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नितिन मलिक बने भाजपा के पश्चिमी यूपी क्षेत्रीय मंत्री:समर्थकों ने किया स्वागत, बोले- 2027 में सभी 6 सीटों पर जीत दिलाएंगे
मुज़फ़्फ़रनगर में भाजपा नेता नितिन मलिक को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय मंत्री बनाया गया है। इस नियुक्ति के बाद उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी है। शनिवार शाम करीब 4 बजे आवास विकास कॉलोनी स्थित उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें बुके और फूल-मालाएं भेंट कीं, साथ ही मिठाई खिलाकर खुशी जताई। इस मौके पर नितिन मलिक ने पार्टी के बड़े नेताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा दिखाया है, उस पर वे पूरी ईमानदारी और लगन से खरा उतरने की कोशिश करेंगे। मलिक ने बताया कि उन्होंने करीब 21 साल के राजनीतिक सफर में पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार काम किया है। कार्यकर्ताओं से उनके अच्छे संबंध और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह जिम्मेदारी दी है। नितिन मलिक ने कहा कि यह जिम्मेदारी सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि मुज़फ़्फ़रनगर जिले और बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए भी खुशी की बात है। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी प्राथमिकताएं बताईं। नितिन मलिक ने कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत से काम किया जाएगा। उनका लक्ष्य मुज़फ़्फ़रनगर जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत पक्की करना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ और संगठन की मजबूती से भाजपा प्रदेश में एक बार फिर सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके घर पर दिनभर बधाई देने वालों का आना-जाना लगा रहा। कार्यकर्ताओं ने इसे नितिन मलिक के लंबे राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव का सम्मान बताया और खुशी जताई। -
मुरादाबाद: सर्किट हाउस में रास्ता रोककर अदा की नमाज, सपा नेता हाजी उस्मान पर FIR दर्ज
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के राजकीय सर्किट हाउस परिसर में सार्वजनिक रास्ते को बाधित कर नमाज़ अदा की गई थी. इसका वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. यह मामला 3 सितंबर का है, जब विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव की बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष एवं प्रमुख मुस्लिम विद्वान हाजी मोहम्मद उस्मान ने अपनी गाड़ी के पीछे खुले मार्ग पर नमाज पढ़ी थी.

इस पूरे मामले का वीडियो उनके समर्थक द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई थी. हालांकि बढ़ते विवाद को देखकर वीडियो हटा लिया गया था, लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ चुका था.
सपा नेता के खिलाफ FIR दर्ज
लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड के अवर अभियंता और सर्किट हाउस प्रभारी अनित कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले का त्वरित संज्ञान लिया है. थाना मझोला में सपा नेता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में FIR दर्ज की गई है. इस घटनाक्रम ने राज्य में सियासी पारे को बढ़ा दिया है.
शिकायत में क्या कहा गया
थाना मझोला में दर्ज प्राथमिकी (प्र.सू.रि. संख्या 0976/2026) के अनुसार, यह पूरी कानूनी कार्रवाई सर्किट हाउस के प्रभारी और अवर अभियंता अनित कुमार की लिखित तहरीर पर अंजाम दी गई है. यह मामला 4 सितंबर 2026 की रात 10:21 बजे आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 285 और 292 के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है.
शिकायत पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि 3 और 4 सितंबर को यूपी विधान परिषद के नेता लाल बिहारी यादव के प्रवास के लिए गोमती कक्ष और कक्ष संख्या 03 एवं 08 आरक्षित थे. उनके आगमन के चलते परिसर में लोगों की भीड़ थी, उसी दौरान मुख्य मार्ग पर चार पहिया वाहन खड़ा कर आवागमन बाधित किया गया था. इस प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की जांच उपनिरीक्षक सौरभ कुमार को सौंपी गई है.
VHP ने साधा सपा पर निशाना
इधर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इसे आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सपा द्वारा अपने विशेष वोट बैंक को साधने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया है. VHP नेताओं ने सरकारी परिसरों के इस प्रकार के इस्तेमाल पर कड़े सवाल खड़े किए हैं, जबकि पुलिस प्रशासन अब आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटा है.
VHP की केंद्रीय प्रबंध समिति के सदस्य डॉ. राजकमल गुप्ता का आरोप है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह कदम समाजवादी पार्टी द्वारा अपने समर्थकों को राजनीतिक संदेश देने का एक प्रयास है. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी परिसरों में सार्वजनिक यातायात रोककर धार्मिक अनुष्ठान करने के पीछे क्या मंशा है.
