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  • हिमाचल: स्मार्ट मीटर से इनकार किया तो कट गई बिजली! विद्युत बोर्ड की कार्रवाई पर भड़के लोग

    हिमाचल: स्मार्ट मीटर से इनकार किया तो कट गई बिजली! विद्युत बोर्ड की कार्रवाई पर भड़के लोग

    लोगों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच कर की शिकायत; आंदोलन की दी चेतावनी

    हमीरपुर।  हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद अब सड़क से पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। हमीरपुर शहर के गौड़ा क्षेत्र में कुछ उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार क्या किया, उनके बिजली कनेक्शन काट दिए गए। बिजली जैसी जरूरी सुविधा बंद होने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। नाराज उपभोक्ता उपभोक्ता कल्याण मंच के साथ पुलिस अधीक्षक हमीरपुर के कार्यालय पहुंचे और विद्युत बोर्ड तथा स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।

    गौड़ा क्षेत्र के उपभोक्ताओं का आरोप है कि वे अपने घरों में लगे पुराने बिजली मीटरों को ही जारी रखना चाहते हैं और स्मार्ट मीटर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने के बाद उन्हें पहले नोटिस दिए गए और इसके बाद बिजली आपूर्ति ही काट दी गई।

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    उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली बोर्ड और स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी उन पर स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए दबाव बना रहे हैं। इतना ही नहीं, लोगों ने कर्मचारियों पर डराने और धमकाने के भी आरोप लगाए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली कनेक्शन काटकर उन पर अपनी बात मनवाने का दबाव बनाया जा रहा है।

    उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके पुराने मीटर सही तरीके से काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी इच्छा के खिलाफ नया मीटर लगाने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है, यह समझ से परे है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि उपभोक्ता स्मार्ट मीटर को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा रहे हैं तो उनकी बिजली आपूर्ति काटना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों को रोजमर्रा के कामकाज में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और जिम्मेदार अधिकारियों व कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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    गौड़ा निवासी प्रकाश गौतम ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार करने के कारण क्षेत्र में चार बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं। उनका कहना है कि कनेक्शन कटने के बाद प्रभावित परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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    उन्होंने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत देकर बिजली कनेक्शन काटने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे किसी विवाद के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपनी आपत्ति के बावजूद स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव बनाए जाने को स्वीकार नहीं करेंगे।

    उपभोक्ता कल्याण मंच के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि हमीरपुर शहर के एक अन्य क्षेत्र में भी स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध करने वाले कुछ उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे गए थे। उन्होंने दावा किया कि एक परिवार को करीब एक महीने तक बिजली के बिना रहना पड़ा और बाद में अदालत के हस्तक्षेप के बाद उनकी बिजली आपूर्ति बहाल हुई।

    सुरेश ठाकुर का कहना है कि उपभोक्ता अपने पुराने मीटरों को ही रखना चाहते हैं। उनके अनुसार, सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास और विरोध करने पर बिजली काटना उपभोक्ताओं की समस्या को और गंभीर बना रहा है।

    गौड़ा निवासी पुरुषोत्तम प्रकाश ने स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पुराने मीटर ठीक तरीके से चल रहे हैं तो उन्हें हटाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं की सहमति और उनकी चिंताओं को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। उपभोक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे स्मार्ट मीटर को लेकर अपनी आपत्तियों का समाधान चाहते हैं और जबरन मीटर लगाए जाने का विरोध करेंगे।

    पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत देने के बाद उपभोक्ता कल्याण मंच ने चेतावनी दी है कि यदि काटे गए बिजली कनेक्शन जल्द बहाल नहीं किए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बिजली बोर्ड के अधिकारियों का घेराव किया जाएगा और कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है।

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    हमीरपुर में स्मार्ट मीटर को लेकर सामने आया यह विवाद अब केवल कुछ उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच का मामला नहीं रह गया है। उपभोक्ता कल्याण मंच के हस्तक्षेप के बाद मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच चुका है। एक तरफ स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर काम आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ उपभोक्ता पुराने मीटरों को बदलने का विरोध कर रहे हैं।

  • देवदत्त पडिक्कल की पीठ पर छपा नाम और जर्सी नंंबर:लगातार 244 ओवर फील्डिंग करने का नतीजा; 127 ओवर तक बैटिंग भी की

