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  • क्या पाकिस्तानी कप्तान से हाथ मिलाएंगी हरमनप्रीत कौर:कैप्टंस मीट में जवाब नहीं दिया था; थोड़ी देर में भारत-पाकिस्तान मैच का टॉस

    विमेंस एशिया कप 2026 में आज भारत और पाकिस्तान का मुकाबला खेला जाएगा। मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में रात 8 बजे से शुरू होगा। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर टॉस के समय पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना से हाथ मिलाएंगी या नहीं। यह साफ नहीं है, क्योंकि टूर्नामेंट से पहले कैप्टंस मीट में इस सवाल का जवाब नहीं दिया था। भारत अपने दोनों मुकाबले जीतकर पहले ही सेमीफाइनल में पहुंचा चुका है। हरमनप्रीत कौर 150वीं बार टी-20 इंटरनेशनल में बतौर कप्तान उतरेंगी। वे इस मुकाम तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर बनेंगी। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ पिछले चारों मुकाबले जीते टीम इंडिया पिछले 4 मैचों से अजेय है। पाकिस्तान ने आखिरी बार अक्टूबर 2022 में एशिया कप के मुकाबले में ही भारत के खिलाफ जीत दर्ज की थी। यह एशिया कप टी-20 में भारत के खिलाफ उसकी इकलौती जीत भी है। टूर्नामेंट में खेले बाकी के 6 मुकाबले भारत ने अपने नाम किए। दोनों टीमें टी-20 इंटरनेशनल में 17 बार भिड़ी हैं। इनमें भारत ने 14 मैचों में पाकिस्तान को हराया है। पाकिस्तान 3 मुकाबलें ही जीत सका है। पाकिस्तान जीता तो सेमीफाइनल में पहुंचेगा ग्रुप में भारत 4 अंकों के साथ पहले और पाकिस्तान 2 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर है। यह मैच जीतने पर पाकिस्तान टॉप-4 में पहुंच जाएगा। हारने की स्थिति में उसे अपने आखिरी लीग मैच में हॉन्गकॉन्ग को हराना होगा। मंधाना और दीप्ति शानदार फॉर्म में हैं इस टूर्नामेंट में भारत की ओर से ओपनर स्मृति मंधाना और स्पिनर दीप्ति शर्मा टॉप परफॉर्मर रही हैं। मंधाना ने 2 मैचों में 193.24 के स्ट्राइक रेट से 143 रन बनाए हैं। उन्होंने पिछले मैच में 124 रन की पारी खेली थी। गेंदबाजी में दीप्ति शर्मा हाईएस्ट विकेट टेकर रही हैं। उन्होंने 2 मैचों में सिर्फ 2.16 की इकोनॉमी से 6 विकेट चटकाए हैं। उन्होंने पहले मैच में थाईलैंड के खिलाफ बिना रन दिए 3 विकेट लिए थे। पाकिस्तान को मुनीबा अली और सादिया इकबाल से उम्मीदें पाकिस्तान के लिए ओपनर मुनीबा अली और स्पिनर सादिया इकबाल ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। मुनीबा ने खेले इकलौते मैच में 54 रन बनाए थे। वहीं गेंदबाजी में सादिया ने टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट लिए हैं। उन्होंने पहले मैच में थाईलैंड के खिलाफ 2.75 की इकोनॉमी से रन खर्च करते हुए 3 विकेट चटकाए। दुबई में स्पिनर्स को 71, पेसर्स को 31 विकेट एशिया कप के शुरुआती 7 मैचों में 6 बार टॉस जीतने वाली टीम ने पहले गेंदबाजी चुनी। टूर्नामेंट में अब तक सिर्फ भारत ने 150+ का स्कोर बनाया है। बल्लेबाज शुरुआत में तेजी से रन बना रहे हैं, लेकिन आखिरी ओवर्स में रन बनाने की रफ्तार कम हुई है। पिच से स्पिनरों को मदद मिली है। स्पिनर्स ने सिर्फ 5.1 की इकोनॉमी से रन खर्च करते हुए 71 विकेट लिए हैं। वहीं तेज गेंदबाजों को 31 विकेट मिले हैं। दुबई में शनिवार को मैच शुरू होने के समय तापमान करीब 37 डिग्री रहने का अनुमान है। इसके बाद तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं होगी। स्मृति मंधाना ने दुबई की परिस्थितियों को ‘स्टीम बॉक्स’ जैसा बताया था। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-11 भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, प्रतिका रावल, भारती फुलमाली, रिचा घोष, दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, श्री चरणी, क्रांति गौड़, नंदनी शर्मा। पाकिस्तान: फातिमा सना (कप्तान), मुनीबा अली (विकेटकीपर), शवाल जुल्फिकार, गुल फिरोजा, आयशा जफर, सदफ शमास, ईमान फातिमा, उम्म-ए-हानी, तुबा हसन, नशरा संधू, सादिया इकबाल।
  • रातभर अफवाह, सुबह एक्शन… सहारनपुर में मस्जिद पर क्यों चला बुलडोजर? समझिए पूरा विवाद

