नाथ कॉरिडोर के तहत बरेली को भव्य और दिव्य स्वरूप देने की कवायद तेज हो गई है। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने गांधी उद्यान के सामने स्थित चौराहे के पुनर्विकास की रूपरेखा तैयार की है। योजना के अनुसार, इस पूरे इलाके का समग्र कायाकल्प किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी और आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा। इस चौराहे पर भगवान गौतम बुद्ध की भव्य प्रतिमा स्थापित कर इसे आधिकारिक तौर पर ‘गौतम बुद्ध चौक’ के रूप में पहचान दी जाएगी। गांधी उद्यान परिसर में बनेगी आकर्षक फोकस वॉल
सौंदर्यीकरण की कड़ी में गांधी उद्यान परिसर में नाथ नगरी की धार्मिक आभा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती विशेष फोकस वॉल भी तैयार की जाएगी। यह वॉल नाथ कॉरिडोर की थीम पर आधारित होगी, जो शहरवासियों के साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी और पूरे इलाके को एक विशिष्ट रूप देगी। समिति ने प्रस्ताव का स्वागत कर दिए अहम सुझाव
प्रस्तावित योजना को लेकर गौतम बुद्ध पार्क समन्वय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पाण्डेय से मुलाकात की। समिति ने चौक के नामकरण और प्रतिमा स्थापना के फैसले का स्वागत करते हुए इसे बौद्ध समाज की भावनाओं के अनुरूप बताया। साथ ही, पार्क में स्तूपाकार प्रवेश द्वार बनाने और मार्ग पर भगवान बुद्ध के धम्म उपदेशों को प्रदर्शित करने के सुझाव भी दिए। हर वर्ग तक पहुंचेगा विकास का लाभ: बीडीए उपाध्यक्ष
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पाण्डेय ने कहा कि यह परियोजना मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप शहर की पहचान, आस्था और संस्कृति को संवारने की दिशा में बड़ा कदम है। शहर का विकास इस तरह किया जा रहा है कि उसका सीधा फायदा हर नागरिक तक पहुंचे। चौराहे के कायाकल्प, भव्य प्रतिमा और गांधी उद्यान की फोकस वॉल से नाथ कॉरिडोर को नई भव्यता मिलेगी। उन्होंने समिति द्वारा दिए गए रचनात्मक सुझावों को भी विकास प्रक्रिया में शामिल करने का भरोसा दिया। दिशा-निर्देशन में तेजी से आगे बढ़ रहे विकास कार्य
नाथ कॉरिडोर से जुड़े तमाम विकास कार्य कमिश्नर बरेली शंभू कुमार के संरक्षण एवं दिशा-निर्देशन में तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। शहर के सभी प्रमुख स्थलों को बेहतर ट्रैफिक, आधुनिक सुविधाओं, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए सर्वांगीण विकास का रोडमैप जमीन पर उतारा जा रहा है। बैठक में मौजूद समिति के सदस्यों ने पूरी कार्ययोजना पर अपनी सहमति जताते हुए प्रशासन की इस पहल को सराहा।
हिमाचल: एक गांव से निकली 3-3 अ*र्थियां, चीखों से दहला इलाका; रात भर खाई में पड़े रहे थे तीनों युवक
एक युवक अपने परिवार का था इकलौटा सहारा, तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
शाहपुर कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शुक्रवार देर रात हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक साथ तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के दरिणी इलाके में भलेड़ पावर हाउस के समीप एक बाइक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में बाइक सवार एक ही गांव के तीन युवकों की मौत हो गई।
सबसे दर्दनाक बात यह रही कि हादसा रात के अंधेरे और खराब मौसम के बीच हुआ और इसकी जानकारी कई घंटे तक किसी को नहीं मिल पाई। तीनों युवक खाई में पड़े रहे। शनिवार सुबह सड़क से गुजर रहे लोगों की नजर जब नीचे खाई में पड़ी बाइक और टूटी झाड़ियों पर गई, तब इस भयावह हादसे का पता चला।
बताया जा रहा है कि तीनों युवक शुक्रवार रात किसी धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए घर से निकले थे। कार्यक्रम से लौटते समय भलेड़ के समीप पहाड़ी सड़क पर बाइक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। रात का अंधेरा, बारिश और पहाड़ी रास्ते की मुश्किल परिस्थितियां ऐसी थीं कि हादसे के बाद किसी को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। बाइक के साथ तीनों युवक खाई में जा गिरे और रातभर वहीं पड़े रहे।
