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  • चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ा:रामघाट में पानी खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर, पुलिस और प्रशासन की टीमें अलर्ट

    चित्रकूट के पहाड़ी और मध्य प्रदेश क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। रामघाट क्षेत्र में नदी का पानी खतरे के निशान से लगभग 2 मीटर ऊपर बह रहा है। इससे नदी किनारे रहने वाले लोगों और दुकानदारों में चिंता का माहौल है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण रामघाट के निचले हिस्सों में पानी भर गया है। नदी किनारे बनी कई दुकानें और रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं। लोगों को नदी के आसपास जाने से मना किया जा रहा है और घाटों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मंदाकिनी का पानी सड़क तक पहुंचने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। सड़क पर पानी आने से आवागमन बाधित हो गया है, जिससे दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रख रहा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। राजस्व, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक कदम उठा रही हैं। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे और तेज बहाव वाले स्थानों पर न जाएं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को घाटों से दूर रहने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि बारिश और नदी के जलस्तर की स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
  • जलवायु परिवर्तन: हिमाचल की ग्लेशियर झीलें बनीं टाइम बम, 88 बेहद संवेदनशील, अध्ययन में खुलासा

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    जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों के खतरे को और बढ़ा दिया है। ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में बर्फबारी की जगह बारिश और रेन-ऑन-स्नो जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और झीलों में पानी की मात्रा बढ़ रही है। कमजोर प्राकृतिक बांधों पर बढ़ते पानी के दबाव के साथ भारी बारिश, बादल फटना, भूस्खलन, हिमस्खलन, रॉकफॉल और भूकंपीय गतिविधियां और ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ा रही हैं।

    हिमाचल में 94 ग्लेशियर झीलों का आकलन किया

    आईआईटी रोपड़ और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अध्ययन में हिमाचल प्रदेश की 0.02 वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक क्षेत्र वाली 94 ग्लेशियल झीलों का आकलन किया गया। इनमें 88 झीलें बाढ़ के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील पाई गई हैं। यह अध्ययन 1990 से 2024 तक के 34 वर्षों के उपग्रह और जलवायु आंकड़ों पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ हाइड्रोलॉजी रीजनल स्टडीज में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में आईआईटी रोपड़ की पीएचडी स्कॉलर दीपाली गायकवाड़, दायिशिशा इयावफनियाव, विकास सिंह जादौन और प्रो. बिश्वजीत प्रधान शामिल रहे।

     34 वर्षों में झीलों की संख्या में 525 फीसदी की वृद्धि

    अध्ययन के अनुसार हिमाचल में ग्लेशियल झीलों की संख्या 1990 में 107 थी, जो 2024 में बढ़कर 669 हो गई। यानी 34 वर्षों में 525 फीसदी की वृद्धि हुई। इन झीलों का कुल क्षेत्रफल भी 5.54 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 11.20 वर्ग किलोमीटर हो गया, जो करीब 102 फीसदी की वृद्धि है। बड़ी चिंता छोटी यानी 0.01 वर्ग किलोमीटर से कम क्षेत्र वाली झीलों को लेकर है। इनकी संख्या 1990 में केवल नौ थी, जो 2024 में बढ़कर 487 हो गई। प्राकृतिक बांधों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। अध्ययन में 94 प्रमुख झीलों में से 73 के मोरेन बांधों को संरचनात्मक रूप से अस्थिर पाया गया। 

     58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में

    58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में हैं। 52 झीलों में आइस-कोर यानी बर्फ की आंतरिक परत के पिघलने से रिसाव और बांध टूटने का जोखिम है। वहीं, 44 झीलों की ढलानों पर रॉकफॉल का खतरा दर्ज किया गया है। जोखिम की गंभीरता के आधार पर नौ झीलों को अति उच्च, 18 को उच्च और 26 को मध्यम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश, बादल फटने, भूस्खलन या हिमस्खलन से अचानक बड़ी मात्रा में पानी झील में पहुंचने पर प्राकृतिक बांध टूट सकता है। ऐसी स्थिति में नीचे की ओर बसे क्षेत्रों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य ढांचों को भारी नुकसान हो सकता है। 

    उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार

    अध्ययन में ब्यास और सतलुज नदी बेसिन की दो उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार किया गया। प्रोबेबल मैक्सिमम फ्लड यानी पीएमएफ की स्थिति में पंडोह बांध तक अधिकतम जलप्रवाह 17,086 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और भाखड़ा बांध तक 23,478 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पहुंचने का अनुमान लगाया गया। सबसे खराब स्थिति में यदि झील फटने और अत्यधिक बारिश की घटना एक साथ होती है तो ब्यास बेसिन में जलप्रवाह 17,356 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और सतलुज बेसिन में 24,723 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है। ऐसे भयावह जलप्रवाह की स्थिति में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं, धार्मिक स्थलों और नदी के बहाव क्षेत्र में मौजूद 680 से अधिक ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

    निगरानी और आपदा प्रबंधन मजबूत करने की जरूर

    शोध में सामने आए आंकड़े हिमाचल के लिए ग्लेशियल झीलों की निगरानी, प्राकृतिक बांधों की नियमित जांच, संवेदनशील क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। खासकर बदलते मौसम में बारिश के बढ़ते पैटर्न और तेजी से पिघलते ग्लेशियलों को देखते हुए उच्च जोखिम वाली झीलों की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

     

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  • पुलिस ने 2 लुटेरों को दौड़ाकर पैर में गोली मारी:गाजियाबाद में रक्षाबंधन पर महिलाओं से चेन व कुंडल लूटे, कहा- सर बहुत बड़ी गलती हो गई

    गाजियाबाद मे मोदीनगर पुलिस ने शुक्रवार आधी रात 2 लुटेरों को एनकाउंटर में अरेस्ट किया है। पुलिस ने दौड़ाकर पैर में गोली मारी। इनमें एक लुटेरा मेरठ के लिसाड़ीगेट का रहने वाला है। पुलिस ने मौके से एक तमंचा, एक जोड़ी सोने के कुंडल, एक बाइक बरामद की है। यह गैंग मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली में लगातार लूट की वारदात कर रहा था। घायल फारुख गोली लगने के बाद पुलिस से कहने लगा कि साहब गलती हो गई, अब लूट नहीं करुंगा। पुलिस पर फायरिंग कर भागे एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि मोदीनगर SHO आनंद प्रकाश मिश्रा शुक्रवार रात कलछीना रोड पर वाहनों की चेकिंग र रहे थे। इस बीच पुलिस ने बाइक सवार 2 संदिग्ध युवकों को रोकने का प्रयास किया। दोनों ने बाइक नहीं रोकी और बाइक दौड़ा दी। जहां दोनों युवक बाइक फिसल ने से गिर गए और एक बदमाश ने पुलिस पर तमंचे से फायर कर दिया। जिसमें एक सिपाही गोली लगने से बाल बाल बचा। पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में एक बदमाश के पैर में गोली लगी व दूसरे बदमाश को पीछा करके पकड लिया। मेरठ का फारुख शातिर लुटेरा एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि घायल युवक ने पूछे जाने पर अपना नाम फारुख उर्फ छोटू पुत्र यामीन निवासी लिसाडीगेट मेरठ बताया। जो गाजियाबाद के विजयनगर में रह रहा है। दूसरे युवक ने अपना नाम हाशिम पुत्र चांदबाबू निवासी उज्जवल गार्डन थाना लिसाड़ीगेट बताया। दोनों ने पूछताछ में बताया कि 21 अगस्त को मोदीनगर में एक महिला से कुंडल लूटे, इसके बाद चेन लूटी। मेरठ में भी 2 लूट की बात स्वीकार की। यह गैंग दिल्ली, मेरठ और गाजियाबाद में लूट कर रहा था। दोनों पर लूट के 6 मुकदमें दर्ज हैं।
  • पुलिस ने 2 लुटेरों को दौड़ाकर पैर में गोली मारी:गाजियाबाद में रक्षाबंधन पर महिलाओं से चेन व कुंडल लूटे, मेरठ दिल्ली में भी कर रहे थे लूट