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार सुबह अचानक बुलडोजर एक्शन में बदल गया. देर रात से ही सोशल मीडिया और शहर में मस्जिद को जमींदोज किए जाने की अफवाह फैल रही थी. रात बढ़ने के साथ कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास पुलिस बल की मौजूदगी भी बढ़ती गई. शनिवार तड़के करीब चार बजे से मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. सुबह तक मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया था. पूरी इमारत को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से छह बुलडोजर लगाए गए हैं.

    कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील परिसर में रात के समय अचानक भारी पुलिस फोर्स की तैनाती ने अफवाहों को और हवा दी. सामान्य दिनों में रात के समय कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहती. मुस्लिम पक्ष के लोगों और स्थानीय नेताओं को जब पुलिस बल की तैनाती और गेट बंद किए जाने की जानकारी मिली तो वे भी सक्रिय हो गए.

    जिला जज ने बरकरार रखा था सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश

    मस्जिद पर शनिवार को हुई कार्रवाई के पीछे करीब डेढ़ साल से चल रहा कानूनी विवाद है. जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था. जिला अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी भूमि माना. मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को अपील दाखिल की थी और अदालत में कुल 17 तारीखों पर सुनवाई हुई.

    अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश

    सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था. आदेश में 30 दिन में परिसर खाली करने के निर्देश के साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी. मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए दलील दी गई थी. पक्ष ने मस्जिद के करीब 150 वर्ष पुरानी होने का दावा भी किया था, लेकिन अदालत में इस दावे के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके.

    देर रात फैल गई मस्जिद गिराने की खबर

    शुक्रवार रात अचानक यह बात फैलने लगी कि कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को प्रशासन रात में ही गिराने जा रहा है. देखते ही देखते यह चर्चा शहर और सोशल मीडिया तक पहुंच गई. इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर नेताओं और लोगों की हलचल बढ़ गई.

    कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर मस्जिद प्रकरण पर अपनी बात रखी. उनके दामाद शायान मसूद ने भी लाइव के माध्यम से घटनाक्रम की जानकारी दी. मुस्लिम पक्ष के नेताओं में भी बेचैनी बढ़ गई.

    रात में सपा विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए निकले, लेकिन उन्हें परिसर के गेट के बाहर ही रोक दिया गया. कलेक्ट्रेट के पांच गेट बंद कर दिए गए और पुलिस बल तैनात कर दिया गया. स्थिति को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स की भी तैनाती की गई.

    डीएम से मुलाकात के बाद भी बदला पूरा घटनाक्रम

    देर रात सपा के कई नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात की बात भी सामने आई. नेताओं की ओर से मस्जिद को लेकर कार्रवाई की आशंका जताई गई. बताया गया कि प्रशासन की ओर से उस समय यह भरोसा दिया गया कि मस्जिद को केवल सील किया जा रहा है और तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होगी. इसी वजह से रात में मौजूद मुस्लिम पक्ष के लोगों में यह उम्मीद बनी रही कि सुबह मस्जिद को नहीं गिराया जाएगा. लेकिन शनिवार तड़के हालात पूरी तरह बदल गए.

    सुबह चार बजे शुरू हुआ एक्शन

    शनिवार सुबह करीब चार बजे से कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई शुरू हो गई. कलेक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई. परिसर के भीतर अधिकारी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे. बाहर भी भारी पुलिस फोर्स तैनात रही. इसके बाद बुलडोजर मस्जिद तक पहुंचाए गए और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई. शुरुआती कार्रवाई में मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया. पूरी इमारत को हटाने के लिए छह बुलडोजर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है. कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा इतनी कड़ी रही कि सामान्य लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई. पुलिस ने किसी भी तरह की भीड़ को परिसर के आसपास एकत्र होने से रोकने की कोशिश की.

    इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा

    मामले को लेकर राजनीतिक सक्रियता भी देर रात बढ़ गई. कैराना सांसद इकरा हसन के भी सहारनपुर आने की तैयारी की जानकारी सामने आई, लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया गया. इस घटनाक्रम से साफ हो गया कि प्रशासन किसी भी तरह की भीड़ या राजनीतिक जमावड़े को कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास नहीं होने देना चाहता था.

    2025 में शुरू हुआ था विवाद

    कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी. इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दाखिल हुआ था. लंबी सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था.

    मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी. करीब डेढ़ महीने की सुनवाई के बाद जिला जज की अदालत ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा.

    अब शनिवार सुबह शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर शहर के केंद्र में ला दिया है. एक तरफ अदालत के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष की ओर से कानूनी और राजनीतिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है. फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात है.

    रिपोर्ट/सुधीर नामदेव

  • शिमला: बंदरों के हमले में तीन मंजिला मकान से गिरी बुजुर्ग महिला की म*त, एक सप्ताह से आईसीयू में थी भर्ती

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    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के शांति विहार वार्ड के समिट्री क्षेत्र में बंदरों के हमले के बाद गंभीर रूप से घायल हुई बुजुर्ग महिला सत्या देवी की शनिवार दोपहर करीब 12:00 बजे मौत हो गई। तीन मंजिला मकान से नीचे गिरने से सत्या देवी के सिर और छाती पर गंभीर चोटें लगी थीं। इन्हें आईजीएमसी में भर्ती करवाया था। सात दिन से महिला आईसीयू में भर्ती थी। गंभीर चोटों के कारण शनिवार को महिला ने दम तोड़ दिया। स्थानीय पार्षद विनीत शर्मा के अनुसार 63 वर्षीय सत्या देवी 30 अगस्त की सुबह करीब 7:30 बजे मकान की छत पर रखी पानी की टंकियों को देखने गई थीं।


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    वहां बंदरों का झुंड बैठा था जो सत्या देवी पर झपट पड़ा। इस हमले से घबराकर सत्या देवी तीन मंजिला मकान से नीचे आंगन में गिर गईं। पड़ोसियों ने उन्हें गिरते हुए देखा था। महिला के परिजन तुरंत घायल अवस्था में सत्या देवी को आईजीएमसी अस्पताल ले आए। यहां उनकी बेटी रजनी भी उनके साथ थीं। डॉक्टरों के अनुसार गंभीर चोटों के चलते महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। सातवें दिन शनिवार को महिला ने दम तोड़ दिया। पार्षद विनीत शर्मा ने शनिवार को फिर मौके का दौरा किया। स्थानीय लोगों ने कहा कि इस क्षेत्र में बंदरों के साथ कुत्तों का भी आतंक है। लोगों ने मांग की कि उन्हें इनसे राहत दिलाई जाए।

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    नगर निगम और वन विभाग मौन, पार्षद भड़के

    शहर के समिट्री क्षेत्र में बंदरों के हमले के कारण महिला की मौत के बाद पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा और साथ लगते भट्ठाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि घटना के बाद नगर निगम के अधिकारियों को इसकी सूचना दी थी लेकिन मदद के लिए न निगम आगे आया और न वन विभाग। बंदरों को पकड़ने या कुत्तों को भगाने के लिए कर्मचारी तक नहीं भेजे गए।

    बंदरों के हमले से अब तक पांच मौतें, रोज लहूलुहान हो रहे लोग

    शिमला के उत्पाती बंदर अब जानलेवा हो गए हैं। बंदरों के हमले के कारण बुजुर्ग महिला सत्या देवी से पहले भी शहर में एक बच्चे समेत तीन महिलाएं अपनी जान गंवा चुकी हैं। पांच मौतों के बावजूद वन विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन मौन बैठे हैं। हालात यह हैं कि अब शहर में बंदरों की नसबंदी तक नहीं हो रही है। केंद्र सरकार ने बंदरों को वन्यजीव की श्रेणी से बाहर कर दिया है। इसके बाद से न तो वन विभाग इन्हें पकड़ रहा है और न ही नगर निगम कोई कार्रवाई कर रहा है। शहरवासी रोजाना बंदरों के हमले से लहूलुहान हो रहे हैं। शहर में हर महीने बंदरों के काटने के 30 से 40 मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वन विभाग के अनुसार वर्ष 2019 में शिमला शहर में करीब 2,000 बंदर थे। अब सात साल में इनकी संख्या बढ़ गई है। शहर के जाखू, बैनमौर, छोटा शिमला, अपर ढली, लक्कड़ बाजार, बालूगंज, कसुम्पटी, संजौली समेत साथ लगते इलाकों में बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा है।

