
गोरखपुर जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से बचाव और उससे निपटने के लिए पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। SIC डॉ. आरडी रमन ने बताया कि शासन से मिले निर्देशों के बाद अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल परिसर में 10 बेड का एक अलग स्वाइन फ्लू वार्ड बनाकर तैयार कर दिया गया है। इस वार्ड में मरीजों के इलाज के लिए सभी जरूरी सुविधाएं और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। गाइडलाइन के मुताबिक सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अस्पताल में आने वाले वायरल बुखार के हर मरीज की बहुत बारीकी से जांच की जा रही है। राहत की बात यह है कि अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू का एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अस्पताल में पुख्ता इंतजाम जिला अस्पताल की ओपीडी (OPD) में रोज सैकड़ों मरीज बुखार, सर्दी और जुकाम की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों की तुरंत पहचान करें। अगर किसी मरीज में स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण दिखते हैं, तो उसकी जांच कराई जाएगी। स्वाइन फ्लू वार्ड में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडरों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लाइफ सेविंग दवाओं का स्टॉक भी जमा कर लिया गया है। वार्ड में तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को खास हिदायत दी गई है कि वे मरीजों की देखभाल के दौरान पूरी सावधानी बरतें और खुद भी सुरक्षा किट का इस्तेमाल करें। क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू एक सांस से जुड़ा हुआ इन्फेक्शन है, जो एच1एन1 (H1N1) नाम के वायरस से फैलता है। यह एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो हवा के जरिए इसके वायरस दूसरों के शरीर में पहुंच जाते हैं। सही समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह बीमारी फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार जैसे ही होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे पहचान नहीं पाते। जिनमें बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है डॉक्टर का कहना है कि किसी भी बीमारी से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बहुत काम आती हैं। थोड़ा सा ध्यान रखकर इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। उन्होंने सलाह दी…. घबराएं नहीं, सावधानी बरतें
डॉ. आरडी रमन ने लोगों से अपील की है कि वे बीमारी को लेकर पैनिक न हों। स्वाइन फ्लू का इलाज पूरी तरह से संभव है, बशर्ते सही समय पर डॉक्टर से संपर्क किया जाए। खुद से कोई भी दवा या एंटीबायोटिक खाने की गलती न करें। अगर बुखार दो-तीन दिनों में ठीक न हो या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो बिना देरी किए जिला अस्पताल आएं और अपनी जांच करवाएं। अस्पताल में जांच और इलाज के सारे साधन मौजूद हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है और आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
स्वाइन फ्लू एक सांस से जुड़ा हुआ इन्फेक्शन है, जो एच1एन1 (H1N1) नाम के वायरस से फैलता है। यह एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो हवा के जरिए इसके वायरस दूसरों के शरीर में पहुंच जाते हैं। सही समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह बीमारी फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार जैसे ही होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे पहचान नहीं पाते। जिनमें बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है डॉक्टर का कहना है कि किसी भी बीमारी से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बहुत काम आती हैं। थोड़ा सा ध्यान रखकर इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। उन्होंने सलाह दी…. घबराएं नहीं, सावधानी बरतें
डॉ. आरडी रमन ने लोगों से अपील की है कि वे बीमारी को लेकर पैनिक न हों। स्वाइन फ्लू का इलाज पूरी तरह से संभव है, बशर्ते सही समय पर डॉक्टर से संपर्क किया जाए। खुद से कोई भी दवा या एंटीबायोटिक खाने की गलती न करें। अगर बुखार दो-तीन दिनों में ठीक न हो या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो बिना देरी किए जिला अस्पताल आएं और अपनी जांच करवाएं। अस्पताल में जांच और इलाज के सारे साधन मौजूद हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है और आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
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