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  • हिमाचल: गांव की बेटी मुस्कान ने राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया नाम, AIIMS परीक्षा में हासिल की 87वीं रैंक

    मुस्कान की सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, लगन और पढ़ाई के प्रति समर्पण रहा। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रवेश परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर यह साबित किया कि अगर मेहनत और हौसला हो तो गांव से निकलकर भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।
  • 6 दिन की बच्ची की मां ने की आत्महत्या:प्रयागराज में पति हिरासत में, एसीपी ने मौके का किया निरीक्षण

    प्रयागराज के कोरांव थाना क्षेत्र की ग्राम सभा अल्हवा में छह दिन की बच्ची की मां ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पुलिस ने मृतका के पति को हिरासत में लिया है। मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। घटना देर रात करीब 12 बजे की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, महिला ने कमरे का दरवाजा बंद कर साड़ी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी होने पर परिजनों ने दरवाजा तोड़कर उसे नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। परिजन उसे अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका की शादी पिछले साल जून में हुई थी। वह मध्य प्रदेश के सोहागी थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली थी। 21 अगस्त को नैनी के एक अस्पताल में ऑपरेशन से उसने बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची के जन्म के बाद रक्षाबंधन पर छठी का कार्यक्रम भी निर्धारित था। परिजनों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच अलग रहने को लेकर विवाद चल रहा था। बताया गया कि महिला पति से अलग रहने की बात कह रही थी, जबकि पति अपनी विधवा मां को अकेला छोड़ने के पक्ष में नहीं था। इसी बात को लेकर रात में विवाद होने की बात सामने आई है। हालांकि, आत्महत्या के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका के भाई ने कोरांव थाने में ससुराल पक्ष के खिलाफ तहरीर दी है। शिकायत के आधार पर पति को हिरासत में लिया गया है। कोरांव इंस्पेक्टर ने मायके पक्ष की मौजूदगी में घटनास्थल की जांच की। मेजा एसीपी ने भी मौके का निरीक्षण किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई और विवेचना की जाएगी। दहेज उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।
  • मेंटल हेल्थ- 25 साल बाद पेरेंट्स के घर लौटी हूं:यहां मन नहीं लग रहा, अपनी अकेली जिंदगी याद आती है, क्या मैं स्वार्थी हूं