     

    वर्ष 2014 : मिडिल बाजार में महिला की मौत

    चार नवंबर 2014 को मिडिल बाजार में एक महिला की बंदर के हमले के कारण मौत हो गई थी। महिला ममता (38) अपने घर की छत से कपड़े उठा रही थीं कि अचानक बंदर ने उन पर हमला कर दिया। बंदर को देखकर ममता डर गईं। इससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर पड़ीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी।

     

    जुलाई 2020 : कुफ्टाधार में महिला की मौत

    कुफ्टाधार में 9 जुलाई 2020 को बंदरों के हमले के कारण छत पर काम कर रही 56 वर्षीय राजबाला नीचे गिर गईं थीं। हरियाणा के यमुनानगर की रहने वाली राजबाला की इस हादसे में मौत हो गई थी। वर्ष 2020 में ही संजौली में भी एक बच्चा बंदरों से डरकर घर के लेंट्र से नीचे गिर गया था। बाद में पीजीआई में उसकी मौत हो गई थी।

    वर्ष 2023 : ढांडा में युवती ने गंवाई जान

    शहर के ढांडा क्षेत्र में बंदरों के हमले के कारण 19 वर्षीय हिमांशी ने भी अपनी जान गंवाई। हिमांशी अपने घर की तीसरी मंजिल पर कपड़े सुखाने गई थीं। इस दौरान बंदरों ने उन पर हमला कर दिया। डरकर हिमांशी अचानक तीसरी मंजिल से नीचे गिर गईं। लहूलुहान हालत में हिमांशी को आईजीएमसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    लोअर बाजार में 71 वर्षीय महिला की मौत

    सितंबर 2025 में बंदर के हमले में घायल हुई 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला मधु की आईजीएमसी में हृदयघात से मौत हो गई थी। बुजुर्ग महिला घर की सीढ़ियों पर चल रही थीं कि अचानक बंदर ने उन्हें धक्का मार दिया। घायल महिला ने कुछ दिन बाद दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने कहा कि बंदरों के हमले के कारण सीधे तौर पर उनकी मृत्यु नहीं हुई बल्कि चोट के बाद स्वास्थ्य में उत्पन्न जटिलताओं के चलते कार्डियक अरेस्ट हुआ।

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  • शादी कहीं और की तो जान से मार दूंगा:अलीगढ़ में युवती को सिरफिरे युवक की धमकी; ब्लैकमेलिंग का भी आरोप, SSP ने SHO को दिए कड़े निर्देश

    महुआखेड़ा थाना क्षेत्र के ईकरी गांव में युवती को शादी से रोकने के लिए धमकी देने का मामला सामने आया है। युवती का आरोप है कि गांव का ही विनीत उसे लगातार परेशान कर रहा है। वह उसकी बात नहीं मानने पर जान से मारने की धमकी देता है। इतना ही नहीं, आरोपी पर युवती की कहीं और शादी नहीं होने देने और उसके बारे में गलत बातें फैलाकर बदनाम करने की धमकी देने का भी आरोप है।
    मामले की शिकायत युवती ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की। शिकायत में उसने बताया कि आरोपी और उसका भाई प्रवीण लंबे समय से उसे परेशान कर रहे हैं। लगातार मिल रही धमकियों के कारण युवती और उसका परिवार डरा हुआ है। परिवार को किसी अनहोनी की आशंका सता रही है।
    ‘मेरी बात नहीं मानी तो शादी नहीं होने दूंगा’
    पीड़िता के मुताबिक आरोपी विनीत उस पर अपनी बात मानने का दबाव बनाता है। आरोप है कि वह साफ तौर पर धमकी देता है कि यदि युवती ने उसकी बात नहीं मानी तो वह उसकी शादी कहीं और नहीं होने देगा। इसके साथ ही जान से मारने और समाज में बदनाम करने की धमकी भी दी जा रही है। युवती ने पुलिस को बताया कि आरोपी की धमकियों और लगातार परेशान किए जाने से वह मानसिक रूप से परेशान है। परिवार के लोग भी उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
    कॉल रिकॉर्डिंग और चैट बनीं अहम कड़ी
    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी की ओर से की गई बातचीत और धमकियों से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग, मोबाइल चैट और स्क्रीनशॉट उसके पास सुरक्षित हैं। उसने इन्हें पुलिस जांच में उपलब्ध कराने की बात कही है। अब पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाएगी कि युवती को कब-कब फोन किया गया, बातचीत में किस तरह की धमकियां दी गईं और आरोपी की ओर से वास्तव में क्या संदेश भेजे गए।
    SSP ने लिखा- ‘PERSONAL ATTENTION’
    युवती की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए SSP ने महुआखेड़ा थाना प्रभारी को मामले में “PERSONAL ATTENTION” देने के निर्देश दिए हैं। आदेश में प्रकरण को गंभीर बताते हुए SHO को स्वयं मामले को देखने और विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीओ द्वितीय धनंजय के अनुसार मामले में आगे कार्रवाई तय की जा रही है।
    परिवार को सुरक्षा की चिंता
    पीड़िता का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के चलते उसका परिवार भी भयभीत है। शिकायत में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ सुरक्षा की मांग भी की गई है। पुलिस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।
  • कुल्लू: बीस भादो पर तीर्थ स्थलों में उमड़ा आस्था का स***ब, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

