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  • अधिकारियों से पूछताछ के लिए SIT के 30 सवाल तैयार:कानपुर नगर निगम की 17 फाइलों में मिली गड़बड़ी, गोविंद शर्मा के घर छापेमारी

    नगर निगम में छापेमारी के बाद SIT ने बुधवार को नगर निगम से 17 फाइलें जब्त की थीं। ऐसे में दो दिन SIT ने इन फाइलों को खंगाला और ई-टेंडरिंग और लॉटरी प्रक्रिया को समझा। जिसमें कई खामियां मिलने के बाद प्राथमिकता के आधार पर अधिकारियों से पूछताछ के लिए SIT ने 30 प्रश्न तैयार किए है। जांच के दायरे में आए अधिकारियों और कर्मचारियों से नोटिस देकर पूछताछ की जाएगी। आगरा स्थित घर पहुंची पुलिस वहीं नगर निगम में टेंडर रैकेट चलाने वाले गोविंद शर्मा पुलिस की पकड़ से काफी दूर है। तीन दिनों से उसका मोबाइल बंद है ऐसे में पुलिस को उसकी लोकेशन भी नहीं मिल रही है। शुक्रवार को फजलगंज पुलिस ने उसके आगरा स्थित घर पर छापा मारा, लेकिन पुलिस को बाहर से ही बैरंग वापस लौटना पड़ा। नगर निगम में टेंडर रैकेट चलाने वालों के खिलाफ कमिश्नरेट पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने मंगलवार को स्वरूप नगर में पांच और फजलगंज में एक मुकदमा दर्ज किया है। स्वरूप नगर थाने में दर्ज मामलों की जांच एसआईटी कर रही है, जबकि फजलगंज थाने में दर्ज मामले में पुलिस ठेकेदार संदीप जैन और रज्जन बाजपेयी को जेल भेज चुकी है। टेंडर रैकेट के मास्टर माइंड गोविंद शर्मा पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि गोविंद के आगरा स्थित घर पर छापा मारा गया है। गोविंद के घर पर ताला मिला है। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई। लोगों का कहना है कि गोविंद परिवार के साथ गया था, लेकिन तीन चार दिन से दिखाई नहीं दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक राजस्थान के आश्रम से गोविंद ने अपना मोबाइल बंद कर लिया था। तब से उसकी कोई लोकेशन नहीं मिली है। हालांकि सूत्र यह भी बता रहे हैं कि वह अपने अन्य किसी नजदीकी के मोबाइल से मददगारों के संपर्क में है। पुलिस का दावा है कि उसके मददगारों को भी पकड़ा जाएगा। पार्षद वेलफेयर समिति की जांच से मचा हड़कंप पुलिस के पास पार्षद वेलफेयर समिति की शिकायत पहुंची थी। जिसके बाद समिति में शामिल पार्षदों की जांच शुरू हो चुकी है। जांच शुरू होने के साथ ही समिति में शामिल पार्षदों में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस को प्राथमिक जांच में कुछ नाम सामने आए हैं, जिनकी जानकारी जुटायी जा रही है।
  • नोएडा में जल्द गुलजार होंगे दो स्ट्रीट मार्केट:खाने-पीने के साथ मिलेगी पार्किंग, बॉटनिकल गार्डन से जीआईपी के बीच 19 और सेक्टर-18 में 15 कियोस्क चलेंगे

