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  • आईआईटी मंडी: झील की हर हलचल की खबर देगा फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम, नेपाल जैसी त्रासदी में कारगर

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    नेपाल जैसी प्राकृतिक त्रासदी और हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से बढ़ते खतरे के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जो झील की हर हलचल पर नजर रखेगी। झील के पानी में असामान्य बदलाव होते ही फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम सक्रिय हो जाएगा और संभावित बाढ़ की स्थिति में यह भी बता सकेगा कि पानी कितनी तेजी से नीचे की ओर बढ़ रहा है और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कितना समय लग सकता है।


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    हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से होने वाली अचानक बाढ़, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) कहा जाता है, का खतरा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इसे देखते हुए आईआईटी मंडी एक स्टार्टअप के लिए अत्याधुनिक फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित कर रहा है। यह सिस्टम अभी परीक्षण और विकास के चरण में है।

    दूरदृष्टि नाम के इस सिस्टम को ग्लेशियर झील के आउटलेट, मोरेन से बने बांध वाले हिस्से या संवेदनशील डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के पास स्थापित किया जा सकता है। यह सौर ऊर्जा से संचालित एक स्वायत्त निगरानी इकाई होगी, जो लगातार जलस्तर, पानी के बहाव की गति और आसपास की परिस्थितियों पर नजर रखेगी। सिस्टम में बिना पानी के सीधे संपर्क में आए जलस्तर मापने के लिए रडार आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, डॉप्लर रडार के माध्यम से पानी की सतह के बहाव की गति पर नजर रखी जाएगी। इसके साथ एआई आधारित ऑप्टिकल कैमरा भी लगाया जाएगा, जो असामान्य गतिविधियों की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकेगा।

    यदि जलस्तर में अचानक तेजी से बढ़ोतरी या गिरावट होती है। पानी के बहाव की गति असामान्य रूप से बढ़ती है। मलबा बहने लगता है या झील के आउटलेट पर रुकावट जैसी स्थिति बनती है तो सिस्टम उच्च आवृत्ति पर निगरानी शुरू कर देगा। ऐसी स्थिति में कैमरे भी सक्रिय होकर फोटो और वीडियो उपलब्ध कराएंगे, जिससे कंट्रोल सेंटर से वास्तविक स्थिति की पुष्टि की जा सके। इस तकनीक में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। एआई फोटो और वीडियो का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश करेगा कि जलस्तर में बदलाव किसी सामान्य कारण, जैसे तेज हवा या लहरों की वजह से हुआ है या वास्तव में कोई गंभीर खतरा पैदा हुआ है। इससे केवल किसी एक सेंसर की गलत रीडिंग के कारण अनावश्यक चेतावनी जारी होने की संभावना भी कम होगी।

    वास्तविक खतरे की पुष्टि होने पर फ्लड मॉडल सक्रिय होगा

    वास्तविक खतरे की पुष्टि होने पर फ्लड मॉडल सक्रिय होगा। पानी की गहराई, जलस्तर और बहाव की गति से जुड़ी जानकारी के आधार पर यह अनुमान लगाया जाएगा कि बाढ़ का पानी नीचे बसे गांवों या अन्य क्षेत्रों तक कितनी देर में पहुंच सकता है और उसका संभावित प्रभाव कितना हो सकता है। सिस्टम में 4जी/एलटीई, लोरा और वीसेट सहित कई संचार विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे दूरदराज के हिमालयी क्षेत्रों में भी निगरानी संभव होगी, जहां सामान्य संचार सुविधाएं विश्वसनीय नहीं होतीं। सिस्टम में डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखने की सुविधा भी होगी। खतरे की स्थिति में सिस्टम रियल टाइम जानकारी कंट्रोल सेंटर तक भेजेगा और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट जारी किया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में सायरन के माध्यम से स्थानीय लोगों को चेतावनी भी दी जा सकेगी। इससे प्रशासन को पानी पहुंचने से पहले जरूरी कार्रवाई करने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का समय मिल सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी आपदाओं में जनहानि को कम करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार, सिस्टम की खासियत यह है कि यह बिना सीधे पानी के संपर्क में आए काम करेगा। सौर ऊर्जा से संचालित होने और मौसमरोधी संरचना के कारण इसे अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में भी लगाया जा सकेगा, जहां पारंपरिक सेंसरों का रखरखाव मुश्किल होता है और अत्यधिक बहाव के दौरान उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। 