    कुल्लू: बीस भादो पर तीर्थ स्थलों में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
  • ब**़ से घिरे भैया नगला में डीएम-विधायक ने बांटी राशन:रामपुर में नाव से पहुंचे, ग्रामीण बोले- स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी भगवान भरोसे

    रामपुर के भैया नगला गांव में शनिवार को जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी और नगर विधायक आकाश सक्सेना पहुंचे। वे मोटर बोट से गांव आए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान 200 से ज्यादा लोगों को राशन किट बांटी गई। किट में खाने-पीने और जरूरत का दूसरा सामान था। विधायक आकाश सक्सेना ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सरकार और वे खुद बाढ़ प्रभावितों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल के समय हरसंभव मदद दी जाएगी। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। देखें, 4 तस्वीरें… राशन मिलने के बाद ग्रामीणों ने राहत तो महसूस की, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नाराजगी भी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि अधिकारियों के गांव में रहने तक डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को देखते हैं। हालांकि, उनके जाते ही स्वास्थ्य सेवाएं बंद हो जाती हैं।
    ग्रामीण विजयपाल ने बताया कि वे खुद बीमार हैं और उनकी बेटी शिवानी को भी तेज बुखार है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को दवा लेने पहुंचे तो डॉक्टर वहां से जा चुके थे। शनिवार को भी डॉक्टर नहीं मिले। अब वे बेटी को एंबुलेंस से जिला अस्पताल या किसी निजी अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
    एक दूसरे ग्रामीण राजेश ने बताया कि दोपहर करीब तीन बजे तक जब अधिकारी मौजूद रहते हैं, तब तक व्यवस्थाएं ठीक रहती हैं। लेकिन उनके जाने के बाद डॉक्टर और कर्मचारी दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों की मांग है कि गांव में कम से कम एक स्वास्थ्यकर्मी की लगातार तैनाती की जाए। चारों तरफ पानी होने के कारण आने-जाने में दिक्कत है। नावों की व्यवस्था तो है, लेकिन गांव में स्वास्थ्यकर्मी होने से बीमार लोगों को समय पर दवा और शुरुआती इलाज मिल सकेगा।
  • सहारनपुर में मस्जिद गिराने पर भड़की सपा और कांग्रेस, इमरान मसूद बोले- संविधान पर हथौड़ा चलाया जा रहा

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन शुरू कर दिया है. अवैध मस्जिद पर कार्रवाई के बाद अब राजनीतिक हलकों में शोर तेज हो गया है. इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है, “सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है और उपलब्धि भी.”

    वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं. मस्जिद 1911 से पहले की है. अभी 22 दिन और बचे थे. रातों रात चारों तरफ से घेरा हुआ है. देश के संविधान पर हथौड़ा चलाया जा रहा है. ये ना समझे मस्जिद को शहीद करके बहुत बड़ा काम कर दिया. आज ये काम हमारे लिए कर रहे है कल किसी और के लिए करोगे इससे कोई हिंदू खुश नहीं होगा. राज्य सरकार का ये राजनीति एजेंडा है.”