मामले की जांच में जुटी पुलिस
इस घटना ने मुरादाबाद सहित पूरे प्रदेश के सियासी हलकों में गरमाहट पैदा कर दी है. आरोपी हाजी मोहम्मद उस्मान क्षेत्र के जाने-माने मुस्लिम स्कॉलर हैं और बिलारी से सपा विधायक हाजी मोहम्मद फहीम के सगे चाचा हैं. पूर्व में भी वो अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. वहीं इस बार सर्किट हाउस के रास्ते पर नमाज़ अदा करने और उसका वीडियो खुद ही बनवाने के फेर में चौतरफा घिर गए हैं.
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आईआईटी के प्रोफेसर का दावा: लांगटांग ग्लेशियर को गोरखा भूकंप ने किया था कमजोर, टूटने से नेपाल में मची त***ी
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वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखेंनेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और तबाही के पीछे केवल जलवायु परिवर्तन ही नहीं, बल्कि 11 साल पहले वर्ष 2015 में आया विनाशकारी गोरखा भूकंप भी बड़ी वजह है। इस भूकंप ने लांगटांग ग्लेशियर की संरचना को ही कमजोर कर दिया था, जिसके टूटने से नेपाल में तबाही मच गई। यह दावा आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के संस्थापक अध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डेरेक्स पी. शुक्ला ने किया है। उन्होंने सैटेलाइट चित्रों और भूवैज्ञानिक तकनीकों से किए प्रारंभिक आकलन के आधार पर यह खुलासा किया है।
प्रोफेसर शुक्ला ने ये कहा
प्रोफेसर शुक्ला के अनुसार गोरखा भूकंप के बाद ग्लेशियर का एक हिस्सा अपनी मूल संरचना से अलग होकर हैंगिंग ग्लेशियर की स्थिति में पहुंच गया और लंबे समय तक अस्थिर बना रहा। 26 अगस्त को उत्तरी हिस्से के टूटने पर भारी मात्रा में बर्फ, मलबा और बड़े बोल्डर नीचे की ओर बह गए, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में विनाशकारी स्थिति पैदा हुई। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार इस घटना में अब तक 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है और 4,875 अब भी लापता हैं। प्रोफेसर शुक्ला का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन ही इस घटना की मुख्य वजह होती तो आसपास के अन्य ग्लेशियरों में भी इसी प्रकार के व्यापक बदलाव दिखाई देते।
भूकंप के बाद ग्लेशियर की संरचना में बदलाव के संकेत मिले
उन्होंने बताया कि आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक, सैटेलाइट चित्रों, उपलब्ध फोटो और वीडियो के साथ भूवैज्ञानिक तथ्यों का विश्लेषण कर ग्लेशियर की पुरानी और वर्तमान स्थिति की तुलना की गई। प्रारंभिक तकनीकी आकलन में वर्ष 2015 के भूकंप के बाद ग्लेशियर की संरचना में बदलाव के संकेत मिले हैं। हालांकि, घटना के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन अभी जारी है। गोरखा भूकंप के दौरान वर्ष 2015 में लांगटांग ग्लेशियर के दक्षिणी हिस्से की ओर भी भारी टूट-फूट हुई थी। इसके बाद बर्फ, पत्थर और मलबे ने नीचे स्थित गोंपा और लांगटांग क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था। अब 26 अगस्त को उत्तरी मुख की ओर का हिस्सा टूटकर गिरा। इस बार भी भारी मात्रा में मलबा और बड़े बोल्डर नीचे की ओर बहने से जानमाल का बड़ा नुकसान हुआ।
हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से बढ़ जाता है खतरा
प्रो. शुक्ला के अनुसार सामान्य ग्लेशियर के टूटने की तुलना में ऊंचाई पर अस्थिर स्थिति में मौजूद हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से तबाही का दायरा बढ़ जाता है। इसके टूटने पर बर्फ के साथ भारी मात्रा में पत्थर और मलबा तेजी से नीचे की ओर आता है। उन्होंने बताया कि लांगटांग क्षेत्र में पहले भी फ्लैश फ्लड की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में इस क्षेत्र की भौगोलिक अस्थिरता को समझने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
हिमालयी क्षेत्रों में हो रहे भौगोलिक बदलावों का अध्ययन करते हैं शुक्ला
प्रो. डेरेक्स पी. शुक्ला की विशेषज्ञता रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम, भूस्खलन, परमा फ्रॉस्ट, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरण भूविज्ञान में है। वह सैटेलाइट चित्रों और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में हो रहे भौगोलिक बदलावों का अध्ययन करते हैं।
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बरेली कॉलेज में छात्रों ने गुरु के नाम लगाए पेड़:पर्यावरण मंत्री ने की शुरुआत, हरियाली के लिए लिया संकल्प