    गाजियाबाद मे मोदीनगर पुलिस ने शुक्रवार आधी रात 2 लुटेरों को एनकाउंटर में अरेस्ट किया है। पुलिस ने दौड़ाकर पैर में गोली मारी। इनमें एक लुटेरा मेरठ के लिसाड़ीगेट का रहने वाला है। पुलिस ने मौके से एक तमंचा, एक जोड़ी सोने के कुंडल, एक बाइक बरामद की है। यह गैंग मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली में लगातार लूट की वारदात कर रहा था। पुलिस पर फायरिंग कर भागे एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि मोदीनगर SHO आनंद प्रकाश मिश्रा शुक्रवार रात कलछीना रोड पर वाहनों की चेकिंग र रहे थे। इस बीच पुलिस ने बाइक सवार 2 संदिग्ध युवकों को रोकने का प्रयास किया। दोनों ने बाइक नहीं रोकी और बाइक दौड़ा दी। जहां दोनों युवक बाइक फिसल ने से गिर गए और एक बदमाश ने पुलिस पर तमंचे से फायर कर दिया। जिसमें एक सिपाही गोली लगने से बाल बाल बचा। पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में एक बदमाश के पैर में गोली लगी व दूसरे बदमाश को पीछा करके पकड लिया। मेरठ का फारुख शातिर लुटेरा एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि घायल युवक ने पूछे जाने पर अपना नाम फारुख उर्फ छोटू पुत्र यामीन निवासी लिसाडीगेट मेरठ बताया। जो गाजियाबाद के विजयनगर में रह रहा है। दूसरे युवक ने अपना नाम हाशिम पुत्र चांदबाबू निवासी उज्जवल गार्डन थाना लिसाड़ीगेट बताया। दोनों ने पूछताछ में बताया कि 21 अगस्त को मोदीनगर में एक महिला से कुंडल लूटे, इसके बाद चेन लूटी। मेरठ में भी 2 लूट की बात स्वीकार की। यह गैंग दिल्ली, मेरठ और गाजियाबाद में लूट कर रहा था। दोनों पर लूट के 6 मुकदमें दर्ज हैं।
  • सरहरा में 15 मीटर उपजाऊ भूमि नदी में विलीन:सरयू का जलस्तर 10 सेमी घटा, कटान से तटवर्ती इलाकों में हड़कंप

    सरयू नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। शुक्रवार शाम चार बजे तक जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई, जिससे यह 69.60 मीटर पर पहुंच गया। यह खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 30 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, जलस्तर घटने के बावजूद नदी में लहरों का उफान तेज होने से तटवर्ती क्षेत्रों में कटान बढ़ गई है, जिससे किसानों में हड़कंप है। नईबाजार के सरहरा पूरवे के सामने बीते 24 घंटे में लगभग 15 मीटर उपजाऊ भूमि नदी में समा गई है। इससे किसानों में भारी चिंता है। आरोप है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद बाढ़ खंड आजमगढ़ का कोई अधिकारी या कर्मचारी कटान का मुआयना करने नहीं पहुंचा है। दोहरीघाट कस्बे में शवदाह स्थल और भारत माता मंदिर के पास बैकरोलिंग तेज होने से बोल्डरों के खिसकने का खतरा मंडरा रहा है। नदी के दबाव से मुक्तिधाम, शाही मस्जिद, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, खाकी बाबा की कुटी, रामघाट और जानकी घाट जैसी ऐतिहासिक धरोहरों पर भी कटान का खतरा बना हुआ है। सिंचाई विभाग मऊ की टीम ने धनौली रामपुर से रामघाट तक निगरानी बढ़ा दी है। विभाग के कर्मचारी नगर की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए मुस्तैदी से डटे हुए हैं। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को गौरीशंकर घाट पर जलस्तर 69.70 मीटर था, जो शुक्रवार शाम तक 69.60 मीटर हो गया। निचले इलाकों के लोग भले ही जलस्तर घटने से राहत महसूस कर रहे हों, लेकिन स्थानीय लोगों को चिंता है कि नदी जब घटती है, तब तटवर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही मचाती है। इस समय लहरों में उफान तेज हो गया है। जबकि पानी घटने के साथ ही सरहरा पूरवे के सामने किसानों की खेती योग्य भूमि कटान की जद में आ रही है। बीते 24 घंटे में 15 मीटर से अधिक उपजाऊ भूमि काटकर नदी में विलीन कर दी।
    वहीं अब तक सरहरा में सरयू नदी एक जरीब से अधिक उपजाऊ भूमि को काट चुकी है। जिससे किसानों में हड़कंप मचा हुआ है। उधर, परमहंस बाबा कुटी के सामने में भी रुक-रुककर नदी कटान कर रहीं हैं। हालांकि पहले की अपेक्षा यहां कटान कम है। लेकिन यही हाल रहा तो कटान तेज होने की उम्मीद है। लोगों का कहना है कि पहले की तुलना में अब कटान कम है, लेकिन अब भी किनारे की भूमि लगातार सरयू की लहरों का निवाला बन रहे हैं। बाढ़ खंड आजमगढ़ के कार्यक्षेत्र में लगातार कटान होने के बाद भी किसी कर्मचारी या अधिकारी के न पहुंचने से लोगों में भारी आक्रोश बढ़ रहा है। वहीं सिंचाई विभाग मऊ की माने तो एक-दो दिन में सरयू का जलस्तर अब भी और नीचे आएगा। जलस्तर में घटाव होने से बाढ़ की संभावना टल गई है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता सिंचाई विभाग प्रिंस कुमार ने बताया कि खाकी बाबा कुटी के पास हुई कटान को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। कटान वाले स्थानों पर बोरी में ईंट की टुकड़ी भरकर नदी के तलहटी में डाला जा रहा है। ऊपर से जियो बैग भी डाले जा रहे है। अब कहीं और कटान की संभावना नही है।
  • हिमाचल में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज: आज कई इलाकों में बरसेंगे मेघ- 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट

    तापमान की बात करें तो अगले 3 से 4 दिनों में न्यूनतम तापमान में ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है। अगले 48 घंटों तक अधिकतम तापमान भी लगभग सामान्य रह सकता है। इसके बाद तापमान में करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आने की संभावना है।
  • दहेज में कार मांगने पर विवाहिता से मारपीट:प्रतापगढ़ में पति-सास समेत चार पर केस, दूसरी शादी की धमकी देने का भी आरोप

    प्रतापगढ़ में दहेज में कार की मांग को लेकर एक विवाहिता से मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस ने विवाहिता की शिकायत पर पति, सास और ननद समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि चार पहिया वाहन की मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किया गया और दूसरी शादी की धमकी भी दी गई। आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के संग्रामपुर गांव निवासी काजल रावत ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसका विवाह 2 दिसंबर 2022 को अयोध्या जिले के बीकापुर थाना क्षेत्र के खजुरहट गांव निवासी समीर रावत से हुआ था। शादी के बाद पति समीर रावत, सास सुनीता देवी और ननद अंजली, दिया व सोनिया समेत अन्य ससुरालियों ने दहेज में चार पहिया वाहन की मांग शुरू कर दी। पीड़िता का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की जाती थी। पति समीर रावत पर दूसरी शादी करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। इन सब से परेशान होकर काजल रावत 16 मई 2026 को ससुराल छोड़कर अपने मायके आ गई। मायके आने के बाद भी ससुराल पक्ष की ओर से उसे लगातार धमकी दिए जाने का आरोप है। पुलिस ने काजल रावत की तहरीर के आधार पर पति समीर रावत, सास सुनीता देवी, ननद अंजली, दिया और सोनिया समेत अन्य ससुरालियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
  • भू माफिया व दबंगों के खिलाफ करें कठोर कार्रवाई:गोरखपुर में CM ने 200 लोगों की फरियाद सुनी; कहा-सबकी समस्या का समाधान होगा

    तीन दिवसीय गोरखपुर प्रवास के दूसरे दिन, शनिवार की सुबह मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्या सुनी। उन्होंने कहा कि सभी लोगों की समस्या का समाधान करना सरकार की प्रतिबद्धता है। अधिकारियों को सीएम ने निर्देश दिया कि जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता व समय से किया जाए। गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में लोगों को कुर्सियों पर बैठाया गया था। मुख्यमंत्री एक-एक कर सबके पास गए और उनकी समस्या सुनी, उनसे प्रार्थना पत्र लिया। इस जनता दर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग आए थे। सीएम ने कहा कि बिना भेदभाव, हर व्यक्ति की समस्या का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने फरियादियों को भरोसा दिलाया कि हर पीड़ित की समस्या का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार कुछ लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। इन लोगों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री ने शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। जनता दर्शन में कुछ लोग पारिवारिक विवादों के मामले भी लेकर आए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पारिवारिक विवादों में सबंधित पक्षों के बीच संवाद कराने की पहल की जाए। मुख्यमंत्री ने की गोसेवा, गोवंश को खिलाया गुड़
    गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। मुख्यमंत्री ने गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-पूड़ी खिलाया।
  • जलवायु परिवर्तन: हिमाचल की ग्लेशियल झीलें बनीं टाइम बम, 88 बेहद संवेदनशील, अध्ययन में खुलासा