    भारत ने नंबर-3 टेस्ट बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल की पीठ पर उनका नाम और जर्सी नंबर छप गया है। कोलंबो टेस्ट में फॉलोऑन मिलने के बाद श्रीलंका ने लगातार 2 पारियों में बैटिंग की। इसकी वजह से भारतीय खिलाड़ी 243.4 ओवर तक फील्डिंग करते रहे। इससे पहले पडिक्कल ने पहली पारी में 127 ओवर तक बल्लेबाजी की। वे 11वें ओवर में बल्लेबाजी के लिए उतरे और 138वें ओवर में भारतीय पारी घोषित होने तक नाबाद रहे। कोलंबो में दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहा था। भारत ने श्रीलंका से 2 मैचों की टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती। पडिक्कल ने लिखा- सूरज ने टैटू दे दिया पडिक्कल ने इंस्टाग्राम पर इसकी तस्वीर शेयर की। उन्होंने पोस्ट में सीरीज की कुछ और तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा- सीरीज में मिले वसर के लिए बेहद आभारी हूं। आगे और बेहतर करने की भूख है। सीरीज से काफी कुछ सीखा। इसके बाद उन्होंने लिखा कि सूरज की धूप ने मुझे एक टैटू दे दिया है। पडिक्कल ने सीरीज में 2 शतक लगाए पडिक्कल ने सीरीज की तीन पारियों में 2 शतक के साथ 328 रन बनाए। उन्होंने 167, 44 और 117 रन की पारियां खेली। उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का चुना गया। पडिक्कल ने अपने करियर में चार टेस्ट मैच खेले है। इसकी छह पारियों में 418 रन उनके नाम हैं। उनका औसत 69.66 रहा है। उन्होंने 2 शतक और 1 अर्धशतक लगाए हैं। पंत ने कंधे की चोट की तस्वीर शेयर की कोलंबो टेस्ट के दौरान ऋषभ पंत के दाएं कंधे पर चोट लगी थी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर इसकी तस्वीर शेयर करते हुए इसे यादगार निशानी बताया। चोट के कारण पंत कई घंटों तक बेंच पर बैठे रहे। उनकी जगह ध्रुव जुरेल ने विकेटकीपिंग की। पंत ने तीन पारियों में 56 की औसत से 168 रन बनाए। उन्होंने 2 अर्धशतक लगाए। कोलंबो टेस्ट मैच की खबर पढ़ें… श्रीलंका ने भारत को नहीं जीतने दिया दूसरा टेस्ट:फॉलोऑन खेलने के बावजूद मैच ड्रॉ कराया, सोनल दिनूषा का दोनों पारियों में शतक श्रीलंका ने फॉलोऑन खेलने के बावजूद भारत के खिलाफ दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ करा लिया है। इस तरह भारत ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज 1-0 से जीत ली है। भारत ने गॉल में हुआ पहला टेस्ट मैच 165 रन से जीता था। पूरी खबर पढ़ें… —————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… एशियाड में क्रिकेट की B टीमें भेज सकता है भारत:जापान में सुविधाओं से BCCI नाराज; होटल के कमरे छोटे, स्टेडियम से 20km दूर भारत जापान में होने वाले एशियन गेम्स में क्रिकेट की ‘B टीम’ भेज सकता है। बोर्ड के सूत्रों के अनुसार BCCI जापान में मिलने वाली सुविधाओं से संतुष्ट नहीं है। एशियन गेम्स में क्रिकेट के मुकाबले 17 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच खेले जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
  • सुक्खू सरकार ने बदल दिया हिमकेयर योजना में उपचार के भुगतान का गणित, आदेश जारी; जानें नए नियम

    सुक्खू सरकार ने बदल दिया हिमकेयर योजना में उपचार के भुगतान का गणित, आदेश जारी; जानें नए नियम

    अब वास्तविक खर्च या पैकेज रेट में जो कम होगा, उसका ही मिलेगा पैसा

    शिमला। हिमाचल प्रदेश में पूर्व जयराम सरकार के समय शुरू की गई हिमकेयर योजना को लेकर सुक्खू सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में हिमकेयर के तहत मरीजों के इलाज के भुगतान की व्यवस्था अब पहले जैसी नहीं रहेगी। प्रदेश सरकार ने इलाज की प्रतिपूर्ति को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। अब सरकारी संस्थानों को हिमकेयर के तहत इलाज पर वास्तविक खर्च या निर्धारित पैकेज रेट में से जो राशि कम होगी, उतनी ही राशि का दावा करने की अनुमति होगी।

    चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हिमकेयर योजना समय-समय पर भुगतान, बिलों और कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रही है। हालांकि नई अधिसूचना का मुख्य फोकस सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को स्पष्ट करना है।

    नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज हिमकेयर के मरीज का इलाज करने के बाद इलाज पर हुए वास्तविक खर्च और योजना के तहत निर्धारित पैकेज रेट के आधार पर भुगतान का दावा कर सकेंगे। लेकिन दोनों में से जो राशि कम होगी, वही प्रतिपूर्ति के लिए मान्य होगी। यानी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि पैकेज की तय सीमा से अधिक खर्च होने की स्थिति में भी सरकारी संस्थान पैकेज रेट से ज्यादा राशि हिमकेयर के तहत क्लेम नहीं कर पाएंगे।