    ‘हाई कोर्ट में सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दिया’

    इमरान ने कहा, “आज भी मस्जिद का मालिकाना हक वाहिद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है. हाई कोर्ट में सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दिया गया; न तो वक्फ़ बोर्ड को मामले में पक्षकार बनाया गया और न ही कार्यवाही में शामिल किया गया. इलाके को चारों तरफ़ से घेरकर और लोगों को घरों में कैद करके मस्जिद को गिराया गया.”

    मसूद ने इसे कला दिन बताते हुए कहा, “आज सहारनपुर के लोगों के लिए काला दिन है. सहारनपुर के लोगों को काली पट्टी बांधकर इसका विरोध करना चाहिए.”

    सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी एक अवैध मस्जिद को SDM, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में गिराया जा रहा है. सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पिछले महीने इस मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए इसे गिराने का आदेश दिया था.

    हाई अलर्ट पर प्रशासन

    कार्रवाई के बीच पूरे सहारनपुर जिले में हाई अलर्ट घोषित किया गया है. संवेदनशील स्थानों पर PAC और RRF को तैनात किया गया है. दमकल की गाड़ियां भी अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई हैं. पुलिस प्रशासन ने किसी भी तरह की भीड़ या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं.

  • हिमाचल पुलिस: वर्ष 2027 में तीन आईपीएस और 14 एचपीएस अधिकारी होंगे सेवानिवृत्त, यहां देखें सूची

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    हिमाचल प्रदेश कैडर के तीन आईपीएस अधिकारी वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। इसके अतिरिक्त  प्रदेश पुलिस सेवा के 14 अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। राज्य सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गर्ग 31 जुलाई 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। गर्ग वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी एन. वेणुगोपाल 31 दिसंबर 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। वेणुगोपाल भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय जांच ब्यूरो कोलकाता जोन में संयुक्त निदेशक के रूप में तैनात हैं। 2008 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी डीके चौधरी भी 31 दिसंबर 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। वे हिमाचल प्रदेश में पुलिस महानिरीक्षक, संचार एवं तकनीकी सेवाएं, हमीरपुर के पद पर कार्यरत हैं। 

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  • बागपत समाधान दिवस: 19 में से 3 शिकायतों का मौके:राजस्व विभाग की सबसे ज्यादा शिकायतें मिलीं, अधिकारियों ने कार्रवाई के निर्देश दिए

    बागपत तहसील परिसर में शनिवार को समाधान दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान कई लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें लेकर अधिकारियों के सामने पहुंचे। अधिकारियों ने सभी फरियादियों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों को जल्द और सही तरीके से शिकायतों के निपटारे के निर्देश दिए। समाधान दिवस में कुल 19 शिकायतें मिलीं। इनमें से 3 शिकायतों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। मिली शिकायतों में एक शिक्षा विभाग से, 6 पुलिस विभाग से, एक खंड विकास विभाग से और 11 राजस्व विभाग से जुड़ी थीं। राजस्व विभाग की शिकायतें सबसे ज्यादा थीं, इसलिए अधिकारियों ने इन पर प्राथमिकता से कार्रवाई करने को कहा। इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक सूरज राय, एसडीएम दिग्विजय सिंह और क्षेत्राधिकारी सुकन्या शर्मा मौजूद रहे। इनके साथ कई और विभागों के अधिकारी भी थे। अधिकारियों ने फरियादियों की बात सुनी और विभागों को साफ निर्देश दिए कि शिकायतों के निपटारे में कोई लापरवाही न हो। अधिकारियों ने यह भी कहा कि शिकायतों का समाधान सिर्फ कागजों पर नहीं होना चाहिए। लोगों को असल में राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने लंबित मामलों में हो रही कार्रवाई की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। समाधान दिवस का मुख्य मकसद आम लोगों की समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाना और उनका समय पर निपटारा करना है। अधिकारियों ने सभी विभागों को तय समय में शिकायतों का सही तरीके से निपटारा करके रिपोर्ट देने को कहा।
  • हिमाचल: लोक अदालतों के बाद भी राजस्व मामले लंबित रहे तो तय होगी डीसी की जवाबदेही

    राजस्व लोक अदालत और विशेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से प्रदेश में लाखों लंबित मामलों का निपटारा किया जा चुका है, बावजूद इसके सरकार को अभी भी प्रदेश के कई क्षेत्रों से राजस्व मामलों के समय पर न निपटने की सूचनाएं मिल रही हैं।