    कटौला में डेढ़ साल से हो रही टेस्टिंग

    आईआईटी मंडी के समन्वय में विकसित हो रहे इस सिस्टम की टेस्टिंग मंडी की कटौला में करीब डेढ़ साल से की जा रही है। परीक्षण में अब तक अच्छे नतीजे मिले हैं। अगले दो से तीन महीनों में सिस्टम को और विकसित करने का लक्ष्य है। उम्मीद है कि अगले मानसून तक यह तकनीक धरातल पर होगी।– डॉ. विवेक गुप्ता, सहायक प्रोफेसर, जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन केंद्र, आईआईटी मंडी

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  • हिमाचल के ड्राइवर की दिल्ली के पास हादसे में मौत:दिल्ली में बस दुर्घटनाग्रस्त, परिवार में अकेला कमाने वाला; 2 बच्चे का पिता

    हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के सुजानपुर क्षेत्र के 35 वर्षीय बिक्रम की दिल्ली के पास एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वह ग्राम पंचायत चमियाणा का निवासी था और दिल्ली में बस ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। ग्राम पंचायत प्रधान सागर सडयाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह बिक्रम के परिजनों को सूचना मिली कि जिस बस को वह चला रहा था वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। इस हादसे में बिक्रम की जान चली गई। सूचना मिलते ही परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बिक्रम अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी, एक 3 वर्षीय बेटा और एक 1 वर्षीय बेटी छोड़ गया है। बताया जा रहा है कि वह परिवार में एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। गांव में शोक व्यापत युवक की मौत की खबर से परिवार के साथ-साथ गांव में भी शोक का माहौल है। पंचायत प्रधान सागर सडयाल ने बताया कि बिक्रम का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
  • ट्रेन में दोस्ती कर यात्रियों का सामान चुराता था:जीआरपी ने शातिर चोर को कानपुर सेंट्रल से दबोचा

    कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से चोरी करने वाले एक शातिर अपराधी को जीआरपी कानपुर सेंट्रल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह आरोपी ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों से दोस्ती कर उनका विश्वास जीतता था और फिर मौका मिलते ही उनके मोबाइल, रुपये व अन्य सामान लेकर फरार हो जाता था। आरोपी को शुक्रवार शाम 5 बजे जेल भेज दिया गया। जीआरपी प्रभारी ओमनारायण सिंह ने बताया कि ट्रेनों में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान आरोपी कई बार सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ था, जिसके बाद जीआरपी टीम उस पर नजर रख रही थी। शुक्रवार भोर 3:40 बजे टीम ने कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को देखा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ा। पूछताछ में उसकी पहचान सुधीर कुमार (32) निवासी नौनीकपुर, थाना अछल्दा, जिला औरैया के रूप में हुई। जीआरपी की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह बिना टिकट ट्रेनों में सफर करता था। वह यात्रियों से बातचीत कर पहले उनसे दोस्ती करता था और विश्वास जीतने के बाद मौका देखकर उनके सामान पर हाथ साफ कर देता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी यात्रियों के मोबाइल फोन, रुपये और अन्य सामान चोरी कर अपना जीवन-यापन करता था। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से दस्तावेज समेत अन्य सामान बरामद किया है। जीआरपी पुलिस अब आरोपी से जुड़े पुराने मामलों और उसके संभावित साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। पुलिस की जांच में आरोपी के खिलाफ छिनैती, चोरी और आर्म्स एक्ट के 4 मुकदमे दर्ज होने का खुलासा हुआ है। जीआरपी द्वारा आरोपी का आपराधिक इतिहास खंगाला गया, जिसमें कानपुर सेंट्रल जीआरपी थाने में उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे सामने आए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इससे पहले किन-किन ट्रेनों और स्टेशनों पर यात्रियों को निशाना बनाया है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि उसके खिलाफ अन्य थानों या जीआरपी इकाइयों में कोई और मुकदमा दर्ज है या नहीं। पुलिस उसके अन्य साथियों की तलाश भी कर रही है।
  • संभल में BSA अलका शर्मा पर DM का एक्शन, रोक दिया वेतन; जानें क्या है पूरा मामला

    Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अलका शर्मा के खिलाफ जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने कड़ी कार्रवाई की है. सरकारी कार्यों में लापरवाही और निर्धारित समय सीमा में जांच रिपोर्ट नहीं सौंपने के मामले में डीएम ने BSA के अगस्त महीने के वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं. डीएम की इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

    समय पर जांच रिपोर्ट नहीं देने का मामला

    मामला संभल के पंवासा क्षेत्र के सौधन मोहम्मदपुर से जुड़ा है. यहां विकास कार्यों को लेकर एक शिकायत सामने आई थी. शिकायत की जांच के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा को जांच अधिकारी बनाया गया था. आरोप है कि जांच पूरी करने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जिलाधिकारी के सामने प्रस्तुत नहीं की गई. रिपोर्ट नहीं सौंपे जाने को लेकर प्रशासन ने इसे सरकारी कार्यों में लापरवाही माना.

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    डीएम ने वेतन रोकने के दिए निर्देश

    मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने BSA अलका शर्मा के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए. आदेश के तहत अगस्त महीने का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया गया है. प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई को समय पर सरकारी कार्य पूरा नहीं करने से जोड़कर देखा जा रहा है. डीएम के इस कदम के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी चर्चा तेज हो गई है.

    पंवासा के सौधन मोहम्मदपुर की शिकायत

    पूरा मामला पंवासा क्षेत्र के सौधन मोहम्मदपुर गांव में विकास कार्यों को लेकर सामने आई शिकायत से जुड़ा है. शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच की जिम्मेदारी BSA अलका शर्मा को दी गई थी. जांच रिपोर्ट निर्धारित समय में नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने इस पर नाराजगी जताई. इसके बाद डीएम ने वेतन रोकने का आदेश जारी किया.

    आगे क्या होगा?

    अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट कब तक जिलाधिकारी के सामने प्रस्तुत की जाती है. रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है. फिलहाल अगस्त माह के वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है. प्रशासन की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में भी इस मामले को लेकर हलचल बनी हुई है.

  • धर्मशाला: फर्जी बिलों से लाखों के सब्सिडी घोटाले में विजिलेंस ने मांगे दस्तावेज, तीन लोगों के खिलाफ दर्ज है क

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    बागवानी विभाग की योजनाओं में फर्जी बिल-वाउचर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिये लाखों रुपये का सरकारी अनुदान लेने के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने संबंधित विभाग से दस्तावेज मांगे हैं। साथ ही मामले में ठेकेदार, फर्म और अन्य मजदूरों को किए गए कार्यों की एवज में किए गए भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। ब्यूरो जिले के जवाली उपमंडल के अंतर्गत क्षेत्र के तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले में पिता-बेटे सहित एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    ब्यूरो जांच में ये खुलासा हुआ

    ब्यूरो जांच में टिशू कल्चर यूनिट की परियोजना लागत कृत्रिम रूप से बढ़ाकर 36.42 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी लेने सहित अन्य योजनाओं में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिकायत की सत्यापन जांच में सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2020 में टिशू कल्चर यूनिट स्थापित करने के लिए करीब 93.48 लाख रुपये का खर्च दर्शाकर 36.42 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त की। जांच में कई बिलों और दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां मिलीं।

    एक व्यक्ति का पंचायत रिकॉर्ड में अस्तित्व नहीं

    एक बिल ऐसे व्यक्ति के नाम से मिला, जिसका पंचायत रिकॉर्ड में कोई अस्तित्व नहीं पाया गया। एक अन्य फर्म के वास्तविक बिल की राशि से कई गुना अधिक रकम विभागीय अभिलेखों में दर्शाई गई। जांच में एक ठेकेदार ने भी अपने नाम से दर्शाए गए लाखों रुपये के कार्य और बिल जारी करने से इन्कार किया। वहीं, आरोपी के पिता के नाम पर तीन पॉलीहाउस और एक फल पौधरोपण परियोजना में करीब 20.30 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त करने का मामला भी जांच के दायरे में आया है।