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    सरकार के नए नियम को एक उदाहरण से समझें। यदि किसी उपचार के लिए हिमकेयर के तहत पैकेज रेट 50 हजार रुपये निर्धारित है और सरकारी अस्पताल में उस इलाज पर वास्तविक खर्च 40 हजार रुपये आता है, तो अस्पताल 40 हजार रुपये का ही दावा कर सकेगा। वहीं, यदि उसी उपचार में अस्पताल का वास्तविक खर्च बढ़कर 60 हजार रुपये हो जाता है, तब भी हिमकेयर के तहत अधिकतम 50 हजार रुपये यानी निर्धारित पैकेज रेट तक ही दावा किया जा सकेगा। इस तरह अब सरकारी संस्थानों के लिए भुगतान की अधिकतम सीमा पैकेज रेट और वास्तविक खर्च में से कम राशि होगी।

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    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए नियम के बावजूद हिमकेयर के तहत सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में मरीजों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती रहेगी। अस्पताल इलाज से संबंधित वास्तविक खर्च के आधार पर दावा कर सकेंगे। इसके साथ ही अधिसूचना में हिमकेयर साथी के निर्धारित पारिश्रमिक का क्लेम करने की भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है।

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    इसका मतलब यह है कि योजना के तहत इलाज करवाने वाले मरीज को अस्पताल में उपचार के दौरान सीधे भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी, जबकि भुगतान की प्रक्रिया सरकार और संबंधित संस्थान के बीच योजना के नियमों के अनुसार होगी।

    नई अधिसूचना में सरकार ने दवाइयों और मेडिकल सामग्री को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है। इलाज के दौरान ऐसी दवाइयां, कंज्यूमेबल, सर्जिकल सामान और अन्य सामग्री, जो पहले से सरकारी सप्लाई में उपलब्ध हैं या राज्य सरकार अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बजट से अलग से उपलब्ध करवाई गई हैं, उनका भुगतान हिमकेयर योजना के तहत दोबारा क्लेम नहीं किया जा सकेगा। यानी सरकारी संसाधनों से उपलब्ध करवाई जा चुकी सामग्री को हिमकेयर के बिल में अलग से जोड़कर भुगतान लेने की व्यवस्था नहीं होगी।

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    सरकार का यह नया आदेश चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से 8 अप्रैल 2026 को जारी की गई पिछली अधिसूचना को सुपरसीड करता है। यानी अब सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हिमकेयर के तहत भुगतान के लिए नई व्यवस्था प्रभावी होगी। यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी की गई है।

    नई व्यवस्था को लागू करवाने के लिए सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को आदेश की प्रतियां भेज दी हैं। इनमें महालेखाकार, हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, डेंटल हेल्थ सर्विसेज निदेशक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक समेत अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं। 
    इससे साफ है कि सरकार ने हिमकेयर के तहत सरकारी संस्थानों में होने वाले इलाज और उसके भुगतान की प्रक्रिया को एक समान तरीके से लागू करने की तैयारी कर ली है।

    हिमकेयर योजना की शुरुआत हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसका उद्देश्य प्रदेश के पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाना था। अब सत्ता परिवर्तन के बाद सुक्खू सरकार ने योजना की भुगतान व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार के नए आदेश का सीधा असर उन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ेगा, जो हिमकेयर के तहत मरीजों का उपचार कर प्रतिपूर्ति के लिए बिल प्रस्तुत करते हैं।

  • जेंडर बदलने के बाद क्रिकेट में एंट्री नहीं मिलनी चाहिए:साउथ अफ्रीकी ऑलराउंडर बोलीं- यह बिल्कुल हास्यास्पद; अनाया को ऑस्ट्रेलिया ने खेलने की अनुमति दी