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शनिवार सुबह एक वाहन चालक की नजर सड़क किनारे टूटी झाड़ियों और नीचे खाई में पड़ी बाइक पर गई। शक होने पर उसने वाहन रोका और स्थानीय लोगों को मौके पर बुलाया। जब लोग नीचे खाई में पहुंचे तो वहां तीन युवक गंभीर हालत में पड़े मिले। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और स्थानीय लोगों की मदद से तीनों को शाहपुर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
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धर्मशाला में पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही तीनों युवकों के शव उनके घर पहुंचे तो परिवार की चीखों से पूरा इलाका दहल उठा। अपने लाडलों के शव देख कर उनके परिजन फूट फूट कर रोए। परिवार की चीखों को सुन वहां मौजूद हर शख्स की आंख नम हो गई। सबसे दर्दनाक पहलू उस समय सामने आया, जब एक ही गांव से तीन तीन अर्थियां निकली। एक साथ तीन अर्थियां उठना पूरे क्षेत्र के लिए बेहद पीड़ादायक दृश्य रहा। गांव का कोई ऐसा घर नहीं था जहां इस हादसे की चर्चा के दौरान आंखें नम न हुई हों।
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मृतकों की पहचान अशोक कुमार (38) पुत्र जोगिंद्र पाल, प्रिंस पुत्र पूरन चंद और पवन कुमार पुत्र केवल कुमार निवासी सल्लि चनैला वार्ड.4 तहसील दरिणी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अशोक कुमार के घर में उसके बेटा बेटी के अलावा माता पिता और दो बहनें हैं। जबकि पवन के घर में माता पिता और भाई है। वहीं इस हादसे में जान गंवाने वाला प्रिंस अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसने हाल ही में जमा दो की परीक्षा पास की थी। प्रिंस के घर में माता पिता और एक बहन है।
हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया शाहपुर नागरिक अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और इस दुख की घड़ी में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने प्रशासन से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध करवाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
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पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हादसे के कारणों को लेकर पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर खराब मौसम, बारिश, सड़क पर फिसलन और पहाड़ी मोड़ को हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि हादसे की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी। पुलिस ने वाहन चलाने में लापरवाही और हादसे से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गोरखपुर में गगहा क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान नयश इंटरनेशनल स्कूल में 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। छात्र-छात्राओं ने अपने प्रिय शिक्षकों के सम्मान में सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें स्वागत गीत, भाषण, कविता पाठ और नृत्य शामिल थे। बच्चों ने शिक्षकों के समाज में योगदान और उनके महत्व पर अपने विचार रखे। सभी शिक्षकों को बच्चों द्वारा सम्मानित किया गया और कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस सफल आयोजन में विद्यालय के प्रबंधक श्री सत्यवीर सिंह का मार्गदर्शन सराहनीय रहा। विद्यालय के सभी शिक्षकगण श्री राजकुमार सर, सोनी तिवारी, खुशबू सिंह, नीतू, अर्चना, अंजली, मार्था, बचाओ, संदीप सर एवं अन्य समस्त शिक्षकगण का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा। सभी शिक्षकों ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में प्रबंधक महोदय ने सभी बच्चों को आशीर्वाद दिया और शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ दीं। पूरे विद्यालय परिसर में हर्ष और उल्लास का माहौल रहा.
भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने एक बार फिर पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना से हाथ नहीं मिलाया। शनिवार को विमेंस एशिया कप में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ टॉस जीता और बैटिंग चुनी। यह मैच दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। भारतीय कप्तान ने 14 जून को खेले गए विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के मैच में भी पाकिस्तानी कप्तान से हाथ नहीं मिला था। 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बीच हैंडशेक नहीं करने की नीति देखी जा रही है। मेंस एशिया कप से शुरू हुई नो-हैंडशेक पॉलिसी भारतीय खिलाड़ियों की पाकिस्तानियों से नो-हैंडशेक पॉलिसी पिछले साल मेंस एशिया कप से शुरू हुई थी। जब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम ने सलमान अली आगा से हाथ नहीं मिलाया था। हरमनप्रीत बतौर कप्तान 150वां मैच खेल रहीं हरमनप्रीत कौर 150वें मैच में कप्तानी कर रही हैं। वे टी-20 इंटरनेशनल में यह मुकाम हासिल करने वाली पहली महिला क्रिकेटर हैं। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 में बदलाव नहीं भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, प्रतिका रावल, भारती फुलमाली, रिचा घोष, दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, श्री चरणी, क्रांति गौड़, नंदनी शर्मा। पाकिस्तान: फातिमा सना (कप्तान), मुनीबा अली (विकेटकीपर), शवाल जुल्फिकार, गुल फिरोजा, आयशा जफर, सदफ शमास, ईमान फातिमा, उम्म-ए-हानी, तुबा हसन, नशरा संधू, सादिया इकबाल।
राम मंदिर के महासचिव गोविंद देव गिरी महाराज अयोध्या से रवाना हो गए हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 2 दिसंबर को होगी. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि राम मंदिर में रामलला के आरती पूजन में बदलाव किया गया है. अब से रामलला का आकर्षक श्रृंगार होगा, अंदर और बाहर दो समूह में अर्चक रामलला की आरती करेंगे. उन्होंने कहा कि कलात्मक आरती से रामलला को रिझाया जाएगा और अखंड श्री राम नाम का जाप शुरू होगा. इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि रोजाना पंच देवता यज्ञ किया जाएगा और साथ ही माता सीता के नाम पर अयोध्या में अन्न क्षेत्र भी विकसित किया जाएगा.
उन्होंने ट्रस्ट में शामिल हुए तीन नए सदस्यों को लेकर कहा कि दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव को न्यास मंडल में शामिल किया गया है. इसमें कोषाध्यक्ष का पद महेश भागचंदका को दिया गया है और महासचिव के रूप में सेवा करने का दायित्व न्यास के माध्यम से भगवान श्री राम ने मुझे सौंपा है. उन्होंने कहा कि यह दायित्व बहुत बड़ा है और मेरा विश्वास है कि उसे निर्वाह करने का बल भी भगवान स्वयं देंगे.
राम मंदिर में हुए जन्माष्टमी समारोह को किया याद
ट्रस्ट के महासचिव ने आगे कहा, ‘मुझे विश्वास है कि न्यास मंडल अब बहुत अच्छा काम करेगा. उसका शुभारंभ हम लोगों ने कल ही कर दिया है. कल आप लोगों ने देखा होगा, भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव था, जन्माष्टमी का उत्सव पहली बार झूले में भगवान को झुलाकर के मनाया गया और आरती का भी हम लोगों ने जो परिवर्तन किया है, वह भी लोगों को बहुत रास आ रहा है’.
अगले हफ्ते से काम शुरू करेंगे CEO जितेंद्र मिश्रा
उन्होंने ट्रस्ट के पहले सीईओ बने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को लेकर भी बताया कि उन्होंने शुक्रवार को अपना पदभार ग्रहण कर लिया है, वो अपने घर की व्यवस्था करके तुरंत 4-5 दिन में यहां पर आएंगे और अगले हफ्ते से उनका काम सुचारू रूप से नियमित रूप से चलता रहेगा और इसके कारण और भी हमारा काम सरल होता रहेगा.