    सवाल- मेरी उम्र 45 साल है। पिछले 25 सालों से मैं घर से दूर रह रही थी। पहले पढ़ाई और फिर जॉब के लिए। एक साल पहले ही मैं अपने होमटाउन में पेरेंट्स के घर में शिफ्ट हुई हूं। लेकिन जैसा मैंने सोचा था, वैसा बिल्कुल फील नहीं हो रहा। मुझे लगा था कि इतने साल बाद घर लौटना अच्छा लगेगा। ज्यादा सुकून और खुशी होगी। लेकिन इसका ठीक उल्टा हुआ है। मुझे ज्यादा तनाव और अकेलापन महसूस होने लगा है। यहां मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता। मुझे अपनी अकेली जिंदगी की याद आती है। बेंगलुरू में मेरा घर और मेरी सिंगल लाइफ। ये बात मैं अपने पेरेंट्स से कैसे कहूं कि मुझे इस घर में रहना अच्छा नहीं लग रहा। मैं अपनी मेंटल हेल्थ को कैसे ठीक रखूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी भावनाएं गलत नहीं हैं। 25 साल तक घर से दूर रहना बहुत लंबा समय होता है। इस दौरान आपने सिर्फ पढ़ाई और नौकरी नहीं की, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी अपने तरीके से जीना सीखा है। आपने तय किया होगा कि कब उठना है, कब खाना है, किससे मिलना है, कब घर से बाहर जाना है, छुट्टी कैसे बितानी है और कितना समय अकेले रहना है। अब एक साल से आप फिर उसी घर में हैं, जहां कभी आपकी जिंदगी की शुरुआत हुई थी। लेकिन इस बीच आप खुद बहुत बदल चुकी हैं। इसलिए घर वही होने के बावजूद आपका अनुभव पहले जैसा नहीं है। यह जरूरी नहीं कि आपका अपने माता-पिता से प्यार कम हो गया है। हो सकता है कि आपको सिर्फ अपनी पुरानी स्वतंत्र जिंदगी की कमी महसूस हो रही हो। घर लौटने की खुशी की जगह तनाव क्यों? लंबे समय तक अकेले रहने के बाद जब कोई व्यक्ति माता-पिता के साथ वापस रहने लगता है तो उसे अपनी आजादी कम होती हुई महसूस हो सकती है। माता-पिता का ये पूछना कि– ये उनका प्यार और चिंता का तरीका हो सकता है। लेकिन इतने साल अपने फैसले खुद लेने के बाद यही बातें आपको रोक-टोक जैसी लग सकती हैं। इसी तरह परिवार के साथ खाना, हर दिन बातचीत करना और अपनी दिनचर्या में दूसरों को शामिल करना माता-पिता के लिए सामान्य हो सकता है। लेकिन आपको अपने अकेलेपन और पर्सनल स्पेस की जरूरत ज्यादा महसूस हो सकती है। इसमें किसी एक को गलत ठहराने की जरूरत नहीं है। दोनों की जरूरतें अलग हो सकती हैं। परेशानी की असल वजह क्या है? पहले यह समझें कि आपको वास्तव में परेशानी किस बात से है, जैसेकि– इन सवालों के जवाब आपको असली समस्या को समझने में मदद करेंगे। माता-पिता से बात कैसे करें? सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता से यह न कहें कि मुझे आपके साथ रहना अच्छा नहीं लगता। ऐसा सुनकर उन्हें लग सकता है कि आप उनके प्यार या घर को अस्वीकार कर रही हैं। इसके बजाय अपनी परेशानी को अपनी जरूरत के रूप में बताएं। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– पहले चिट्‌ठी लिखना भी अच्छा विकल्प अगर आपको लगता है कि आमने-सामने बात करते समय आप अपनी बात ठीक से नहीं कह पाएंगी, तो पहले माता-पिता को एक पत्र भी लिख सकती हैं। यहां मैं आपके लिए एक काल्पनिक खत लिख रहा हूं। आप इसमें अपने मन की बातें लिख सकती हैं। प्यारे मम्मी-पापा, मैं आप दोनों से एक जरूरी बात कहना चाहती हूं। शायद सामने बैठकर मैं इसे ठीक से न कह पाऊं। इसलिए पत्र लिख रही हूं। सबसे पहले मैं आपको बताना चाहती हूं कि इतने साल बाद घर लौटने पर आपने जिस तरह मुझे अपनाया, उसके लिए मैं बहुत आभारी हूं। मुझे पता है कि मेरे लिए आपके मन में बहुत प्यार है और आप चाहते हैं कि मैं आपके साथ रहूं। लेकिन पिछले 25 सालों में मेरी जिंदगी बहुत बदल गई है। मैं लंबे समय तक अकेले रही हूं। मुझे अपने समय, काम, फैसले और निजी जगह को अपने तरीके से संभालने की आदत हो गई है। घर लौटने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं अपनी उस स्वतंत्र जिंदगी को बहुत याद कर रही हूं। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं आपसे दूर होना चाहती हूं। मैं सिर्फ यह समझने की कोशिश कर रही हूं कि आपके साथ रहते हुए अपनी स्वतंत्रता कैसे बनाए रखूं। मैं चाहती हूं कि हम मिलकर कुछ बातें तय करें। जैसे हम कितना समय साथ बिताएं, मुझे कब अपने काम या अकेले रहने का समय चाहिए और किन निजी फैसलों में मुझे अपनी आजादी बनाए रखने की जरूरत है। मैं यह भी समझती हूं कि मेरे घर लौटने के बाद आपको भी अपनी दिनचर्या में बदलाव करना पड़ा होगा। इसलिए मैं सिर्फ अपनी बात नहीं रखना चाहती। मैं आपकी परेशानी भी समझना चाहती हूं। मैं घर छोड़कर आपसे दूर नहीं जाना चाहती। मैं ऐसा रास्ता ढूंढना चाहती हूं, जिसमें हमारा रिश्ता भी अच्छा रहे और मैं अपनी स्वतंत्र पहचान भी बनाए रखूं। प्यार के साथ। घर में तय करें कुछ स्पष्ट सीमाएं माता-पिता के साथ रहने का मतलब यह नहीं है कि आपकी सारी स्वतंत्रता खत्म हो जाए। आप मिलकर कुछ ऐसी बातें तय कर सकते हैं, जिनसे दोनों पक्ष सहज रहें। मसलन– लेकिन सीमाएं तय करते समय सिर्फ अपनी सुविधा के बारे में न सोचें। माता-पिता की भी अपनी दिनचर्या है। 25 सालों में उन्होंने भी अपने घर को अपने तरीके से चलाया होगा। इसलिए उनसे भी यह पूछें— “मेरे यहां रहने से आपको किन बातों से परेशानी हो रही है?” इस सवाल से बातचीत एकतरफा नहीं रहेगी। दोनों पक्ष अपनी जरूरतें समझा पाएंगे। अपनी मेंटल के लिए क्या करें? सबसे पहले खुद को दोष देना बंद करिए। यह मत सोचिए कि “मुझे तो खुश होना चाहिए, फिर मैं दुखी क्यों हूं?” भावनाएं इस तरह काम नहीं करतीं। अपनी पुरानी जिंदगी की वे चीजें वापस अपनी दिनचर्या में शामिल करें, जिनसे आपको अच्छा महसूस होता था। दोस्तों से मिलें, अकेले बाहर जाएं, टहलें, एक्सरसाइज करें, पढ़ें या अपने किसी पुराने शौक के लिए समय निकालें। सबसे जरूरी है कि आपकी पूरी जिंदगी सिर्फ घर और माता-पिता के इर्द-गिर्द न सिमट जाए। आपकी अपनी सामाजिक जिंदगी, काम, दोस्त, रुचियां और निजी समय भी जरूरी है। चार से छह सप्ताह तक कुछ बदलाव करके देखिए। फिर खुद से पूछिए– अगर बदलावों के बाद भी लगातार उदासी बनी रहे, किसी काम में मन न लगे, नींद या भूख में बड़ा बदलाव आए, बहुत ज्यादा चिंता हो, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें या जीवन को लेकर निराशा बढ़ने लगे, तो काउंसिलर से बात करना सही रहेगा। अंतिम बात आखिर में एक बात याद रखिए, माता-पिता से प्यार करने और उनके साथ न रह पाने की इच्छा, दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं। आपको अपने माता-पिता और अपनी स्वतंत्र जिंदगी में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। शायद आपको घर छोड़ने या खुद को बदलने से पहले एक नया तरीका खोजने की जरूरत है— माता-पिता के साथ एक वयस्क बेटी की तरह रहना, न कि 25 साल पहले वाली बेटी की तरह। इससे रिश्ता भी बचेगा, अपनापन भी बना रहेगा और आपकी स्वतंत्र जिंदगी भी रहेगी।
  • सड़क नहीं, डेढ़ किमी पैदल रास्ता बनी मजबूरी!