    साउथ अफ्रीका की ऑलराउंडर मारिजन कैप ने ट्रांस क्रिकेटर अनाया बांगड़ को ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट खेलने की अनुमति मिलने पर नाराजगी जताई है। 36 साल की कैप ने इंस्टाग्राम पर अनाया से जुड़ी एक न्यूज रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने लिखा, यह बिल्कुल हास्यास्पद है, इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कैप ने अपनी पोस्ट में विमेंस बिग बैश लीग (WBBL) को भी टैग किया। दरअसल, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ने अनाया को फिलहाल ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिटी क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलने की अनुमति दी है। वह आगे WBBL में भी खेल सकती हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें तय हार्मोन संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी। 25 साल की अनाया पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की बेटी हैं। उन्होंने इसी साल जेंडर ट्रांजिशन के तहत जेनिटल सर्जरी कराई थी। WBBL खेलेने के लिए ब्लड टेस्ट क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के फैसले के मुताबिक, अनाया मार्च 2027 तक ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र की प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेल सकती हैं। हालांकि, मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए उन्हें कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। CA के हेड ऑफ इंटीग्रिटी जैकी पार्ट्रिज ने अनाया को बताया कि ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर उन्हें ब्लड टेस्ट देना होगा। टेस्ट में उनके सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर 10 nmol/L से कम होना चाहिए। अनाया ने कहा- लगा था दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी अनाया ने कुछ दिन पहले इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के फैसले पर खुशी जताई थी। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बहुत खास दिन है, क्योंकि उन्हें फिर से क्रिकेट खेलने का मौका मिला है। अनाया ने बताया कि एक समय उन्हें लगा था कि वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी। उनके मुताबिक, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें एक और मौका दिया है। BCCI से जवाब नहीं मिला तो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया अनाया ने क्रिकेट खेलने की अनुमति के लिए BCCI से भी संपर्क किया था, लेकिन उन्हें वहां से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से अनुरोध किया। BCCI के एक अधिकारी ने बताया कि ICC ने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के मामले में एलीट महिला क्रिकेट के लिए अनुमति नहीं दी है। अधिकारी के मुताबिक, BCCI ने अभी ऐसे मामलों में घरेलू क्रिकेट को लेकर अपना रुख तय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड के सामने इस तरह का पहला मामला है, इसलिए इस पर फैसला किया जाना बाकी है। अनाया का क्रिकेट कनेक्शन क्या है? अनाया बांगर पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर की संतान हैं। उन्होंने भारत में एज-ग्रुप क्रिकेट भी खेला है। अनाया ने सरफराज खान और उनके भाई मुशीर खान के साथ भी एज ग्रुप क्रिकेट खेला है। ————–
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    संजय बांगड़ की बेटी अनाया फिर खेल सकेंगी क्रिकेट पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की बेटी अनाया बांगड़ अब क्रिकेट में वापसी कर सकती हैं। अनाया का जन्म एक लड़के के तौर पर हुआ था। उनका नाम आर्यन था। उन्होंने बाद में सर्जरी और हार्मोन रिप्लेसमेंट के जरिए खुद को लड़की बना लिया और अपना नाम अनाया रख लिया। जेंडर बदलवाने के कारण उन्हें खेल से बाहर होना पड़ा था। पढ़ें पूरी खबर…
  • हिमाचल : रात को खाना खाकर सोया युवक, सुबह परिवार को कमरे में मिली लाड़ले की देह; पसरा मातम

    इस मामले में मृतक के परिजनों ने किसी भी व्यक्ति पर कोई शक या आरोप नहीं लगाया है। परिवार की ओर से किसी तरह का संदेह जाहिर नहीं किया गया है। वहीं, पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
  • कोहली खेलते तो भारत कोलंबो टेस्ट जीत जाता:कैफ बोले- टीम में जोश की कमी दिखी, टेस्ट में भारत के सबसे सफल कप्तान हैं विराट

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने कहा है कि अगर विराट कोहली कोलंबो टेस्ट में खेलते तो भारत मुकाबला जीत सकता था। कैफ के मुताबिक, टेस्ट के आखिरी दिन भारतीय टीम में जोश और तेजी की कमी दिखाई दी। विराट टीम में होते तो वे खिलाड़ियों को लगातार उत्साहित करते और श्रीलंका के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश करते। मैच के पांचवें दिन श्रीलंका के 4 विकेट बाकी थे और टीम भारत से सिर्फ 16 रन आगे थी। यहां से सोनल दिनूषा ने नाबाद 133 रन की पारी खेली और श्रीलंका ने 9 विकेट पर 429 रन बनाकर पारी घोषित नहीं की। उसकी बढ़त 216 रन हो गई और मुकाबला ड्रॉ पर खत्म हुआ। कोहली भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान रहे हैं। उन्होंने 68 टेस्ट में कप्तानी की, जिनमें भारत ने 40 मैच जीते, 17 हारे और 11 मुकाबले ड्रॉ रहे। इस मामले में उनके बाद एमएस धोनी का नंबर आता है। कैफ बोले- कोहली खिलाड़ियों में जोश भरते कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि विराट कोहली टीम में होते तो वह लगातार खिलाड़ियों से बात करके उन्हें मैच में बनाए रखते। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट लंबा खेल है और इसमें गेंदबाजों को लगातार मेहनत करनी पड़ती है। कैफ के मुताबिक, भारतीय टीम ने कई मौकों पर चीजों को अपने आप होने के लिए छोड़ दिया। उनका मानना था कि सिर्फ गेंदबाजी करते रहने से विकेट मिलने की उम्मीद करना पर्याप्त नहीं था। दिनूषा पर दबाव बनाते कोहली कैफ ने कहा कि भारतीय टीम में ऊर्जा की कमी दिखी, जिसे विराट कोहली बढ़ा सकते थे। उनके मुताबिक, कोहली मैदान पर लगातार खिलाड़ियों को उकसाते और श्रीलंकाई बल्लेबाज सोनल दिनूषा को भी दबाव में लाने की कोशिश करते। उन्होंने कहा कि कोहली सरफराज खान और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों को भी लगातार एक्टिव रखते और मैदान पर आक्रामक माहौल बनाते। कोहली ने मई 2025 में टेस्ट से संन्यास लिया विराट कोहली ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी थी। इससे पहले वह टी-20 इंटरनेशनल से भी संन्यास ले चुके थे। अब वह सिर्फ वनडे क्रिकेट खेल रहे हैं। कोहली ने भारत के लिए 123 टेस्ट में 9,230 रन बनाए। उनके नाम 30 टेस्ट शतक और 31 अर्धशतक हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 254 रन है। ——————— मैच की यह खबर भी पढ़ें… श्रीलंका ने भारत को नहीं जीतने दिया दूसरा टेस्ट:फॉलोऑन खेलने के बावजूद मैच ड्रॉ कराया, सोनल दिनूषा का दोनों पारियों में शतक श्रीलंका ने फॉलोऑन खेलने के बावजूद भारत के खिलाफ दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ करा लिया है। इस तरह भारत ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज 1-0 से जीत ली है। भारत ने गॉल में हुआ पहला टेस्ट मैच 165 रन से जीता था। पूरी खबर पढ़ें…
  • सुक्खू सरकार ने खोल दिए सरकारी नौकरी के द्वार, 870 पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया; जानें डिटेल