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की नगरी गोकुल में शनिवार को सुबह दस बजे से नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही पूरे गोकुल में ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘गोकुल में है रही जय-जयकार, नंद घर लाला जायौ है’ के जयघोष गूंजते रहे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी की शोभायात्रा पर फूल बरसाकर स्वागत किया और उत्सव का आनंद लिया। यह आयोजन निरंतर जारी है। शनिवार सुबह करीब 10 बजे नंदभवन स्थित नंद किला मंदिर में सेवायत पुजारी मथुरा दास ने ठाकुरजी की आरती की। इसके बाद मंदिर परिसर से ठाकुरजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में नंद बाबा और मां यशोदा के रूप में सजे कलाकार डोले के साथ शामिल हुए। खुदाबक्श की शहनाई की मधुर धुनें वातावरण को भक्तिमय बना रही थीं। शोभायात्रा नंदभवन से निकलकर बीच चौक, रतन चौक, गोकुल नाथजी मंदिर, राजा ठाकुर मंदिर और दाई वाला कुआं होते हुए नंद चौक पहुंची। रास्ते भर गोकुलवासियों और श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी पर फूल बरसाकर स्वागत किया। इसके बाद शोभायात्रा रास चबूतरा पहुंची, जहां ठाकुरजी को विराजमान कर नंदोत्सव मनाया गया। नंदोत्सव में सेवायत पुजारी छनिया पंडित ने ठाकुरजी को झूला झुलाया। इसके बाद मंदिर के सेवायत पुजारियों ने परंपरा के अनुसार लाला की छीछी और उपहार बांटे। छीछी और उपहार पाने के लिए श्रद्धालुओं में काफी उत्साह दिखा। जैसे ही पुजारियों ने उपहार लुटाए, श्रद्धालु उन्हें पाने के लिए उमड़ पड़े। हर कोई नंदोत्सव की मस्ती में डूबा नजर आया। उत्सव के दौरान ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों पर श्रद्धालु जमकर नाचे। वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया था। कार्यक्रम के खत्म होने पर फिर से ठाकुरजी की आरती की गई और उन्हें मंदिर के लिए रवाना किया गया। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित, छनिया पुजारी, मैनेजर गिरधारी लाल भाटिया, लक्ष्मण शर्मा, मथुरा दास, विट्ठल पुजारी, पप्पू पुजारी, राममूर्ति पुजारी और राहुल चौहान सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने एक बार फिर पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना से हाथ नहीं मिलाया। शनिवार को विमेंस एशिया कप में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ टॉस जीता और बैटिंग चुनी। यह मैच दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। भारतीय कप्तान ने 14 जून को खेले गए विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के मैच में भी पाकिस्तानी कप्तान से हाथ नहीं मिला था। 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बीच हैंडशेक नहीं करने की नीति देखी जा रही है। पिछले एशिया कप से शुरू हुई नो-हैंडशेक पॉलिसी भारतीय खिलाड़ियों की पाकिस्तानियों से नो-हैंडशेक पॉलिसी पिछले साल मेंस एशिया कप से शुरू हुई थी। जब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम ने सलमान अली आगा से हाथ नहीं मिलाया था। हरमनप्रीत बतौर कप्तान 150वां मैच खेलेंगी हरमनप्रीत कौर 150वीं बार टी-20 इंटरनेशनल में बतौर कप्तान उतरेंगी। वे इस मुकाम तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर बनेंगी। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-11 भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, प्रतिका रावल, भारती फुलमाली, रिचा घोष, दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, श्री चरणी, क्रांति गौड़, नंदनी शर्मा। पाकिस्तान: फातिमा सना (कप्तान), मुनीबा अली (विकेटकीपर), शवाल जुल्फिकार, गुल फिरोजा, आयशा जफर, सदफ शमास, ईमान फातिमा, उम्म-ए-हानी, तुबा हसन, नशरा संधू, सादिया इकबाल।
हिमाचल: छोटे से गांव का रितेश भारतीय सेना में बना लेफ्टिनेंट, कंधे पर सितारे सजाते भावुक हुए माता-पिता
पिता को वर्दी में देख जागा देश सेवा का जुनून कड़ी मेहनत से पूरा किया बचपन का सपना
भवारना (कांगड़ा)। वीरभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश की मिट्टी में देश सेवा का जज्बा मानो पीढ़ियों से रचा-बसा है। गांवों से निकलने वाले कई युवा सीमित संसाधनों और तमाम चुनौतियों के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और जुनून के दम पर भारतीय सेना में जगह बनाकर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। इसी गौरवशाली परंपरा में कांगड़ा जिले के भवारना क्षेत्र के एक और युवा ने अपना नाम दर्ज करवाया है।
अटियाला दाई के 23 वर्षीय रितेश राणा ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने बचपन के सपने को साकार किया है, बल्कि अपने परिवार और पूरे क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया है। चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आयोजित पासिंग आउट परेड में रितेश ने भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। अब रितेश देश की सेवा का अपना नया सफर 16 मद्रास रेजिमेंट के साथ शुरू करेंगे।