बरेली कॉलेज में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान चलाया गया। इस पहल के तहत छात्रों ने अपने गुरुओं के सम्मान में पौधे लगाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना भी पहुंचे। उन्होंने खुद पौधरोपण कर गुरु सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वन मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मां के बाद गुरु का स्थान सबसे अहम है। ऐसे में गुरु के प्रति सम्मान और आभार जताने के लिए पौधा लगाना एक अच्छी पहल है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपने कॉलेज और घरों में गुरु के नाम पर पेड़ लगा रहे हैं। यह पहल युवाओं को पर्यावरण से जोड़ेगी और उनमें गुरु के प्रति सम्मान बढ़ाएगी। डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि बरेली कॉलेज जैसे पुराने शिक्षण संस्थान में ऐसा आयोजन छात्रों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने जोर दिया कि पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। तभी वह पौधा सच में गुरु के सम्मान का प्रतीक बन पाएगा। वन मंत्री ने प्रदेश में चल रहे पौधरोपण अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस साल अब तक 40 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को उनके संरक्षण के लिए भी जागरूक कर रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि पौधरोपण को सिर्फ एक कार्यक्रम न समझें। जिस पौधे को वे अपने गुरु के नाम से लगा रहे हैं, उसकी रोज देखभाल भी करें। इससे गुरु के सम्मान की यह पहल लंबे समय तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती रहेगी। -
विक्रमादित्य सिंह के PWD में लागू हुई नई डिजिटल व्यवस्था, अब हाईटेक होगी पहाड़ी सड़कों की निगरानी
विक्रमादित्य सिंह के PWD में लागू हुई नई डिजिटल व्यवस्था, अब हाईटेक होगी पहाड़ी सड़कों की निगरानी

डिजिटल मैपिंग से सड़क की जमीन होगी सुरक्षित, नुकसान पहुंचाने वालों से होगी वसूली
शिमला। हिमाचल प्रदेश की दुर्गम पहाड़ी सड़कों को सुरक्षित रखने और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में सुक्खू सरकार ने बड़ा बदलाव शुरू किया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में विभाग अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां सड़कों की निगरानी से लेकर उनकी मरम्मत, निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग और विभागीय फाइलों तक का काम डिजिटल सिस्टम के जरिए किया जाएगा।
विधानसभा से पारित हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 को इसी दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इसके तहत सड़क अवसंरचना का डिजिटल और जियो-कोऑर्डिनेटेड रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
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पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण के साथ सबसे बड़ी चुनौती सड़क की जमीन की पहचान और उसकी सुरक्षा को लेकर रहती है। कई स्थानों पर सड़क किनारे निर्माण, अतिक्रमण या अन्य गतिविधियों को लेकर विभाग को मौके पर जाकर सीमांकन करना पड़ता है।
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नई व्यवस्था में सड़क की सीमा और उससे जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को जियो-कोऑर्डिनेट के साथ डिजिटल मैप में दर्ज किया जाएगा। एक बार सही तरीके से मैपिंग पूरी हो जाने के बाद प्रत्येक मामले में दोबारा भौतिक सीमांकन कराने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
नई व्यवस्था का एक अहम पहलू सड़क और उससे जुड़ी संपत्तियों को नुकसान से बचाना है। यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि से सड़क, पुल, जल निकासी व्यवस्था या अन्य सड़क अवसंरचना को नुकसान पहुंचता है तो विभाग को उसकी तत्काल बहाली का अधिकार होगा। मरम्मत के बाद नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति से बहाली की लागत के साथ निर्धारित जुर्माना भी वसूला जा सकेगा। यानी सड़क काटकर निजी गतिविधि करने, अवसंरचना को नुकसान पहुंचाने या नियमों का उल्लंघन करने के बाद उसका पूरा भार सरकारी खजाने पर डालने की व्यवस्था को बदलने की कोशिश की गई है।