    सुक्खू सरकार ने खोल दिए सरकारी नौकरी के द्वार, 870 पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया; जानें डिटेल

    सुक्खू सरकार सरकारी स्कूलों में करेगी 870 शारीरिक शिक्षकों की भर्ती

    शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सुक्खू सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से चल रही शारीरिक शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने 870 शारीरिक शिक्षक (पीईटी) पदों को भरने की कवायद तेज कर दी है, जिससे शिक्षा विभाग में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

    प्रदेश विधानसभा में इस संबंध में जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है और सभी वर्गों के लिए आरक्षण रोस्टर तथा बैकलॉग को ध्यान में रखते हुए पदों का वर्गीकरण किया गया है।

    सरकारी स्कूलों में खेल गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस भर्ती में कुल 870 पद भरे जाएंगे। लंबे समय से खाली पड़े इन पदों को भरने की मांग उठ रही थी। अब सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद युवाओं में उत्साह का माहौल है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन नियुक्तियों से न केवल बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि स्कूलों में खेल और शारीरिक शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

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    भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नीति का पूरा ध्यान रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए सबसे अधिक पद निर्धारित किए गए हैं, जबकि अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी पर्याप्त पद आरक्षित किए गए हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि बैकलॉग पदों को भी इस भर्ती अभियान में शामिल किया जाए, ताकि लंबे समय से लंबित रिक्तियों को भरा जा सके।

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    भर्ती प्रक्रिया में विशेष श्रेणियों को भी प्राथमिकता दी गई है। पूर्व सैनिकों, दिव्यांग अभ्यर्थियों और खेल क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए अलग-अलग कोटे के तहत पद निर्धारित किए गए हैं। 
    इस कदम को सामाजिक समावेश और विभिन्न वर्गों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

    सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन पदों को भरने के लिए बैचवाइज भर्ती प्रणाली और राज्य चयन आयोग दोनों माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। इससे भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। युवाओं को अब भर्ती विज्ञापन, पात्रता शर्तों और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी का इंतजार है, जिसे विभाग जल्द जारी कर सकता है।

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    प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका असर विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा पर पड़ रहा था। सरकार का मानना है कि इन पदों पर नियुक्तियां होने से विद्यार्थियों को बेहतर खेल प्रशिक्षण मिलेगा और स्कूलों में खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक शिक्षा आज के समय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में रिक्त पदों को भरना शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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    प्रदेश में पिछले कुछ समय से विभिन्न विभागों में भर्तियों की घोषणाओं के बीच शारीरिक शिक्षकों के 870 पदों पर भर्ती की खबर ने युवाओं में नई उम्मीद जगाई है। खासकर वे अभ्यर्थी जो लंबे समय से शारीरिक शिक्षक के पदों के लिए तैयारी कर रहे हैं, उन्हें इस भर्ती से बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। सरकार की इस पहल को शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पदों को भरने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • जरूरत की खबर- रक्षाबंधन पर खेलें फन फैमिली गेम्स:भाई-बहन से लेकर मम्मी–पापा, दादा-दादी को भी करें शामिल, राखी को बनाएं यादगार