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    जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों के खतरे को और बढ़ा दिया है। ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में बर्फबारी की जगह बारिश और रेन-ऑन-स्नो जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे ग्लेशियल तेजी से पिघल रहे हैं और झीलों में पानी की मात्रा बढ़ रही है। कमजोर प्राकृतिक बांधों पर बढ़ते पानी के दबाव के साथ भारी बारिश, बादल फटना, भूस्खलन, हिमस्खलन, रॉकफॉल और भूकंपीय गतिविधियां और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ा रही हैं।

    हिमाचल में 94 ग्लेशियर झीलों का आकलन किया

    आईआईटी रोपड़ और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अध्ययन में हिमाचल प्रदेश की 0.02 वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक क्षेत्र वाली 94 ग्लेशियल झीलों का आकलन किया गया। इनमें 88 झीलें बाढ़ के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील पाई गई हैं। यह अध्ययन 1990 से 2024 तक के 34 वर्षों के उपग्रह और जलवायु आंकड़ों पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ हाइड्रोलॉजी रीजनल स्टडीज में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में आईआईटी रोपड़ की पीएचडी स्कॉलर दीपाली गायकवाड़, दायिशिशा इयावफनियाव, विकास सिंह जादौन और प्रो. बिश्वजीत प्रधान शामिल रहे।

     34 वर्षों में झीलों की संख्या में 525 फीसदी की वृद्धि

    अध्ययन के अनुसार हिमाचल में ग्लेशियल झीलों की संख्या 1990 में 107 थी, जो 2024 में बढ़कर 669 हो गई। यानी 34 वर्षों में 525 फीसदी की वृद्धि हुई। इन झीलों का कुल क्षेत्रफल भी 5.54 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 11.20 वर्ग किलोमीटर हो गया, जो करीब 102 फीसदी की वृद्धि है। बड़ी चिंता छोटी यानी 0.01 वर्ग किलोमीटर से कम क्षेत्र वाली झीलों को लेकर है। इनकी संख्या 1990 में केवल नौ थी, जो 2024 में बढ़कर 487 हो गई। प्राकृतिक बांधों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। अध्ययन में 94 प्रमुख झीलों में से 73 के मोरेन बांधों को संरचनात्मक रूप से अस्थिर पाया गया। 

     58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में

    58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में हैं। 52 झीलों में आइस-कोर यानी बर्फ की आंतरिक परत के पिघलने से रिसाव और बांध टूटने का जोखिम है। वहीं, 44 झीलों की ढलानों पर रॉकफॉल का खतरा दर्ज किया गया है। जोखिम की गंभीरता के आधार पर नौ झीलों को अति उच्च, 18 को उच्च और 26 को मध्यम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश, बादल फटने, भूस्खलन या हिमस्खलन से अचानक बड़ी मात्रा में पानी झील में पहुंचने पर प्राकृतिक बांध टूट सकता है। ऐसी स्थिति में नीचे की ओर बसे क्षेत्रों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य ढांचों को भारी नुकसान हो सकता है। 

    उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार

    अध्ययन में ब्यास और सतलुज नदी बेसिन की दो उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार किया गया। प्रोबेबल मैक्सिमम फ्लड यानी पीएमएफ की स्थिति में पंडोह बांध तक अधिकतम जलप्रवाह 17,086 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और भाखड़ा बांध तक 23,478 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पहुंचने का अनुमान लगाया गया। सबसे खराब स्थिति में यदि झील फटने और अत्यधिक बारिश की घटना एक साथ होती है तो ब्यास बेसिन में जलप्रवाह 17,356 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और सतलुज बेसिन में 24,723 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है। ऐसे भयावह जलप्रवाह की स्थिति में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं, धार्मिक स्थलों और नदी के बहाव क्षेत्र में मौजूद 680 से अधिक ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

    निगरानी और आपदा प्रबंधन मजबूत करने की जरूर

    शोध में सामने आए आंकड़े हिमाचल के लिए ग्लेशियल झीलों की निगरानी, प्राकृतिक बांधों की नियमित जांच, संवेदनशील क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। खासकर बदलते मौसम में बारिश के बढ़ते पैटर्न और तेजी से पिघलते ग्लेशियलों को देखते हुए उच्च जोखिम वाली झीलों की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