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रितेश राणा का सेना में जाने का सपना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। बचपन से ही उनके मन में भारतीय सेना की वर्दी पहनने और देश की सेवा करने की इच्छा थी। इस सपने को मजबूत करने में उनके परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि की बड़ी भूमिका रही। रितेश के पिता विक्रम सिंह भारतीय सेना की 6 जैक राइफल्स में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पिता को लंबे समय तक देश की सेवा करते हुए देखकर रितेश ने भी तय कर लिया था कि वह एक दिन सेना की वर्दी पहनेंगे और अधिकारी बनकर देश की सेवा करेंगे।
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रितेश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मरूंह और ठाकुरद्वारा के निजी स्कूलों से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह महाराष्ट्र के पुणे पहुंचे। पुणे में उन्होंने विज्ञान विषय में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा हासिल करने के साथ-साथ उनके मन में सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य लगातार कायम रहा। शैक्षणिक उपलब्धियों और सैन्य सेवा के सपने को साथ लेकर रितेश ने कड़ी मेहनत की और आखिरकार वह मुकाम हासिल कर लिया जिसका सपना उन्होंने बचपन में देखा था।
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चेन्नई में आयोजित पासिंग आउट परेड रितेश के लिए ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण पल रहा। सैन्य प्रशिक्षण की कठिन प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब रितेश ने अधिकारी के रूप में कमीशन हासिल किया तो परिवार की वर्षों की उम्मीद और उनकी मेहनत एक उपलब्धि में बदल गई। रितेश के लेफ्टिनेंट बनने की खबर जैसे ही उनके पैतृक क्षेत्र में पहुंची, बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
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रितेश की सफलता में उनके पिता की सैन्य पृष्ठभूमि की झलक साफ दिखाई देती है। जिस वर्दी को उनके पिता ने वर्षों तक पहनकर देश की सेवा की, उसी वर्दी को अब उनका बेटा अधिकारी के रूप में पहनने जा रहा है। यह उपलब्धि परिवार के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि रितेश ने अपने पिता से प्रेरणा लेकर सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित किया और उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की। उनकी माता रजनी कुमारी गृहिणी हैं, जबकि बहन ममता राणा विवाहित हैं।
लेफ्टिनेंट बनने के बाद रितेश राणा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और गुरुजनों को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के बिना यह उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं था। उन्होंने अपने माता-पिता, बहन, स्वर्गीय दादा अमीन चंद, दादी सरस्वती देवी और गुरुजनों के योगदान को विशेष रूप से याद किया। रितेश के अनुसार, परिवार से मिला संस्कार और मार्गदर्शन ही उन्हें अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ाता रहा।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित एक प्राचीन मस्जिद को सुबह करीब 5 बजे गिराए जाने पर गहरा दुख और अफसोस जाहिर किया है. मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि इस घटना ने देश के सामने एक बार फिर एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है. क्या संविधान और कानून का पालन हर नागरिक और हर धर्म के लिए सचमुच एक समान है? अगर संविधान सभी को समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के समान संरक्षण का अधिकार देता है, तो इसके असल अमल में दोहरा मापदंड क्यों दिखता है?
मौलाना मदनी ने कहा कि सहारनपुर की घटना सिर्फ एक मस्जिद का मामला नहीं है, बल्कि यह संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका से जुड़ा हुआ एक अत्यंत संवेदनशील मामला है. उन्होंने कहा कि 1991 में जो पूजा स्थल अधिनियम लाया गया था, वह अभी मौजूद है, प्रशासन की यह कार्रवाई न केवल उस अधिनियम का उल्लंघन है बल्कि जो नया वक्फ कानून लाया गया है.
उसमें वक्फ बाई यूजर की धारा है, यह कार्य उसकी भी स्पष्ट अवहेलना है, और मस्जिद का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण है, जिसका नंबर 451 है. महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जमीन शुरू से ही याकूब खान और वहीद खान के नाम से है, इसके बावजूद कार्रवाई किस न्याय के अंतर्गत है?
विशेष समुदाय को ही बनाया जा रहा निशाना
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अवैध कब्जा और अतिक्रमण ही कार्रवाई का एकमात्र मापदंड है तो फिर यही मापदंड हर धर्म, हर वर्ग के लिए समान होना चाहिए. लेकिन इस तरह के बहानों और कारणों से एक विशेष समुदाय को ही निशाना बनाया जा रहा है. मौलाना मदनी ने यह सवाल भी किया कि अगर देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी जमीनों, सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और दूसरी जगहों पर वर्षों और दशकों से धार्मिक निर्माण मौजूद हैं.