    शहर में खरीदारी और खाने-पीने के शौकीनों के लिए जल्द ही दो नए स्ट्रीट मार्केट शुरू होने जा रहे हैं। बॉटनिकल गार्डन और जीआईपी मॉल के बीच बने कियोस्क के संचालन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी तरह सेक्टर-18 में भी स्ट्रीट मार्केट विकसित किया जाएगा। इन दोनों जगहों पर कुल 34 कियोस्क संचालित किए जाएंगे। बॉटनिकल गार्डन और जीआईपी मॉल के बीच 19 कियोस्क और सेक्टर-18 में 15 कियोस्क बनाए गए हैं। इनका संचालन शुरू होने के बाद शहरवासियों को खुले माहौल में खान-पान और खरीदारी का नया ठिकाना मिलेगा। 17 सितंबर तक कंपनियां कर सकेंगी आवेदन
    नोएडा प्राधिकरण ने कियोस्क संचालन के लिए कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। इच्छुक कंपनियां 17 सितंबर तक आवेदन कर सकती हैं। इसके बाद नियमों और शर्तों के आधार पर कियोस्क का आवंटन किया जाएगा। प्राधिकरण की कोशिश है कि कम लागत में संचालन करने के साथ ज्यादा राजस्व देने वाली कंपनी को प्राथमिकता मिले। इससे प्राधिकरण को भी आमदनी होगी और लोगों को बेहतर स्ट्रीट मार्केट की सुविधा मिल सकेगी। तीन बार निकला टेंडर, नहीं मिलीं कंपनियां
    कियोस्क के संचालन के लिए प्राधिकरण पहले भी तीन बार टेंडर जारी कर चुका है। हालांकि, नियम और शर्तों के मुताबिक कंपनियों के आवेदन नहीं आने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। प्राधिकरण को उम्मीद है कि इस बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबे समय से तैयार कियोस्क लोगों के लिए खोल दिए जाएंगे। इंदौर के 56 मार्केट की तर्ज पर बनेगा ठिकाना
    इन स्ट्रीट मार्केट को इंदौर के 56 मार्केट की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। यहां मुख्य रूप से खाने-पीने की दुकानें होंगी। अलग-अलग तरह के व्यंजनों के साथ लोगों को बैठने और घूमने के लिए बेहतर माहौल देने की तैयारी है। मार्केट शुरू होने के बाद यह युवाओं और परिवारों के लिए शाम के समय घूमने और खाने-पीने का नया ठिकाना बन सकता है। 100 से ज्यादा वाहन खड़े करने की सुविधा
    स्ट्रीट मार्केट आने वाले लोगों के लिए पार्किंग की भी व्यवस्था की जा रही है। यहां 100 से ज्यादा वाहनों की सरफेस पार्किंग बनाई जाएगी। इससे मार्केट में आने वाले लोगों को सड़क किनारे वाहन खड़े करने की परेशानी नहीं होगी। पूरी परियोजना के निर्माण पर करीब 2 करोड़ 23 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। अब कियोस्क के संचालन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोगों को लंबे इंतजार के बाद दोनों स्ट्रीट मार्केट की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
  • लाहौल: 33 साल में 176 प्रतिशत बढ़ी घेपन घाट झील, घाटी के लोगों की चिंता बढ़ी, लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

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     नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद लाहौल घाटी की संवेदनशील घेपन घाट लेक एक बार फिर चर्चा में है। सैटेलाइट अध्ययन में सामने आया है कि पिछले 33 वर्षों में इस हिमनदीय घेपन झील का दायरा करीब 176 फीसदी बढ़ चुका है। वर्तमान में झील का क्षेत्रफल 101.30 हेक्टेयर, लंबाई 2.464 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई करीब 625 मीटर है। झील में करीब 35.08 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी होने का अनुमान है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण झील के लगातार बढ़ते आकार को देखते हुए केंद्र सरकार यहां पहली बार अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की तैयारी कर रही है। तकनीक का ट्रायल सिस्सू झील के समीप किया जा रहा है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडैक) समेत विभिन्न संस्थान लंबे समय से क्षेत्र की हिमनदीय झीलों और ग्लेशियरों का अध्ययन कर रहे हैं।

    चिनाब घाटी के लिए गंभीर खतरा

    नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार घेपन घाट झील के टूटने की स्थिति में चिनाब घाटी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि झील का आकार बढ़ने और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से पानी का स्तर लगातार बढ़ता रहा तो हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (ग्लोफ) का खतरा भी बढ़ सकता है। झील टूटने की स्थिति में इसका प्रभाव केवल लाहौल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चिनाब नदी के साथ जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों और आगे पाकिस्तान तक पड़ सकता है।

    सैटेलाइट से मिलेगी आपदा की पूर्व सूचना

    लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना ने बताया कि विशेषज्ञों और तकनीकी टीम ने दो बार घेपन झील का निरीक्षण किया है। जल्द ही यहां हिमाचल का पहला अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह प्रणाली सैटेलाइट आधारित तकनीक से झील के जलस्तर और संभावित बदलावों पर नजर रखने में मदद करेगी और खतरे की स्थिति में मौसम विभाग तथा जिला प्रशासन को पहले ही सूचना मिल सकेगी। झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग को पत्र लिखा गया है।

    सिस्सू झील के समीप चल रहा सिस्टम का ट्रायल

    सीडैक के वैज्ञानिक डॉ. अनीश सत्यान ने बताया कि फिलहाल सिस्सू झील के समीप अर्ली वार्निंग सिस्टम को ट्रायल के तौर पर स्थापित किया गया है। ट्रायल के परिणामों का अध्ययन किया जा रहा है। केंद्र सरकार से अनुमति मिलते ही इसी तकनीक को घेपन घाट लेक में स्थापित किया जाएगा।

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  • अफीम कोठी में धंसा डॉट नाला, गलियों में भरा पानी:घरों की दीवारों-फर्श में आईं दरारें, अब रिश्तेदारों ने आने से किया इनकार