     

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  • गाजीपुर में पुलिस को चकमा देकर हिस्ट्रीशीटर फरार:मेडिकल कॉलेज के शौचालय की खिड़की से भागा, बाहर इंतजार करती रही पुलिस

    गाजीपुर के मेडिकल कॉलेज से हिस्ट्रीशीटर सुधीर पासी उर्फ ध्रुव पासी शनिवार तड़के 4 बजे फरार हो गया। वह गहमर पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद ऑपरेशन के लिए 21 अगस्त को जिला कारागार से यहां भर्ती कराया गया था। शनिवार सुबह करीब 4 बजे सुधीर व्हीलचेयर से दूसरे तल स्थित बर्न वार्ड के शौचालय में गया। शौचालय के बाहर एक पुलिसकर्मी मौजूद था। जब वह लगभग 15 मिनट तक बाहर नहीं आया, तो पुलिसकर्मी ने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब न मिलने पर दरवाजे का लॉक तोड़ा गया। पुलिसकर्मियों ने देखा कि शौचालय की जाली टूटी हुई थी और सुधीर वहां से गायब था। मौके पर उसकी व्हीलचेयर और एक गमछा पड़ा मिला। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुधीर पासी को 1 अगस्त को गहमर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के दौरान दोनों पैरों में गोली लगी थी। उसे 2 अगस्त को पहली बार इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद उसे जिला कारागार भेज दिया गया था। जेल में रहने के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ी और पैरों में लगी गोली के उपचार के लिए ऑपरेशन की आवश्यकता बताई गई। इसी के चलते उसे 21 अगस्त को दोबारा जिला कारागार से मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया गया था। घायल अवस्था में सुधीर किस तरह जाली तोड़कर बाहर निकला और मेडिकल कॉलेज परिसर से किस रास्ते फरार हुआ, यह जांच का विषय बना हुआ है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। पत्नी से बात करने के लिए मोबाइल मांगने की भी चर्चा अस्पताल में मौजूद मरीजों और तीमारदारों के मुताबिक, सुधीर ने अपनी पत्नी से बातचीत करने के लिए कई बार मोबाइल फोन मांगा था। हालांकि, किसी ने उसे मोबाइल देने से इनकार कर दिया। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि वह दिन में कई बार शौचालय जाने के लिए जाता था। ऐसे में उसके फरार होने की घटना को लेकर अस्पताल परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, उसने फरार होने की योजना पहले से बनाई थी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। कुछ तीमारदारों ने यह भी बताया कि उन्हें स्पष्ट रूप से पता नहीं था कि वार्ड में भर्ती व्यक्ति पुलिस अभिरक्षा में मौजूद आरोपी है। उसके हाथ में हथकड़ी भी नजर नहीं आने की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस अभिरक्षा, सुरक्षा व्यवस्था और फरार होने की परिस्थितियों को लेकर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए इन सवालों पर अंतिम स्थिति जांच और पुलिस के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। 35 मुकदमों में नाम, मुठभेड़ में दोनों पैरों में लगी थी गोली सुधीर पासी उर्फ ध्रुव पासी मरदह थाने का हिस्ट्रीशीटर HS-92A है। गहमर पुलिस की ओर से 2 अगस्त को जारी प्रेस नोट के अनुसार, उसे 1 अगस्त को पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसके साथी समीम शाह के साथ गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में सुधीर के दाहिने पैर के घुटने और बाएं पैर में घुटने के नीचे गोली लगी थी। पुलिस के अनुसार, सुधीर के खिलाफ गाजीपुर, मऊ, सुल्तानपुर और आजमगढ़ समेत कई जिलों में चोरी, लूट, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में 35 मुकदमे दर्ज हैं। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उसके कब्जे से दो तमंचे, कारतूस, चोरी की मोटरसाइकिल, पांच मोबाइल, सोने का लॉकेट और 90,620 रुपये बरामद करने का दावा किया था। फरार होने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। मेडिकल कॉलेज परिसर और उसके आसपास लगे संभावित रास्तों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि पुलिस अभिरक्षा में भर्ती एक घायल बंदी शौचालय की जाली तोड़कर कैसे बाहर निकल गया। पूरे घटनाक्रम में सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई, इसका पता पुलिस की जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही चल सकेगा।