तो क्या इन सभी निर्माणों के खिलाफ भी प्रशासन इसी जल्दबाजी, इसी सख्ती और इसी मापदंड से कार्रवाई कर रहा है? अगर ऐसा नहीं है तो फिर किसी एक धार्मिक स्थल के मामले में असाधारण सख्ती न्याय के सिद्धांत पर सवाल खड़ा करती है.
मस्जिद कमेटी का पक्ष भी महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल की मिल्कियत या जमीन से संबंधित कानूनी विवाद को अदालत में तय किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय से जारी धार्मिक उपयोग, ऐतिहासिक दस्तावेजों और जमीनी तथ्यों को भी कानून के दायरे में पूरी गंभीरता से देखा जाना चाहिए. इस संबंध में मस्जिद कमेटी का पक्ष भी महत्वपूर्ण है.
कमेटी ने अदालत में विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे कि मस्जिद का अस्तित्व कलेक्ट्रेट की वर्तमान इमारत से पहले का है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार कमेटी की ओर से 1911 से संबंधित दस्तावेज, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख भी अदालत के सामने रखे गए थे. लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया.
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में बुनियादी सवाल यह पैदा होता है कि अगर किसी स्थान पर एक सदी से अधिक समय तक बिना किसी रुकावट के नमाज अदा होती रही हो, पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग उसे मस्जिद के रूप में इस्तेमाल करते रहे हों और उसके प्राचीन होने से संबंधित दस्तावेजी दावे भी मौजूद हों तो इस पूरी ऐतिहासिक वास्तविकता को महज एक प्रशासनिक विवाद के रूप में देखना कहां तक उचित है?
देश किसी एक धर्म या किसी एक वर्ग का नहीं
मौलाना मदनी ने कहा यह देश किसी एक धर्म या किसी एक वर्ग का नहीं है. भारत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी धर्मों एवं आस्थाओं के लोगों का साझा वतन है. संविधान ने किसी को प्रथम श्रेणी और किसी को दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं बनाया है. फिर प्रशासन के रवैये से ऐसा एहसास क्यों पैदा होता है कि धार्मिक पहचान न्याय के मापदंड को प्रभावित कर रही है?
सिर्फ समान न्याय मांग
उन्होंने कहा कि हम सरकार से कोई विशेष रियायत नहीं मांग रहे हैं, हम सिर्फ समान न्याय मांग रहे हैं. हमारा सवाल बिल्कुल सीधा है, जो कानून मस्जिद के लिए है, वही कानून हर धार्मिक स्थल के लिए क्यों नहीं है? जो मापदंड एक मुसलमान के लिए है, वही दूसरे नागरिक के लिए क्यों नहीं है? अगर संविधान और कानून सबके लिए हैं तो उसका संरक्षण और लागू करने में भी सबके लिए समान होना चाहिए.
हिमाचल के डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री के मुख्य सुरक्षा अधिकारी DSP बिन्नी मिन्हास की बोलेरो गाड़ी का टायर फट गया। इससे गाड़ी अनियंत्रित होकर हरोली-रामपुर पुल के पास खेतों में जा गिरी। इस हादसे में बिन्नी मिन्हास बाल-बाल बच गए। उन्हें इलाज के लिए रीजनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। यह घटना शनिवार को हुई, जब डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री हरोली विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। डीएसपी बिन्नी मिन्हास की गाड़ी उनके काफिले में शामिल थी। हरोली-रामपुर पुल के पास अचानक टायर फटने से गाड़ी खेतों में जा गिरी। इस हादसे में बिन्नी मिन्हास सुरक्षित रहे। गाड़ी के चालक को कोई चोट नहीं आई है। हादसे की खबर मिलते ही डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री अपना दौरा बीच में छोड़कर रीजनल अस्पताल ऊना पहुंचे। उन्होंने बिन्नी मिन्हास का हालचाल पूछा और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। डॉक्टरों ने उनका सीटी स्कैन और अन्य जरूरी जांचें कीं। डॉक्टरों ने बताया कि बिन्नी मिन्हास को कोई गंभीर चोट नहीं आई है। इसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। एक घंटे तक रीजनल अस्पताल में रहे डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री करीब एक घंटे तक रीजनल अस्पताल में मौजूद रहे। वह लगातार डॉक्टरों से बिन्नी मिन्हास के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेते रहे। अपने सुरक्षा अधिकारी की जांच पूरी होने तक डिप्टी सीएम अस्पताल में ही रुके रहे।