
रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को मुफ्त यात्रा सुविधा मिलने से शुक्रवार को रोडवेज और शहर की ई-बसों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। प्रयागराज मंडल में पहले ही दिन करीब 55 हजार महिलाओं ने एक सहयोगी के साथ मुफ्त यात्रा का लाभ उठाया। वहीं पहली बार शहर में डबल डेकर बस का ट्रायल भी किया गया, जिसमें महिलाओं को नि:शुल्क सैर कराई गई। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) रवींद्र सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन पर रोडवेज की ओर से बहनों को मुफ्त यात्रा सुविधा दी गई, जिसके चलते बस स्टेशनों और प्रमुख रूटों पर यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। ई-बसों में 8 हजार से ज्यादा महिलाओं ने किया सफर
शहर में संचालित 50 ई-बसों में भी दिनभर यात्रियों की भीड़ रही। सिटी बस सेवा के आंकड़ों के अनुसार करीब 10,600 यात्रियों ने सफर किया, जिनमें 8,315 महिलाएं शामिल रहीं। नैनी, फाफामऊ, झूंसी, सिविल लाइंस और धूमनगंज रूटों पर सबसे अधिक भीड़ दर्ज की गई। डबल डेकर बस का सफल ट्रायल
महाकुंभ के दौरान मिली डबल डेकर बस का पहली बार शहरी परिवहन में ट्रायल किया गया। सिविल लाइंस से अलोपीबाग और फिर अलोपीबाग से पत्थर गिरजाघर तक चलाए गए ट्रायल में करीब 90 महिलाओं ने मुफ्त यात्रा की। यात्रियों ने डबल डेकर बस के संचालन को लेकर उत्साह जताया। पहले रूट की बाधा बनी थी अड़चन
महाकुंभ के दौरान प्रयागराज को 26 ई-अटल बसें मिली थीं, जिनमें दो डबल डेकर बसें भी शामिल थीं। हालांकि बिजली के तार, आरयूबी-आरओबी और ऊंचाई संबंधी बाधाओं के कारण इनके संचालन के लिए उपयुक्त रूट तय नहीं हो पा रहा था। अब इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पत्थर गिरजाघर-झूंसी रूट को अंतिम रूप दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल सफल रहने के बाद शहर में डबल डेकर बसों के नियमित संचालन की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
शहर में संचालित 50 ई-बसों में भी दिनभर यात्रियों की भीड़ रही। सिटी बस सेवा के आंकड़ों के अनुसार करीब 10,600 यात्रियों ने सफर किया, जिनमें 8,315 महिलाएं शामिल रहीं। नैनी, फाफामऊ, झूंसी, सिविल लाइंस और धूमनगंज रूटों पर सबसे अधिक भीड़ दर्ज की गई। डबल डेकर बस का सफल ट्रायल
महाकुंभ के दौरान मिली डबल डेकर बस का पहली बार शहरी परिवहन में ट्रायल किया गया। सिविल लाइंस से अलोपीबाग और फिर अलोपीबाग से पत्थर गिरजाघर तक चलाए गए ट्रायल में करीब 90 महिलाओं ने मुफ्त यात्रा की। यात्रियों ने डबल डेकर बस के संचालन को लेकर उत्साह जताया। पहले रूट की बाधा बनी थी अड़चन
महाकुंभ के दौरान प्रयागराज को 26 ई-अटल बसें मिली थीं, जिनमें दो डबल डेकर बसें भी शामिल थीं। हालांकि बिजली के तार, आरयूबी-आरओबी और ऊंचाई संबंधी बाधाओं के कारण इनके संचालन के लिए उपयुक्त रूट तय नहीं हो पा रहा था। अब इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पत्थर गिरजाघर-झूंसी रूट को अंतिम रूप दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल सफल रहने के बाद शहर में डबल डेकर बसों के नियमित संचालन की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
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