    सड़क नहीं, डेढ़ किमी पैदल रास्ता बनी मजबूरी!
  • हिमाचल के सेब उत्पादक CA कंपनियों से नाराज:खरीद के रेट घोषित नहीं करने पर जताया विरोध; कहा-पारदर्शी खरीद की दरें सार्वजनिक करें

    हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने अदानी, बीजा, देवभूमि और इंद्रप्रस्थ सहित अन्य सीए कंपनियों द्वारा सेब खरीद के रेट समय पर स्पष्ट रूप से घोषित न किए जाने पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। संघ ने सरकार से मांग की है कि वह इन कंपनियों से पारदर्शी और लिखित खरीद दरें सार्वजनिक करवाए ताकि बागवानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर और सचिव पूर्ण ठाकुर ने बताया कि कंपनियों की ओर से रेट को लेकर अस्पष्टता के कारण प्रदेश के बागवान असमंजस में हैं। यह स्थिति बाजार पर दबाव बढ़ा रही है और भ्रम पैदा कर रही है। संघ के अनुसार, बायल में देवभूमि द्वारा अनौपचारिक रूप से लगभग 105 रुपये प्रति किलोग्राम का रेट खोले जाने की बात सामने आई है। वहीं, बागवानों के बीच यह चर्चा है कि यदि अदानी या बीजा इससे अधिक रेट घोषित करती हैं, तो देवभूमि बाद में अपना रेट बढ़ा सकती है। इसके विपरीत, अपेक्षाकृत छोटी कंपनी बिगबास्केट द्वारा 118 रुपये प्रति किलोग्राम का रेट घोषित किए जाने की जानकारी मिली है। बागवानों को नुकसान पहुंचा रही कंपनियां संघ ने सवाल उठाया है कि जब एक छोटी कंपनी प्रतिस्पर्धी रेट दे रही है, तो बड़ी सीए कंपनियां स्पष्ट और प्रतिस्पर्धी दरें क्यों जारी नहीं कर रही हैं। संघ का आरोप है कि कम शुरुआती रेट रखकर एक-दूसरे की दरों का इंतजार करने की यह नीति सीधे तौर पर बागवानों को नुकसान पहुंचा सकती है। बागवानी विभाग से हस्तक्षेप की मांग संघ ने सरकार और बागवानी विभाग से इस मामले की तत्काल जांच की मांग की है। साथ ही, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी से हस्तक्षेप कर सीए कंपनियों से पारदर्शी एवं लिखित खरीद दरें सार्वजनिक करवाने का आग्रह किया है।
  • लखनऊ में सपा नेता को राखी गिफ्ट में मिली चीनी:महंगी चीनी का किया विरोध , पूजा बोली – महंगाई ने त्योहारों कि मिठास को कम किया