    मौके पर संरचनाएं स्थापित मिलीं लेकिन जांच में परिवार के सदस्यों की ओर से अलग-अलग नामों से योजनाओं का बार-बार लाभ लेने पर आपसी मिलीभगत और योजनाओं के संगठित दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। एक अन्य मामले में 6.99 लाख रुपये की सब्सिडी से संबंधित पॉलीहाउस मौके पर नहीं मिला। अभिलेख में एक व्यक्ति का नाम और दूसरे व्यक्ति की फोटो मिलने सहित रिकॉर्ड नष्ट किए जाने के तथ्य भी जांच में सामने आए।

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  • शिमला में खाई में गिरी कार, पिता की मौत:बेटे की हालत गंभीर. रामपुर में मोड़ पर वाहन के अनियंत्रित होने से हादसा

    रामपुर उपमंडल के अंतर्गत आते तकलेच क्षेत्र में गुरुवार रात एक कार के अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर जाने से 64 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि हादसे में उनका 40 वर्षीय बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा रात करीब 8:30 बजे उस समय पेश आया जब दोनों पिता-पुत्र कार में सवार होकर अपने घर लौट रहे थे। रामपुर पुलिस थाना के प्रभारी रमेश नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने दुर्घटना के संबंध में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कार के खाई में गिरने के सटीक कारणों (तकनीकी खराबी या मानवीय चूक) का पता लगाने के लिए पुलिस बारीकी से जांच कर रही है। 30 मीटर नीचे खाई में गिरी कार प्राप्त जानकारी के अनुसार, जगदीश चंद (40) पुत्र निका राम, निवासी थेड़ा (तकलेच), गुरुवार रात को अपनी कार चला रहे थे। कार में उनके बुजुर्ग पिता निका राम (64) भी उनके साथ सवार थे। जब वे तकलेच से अपने पैतृक गांव थेड़ा की ओर जा रहे थे, तो अचानक एक तीखे मोड़ पर वाहन अनियंत्रित हो गया और सड़क से करीब 30 मीटर नीचे ढांक (खाई) में जा गिरा। अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम हादसे की आवाज सुनते ही स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर राहत व बचाव कार्य के लिए दौड़े। लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों घायलों को खाई से बाहर निकाला और तुरंत उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तकलेच पहुंचाया। हालांकि, वहां तैनात चिकित्सकों ने जांच के बाद निका राम (64) को मृत घोषित कर दिया। कार चालक जगदीश चंद को भी चोटें आई हैं, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर और स्थिर बताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही रामपुर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए महात्मा गांधी चिकित्सा सेवा परिसर खनेरी (रामपुर) लाया गया है, जहां शुक्रवार को पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
  • इस्कॉन कानपुर में मना बलराम प्राकट्योत्सव:सिंगापुर और थाईलैंड के दुर्लभ फूलों से सजा दरबार; चांदी के कलशों से हुआ महाअभिषेक, 108 व्यंजनों का महाभोग