    लक्ष्मीपुरवा के शक्कर मिल खलवा इलाके में जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।अफीमकोठी पेट्रोल पंप के सामने जीटी रोड पर बुधवार को डॉट नाला धंसने से सड़क पर बड़ा गड्ढा हो गया था।नाला धंसने के बाद हालात यह हैं कि आसपास के इलाकों में पानी पहुंच गया है। लोगों को इसी पानी के बीच से होकर आने-जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, इलाके के कुछ घरों की फर्श और दीवारों में दरारें आने से लोगों को मकान धंसने का खतरा भी सता रहा है। देखिए 3 तस्वीरें… शक्कर मिल खलवा की गलियों में भरा पानी स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां कुछ महीने पहले ही सीवर लाइन डाली गई थी। काम के दौरान पानी की लाइन भी टूट गई थी। इसके बाद लगातार पानी रिसने से जमीन के नीचे की मिट्टी धीरे-धीरे कटती चली गई। अब डॉट नाला भी धंस गया। नाला धंसने से जीटी रोड पर बड़ा गड्ढा बन गया और आसपास का पानी शक्कर मिल खलवा की गलियों में भरने लगा। रिश्तेदारों ने आने से किया इंकार मुन्नी देवी ने बताया कि पानी भरने से घर से निकलना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा के काम के लिए भी लोगों को पानी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है। वहीं श्रीराम साहू ने बताया कि रक्षाबंधन पर रिश्तेदारों को घर आना था, लेकिन रास्ते में इतना ज्यादा पानी भरा होने के कारण कई रिश्तेदारों ने आने से ही मना कर दिया। उनका आरोप है कि अधिकारी मौके पर आए थे, लेकिन सिर्फ वीडियो बनाकर लौट गए। इस समस्या का समाधान नहीं हुआ। कई मकानों में आईं दरारें स्थानीय निवासी गुड्डी ने बताया कि कुछ समय पहले इलाके में नाले की लाइन डालने का काम हुआ था। इसके बाद घर की कई दीवारों में अचानक से दरारें आने लगी हैं। अब घर के फर्श में भी दरारें आ गई हैं और उन्हें मकान के धंसने का डर बना हुआ है। जलभराव के बीच से गुजरने को मजबूर लोग स्थानीय संतोष ने बताया कि नाले का पानी सड़क पर भर गया है। इसी पानी के बीच से होकर लोगों को मजबूरी में गुजरना पड़ रहा है। त्योहार के दिन भी यही स्थिति बनी रही। वहीं चंदन ने बताया कि जीटी रोड पर नाला धंसे हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया है। लोगों को मजबूरी में जलभराव के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। जीटी रोड पर लगा जाम, हादसे का खतरा व्यस्त जीटी रोड पर डॉट नाला धंसने से यातायात भी प्रभावित हो रहा है। सड़क पर बने बड़े गड्ढे और जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है। कई बार वाहनों की कतार लगने से जाम की स्थिति बन रही है। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान शहर में डॉट नालों के धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे सड़क की स्थिति खराब होने के साथ ही आसपास रहने वाले लोगों के घरों और जान-माल पर भी खतरा बढ़ रहा है। लोगों ने जलकल विभाग से धंसे डॉट नाले की तत्काल मरम्मत कराने, जलभराव दूर करने और सड़क को सुरक्षित कराने की मांग की है
  • मेंस हॉकी वर्ल्डकप- पेनल्टी शूटआउट में बेल्जियम से हारा भारत:टूर्नामेंट में आठवें स्थान पर रहा; हरमनप्रीत सिंह टीम के टॉप गोल स्कोरर रहे