    लखनऊ में रक्षाबंधन के मौके पर समाजवादी पार्टी ने बढ़ती चीनी की कीमतों के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। सपा नेता प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी बांधी और बदले में उपहार के तौर पर 5 किलो चीनी ली। ‘महंगी ने मिठास को कम किया’ पूजा शुक्ला ने इस मौके पर बढ़ती महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महंगाई ने मिडिल क्लास और गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है। चीनी के लगातार बढ़ते दामों का असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। चीनी त्योहारों में मिठास लाती है, लेकिन अब महंगाई ने त्योहारों कि मिठास को कड़वाहट में बदल दिया है। ‘किचन का बजट बिगड़ा’ पूजा शुक्ला ने कहा कि चीनी हमारे जीवन का अहम हिस्सा है और त्योहारों में मिठास लाने का काम करती है. लेकिन जिस तरह से चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, उससे आम लोगों के किचन का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन उनके भाई ने उन्हें 5 किलो चीनी भेंट की महंगी होती चीनी के खिलाफ ये उनका सांकेतिक विरोध था। रसोई के सभी सामान हुए महंगे सपा प्रवक्ता ने उत्तर प्रदेश और देशभर के भाइयों से अपील की कि सरकार को आईना दिखाने के लिए रक्षाबंधन पर अपनी बहनों को चीनी उपहार में दें। पूजा शुक्ला ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नाकामी और गलत नीतियों की वजह से चीनी महंगी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पहले गैस सिलेंडर की मार से जूझ रहा था अब चीनी से परेशान है। इसके अलावा आटा, दाल, चावल और सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
  • हिमाचल में बारिश का असर: 68 सड़कें बंद, 16 बिजली ट्रांसफार्मर ठप; मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित

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  • बिलासपुर में 2 बसों से 158 ग्राम चिट्टा बरामद:2 मामलों में नशे सहित 4 आरोपी गिरफ्तार; सभी पंजाब के रहने वाले

    बिलासपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। विशेष जांच दल (एसडीटी) ने 2 अलग-अलग मामलों में कुल 158 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह जानकारी एसपी अभिषेक धीमान ने दी। पहला मामला पुलिस थाना घुमारवीं क्षेत्र का है। एसडीटी ने बालोह-मल्यावर लिंक रोड पर नाकाबंदी के दौरान एक वोल्वो बस की तलाशी ली। इस दौरान बस में सवार रणजीत सिंह उर्फ राणा (40) और अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श (22) के कब्जे से 104 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद हुई। दोनों आरोपी पंजाब के तरनतारन जिले के निवासी हैं। पुलिस थाना घुमारवीं में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 21 और 29 के तहत एफआईआर नंबर 172/2026 दर्ज की गई है। दूसरी कार्रवाई पुलिस थाना स्वारघाट क्षेत्र में कैचीमोड़ फोरलेन फ्लाईओवर, टनल नंबर-1 के पास की गई। किरतपुर से मंडी-भराड़ी की ओर जा रही एक अन्य वोल्वो बस की जांच के दौरान दो यात्रियों, जगजीत सिंह (21) और सुखविंद्र सिंह (48) के पास से 54 ग्राम चिट्टा/हेरोइन मिली। ये दोनों भी पंजाब के तरनतारन जिले के डल्ल गांव के रहने वाले हैं। पुलिस ने एफआईआर नंबर 63/2026 दर्ज कर एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 21 और 29 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों से पूछताछ कर रही पुलिस पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस नशीले पदार्थ की आपूर्ति के स्रोत और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रही है। पुलिस ने बताया कि पिछले दो महीनों में जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत 67 मामले दर्ज किए गए हैं और 146 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस अवधि में लगभग 1.2 किलोग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद की गई है। छह महीनों में लगभग 300 ग्राम चिट्टा पकड़ा वहीं, वर्ष के पहले छह महीनों में लगभग 300 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था। पुलिस ने अन्य राज्यों से जुड़े 15 प्रमुख सप्लायरों को भी गिरफ्तार किया है। एसपी अभिषेक धीमान ने कहा कि पुलिस नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • हिमाचल : शिमला में टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल खत्म, नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने जूस पिलाकर कराया धरना समाप्त