    शहर के इस्कॉन मंदिर में शुक्रवार, 28 अगस्त को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई श्री बलराम का आविर्भाव दिवस ‘बलराम पूर्णिमा’ धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से हो रही तेज बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और बड़ी संख्या में भक्तों ने मंदिर पहुंचकर दर्शन और पूजन किया। शास्त्रों के अनुसार श्री बलराम भगवान श्री कृष्ण के प्रथम विस्तार और आदि गुरु तत्व हैं, जो अनंतशेष के रूप में पूरे ब्रह्मांड को धारण करते हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आयोजित इस भव्य उत्सव में पूरे मंदिर प्रांगण को दुल्हन की तरह सजाया गया था। IIT खड़गपुर से पढ़े महारास प्रभुजी ने सुनाई बलराम कथा उत्सव की शुरुआत सुबह मंगला आरती और दर्शन आरती से हुई, जिसके बाद प्रात:कालीन श्रीमद्भागवतम सत्र आयोजित किया गया। इस विशेष अवसर पर इस्कॉन कोलकाता से पधारे श्रीमान महारास प्रभुजी (IIT खड़गपुर से शिक्षित) ने भगवान श्री बलराम के गोपनीय तत्व और उनके लीला-माहात्म्य पर सुंदर कथा प्रस्तुत की। कथा के उपरांत मृदंग और करताल की थाप पर हरे कृष्ण महामंत्र और वैष्णव गीतों का सुमधुर संकीर्तन शुरू हुआ, जिससे पूरा मंदिर प्रांगण आध्यात्मिक तरंगों से गूंज उठा। चांदी के कलशों से पंचगव्य अभिषेक, लगा 108 व्यंजनों का भोग सुबह 11 बजे से भगवान श्री बलराम के अनंतशेष स्वरूप का भव्य महाअभिषेक प्रारंभ हुआ। पुजारियों ने चांदी के कलशों से पंचगव्य सहित कई दुर्लभ सामग्रियों से भगवान का आकर्षक अभिषेक किया। दोपहर में श्री बलराम जी को 108 प्रकार के दिव्य महाभोग अर्पित किए गए। बलराम पूर्णिमा की विशेष महाआरती के बाद मंदिर परिसर में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। सिंगापुर और थाईलैंड के ऑर्किड फूलों से सजा झूला, झूलन यात्रा का समापन
    बलराम पूर्णिमा के साथ ही श्री राधा-कृष्ण की प्रसिद्ध झूलन यात्रा का भी समापन हुआ। इस बार झूला सजाने के लिए सिंगापुर और थाईलैंड से विशेष रूप से मंगाए गए विभिन्न रंगों के दुर्लभ ‘ऑर्किड’ फूलों का इस्तेमाल किया गया था। ऐसा मनमोहक दृश्य देखकर लग रहा था मानो ब्रज धाम खुद कानपुर में उतर आया हो। संकीर्तन के बीच भक्तों ने भगवान को झूला झुलाया।

    3 से 5 सितंबर तक मनेगा तीन दिवसीय भव्य जन्माष्टमी महोत्सव
    कार्यक्रम के अंत में इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष श्रीमान प्रेम हरिनाम प्रभुजी ने सभी पधारे भक्तों का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने शहरवासियों को जानकारी दी कि इस बार इस्कॉन कानपुर में 3, 4 और 5 सितंबर को तीन दिवसीय भव्य जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दिव्य कृष्ण कथा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और महाअभिषेक का आयोजन होगा।

  • हिमाचल प्रदेश: भाखड़ा बांध से पानी उठाने के लिए एनओसी की शर्त खत्म, सीएम सुक्खू का विधानसभा में बड़ा एलान

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    विधानसभा में जलविद्युत परियोजनाओं, परियोजना प्रभावितों के अधिकारों और प्रदेश के जल संसाधनों पर बुधवार को हुई चर्चा के जवाब में मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकार हिमाचल के पानी, जमीन और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी के मामले में भी फैसला प्रदेश के हित में आने की उम्मीद है। 


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    उन्होंने कहा कि पीने के पानी और सिंचाई परियोजनाओं के लिए अब बीबीएमबी से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी। आपदा के समय के जब ऊर्जा सचिव आरके सिंह कुल्लू आए थे तो उस समय उनसे एनओसी का मामला उठाया था। उन्होंने पानी उठाने के लिए एनओसी शर्त हटा दी है। अन्य बांधों से पानी उठाने के लिए भी एनओसी खत्म करने का यह मामला केंद्र से उठाया जाएगा। बांध परियोजनाओं में हिमाचल के हित सुरक्षित रखने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एकमत से केंद्र को प्रस्ताव भेजने का संकल्प पारित किया।

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    संकल्प चर्चा के दौरान विपक्ष पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार के समय यदि ये मुद्दे उठाए गए होते तो बेहतर होता। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की ओर से उठाए गए प्रदेश हित के मुद्दों को भी गंभीरता से ले रही है। सुक्खू ने कहा कि बांध परियोजना क्षेत्र से संबंधित परियोजना संचालकों को खनन सामग्री नहीं उठाने दी जाएगी। इसके लिए कानून लाया जा रहा है। 