    भारत मेंस हॉकी वर्ल्ड कप में शुक्रवार को बेल्जियम से पेनल्टी शूटआउट में हार गया। इसके साथ ही टीम ने टूर्नामेंट में आठवें स्थान पर रही। बेल्जियम मैच के आखिरी मिनट तक 3-2 से आगे थी। मैच खत्म होने में 26 सेंकंड बाकी थे, तभी भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इसे गोल में बदलकर मैच को शूटआउट में पहुंचाया, जहां टीम 3-4 से मुकाबला हार गई। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस मैच में 2 गोल किए। वे टूर्नामेंट में 8 गोल के साथ भारत के टॉप स्कोरर रहे। भारत का पहला गोल, फिर बेल्जियम की वापसी अभिषेक ने छठे मिनट में गोल कर भारत को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई। हालांकि, बेल्जियम ने शानदार वापसी करते हुए 22वें और 23वें मिनट में दो गोल दागकर 2-1 की बढ़त बना ली। हाफ टाइम के तुरंत बाद 31वें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत ने पेनल्टी कॉर्नर से गोल दागकर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया। इसके बाद 47वें मिनट में बेल्जियम के डी केरपेल ने गोल कर स्कोर 3-2 कर दिया। शूटआउट में हरमनप्रीत गोल नहीं कर सके शूटआउट में भारत के लिए शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह और अभिषेक ने पहले 3 शॉट पर गोल किए। हालांकि भारत के लिए आखिरी 2 शॉट पर हरमनप्रीत और सुखजीत सिंह गोल नहीं कर सके। वहीं बेल्जियम के लिए टॉम बून, आर्थर डी स्लोवर, अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स और रोमन डुवेकोट ने गोल किए। विक्टर फोरबर्ट अपना प्रयास गोल में नहीं बदल सके। मनप्रीत सिंह के आंख पर गेंद लगी अंतिम क्वार्टर में बेल्जियम के लाबुशेयर का तेज शॉट मैनप्रीत सिंह के चेहरे पर आंख के ऊपर लगा। वे गंभीर रूप से चोटिल होकर मैदान से बाहर चले गए। हालांकि पेनल्टी शूटआउट के दौरान वे मैदान पर वापस लौटे, लेकिन शॉट नहीं लिया। भारत का निराशाजनक सफर भारतीय टीम 51 साल बाद वर्ल्ड कप मेडल जीतने का सपना लेकर उतरी थी। पहले राउंड में उसने वेल्स को 3-1 और पाकिस्तान को 5-3 से हराया, लेकिन इंग्लैंड से 2-4 से हार गई। दूसरे राउंड में भारत एक भी अंक हासिल नहीं कर सका। नीदरलैंड्स के खिलाफ 1-3 की हार में भारत ने आखिरी 19 मिनट में तीन गोल गंवाए। इसके बाद अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से हराया और सेमीफाइनल में पहुंचने की उसकी आखिरी उम्मीद भी खत्म कर दी। ————————– हॉकी वर्ल्ड कप की यह खबर भी पढ़ें… विमेंस हॉकी वर्ल्डकप- भारत ने जर्मनी को 3-1 से हराया:टूर्नामेंट में पांचवा स्थान हासिल किया; 52 साल बाद टॉप-5 में फिनिश भारत ने विमेंस हॉकी वर्ल्ड कप में जर्मनी को 3-1 से हरा दिया। इस जीत के साथ भारत टूर्नामेंट में पांचवे स्थान पर रहा। टीम ने 52 साल बाद टॉप-5 में फिनिश किया है। इससे पहले टीम 1974 वर्ल्ड कप में चौथे स्थान पर रही थी। पूरी खबर पढ़ें…
  • कमीशनबाजी से घिरा कानपुर नगर निगम का अभियंत्रण विभाग:अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई, मुख्य अभियंता एसएफए जैदी भी रडार पर

    कानपुर नगर निगम के अभियंत्रण विभाग में भ्रष्टाचार और कमीशनबाजी ने अब तूल पकड़ लिया है। विभाग के मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत पहुंचने के बाद अभियंताओं से लेकर लिपिक तक की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
    इनके ठेकेदारों के साथ मिलीभगत और कमीशन के खेल ने शहर के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि शहर में जगह-जगह सड़कें टूटी हैं और गड्ढों की समस्या लगातार बढ़ रही है। डेढ़ साल पहले लखनऊ से आए थे मुख्य अभियंता नगर निगम सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी लखनऊ से तबादले पर कानपुर आए थे। अपने साथ तीन चहेते ठेकेदारों को भी कानपुर लेकर आए थे। इसके बाद अभियंत्रण विभाग में उनके काम करने का रास्ता बनाया गया। सूत्रों का दावा है कि इन ठेकेदारों को छोटे से लेकर बड़े तक कई काम दिलाए गए और कमीशनबाजी का जबरदस्त खेल चलता रहा। इनकी शिकायतें आला अधिकारियों के साथ शासन तक भी पहुंचीं। इसी वजह से नगर आयुक्त ने शासन को पत्र लिखकर जांच प्रभावित न हो इसके लिए मुख्य अभियंता स्तर के एक अधिकारी की मांग की थी। पुलिस इन फर्मों की भी कर रही जांच पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य अभियंता के नजदीकी लोग चार फर्में चला रहे हैं। इसमें मेहताब इंटरप्राइजेज लखनऊ, बजरंग ट्रेडर्स, सैय्यद ट्रेडर्स और एसएस इंटरप्राइजेज शामिल हैं। शिकायत में इन फर्मों के पीछे मुख्य अभियंता का प्रभाव होने का आरोप लगाया गया है। पुलिस अब इन चारों फर्मों से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। इसके चलते अभियंत्रण विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी-कर्मचारी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। अभियंता से बाबू तक रडार पर सूत्रों के मुताबिक, अभियंत्रण विभाग के कई अभियंताओं और कर्मचारी भी ठेकेदारों के साथ कमीशनबाजी में शामिल हैं। कहीं रिश्तेदारों के नाम पर फर्में चल रही हैं तो कहीं चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने में मदद की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई अभियंत्रण विभाग में कमीशनबाजी और भ्रष्टाचार के आरोप नए नहीं हैं। लंबे समय से शिकायतें सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विभाग में मनमानी बढ़ती गई। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नगर निगम में वसूली टैक्स पूछने के बाद खलबली मची। इसके बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ अलग-अलग मामलों की जांच के लिए समितियां गठित की गई हैं। अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई? नगर निगम में अब तक हुई कार्रवाई से ऐसा नजर आ रहा है कि निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई तेजी से हो रही है, लेकिन जिन अधिकारियों के स्तर पर टेंडर प्रक्रिया की निगरानी और स्वीकृति की जिम्मेदारी थी, उनकी जवाबदेही अभी तय नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि अगर भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस नीति है तो इसकी आंच अधिकारियों तक कब पहुंचेगी।
  • प्रयागराज मंडल में 55 हजार महिलाओं ने किया मुफ्त सफर:रोडवेज और सिटी बसों में रही भीड़, डबल डेकर बस का हुआ ट्रायल

    रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को मुफ्त यात्रा सुविधा मिलने से शुक्रवार को रोडवेज और शहर की ई-बसों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। प्रयागराज मंडल में पहले ही दिन करीब 55 हजार महिलाओं ने एक सहयोगी के साथ मुफ्त यात्रा का लाभ उठाया। वहीं पहली बार शहर में डबल डेकर बस का ट्रायल भी किया गया, जिसमें महिलाओं को नि:शुल्क सैर कराई गई। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) रवींद्र सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन पर रोडवेज की ओर से बहनों को मुफ्त यात्रा सुविधा दी गई, जिसके चलते बस स्टेशनों और प्रमुख रूटों पर यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। ई-बसों में 8 हजार से ज्यादा महिलाओं ने किया सफर
    शहर में संचालित 50 ई-बसों में भी दिनभर यात्रियों की भीड़ रही। सिटी बस सेवा के आंकड़ों के अनुसार करीब 10,600 यात्रियों ने सफर किया, जिनमें 8,315 महिलाएं शामिल रहीं। नैनी, फाफामऊ, झूंसी, सिविल लाइंस और धूमनगंज रूटों पर सबसे अधिक भीड़ दर्ज की गई। डबल डेकर बस का सफल ट्रायल
    महाकुंभ के दौरान मिली डबल डेकर बस का पहली बार शहरी परिवहन में ट्रायल किया गया। सिविल लाइंस से अलोपीबाग और फिर अलोपीबाग से पत्थर गिरजाघर तक चलाए गए ट्रायल में करीब 90 महिलाओं ने मुफ्त यात्रा की। यात्रियों ने डबल डेकर बस के संचालन को लेकर उत्साह जताया। पहले रूट की बाधा बनी थी अड़चन
    महाकुंभ के दौरान प्रयागराज को 26 ई-अटल बसें मिली थीं, जिनमें दो डबल डेकर बसें भी शामिल थीं। हालांकि बिजली के तार, आरयूबी-आरओबी और ऊंचाई संबंधी बाधाओं के कारण इनके संचालन के लिए उपयुक्त रूट तय नहीं हो पा रहा था। अब इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पत्थर गिरजाघर-झूंसी रूट को अंतिम रूप दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल सफल रहने के बाद शहर में डबल डेकर बसों के नियमित संचालन की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
  • 18 फीट गड्ढे में बैठने वाले सपा MLA का इंटरव्यू:हसन रूमी बोले- सड़क दरक रही थी; अफसरों को बताया, नहीं आए तो उतर गया

    कानपुर की जाजमऊ सरैया वीआईपी रोड पर सड़क धंसने के विरोध में समाजवादी पार्टी के विधायक हसन रूमी करीब 18 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर 4.5 घंटे तक बैठे रहे। दैनिक भास्कर ने बातचीत कर जानने की कोशिश की आखिर विधायक गड्ढे में क्यों उतरे। विधायक के मुताबिक, गड्ढे के अंदर सफोकेशन था। ऑक्सीजन की कमी महसूस हो रही थी। इस दौरान पीछे ओर दाईं तरफ से सड़क लगातार दरक रही थी। हसन रूमी का कहना है कि गड्ढे में उतरना पहले से तय कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने मौके पर जाने से पहले नगर आयुक्त, एक्सईएन और संबंधित अधिकारियों को फोन किया था। करीब एक घंटे इंतजार के बाद भी अधिकारी नहीं पहुंचे तो उन्होंने विरोध के तौर पर गड्ढे में उतरने का फैसला किया।
    पढ़िए विधायक हसन रूमी से बातचीत के सवाल-जवाब… सवाल: आप 4.5 घंटे तक 18 फीट गहरे गड्ढे में बैठे रहे। उस दौरान क्या महसूस हुआ?
    जवाब- मैं गड्ढे में बैठने के इरादे से नहीं गया था। जब वहां पहुंचा, उससे पहले संबंधित विभाग के मुखिया और नगर आयुक्त को फोन किया था। मैंने कहा था कि दो दिन से गड्ढा हुआ है। क्षेत्रीय विधायक होने के नाते चाहता था कि संबंधित अधिकारी मौके पर आएं और लोगों को आश्वासन दें कि काम शुरू हो जाएगा। जब मैं वहां पहुंचा तो करीब एक घंटे तक कोई नहीं आया। इसके बाद मैंने लोकतंत्र में मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए विरोध के लिए गड्ढे में उतरने का फैसला किया। सवाल: जब गड्ढे के अंदर पहुंचे डर नहीं लगा? जवाब-अंदर काफी सफोकेशन था। गैस भी थी। लेकिन जब विरोध होता है तो किसी चीज से डरा नहीं जाता। मुझे लगा कि मैं जितनी देर यहां बैठा हूं और अधिकारी नहीं आ रहे हैं, इससे उनकी निष्क्रियता दिखाई दे रही है। मुझे कई बार डर भी लगा। पीछे से सड़क धंस रही थी। दाईं तरफ का हिस्सा दरक भी रहा था। एक जगह पर बैठना मुश्किल था। मेरे साथ जो लोग थे, उनसे कहा कि आप लोग बाहर चले जाएं। अगर एक साथ सड़क कोलैप्स हो गई तो बाहर निकलने में दिक्कत होगी। सवाल: क्या आपको अपनी जान का खतरा महसूस हुआ?
    जवाब- कई बार डर का अहसास हुआ। अंदर का वातावरण भयावह था। गड्ढा बहुत गहरा था। दाएं-बाएं भी गड्ढे थे। सड़क बार-बार दरक रही थी। ऑक्सीजन की कमी महसूस हो रही थी। ऊपर वाले का करम था। मैं ईमानदारी से वहां बैठा था। मैं इसलिए बैठा था कि अपने क्षेत्र की जनता और वहां से गुजरने वाले हजारों-लाखों लोगों को परेशानी न हो। जिस रास्ते से पानी निकला, उससे मुख्य सड़क के भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा था। सवाल: आप गड्ढे में कब उतरे और कब बाहर निकले?
    जवाब- जब अधिकारियों का इंतजार करने के बाद भी कोई नहीं आया, तो करीब 12:30 से 12:35 बजे के बीच मैं गड्ढे में उतरा। करीब 4:45 से 5 बजे के बीच वहां से बाहर निकला। सवाल: क्या अधिकारियों को पहले से पता था कि आप मौके पर पहुंच रहे हैं?
    जवाब- हां, लेकिन मेरा कोई प्रायोजित कार्यक्रम नहीं था। मैं ईमानदारी से संबंधित विभाग के अधिकारियों को जानकारी देकर वहां गया था। नगर आयुक्त को फोन किया, एक्सईएन को फोन किया और संबंधित अधिकारियों को भी फोन किया, लेकिन कोई जल्दी नहीं पहुंचा। मेरी जिम्मेदारी थी कि वहां जाकर लोगों को भरोसा दिलाऊं कि सड़क और गड्ढे का काम जल्दी शुरू होगा। अगर मेरे जाने के बाद सिर्फ लीपापोती हो जाए और लोगों को आश्वासन न मिले, तो यह बेईमानी होती। सवाल: आपने गड्ढे में उतरने का फैसला क्यों किया?
    जवाब- मैंने जनता से वादा किया है कि हर समस्या के लिए उनकी लड़ाई लड़ूंगा। अगर किसी समस्या के सामने डरकर भाग जाऊं कि मेरे साथ हादसा हो सकता है, तो मेरा वादा झूठा हो जाएगा।
    मैं जनता को यह भी बताना चाहता था कि मुख्य मार्ग तक की अनदेखी हो रही है। यह रास्ता कानपुर को जाजमऊ से जोड़ता है और यहां से बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। जब मुख्य मार्ग की यह स्थिति है तो छोटी सड़क, गली और नाली की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल: नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री भी अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। कानपुर में नगर निगम के हाल कैसे हैं?
    जवाब- मैंने विधानसभा में अपने अधिकारों के तहत नगर निगम के कामकाज को लेकर कई बार शिकायत की है। नियम के तहत भी मुद्दे उठाए हैं। नगर निगम के कॉर्पोरेटरों ने भी शिकायतें की हैं। जब अपनी ही पार्टी के लोगों को लगा कि घपला, घोटाला और भ्रष्टाचार हो रहा है, तो उन्होंने भी शिकायत की। इससे विपक्ष की शिकायतों को भी कहीं न कहीं पार्टी के लोगों ने सही माना। सवाल: सड़क की गुणवत्ता और निर्माण को लेकर आपका क्या आरोप है?
    जवाब- यह सड़क करीब डेढ़-दो साल पुरानी है। करीब डेढ़ महीने पहले यहां एक छोटा-सा छेद हुआ था और उससे पानी का रिसाव हो रहा था। नगर निगम के लोग आए और लीपापोती कर दी। मेरा सवाल है कि वीआईपी रोड पर इस तरह की लीपापोती करने की हिम्मत कैसे हो जाती है? अगर किसी ऐसी सड़क पर कच्चा काम किया जाए जहां ट्रैफिक कम हो, तो शायद वह कुछ समय चल जाए। लेकिन इस मार्ग पर ऐसी लापरवाही जल्दी सामने आ जाती है। सवाल: आपने भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या कहना है?
    जवाब- मेरा आरोप है कि विकास के काम में जिस प्रोजेक्ट के लिए पैसा आवंटित होता है, उसका पूरा पैसा जमीन पर नहीं लगता। करीब 40% पैसा प्रोजेक्ट पर लगता है और 60% विभागीय स्तर पर और सत्ता के संरक्षण में चला जाता है। कई ठेकेदार पर कार्रवाई हुई है, कई पर होनी है।
  • हर शुक्रवार को गोरखपुर से मुंबई के लिए चलेगी अमृत-भारत:यात्री बोले- अंदर शानदार व्यवस्था है, 875 रुपये में मुंबई तक सफर