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    शिमला के चौड़ा मैदान में परमिट बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल खत्म हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष ने धरनास्थल पर पहुंचकर टैक्सी ऑपरेटरों से बातचीत की और उन्हें जूस पिलाकर हड़ताल समाप्त करवाई।


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    टैक्सी ऑपरेटर लंबे समय से परमिट बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इसी मांग को लेकर उन्होंने चौड़ा मैदान में धरना शुरू किया था। आंदोलन के दौरान ऑपरेटरों ने अपनी मांगों को सरकार के समक्ष उठाया।

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    धरनास्थल पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष ने टैक्सी ऑपरेटरों से बातचीत की। उन्होंने उनकी मांगों को सुना और आंदोलन समाप्त करने की अपील की। इसके बाद टैक्सी ऑपरेटरों ने हड़ताल खत्म करने पर सहमति जताई। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष ने टैक्सी ऑपरेटरों को जूस पिलाकर उनका अनशन/धरना समाप्त करवाया। इसके साथ ही चौड़ा मैदान में चल रहा उनका आंदोलन फिलहाल खत्म हो गया।

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  • बरेली में कैसे बेकाबू हो गई महिलाओं की भीड़? एक की मौत, कई घायल… मेयर को राखी बांधने आईं थीं

    Bareilly News: बरेली क्लब में मेयर उमेश गौतम की ओर से आयोजित सामूहिक रक्षाबंधन कार्यक्रम में गुरुवार को भारी भीड़ के चलते अफरा-तफरी मच गई. गर्मी और उमस के बीच धक्का-मुक्की में कई महिलाएं बेहोश और घायल हो गईं. एक महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मृतका की पहचान मधु सिंह के रूप में हुई है. परिजनों ने पुलिस कार्रवाई से इनकार किया है.

    20 हजार से ज्यादा महिलाएं पहुंंचीं

    कैंट थाना क्षेत्र स्थित बरेली क्लब में बीजेपी मेयर डॉ. उमेश गौतम की ओर से सामूहिक रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं को आमंत्रित किया गया था. आयोजकों की ओर से करीब 20 हजार से अधिक महिलाओं के पहुंचने का दावा किया गया. सुबह करीब 10 बजे से ही महिलाओं का कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना शुरू हो गया था. करीब 11 बजे तक मैदान में भारी भीड़ जमा हो गई. भीषण गर्मी और उमस के बीच लगातार बढ़ती भीड़ के कारण कुछ देर बाद स्थिति बिगड़ने लगी.

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    धक्का-मुक्की में कई महिलाएं बेहोश

    कार्यक्रम में महिलाओं से राखी बंधवाने के लिए पहले से कूपन बांटे गए थे. बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बच्चों और बुजुर्ग परिजनों के साथ पहुंची थीं. भीड़ बढ़ने के बाद मैदान में जगह कम पड़ गई और महिलाएं बैरिकेडिंग पार कर मंच की ओर जाने लगीं. इसी दौरान धक्का-मुक्की शुरू हो गई. कई महिलाएं गिर गईं. कुछ गर्मी व भीड़ के दबाव के कारण बेहोश हो गईं. मौके पर मौजूद एंबुलेंस की मदद से बेहोश और घायल महिलाओं को कार्यक्रम स्थल से बाहर ले जाया गया.

    महिला की हालत बिगड़ी, अस्पताल में मौत

    कार्यक्रम के दौरान एक महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई. उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मृतका की पहचान मधु सिंह के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि गर्मी और उमस के कारण मधु सिंह की हालत बिगड़ी थी. हालांकि, उनकी मौत की पूरी वजह पोस्टमार्टम या चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. पुलिस कार्रवाई को लेकर परिजनों ने फिलहाल इनकार किया है.