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पहाड़ी सड़कों पर बरसात और भूस्खलन के दौरान कई बार सड़क का कोई हिस्सा यात्रियों के लिए खतरनाक हो जाता है। ऐसी स्थिति में यातायात जारी रखना दुर्घटना को न्योता दे सकता है। संशोधित प्रावधान विभाग को जरूरत पड़ने पर सड़क या उसके किसी हिस्से को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित या बंद करने की अनुमति देते हैं। इसका इस्तेमाल रखरखाव, मरम्मत और सड़क अवसंरचना की सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा।
व्यवस्था परिवर्तन का असर केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा। संशोधन में आपत्ति और अपील दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर स्तर पर अपीलीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इससे विभागीय आदेश से असंतुष्ट लोगों को अपनी बात रखने के लिए स्पष्ट मंच मिलेगा और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर अधिक सुगम हो सकेगी।
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लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के लिए यह बदलाव केवल कानून में संशोधन नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्य की सड़क व्यवस्था को नई तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक व्यापक पहल के तौर पर सामने आ रहा है। मंत्री का जोर सड़क निर्माण के साथ-साथ उसकी सुरक्षा, रखरखाव, निगरानी और समय पर मरम्मत पर है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जहां बारिश, भूस्खलन, भू-स्खलन और प्राकृतिक आपदाओं से सड़कें लगातार प्रभावित होती हैं, वहां पारंपरिक तरीके से हर समस्या का समाधान करना मुश्किल होता है।
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सड़क अवसंरचना के कानूनी बदलावों के साथ लोक निर्माण विभाग के अंदर भी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन किया जा रहा है। अब लेखा कार्य, निर्माण कार्यों की निगरानी, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), ई-बिलिंग, एजी इंटीग्रेशन और एमआईएस जैसे महत्वपूर्ण कार्य इसी वेब आधारित व्यवस्था के माध्यम से किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में किसी सड़क का काम कहां पहुंचा, माप कितना हुआ, बिल की स्थिति क्या है और कार्य की मॉनिटरिंग किस स्तर पर है—इन तमाम प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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हिमाचल: राज्य शिक्षक पुरस्कार से 32 गुरुजन सम्मानित, वंदेमातरम के सभी छंदों की धुन से शुरूआत और समापन
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वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखेंशिक्षक दिवस पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के लोकभवन में शनिवार को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था, उसके भविष्य और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को लेकर व्यापक विमर्श का मंच भी बना। समारोह की शुरुआत और समापन राष्ट्रगीत वंदेमातरम के सभी छंदों की विशेष प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे आयोजन को एक अलग गरिमा प्रदान की। राष्ट्रगीत के साथ राष्ट्रगान की धुन भी बजाई गई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अन्य सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्तता के कारण शामिल नहीं हो सके। शिक्षा क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का उल्लेख शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने किया। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के कुल 32 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया।
इनमें स्कूल शिक्षा विभाग के 21, उच्च शिक्षा विभाग के पांच और तकनीकी शिक्षा विभाग के पांच शिक्षक शामिल रहे। वर्ष 2025 के लिए चयनित सोलन के शिक्षक शशिपाल को भी राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के बाद राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देने वाले कर्मी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं। विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। देश का भविष्य किसी संसद या सचिवालय में नहीं, बल्कि कक्षाओं में आकार लेता है। उन्होंने कहा कि आज जब शिक्षा तेजी से डिजिटल और तकनीक आधारित हो रही है, तब भी शिक्षक की भूमिका कम नहीं हुई है, बल्कि पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म सीखने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं, लेकिन शिक्षक का मार्गदर्शन, प्रेरणा, नैतिकता और मानवीय संवेदनाएं किसी तकनीक से प्रतिस्थापित नहीं की जा सकतीं। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय कौशल विकास, नवाचार, अनुसंधान, रचनात्मक सोच और चरित्र निर्माण से जोड़ा है। राज्यपाल ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य शिक्षक पुरस्कार उनकी वर्षों की मेहनत, समर्पण और नवाचार का सम्मान है। हालांकि एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार तब होता है, जब उसके विद्यार्थी जीवन में सफल होकर समाज, प्रदेश और देश के निर्माण में योगदान देते हैं और अपने गुरु को जीवनभर याद रखते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों का भी संचार करना चाहिए।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर और राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर खूब वाहवाही बटोरी। राज्यपाल ने शिक्षक दिवस पर प्रकाशित विशेष स्मारिका का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उपमहापौर उमा कौशल, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ. अभिषेक जैन, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह आदि उपस्थित रहे।
प्रेरणा बनेगी सम्मानित शिक्षकों की सफलता की कहानियां : रोहित
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सम्मानित शिक्षकों की सफलता की कहानियों का दस्तावेजीकरण कर अन्य शिक्षकों के साथ साझा किया जाएगा। बीएड और डाइस संस्थानों में इनके अनुभवों को साझा किया जाएगा। इससे पूरे शिक्षा समुदाय को प्रेरणा मिलेगी। रोहित ने कहा कि शिक्षा विभाग में 9,000 से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं। आगामी एक साल के भीतर कुल 15 हजार नियुक्तियां देने का लक्ष्य रखा गया है। सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम लागू किया गया है। स्थानीय भाषाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण देने के लिए एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम शुरू किया गया है।
शिक्षकों ने निभाया कर्तव्य, कम लोग करते हैं ड्यूटी से ज्यादा काम : धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि पुरस्कृत हुए शिक्षकों ने अपना कर्तव्य निभाया है। बहुत कम ऐसे लोग होते हैं, जो अपनी ड्यूटी से बाहर जाकर ज्यादा काम करते हैं। चयनित शिक्षकों ने अपने कर्तव्य से बढ़कर विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। ऐसे शिक्षकों की सफलता की कहानियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है और अब अगला लक्ष्य प्रदेश में उत्कृष्ट एवं विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।
इन शिक्षकों को मिला सम्मान
स्कूल श्रेणी से सामान्य श्रेणी में शशि पाल, तिलक राज, अजय कुमार, किरण कुमार, राकेश कुमार, संजय कुमार नेगी, मनोज कुमार, इंद्र प्रकाश, जगदीश कुमार, रौशन लाल, राकेश कुमार, राकेश सिंह ,पूर्णिमा कुमारी, खेचोक जांगपो, चमन लाल, लोकेंद्र सिंह और सृष्टि शर्मा को पुरस्कार दिया गया। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर की शिक्षिका मंजरी वी. महाजन ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त किया।
विशेष पुरस्कार श्रेणी में रोशनी देवी, सारिका आहूजा, बलवंत जोहटा, स्नेह लता, ललित कुमार और वीरेंद्र चौहान को पुरस्कार दिया गया।
तकनीकी शिक्षा में डाॅ. विवेक कुमार, डाॅ. रितेश कौंडल, पोहलो राम, सुभाष चंद, रवि दत्त को पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उच्च शिक्षा विभाग से डाॅ. पंकज बसोतिया, डाॅ. हरबंस लाल शर्मा, डाॅ. समजीत सिंह ठाकुर डाॅ. प्रशांत रमन रवि और डॉ. रवि कांत को सम्मानित किया गया।
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दादानगर में सजी ‘श्री श्याम रसोई’:जरूरतमंदों को बंटा फ्री भोजन; सेवा समिति ने पेश की मानवता की मिसाल
कानपुर में ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के महान संकल्प को चरितार्थ करते हुए ‘श्री श्याम जी सेवा समिति’ द्वारा लगातार पुनीत कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 5 सितंबर को कानपुर के दादानगर क्षेत्र में एक विशाल और निशुल्क भोजन वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद छका। दादानगर में आयोजित इस निशुल्क भोजन वितरण कार्यक्रम में समाजसेवी अरुण अरोड़ा का विशेष सहयोग रहा। उनके ही सौजन्य से इस पुनीत अन्नदान कार्य को संपन्न किया गया। इस दौरान क्षेत्र के तमाम जरूरतमंदों, राहगीरों, कामगारों और आम जनमानस ने पूरे आदर-भाव के साथ भोजन ग्रहण किया। ‘श्री श्याम रसोई’ की पहल बन रही मिसाल यह नेक कार्य ‘श्री श्याम जी सेवा समिति कानपुर’ द्वारा संचालित ‘श्री श्याम रसोई’ प्रकल्प के अंतर्गत किया गया। इस प्रकल्प का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। ‘श्री श्याम रसोई’ के माध्यम से भूखों को भोजन कराने के इस निरंतर और निस्वार्थ सेवा कार्य की पूरे कानपुर क्षेत्र में भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। -