    गोरखपुर से मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए शुक्रवार को बड़ी सुविधा शुरू हो गई। गोरखपुर जंक्शन से गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस-गोरखपुर अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस का नियमित संचालन शुरू हुआ। सुबह ट्रेन के रवाना होने के दौरान स्टेशन पर यात्रियों में काफी उत्साह देखने को मिला। ट्रेन नंबर 15085/15086 अब गोरखपुर और बांद्रा टर्मिनस के बीच हर सप्ताह चलेगी। गोरखपुर से ट्रेन प्रत्येक शुक्रवार और बांद्रा टर्मिनस से प्रत्येक शनिवार को रवाना होगी। इससे गोरखपुर और मुंबई के बीच सफर करने वाले यात्रियों को नियमित रेल सेवा का लाभ मिलेगा। ट्रेन के अंदर की व्यवस्था देखकर खुश हुए यात्री नई अमृत भारत ट्रेन से सफर कर रहे यात्रियों ने ट्रेन के अंदर की व्यवस्था की तारीफ की। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के अंदर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है। स्लीपर कोच में भी साफ-सुथरा माहौल देखने को मिल रहा है। यात्रियों का कहना था कि मुंबई जैसे लंबे सफर के लिए ट्रेन में बेहतर व्यवस्था होना काफी राहत देने वाला है। यात्रियों ने स्लीपर श्रेणी में साफ-सफाई और सुविधाओं को अच्छी पहल बताया। गोरखपुर से मुंबई का किराया 875 रुपये यात्रियों के अनुसार गोरखपुर से मुंबई तक स्लीपर श्रेणी का किराया करीब 875 रुपये रखा गया है। यात्रियों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी के सफर में स्लीपर कोच में साफ-सुथरी व्यवस्था और सुविधाएं मिलना काफी अच्छी बात है। गोरखपुर से सुबह 7:50 बजे रवाना होगी ट्रेन ट्रेन संख्या 15085 गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस प्रत्येक शुक्रवार को गोरखपुर से सुबह 7:50 बजे रवाना होगी। इसके बाद ट्रेन खलीलाबाद से 8:29 बजे, बस्ती से 8:57 बजे और गोंडा से 10:15 बजे रवाना होगी। आगे ट्रेन बादशाह नगर से दोपहर 1:13 बजे, ऐशबाग से 2:05 बजे और कानपुर सेंट्रल से 3:45 बजे चलेगी। ट्रेन टूंडला से शाम 7:15 बजे, आगरा फोर्ट से रात 8 बजे, बयाना से रात 10:10 बजे और गंगापुर सिटी से रात 11:05 बजे रवाना होगी। दूसरे दिन इन स्टेशनों से होकर बांद्रा पहुंचेगी यात्रा के दूसरे दिन ट्रेन कोटा से रात 1:05 बजे, भवानी मंडी से 2:10 बजे, शामगढ़ से 2:30 बजे और रतलाम से सुबह 5 बजे रवाना होगी। इसके बाद ट्रेन वडोदरा से सुबह 8:55 बजे, सूरत से 11:57 बजे, वलसाड से दोपहर 1:09 बजे, वापी से 1:32 बजे और पालघर से 3:20 बजे रवाना होगी। ट्रेन बोरीवली से शाम 4:48 बजे रवाना होकर शाम 5:45 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। शनिवार रात 9:45 बजे बांद्रा से चलेगी वापसी ट्रेन वापसी में ट्रेन संख्या 15086 बांद्रा टर्मिनस-गोरखपुर अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस प्रत्येक शनिवार को रात 9:45 बजे बांद्रा टर्मिनस से रवाना होगी। ट्रेन बोरीवली से 10:13 बजे, पालघर से 10:56 बजे और वापी से रात 11:49 बजे रवाना होगी। इसके बाद दूसरे दिन वलसाड से रात 12:22 बजे, सूरत से 1:31 बजे, वडोदरा से 3:12 बजे और रतलाम से सुबह 6:50 बजे ट्रेन चलेगी। इसके बाद ट्रेन शामगढ़ से 8:30 बजे, भवानी मंडी से 8:55 बजे, कोटा से सुबह 10:25 बजे और गंगापुर सिटी से दोपहर 12:40 बजे रवाना होगी। आगे ट्रेन बयाना से दोपहर 2 बजे, आगरा फोर्ट से 4:25 बजे, टूंडला से 5:25 बजे और कानपुर सेंट्रल से रात 10:45 बजे चलेगी। तीसरे दिन सुबह 6:45 बजे गोरखपुर पहुंचेगी वापसी यात्रा में ट्रेन तीसरे दिन ऐशबाग से रात 12:58 बजे, बादशाह नगर से 1:21 बजे, गोंडा से 3:40 बजे, बस्ती से 4:53 बजे और खलीलाबाद से 5:16 बजे रवाना होगी। इसके बाद अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस सुबह 6:45 बजे गोरखपुर जंक्शन पहुंचेगी। मुंबई जाने वाले यात्रियों को मिलेगी राहत गोरखपुर और मुंबई के बीच बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार और अन्य कामों के लिए यात्रा करते हैं। नई अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस के नियमित संचालन से इन यात्रियों को एक और विकल्प मिल गया है। हर सप्ताह ट्रेन चलने से यात्रियों को अपनी यात्रा पहले से तय करने में भी सुविधा होगी।
  • गोरखपुर जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू वार्ड बना:10 बेड की सुविधा उपलब्ध, SIC बोले- अभी तक कोई पॉजिटिव केस नहीं