    रक्षाबंधन के मौके पर पूरा परिवार एक साथ जुटता है। भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, बुआ, चाचा और अन्य रिश्तेदारों से घर गुलजार हो जाता है। जब पूरा परिवार साथ हो तो क्यों न कुछ मजेदार फन गेम्स हो जाएं। इसलिए इस राखी हम आपके लिए कुछ ऐसे फन गेम्स लेकर आए हैं, जिन्हें बच्चे, युवा और बुजुर्ग समेत परिवार का हर सदस्य साथ मिलकर खेल सकता है। ये गेम्स न सिर्फ हंसी-ठिठोली और मनोरंजन का मौका देंगे, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए पलों को यादगार बना देंगे। तो चलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करते हैं– फैमिली फन गेम की। फैमिली के लिए फन गेम्स पूरे परिवार को एक साथ शामिल करना हो तो डंब शराड्स, पिक्शनरी, अंताक्षरी या पासिंग द पार्सल जैसे गेम्स अच्छे ऑप्शन हैं। इसे एक-एक करके समझिए- डंब शराड्स पिक्शनरी पासिंग द पार्सल इन गेम्स की खासियत ये है कि इन्हें परिवार के अलग-अलग उम्र के लोग एक साथ खेल सकते हैं। ग्राफिक में फन फैमिली गेम्स की लिस्ट देखिए- परफेक्ट गेम कैसे चुनें? गेम चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें- भाई-बहन के बीच मजेदार टक्कर रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को सेलिब्रेट करने का दिन है। इसलिए कुछ गेम्स उनके बीच रखें। ‘हू नोज मी बेटर’ इसका एक बढ़िया विकल्प है। इसमें एक खिलाड़ी अपने बारे में सवाल पूछता है और बाकी लोग उनके जवाब लिखते हैं। जिसके सबसे ज्यादा जवाब सही होते हैं, वह विजेता बनता है। सवाल कुछ इस तरह के हो सकते हैं- हर सही जवाब के लिए एक अंक दें। आखिर में सबसे ज्यादा अंक पाने वाला खिलाड़ी जीत जाता है। रैपिड फायर भी अच्छा विकल्प है। इसमें एक-दूसरे से लगातार छोटे-छोटे सवाल पूछे जाते हैं और जवाब देने के लिए 5-10 सेकेंड का समय दिया जाता है। कम समय में सबसे ज्यादा सही जवाब देने वाला खिलाड़ी विजेता होता है। ग्राफिक में भाई-बहन के लिए फन गेम्स देखिए- घर पर कैसे खेलें ‘ट्रेजर हंट’? अगर परिवार में बच्चे और युवा ज्यादा हैं तो रक्षाबंधन पर ट्रेजर हंट गेम खेला जा सकता है। इसमें- उदाहरण के लिए, पहला क्लू डाइनिंग टेबल के पास रखा जा सकता है। उस पर लिखा हो- “जहां पूरा परिवार रोज साथ बैठकर खाना खाता है, अगला क्लू वहीं मिलेगा।” बचपन की तस्वीरों से यादें होंगी ताजा रक्षाबंधन पर ‘गेस द चाइल्डहुड फोटो’ भी खेल सकते हैं। परिवार के सदस्यों की बचपन की तस्वीरें इकट्ठी करें और एक-एक करके सभी को दिखाएं। बाकी लोग अनुमान लगाएं कि तस्वीर किसकी है। इस गेम को और मजेदार बनाने के लिए तस्वीर के साथ छोटे-छोटे सवाल भी जोड़े जा सकते हैं। जैसेकि- इस गेम के साथ परिवार की पुरानी यादें भी ताजा होंगी। ‘वन-मिनट गेम्स’ से बढ़ाएं कम्पटीशन अगर परिवार में ज्यादा लोग हैं तो ‘वन मिनट गेम्स’ अच्छे विकल्प हैं। इनमें हर खिलाड़ी को एक छोटा टास्क दिया जाता है, जिसे उसे एक मिनट के अंदर पूरा करना होता है। ग्राफिक में वन मिनट गेम्स देखिए- इनमें से ऐसे गेम चुनें, जिनमें चोट लगने का जोखिम न हो। छोटे बच्चों को निगरानी में खेलने को कहें। छोटे बच्चों के लिए मजेदार गेम्स छोटे बच्चों के लिए ऐसे खेल चुनें, जिनमें ज्यादा कठिन नियम न हों। ‘कलर हंट’ इसका एक अच्छा विकल्प है। ग्राफिक में छोटे बच्चों के लिए गेम्स देखिए- बुजुर्गों संग पुरानी यादें करें ताजा बुजुर्गों के लिए याददाश्त, संगीत और बातचीत से जुड़े गेम चुने जा सकते हैं। इसके लिए परिवार के किसी सदस्य से जुड़ी यादों को गेम का हिस्सा बना सकते हैं। बुजुर्ग से ये सवाल पूछ सकते हैं- इस तरह बच्चे और युवा भी परिवार की पुरानी कहानियों के बारे में जान पाएंगे। बुजुर्गों के लिए गेम्स ग्राफिक में देखिए- फैमिली क्विज में पूछें मजेदार और चटपटे सवाल फैमिली क्विज को सामान्य सवालों की जगह परिवार से जुड़े सवालों पर आधारित करें। इससे गेम मजेदार बनेगा। ग्राफिक में फैमिली क्विज के सवाल देखिए- हारने वाले को दें फनी पनिशमेंट गेम में हारने वाले के लिए फनी ‘पनिशमेंट’ भी रखा जा सकता है, लेकिन इसे मजेदार और आसान रखें। ऐसा टास्क न दें, जिससे किसी को असहज महसूस हो। परिवार के सभी सदस्यों की उम्र और सहजता का ध्यान रखें। ग्राफिक में फनी पनिशमेंट आइडियाज देखिए- गेम्स का मकसद जीतना नहीं, साथ समय बिताना फैमिली गेम्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनसे परिवार के सदस्यों को एक साथ समय बिताने का मौका मिलता है। खासकर जब बच्चे और युवा मोबाइल या दूसरे स्क्रीन में ज्यादा समय बिताते हैं, तब ऐसे गेम कुछ समय के लिए सभी का ध्यान एक-दूसरे की तरफ ला सकते हैं। ग्राफिक में फैमिली गेम्स के सभी फायदे देखिए- आखिर में बनाएं ‘फैमिली विनर’ अगर कई गेम्स खेले जा रहे हैं तो हर गेम का अलग विजेता चुनने की बजाय पॉइंट सिस्टम अपनाएं। गेम जीतने वाले को 5 पॉइंट, दूसरे स्थान पर आने वाले को 3 और तीसरे स्थान पर आने वाले को 1 पॉइंट दें। सभी गेम्स खत्म होने पर सबसे ज्यादा पॉइंट हासिल करने वाले को ‘फैमिली विनर’ का टाइटल दें। इसके लिए महंगे गिफ्ट की जरूरत नहीं है। हाथ से बनाया गया सर्टिफिकेट, चॉकलेट या परिवार की तरफ से कोई मजेदार टाइटल भी दे सकते हैं, जैसेकि- रक्षाबंधन सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से तरोताजा करने का मौका है। इस बार महंगे उपहारों से ज्यादा अपना ‘समय’ और ‘खुशियां’ एक-दूसरे को गिफ्ट करें। छोटे-छोटे ये फन गेम्स आपके त्यौहार में वो रंग भर देंगे, जिसकी चमक सालों तक फीकी नहीं पड़ेगी। तो देर किस बात की? इस रक्षाबंधन आप भी मनाइए यादगार राखी! ……………………………… ये खबर भी पढ़ें…
    जरूरत की खबर- इस राखी बिना गैस-ओवन के बनाएं मिठाई:ये 5 मिठाइयां सिर्फ 15 मिनट में होंगी तैयार, शेफ से जानें बनाने का सही तरीका रक्षाबंधन पर घर में मिठाई न हो, ऐसा हो नहीं सकता। लेकिन हर बार पेड़ा, बर्फी, लड्डू या रसगुल्ला बाजार से खरीदकर लाना भी जरूरी नहीं है। अगर इस बार कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो ऐसी मिठाइयां बना सकते हैं, जिनके लिए न गैस जलाने की जरूरत है, न ओवन की। पूरी खबर पढ़ें…
  • अश्विन ने बताया- पंत क्यों वनडे-टी20 से बाहर हुए:बोले- अपने खराब फैसलों की कीमत चुका रहे भारतीय विकेटकीपर, उन्हें खास ट्रीटमेंट देना गलत