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    अगर परियोजनाएं खनन सामग्री उठाती है तो मामला दर्ज किए जाएंगे। सरकार खुद इनकी नीलामी करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से लाडा के तहत मिलने वाली 1 फीसदी राशि का मामला उठाया था। अब यह राशि चार साल के एरियर के साथ मिलेगी। शिमला से ऊर्जा निगम के कार्यालय को मंडी में बीबीएमबी की खाली पड़ी 45 बीघा जमीन बनाने पर स्थानांतरित किए जाने पर विचार चल रहा है। बांध परियोजनाओं क्षेत्र के आसपास खाली जमीन को भी सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में लगी। इसके लिए कानून बनाया जाएगा। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल की सबसे बड़ी संपदा पानी है और इससे प्रदेश की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाएगी।

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  • मंडी में अमरनाथ धाम का स्वरूप सजाया:40 साल से रक्षाबंधन पर निभा रहे परंपरा; बाबा बर्फानी के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

    रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा के अवसर पर मंडी शहर के ऐतिहासिक एकादश रुद्र मंदिर में बाबा अमरनाथ यानी बाबा बर्फानी की कृत्रिम गुफा सजाई गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर परिसर में तैयार की गई यह गुफा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे और बाबा बर्फानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी स्वामी सत सुंदरम ने बताया कि एकादश रुद्र मंदिर में पिछले 40 से 45 वर्षों से रक्षाबंधन के दिन बाबा अमरनाथ के विशेष दर्शन करवाने की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पहले प्राकृतिक बर्फ से शिवलिंग और भगवान शिव की प्रतिमा तैयार की जाती थी, जो बर्फबारी के दौरान उपलब्ध बर्फ से बनती थी। शिवलिंग और भगवान शिव की प्रतिमा बनाई स्वामी सत सुंदरम के अनुसार, अब प्राकृतिक बर्फ की अनुपलब्धता के कारण कृत्रिम रूप से शिवलिंग और भगवान शिव की प्रतिमा बनाई जाती है। अमरनाथ गुफा की तर्ज पर मंदिर परिसर में विशेष सजावट की जाती है, जिसमें बाबा बर्फानी का स्वरूप और शिवलिंग स्थापित होता है। भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था यह परंपरा उन श्रद्धालुओं के लिए है जो अमरनाथ धाम नहीं जा पाते, ताकि वे मंडी में ही बाबा बर्फानी के दर्शन कर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकें। रक्षाबंधन पर मंडी शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। मंदिर में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं, जहां श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
  • गोरखपुर में धूमधाम से मनाया गया रक्षाबंधन:हर घर में दिखा भाई-बहन का प्यार, हमेशा साथ निभाने का लिया वचन

    गोरखपुर में रक्षाबंधन का त्योहार इस बार पूरे जोश और खुशी के साथ मनाया गया। सुबह होते ही घरों में पूजा की तैयारी शुरू हो गई। बहनों ने सजे हुए थाल के साथ भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और मिठाई खिलाकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की दुआ की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार दिए और हर हाल में उनकी रक्षा करने का वादा किया। रक्षाबंधन के दिन गोरखपुर के हर घर में खुशी का माहौल रहा। भाई-बहन ने साथ समय बिताया, हंसी-मजाक किया और इस दिन को खास बनाया। कई परिवारों में दूर रहने वाले सदस्य भी एक-दूसरे से मिलने पहुंचे, जिससे रिश्तों में और भी मिठास घुल गई। मंदिरों में गूंजे भक्ति के स्वर, भगवान को भी बांधी राखी रक्षाबंधन के मौके पर शहर के मंदिरों में भी खास रौनक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने भगवान को राखी बांधकर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही और पूरा माहौल भक्ति और श्रद्धा से भर गया। त्योहार पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए। शहर में अतिरिक्त बसें चलाई गईं और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया गया, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा ने भी बहनों की यात्रा को आसान बना दिया। प्यार, भरोसा और आस्था का संदेश रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। यह त्योहार हमें एक-दूसरे के साथ खड़े रहने, प्यार बांटने और रिश्तों को मजबूत बनाने का संदेश देता है। गोरखपुर में यह पर्व एक बार फिर खुशियों, विश्वास और अपनापन लेकर आया। 10 तस्वीरें देखिए…