    करीब पांच मिनट तक भीड़ में दब गई थी बच्ची

    कार्यक्रम में मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने भीड़ की स्थिति को लेकर अपनी आपबीती बताई. उनका कहना था कि भीड़ में एक बच्ची दब गई थी. करीब पांच मिनट तक दबे रहने के बाद उसे बाहर निकाला गया. इस दौरान बच्ची के हाथ-पैर में चोट आई. एक अन्य महिला ने बताया कि भीड़ के बीच धक्का-मुक्की इतनी ज्यादा थी कि लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे. उसका कहना था कि महिलाओं के साथ बच्चों को भी काफी परेशानी हुई और कई लोग घायल हो गए.

    जान बचाकर बाहर निकलना पड़ा

    भुता क्षेत्र से कार्यक्रम में पहुंची एक महिला ने बताया कि जब वह मंच की तरफ जाने की कोशिश कर रही थी तो भीड़ में किसी ने उनका हाथ खींच लिया. धक्का-मुक्की के दौरान उनकी चप्पल और पैरों में पहनी बिछिया तक निकलकर गिर गई. महिला के मुताबिक, भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि उन्हें किसी तरह अपनी जान बचाकर कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलना पड़ा.

    वहीं, बच्चे को गोद में लेकर पहुंची एक महिला ने बताया कि पीछे से भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया. वह अपने बच्चे को सीने से लगाए खड़ी थी. दबाव बढ़ने पर बच्चा हाथ से नीचे गिरते-गिरते बचा. उनकी सास को भी भीड़ ने धक्का दे दिया, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं.

    मंच पर बढ़ी भीड़, बेटे को गेट पर भेजा

    हालात बिगड़ते देख मेयर डॉ. उमेश गौतम ने भीड़ को अलग-अलग जगह बांटने की कोशिश की. बताया गया कि उन्होंने अपने बेटे पार्थ गौतम को मुख्य गेट की ओर भेजा, ताकि वहां भी महिलाओं से राखी बंधवाई जा सके. इसके बावजूद मंच के आसपास भीड़ का दबाव कम नहीं हुआ. कई महिलाएं मंच की तरफ बढ़ने लगीं. इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में आयोजकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी.

    बच्चे भीड़ में बिछड़े, लगातार हुआ अनाउंसमेंट

    भारी भीड़ के बीच कुछ बच्चों के अपने परिजनों से बिछड़ने की बात भी सामने आई. कार्यक्रम स्थल पर लाउडस्पीकर के जरिए लगातार बच्चों और उनके परिजनों के बारे में अनाउंसमेंट कराया गया. मैदान में कई जगह टूटी चूड़ियां, चप्पल और अन्य सामान भी बिखरा नजर आया. इससे कार्यक्रम के दौरान बने हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है.

    उपहार बांटने के दौरान भी बढ़ा दबाव

    कार्यक्रम में महिलाओं को उपहार भी बांटे जा रहे थे. उपहार लेने के दौरान भी भीड़ का दबाव और बढ़ गया. महिलाओं में उपहार लेने की होड़ के बीच कई जगह धक्का-मुक्की हुई. कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि इसी दौरान उनके मोबाइल फोन, पर्स में रखी नकदी और गले की चेन चोरी हो गई. हालांकि, इन आरोपों की पुलिस की ओर से अभी पुष्टि नहीं की गई है.

    कार्यक्रम की व्यवस्था पर उठे सवाल

    कार्यक्रम में शामिल नीलिमा समेत कई महिलाओं ने आयोजन की व्यवस्था पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को बुलाया गया था तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए थे. महिलाओं ने गर्मी और उमस के बीच पानी, सुरक्षित रास्ते और भीड़ नियंत्रण की बेहतर व्यवस्था नहीं होने पर नाराजगी जताई. उनका कहना था कि त्योहार के कार्यक्रम में परिवार और बच्चों के साथ पहुंचना मुश्किल हो गया.

    घटना के बाद कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. फिलहाल घायल महिलाओं को किस-किस अस्पताल में भर्ती कराया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. वहीं, कार्यक्रम में अव्यवस्था और एक महिला की मौत के मामले में मेयर डॉ. उमेश गौतम की ओर से भी बयान नहीं आया है.