हिमाचल हाईकोर्ट: एएनएम होम के दोषपूर्ण डिजाइन पर अफसर की तय हो जिम्मेदारी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) के पद पर सीधी भर्ती के बाद पदोन्नति के तहत वेतन वृद्धि और पुरानी दाई सेवा को जोड़कर एसीपीएस (एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेशन स्कीम) के लाभ की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। -
रुदौली में SDM पर दुर्व्यवहार का आरोप:अधिवक्ताओं का 5वें दिन भी कार्य बहिष्कार जारी, एसडीएम बोले- जल्द निकलेगा समाधान
अयोध्या के रुदौली तहसील में उप जिलाधिकारी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर अधिवक्ताओं का धरना प्रदर्शन शनिवार 5 सितंबर को पांचवें दिन भी जारी रहा। अधिवक्ताओं ने तहसील की सभी अदालतों का अनिश्चितकालीन काम बंद कर दिया है। इससे न्यायिक कामकाज पूरी तरह ठप है और मुकदमे लड़ने वालों को काफी परेशानी हो रही है। एसडीएम ने कहा कि अधिवक्ताओं से बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा। बार एसोसिएशन के नए अध्यक्ष राममिलन यादव ने बताया कि तहसील के एक अधिवक्ता एक आरोपी की जमानत के सिलसिले में एसडीएम अदालत गए थे। आरोप है कि इस दौरान एसडीएम ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और अपमानजनक व्यवहार किया। इस घटना से दुखी होकर अधिवक्ता ने साथी अधिवक्ताओं को जानकारी दी, जिसके बाद अधिवक्ताओं में गुस्सा फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ताओं ने एक बैठक कर सभी अदालतों और तहसील कार्यालयों का काम बंद करने का फैसला किया। पिछले पांच दिनों से अधिवक्ता तहसील परिसर में जुलूस निकालकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिवक्ताओं ने साफ किया है कि जब तक एसडीएम खुद अधिवक्ताओं के साथ बैठकर मामले का सम्मानजनक हल नहीं निकालते और घटना पर साफ जवाब नहीं देते, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं, इस पूरे मामले पर एसडीएम रुदौली विनोद कुमार गुप्ता ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि जब वह अधिवक्ता अदालत आए थे, उस समय वह मौजूद नहीं थे। अधिवक्ता द्वारा अदालत के कर्मचारियों के साथ अभद्रता की जा रही थी और वीडियो बनाया जा रहा था। कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि अधिवक्ता नशे में थे। इसलिए उन्हें बुलाकर समझाया गया कि उनका व्यवहार ठीक नहीं है। एसडीएम ने कहा कि जल्द ही अधिवक्ता संघ के साथ बातचीत कर गतिरोध खत्म करने की कोशिश की जाएगी। अधिवक्ताओं ने भी कहा कि एसडीएम द्वारा भेजे जा रहे बातचीत के प्रस्ताव पर सकारात्मक चर्चा के बाद ही हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया जाएगा। -
कैग रिपोर्ट: कैदियों की अमानत से जेलों का खर्च, सुरक्षा कर्मी नहीं मिलने से इलाज अटका
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वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखेंभारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2024 तक की रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की जेलों में गंभीर खामियां उजागर की हैं। यह रिपोर्ट कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाती है। जेल प्रशासन ने बजट की कमी के दौरान कैदियों के निजी संपत्ति खातों का उपयोग विभागीय खर्चों के लिए किया। जांची गई जेलों में ऐसे खातों से कुल 65.89 लाख रुपये निकाले गए। मार्च 2024 तक 6.56 लाख रुपये कैदियों के खातों में वापस जमा नहीं किए गए थे। हिमाचल प्रदेश प्रिजन मैनुअल 2021 के अनुसार, कैदियों का प्रॉपर्टी अकाउंट निजी अमानत है। इसका विभागीय कार्यों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंडा, सोलन और धर्मशाला जेलों में यह राशि पुलिस सुरक्षा भत्ते और मेडिकल परीक्षण जैसे खर्चों में लगी। कंडा जेल में 4,57,878 रुपये, सोलन जेल में 1,81,380 रुपये और धर्मशाला जेल में 17,085 रुपये वापस जमा नहीं हुए थे। कैग ने इस व्यवस्था को नियमों के विपरीत माना है। विभाग ने बजट मिलने पर राशि की भरपाई का तर्क दिया।