    गोरखपुर जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से बचाव और उससे निपटने के लिए पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। SIC डॉ. आरडी रमन ने बताया कि शासन से मिले निर्देशों के बाद अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल परिसर में 10 बेड का एक अलग स्वाइन फ्लू वार्ड बनाकर तैयार कर दिया गया है। इस वार्ड में मरीजों के इलाज के लिए सभी जरूरी सुविधाएं और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। गाइडलाइन के मुताबिक सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अस्पताल में आने वाले वायरल बुखार के हर मरीज की बहुत बारीकी से जांच की जा रही है। राहत की बात यह है कि अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू का एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अस्पताल में पुख्ता इंतजाम जिला अस्पताल की ओपीडी (OPD) में रोज सैकड़ों मरीज बुखार, सर्दी और जुकाम की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों की तुरंत पहचान करें। अगर किसी मरीज में स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण दिखते हैं, तो उसकी जांच कराई जाएगी। स्वाइन फ्लू वार्ड में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडरों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लाइफ सेविंग दवाओं का स्टॉक भी जमा कर लिया गया है। वार्ड में तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को खास हिदायत दी गई है कि वे मरीजों की देखभाल के दौरान पूरी सावधानी बरतें और खुद भी सुरक्षा किट का इस्तेमाल करें। क्या है स्वाइन फ्लू?
    स्वाइन फ्लू एक सांस से जुड़ा हुआ इन्फेक्शन है, जो एच1एन1 (H1N1) नाम के वायरस से फैलता है। यह एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो हवा के जरिए इसके वायरस दूसरों के शरीर में पहुंच जाते हैं। सही समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह बीमारी फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार जैसे ही होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे पहचान नहीं पाते। जिनमें बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है डॉक्टर का कहना है कि किसी भी बीमारी से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बहुत काम आती हैं। थोड़ा सा ध्यान रखकर इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। उन्होंने सलाह दी…. घबराएं नहीं, सावधानी बरतें
    डॉ. आरडी रमन ने लोगों से अपील की है कि वे बीमारी को लेकर पैनिक न हों। स्वाइन फ्लू का इलाज पूरी तरह से संभव है, बशर्ते सही समय पर डॉक्टर से संपर्क किया जाए। खुद से कोई भी दवा या एंटीबायोटिक खाने की गलती न करें। अगर बुखार दो-तीन दिनों में ठीक न हो या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो बिना देरी किए जिला अस्पताल आएं और अपनी जांच करवाएं। अस्पताल में जांच और इलाज के सारे साधन मौजूद हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है और आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।