    पूर्वभारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि ऋषभ पंत अब तक अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा- पंत अपने खराब फैसलों की वजह से भारत की वनडे और टी20 इंटरनेशनल टीम में नहीं खेल रहे हैं। अश्विन ने कहा कि अगर पंत को सच्चाई बताई जाएगी, तो वे भारत के लिए हर फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पंत को ‘एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला खिलाड़ी’ कहकर टीम मैनेजमेंट को उन्हें खास ट्रीटमेंट नहीं देनी चाहिए। अश्विन बोले- खास ट्रीटमेंट देना है, तो सबको दीजिए अश्विन ने ‘अश्विन की बात’ प्रोग्राम में कहा कि किसी एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट मत दीजिए।’ उन्होंने कहा- अगर खिलाड़ियों को वन जेनरेशन प्लेयर कहकर समर्थन देना ही है, तो यह समर्थन सभी को दीजिए। यशस्वी जायसवाल भी ऐसे ही खिलाड़ी हैं।’ अश्विन बोले कि ‘मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं कि पंत अनुभवी हैं। वे 50 टेस्ट खेल चुके हैं और उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इसके लिए यह तर्क मत दीजिए कि वे वन जेनरेशन प्लेयर हैं। उन्होंने कहा कि पंत को हालात के हिसाब से खेलना होगा। इसके पीछे उनकी आक्रामक बल्लेबाजी को बहाना नहीं बनाया जा सकता। ‘पंत से मेरी उम्मीद अब तक पूरी नहीं हुई’ अश्विन ने कहा, “ऋषभ पंत से मेरी उम्मीद अब तक पूरी नहीं हुई है। इसके लिए मुझे बहुत अफसोस है। सोनल दिनूषा का स्ट्राइक रेट भी काफी अच्छा था, लेकिन अंतर ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों का है।” उन्होंने कहा, “जब खेल आपके हाथ में हो, तब लोग कहते हैं- ‘ऋषभ इसी तरह खेलते हैं।’ लेकिन बात यह है कि आपकी टीम को क्या चाहिए।” अश्विन ने पंत की बल्लेबाजी के तरीके पर कहा कि निर्णायक मौकों पर लिए गए जोखिमों को सही नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक, टीम की जरूरत के हिसाब से फैसले लेना जरूरी है। सिडनी और ब्रिस्बेन की पारियों का जिक्र अश्विन ने कहा, “ऋषभ ने सिडनी और ब्रिस्बेन में शानदार पारियां खेलीं, लेकिन वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर के बिना आप वह मैच नहीं जीत सकते थे।” उन्होंने कहा, “टेस्ट मैच बनाने और उसके आखिरी सेशन में जीतने के लिए 11 क्रिकेटर्स की जरूरत होती है, लेकिन एक टेस्ट हारने के लिए सिर्फ एक पल की मूर्खता काफी होती है।” हाल ही में खत्म हुई श्रीलंका सीरीज में पंत ने 168 रन बनाए थे। इसमें दो टेस्ट मैचों में उनके दो अर्धशतक शामिल थे। कोलंबो में दूसरा टेस्ट ड्रॉ होने के बाद भारत ने यह सीरीज 1-0 से जीती। सेहवाग और गिलक्रिस्ट से तुलना पर जवाब अश्विन ने पंत की आक्रामक बल्लेबाजी की तुलना वीरेंद्र सेहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे पुराने महान खिलाड़ियों से करने की बात भी खारिज की। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ उन मौकों की बात कर रहा हूं, जब मैच निर्णायक स्थिति में हो और ऐसे शॉट खेले जाएं। मुझे खिलाड़ी के तौर पर ऋषभ पसंद हैं। इस फॉर्मेट में हालात के मुताबिक खेलना जरूरी है।” अश्विन ने कहा, “सेहवाग और गिलक्रिस्ट ने आक्रामक क्रिकेट खेला, लेकिन जब उनकी टीम 500 रन पीछे होती थी, तब वे मार्को यानसन की गेंद पर आगे बढ़कर शॉट खेलने के दौरान आउट नहीं होते थे।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे सामने इन खिलाड़ियों के बारे में ऐसी मार्केटिंग वाली बातें दोबारा मत रखिए।”
  • हिमाचल में बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी:मंडी सहित कई जिलों में रक्षाबंधन का पर्व मनाया; बाजारों में खरीदारी को उमड़ी महिलाएं

    हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को भाई-बहन के पवित्र पर्व रक्षाबंधन को धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती दिखीं। बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की, जबकि भाइयों ने उन्हें उपहार दिए। रक्षाबंधन के अवसर पर मंडी के बाजारों में खासी रौनक देखी गई। ऐतिहासिक सेरी मंच पर लगे राखियों के स्टॉल पर महिलाओं और युवतियों ने खरीदारी की। राखी विक्रेता प्रवीण सकलानी ने बताया कि परिवारों के छोटे होने के कारण अब बड़ी संख्या में राखियां खरीदने का चलन कम हुआ है। अधिकांश लोग एक-दो राखियां ही खरीद रहे हैं, लेकिन भाई की कलाई सजाने का बहनों का उत्साह बरकरार है। हैंडमेड और स्वदेशी राखियों की मांग अधिक इस बार बाजार में हैंडमेड और स्वदेशी राखियों की मांग अधिक रही। ये राखियां 10 से 150 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध थीं। बच्चों के लिए 20 से 80 रुपये तक की कार्टून कैरेक्टर वाली रंग-बिरंगी राखियां खूब पसंद की गईं। सूती धागे, स्टोन वर्क और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां भी खूब बिकीं। स्वर्णकारों की दुकानों पर चांदी के ब्रेसलेट और डिजाइनर राखियों की भी मांग देखी गई। एचआरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा रक्षाबंधन पर हिमाचल सरकार ने महिलाओं को एचआरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की। इसके अतिरिक्त, सरकार ने आज सरकारी कार्यालयों में भी अवकाश घोषित किया। छुट्टी और निशुल्क बस यात्रा की सुविधा के कारण प्रदेशभर के लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए घरों तक पहुंचे। परिवार की खुशहाली की कामना मंडी सहित पूरे प्रदेश में घरों में भी रक्षाबंधन को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, उन्हें मिठाई खिलाई और परिवार की खुशहाली की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट किए। बाजारों में मिठाई और उपहारों की दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही।