Category: himachal

  • हिमाचल: राज्य शिक्षक पुरस्कार से 32 गुरुजन सम्मानित, वंदेमातरम के सभी छंदों की धुन से शुरूआत और समापन

    खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

    या
    वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

    शिक्षक दिवस पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के लोकभवन में शनिवार को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था, उसके भविष्य और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को लेकर व्यापक विमर्श का मंच भी बना। समारोह की शुरुआत और समापन राष्ट्रगीत वंदेमातरम के सभी छंदों की विशेष प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे आयोजन को एक अलग गरिमा प्रदान की। राष्ट्रगीत के साथ राष्ट्रगान की धुन भी बजाई गई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अन्य सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्तता के कारण शामिल नहीं हो सके। शिक्षा क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का उल्लेख शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने किया। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के कुल 32 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया।

    इनमें स्कूल शिक्षा विभाग के 21, उच्च शिक्षा विभाग के पांच और तकनीकी शिक्षा विभाग के पांच शिक्षक शामिल रहे। वर्ष 2025 के लिए चयनित सोलन के शिक्षक शशिपाल को भी राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के बाद राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देने वाले कर्मी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं। विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। देश का भविष्य किसी संसद या सचिवालय में नहीं, बल्कि कक्षाओं में आकार लेता है। उन्होंने कहा कि आज जब शिक्षा तेजी से डिजिटल और तकनीक आधारित हो रही है, तब भी शिक्षक की भूमिका कम नहीं हुई है, बल्कि पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म सीखने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं, लेकिन शिक्षक का मार्गदर्शन, प्रेरणा, नैतिकता और मानवीय संवेदनाएं किसी तकनीक से प्रतिस्थापित नहीं की जा सकतीं। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय कौशल विकास, नवाचार, अनुसंधान, रचनात्मक सोच और चरित्र निर्माण से जोड़ा है। राज्यपाल ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य शिक्षक पुरस्कार उनकी वर्षों की मेहनत, समर्पण और नवाचार का सम्मान है। हालांकि एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार तब होता है, जब उसके विद्यार्थी जीवन में सफल होकर समाज, प्रदेश और देश के निर्माण में योगदान देते हैं और अपने गुरु को जीवनभर याद रखते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों का भी संचार करना चाहिए।

    सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

    राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर और राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर खूब वाहवाही बटोरी। राज्यपाल ने शिक्षक दिवस पर प्रकाशित विशेष स्मारिका का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उपमहापौर उमा कौशल, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ. अभिषेक जैन, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह आदि उपस्थित रहे।

    प्रेरणा बनेगी सम्मानित शिक्षकों की सफलता की कहानियां : रोहित

    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सम्मानित शिक्षकों की सफलता की कहानियों का दस्तावेजीकरण कर अन्य शिक्षकों के साथ साझा किया जाएगा। बीएड और डाइस संस्थानों में इनके अनुभवों को साझा किया जाएगा। इससे पूरे शिक्षा समुदाय को प्रेरणा मिलेगी। रोहित ने कहा कि शिक्षा विभाग में 9,000 से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं। आगामी एक साल के भीतर कुल 15 हजार नियुक्तियां देने का लक्ष्य रखा गया है। सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम लागू किया गया है। स्थानीय भाषाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण देने के लिए एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम शुरू किया गया है। 

    शिक्षकों ने निभाया कर्तव्य, कम लोग करते हैं ड्यूटी से ज्यादा काम : धर्माणी

     तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि पुरस्कृत हुए शिक्षकों ने अपना कर्तव्य निभाया है। बहुत कम ऐसे लोग होते हैं, जो अपनी ड्यूटी से बाहर जाकर ज्यादा काम करते हैं। चयनित शिक्षकों ने अपने कर्तव्य से बढ़कर विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। ऐसे शिक्षकों की सफलता की कहानियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है और अब अगला लक्ष्य प्रदेश में उत्कृष्ट एवं विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। 

    इन शिक्षकों को मिला सम्मान

    स्कूल श्रेणी से सामान्य श्रेणी में शशि पाल, तिलक राज, अजय कुमार, किरण कुमार, राकेश कुमार, संजय कुमार नेगी, मनोज कुमार, इंद्र प्रकाश, जगदीश कुमार, रौशन लाल, राकेश कुमार, राकेश सिंह ,पूर्णिमा कुमारी, खेचोक जांगपो, चमन लाल, लोकेंद्र सिंह और सृष्टि शर्मा को पुरस्कार दिया गया। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर की शिक्षिका मंजरी वी. महाजन ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त किया।

    विशेष पुरस्कार श्रेणी में रोशनी देवी, सारिका आहूजा, बलवंत जोहटा, स्नेह लता, ललित कुमार और वीरेंद्र चौहान को पुरस्कार दिया गया।

    तकनीकी शिक्षा में डाॅ. विवेक कुमार, डाॅ. रितेश कौंडल, पोहलो राम, सुभाष चंद, रवि दत्त को पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    उच्च शिक्षा विभाग से डाॅ. पंकज बसोतिया, डाॅ. हरबंस लाल शर्मा, डाॅ. समजीत सिंह ठाकुर डाॅ. प्रशांत रमन रवि और डॉ. रवि कांत को सम्मानित किया गया।

    रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android , iOS और अपने मोबाइल पे|
    Get all in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more .

  • हिमाचल हाईकोर्ट: एएनएम होम के दोषपूर्ण डिजाइन पर अफसर की तय हो जिम्मेदारी

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) के पद पर सीधी भर्ती के बाद पदोन्नति के तहत वेतन वृद्धि और पुरानी दाई सेवा को जोड़कर एसीपीएस (एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेशन स्कीम) के लाभ की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
  • कैग रिपोर्ट: कैदियों की अमानत से जेलों का खर्च, सुरक्षा कर्मी नहीं मिलने से इलाज अटका

    खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

    या
    वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

    भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2024 तक की रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की जेलों में गंभीर खामियां उजागर की हैं। यह रिपोर्ट कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाती है। जेल प्रशासन ने बजट की कमी के दौरान कैदियों के निजी संपत्ति खातों का उपयोग विभागीय खर्चों के लिए किया। जांची गई जेलों में ऐसे खातों से कुल 65.89 लाख रुपये निकाले गए। मार्च 2024 तक 6.56 लाख रुपये कैदियों के खातों में वापस जमा नहीं किए गए थे। हिमाचल प्रदेश प्रिजन मैनुअल 2021 के अनुसार, कैदियों का प्रॉपर्टी अकाउंट निजी अमानत है। इसका विभागीय कार्यों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंडा, सोलन और धर्मशाला जेलों में यह राशि पुलिस सुरक्षा भत्ते और मेडिकल परीक्षण जैसे खर्चों में लगी। कंडा जेल में 4,57,878 रुपये, सोलन जेल में 1,81,380 रुपये और धर्मशाला जेल में 17,085 रुपये वापस जमा नहीं हुए थे। कैग ने इस व्यवस्था को नियमों के विपरीत माना है। विभाग ने बजट मिलने पर राशि की भरपाई का तर्क दिया।


    विज्ञापन

    वर्ष 2021 से 2024 के बीच 16,723 कैदियों को बाहरी अस्पतालों में रेफर किया गया। इनमें से 6,731 यानी 40.25 फीसदी कैदी पुलिस सुरक्षा न मिलने से अस्पताल नहीं पहुंच सके। वर्ष 2022 में 54 फीसदी कैदियों का इलाज सुरक्षा अभाव में अटक गया। कंडा और धर्मशाला जेलों में अस्पताल सुविधाओं की कमी और बेकार पड़े मेडिकल उपकरण भी सामने आए। प्रशिक्षित ऑपरेटरों की कमी के कारण हेमेटोलॉजी एनालाइजर जैसे उपकरण उपयोग में नहीं आ सके। कैग रिपोर्ट ने जेलों में सुरक्षा स्टाफ की भारी कमी को भी रेखांकित किया है। मॉडल जेल मैनुअल के अनुसार 1,281 वार्डर और हेड वार्डर की आवश्यकता थी। अप्रैल 2024 तक केवल 466 पद भरे थे, जो कुल जरूरत का 36 फीसदी है। डिस्पेंसरों के 68 फीसदी और सहायक अधीक्षकों के 57 फीसदी पद भी रिक्त पाए गए। इस स्टाफ कमी ने जेल प्रशासन और कैदियों के अस्पताल रेफरल दोनों को प्रभावित किया।

    सरकार ने मानी खामियां, सुधार के दिए संकेत

    सितंबर 2025 में हुई एग्जिट कॉन्फ्रेंस में गृह विभाग और जेल प्रशासन ने कैग की ओर से उठाए गए इन मुद्दों पर जवाब दिया। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जेल ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में कैदियों के निजी संपत्ति खातों से अत्यधिक आपात स्थिति को छोड़कर धनराशि नहीं निकाली जाएगी। अस्पतालों में लंबित रेफरल की समस्या दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ जेलों में डॉक्टरों के नियमित दौरे सुनिश्चित करने, ई-संजीवनी के जरिये टेली-कंसल्टेशन शुरू करने और साझा पुलिस एस्कॉर्ट व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

    रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android , iOS और अपने मोबाइल पे|
    Get all in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more .

  • हिमाचल: लाहौल के 50 किलोमीटर हिस्से से गुजरेगी सामरिक महत्व की बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन

    खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

    या
    वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

     चीन अधिकृत तिब्बत से लगती देश की सीमाओं तक कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए प्रस्तावित बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन हिमालयी क्षेत्र में देश की सामरिक क्षमता को नई मजबूती दे सकती है। 489 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना में दर्जनों सुरंगों के निर्माण का प्रस्ताव है। अनुमान के अनुसार करीब 270 किलोमीटर रेललाइन सुरंगों के भीतर से गुजरेगी, यानी परियोजना का लगभग 55 फीसदी हिस्सा भूमिगत होगा। रेल लाइन लाहौल के करीब 50 किलोमीटर के हिस्से से गुजरेगी। प्रस्तावित रेल लाइन में कई लंबी सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जाना है।


    विज्ञापन

     

    इनमें सबसे लंबी सुरंग करीब 27 किलोमीटर की होने का अनुमान है। हालांकि, परियोजना अभी प्रारंभिक चरण में है और अंतिम सर्वेक्षण तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद सुरंगों की संख्या, लंबाई और अन्य तकनीकी पहलुओं में बदलाव संभव है। परियोजना के साकार होने से हिमाचल के दुर्गम लाहौल क्षेत्र से होते हुए लेह तक रेल संपर्क स्थापित होने की उम्मीद है। इसके अलावा चंडीगढ़ से लेह तक यात्रा का समय भी काफी कम हो सकता है। रणनीतिक दृष्टि से यह रेललाइन महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना, सैन्य उपकरण और आवश्यक सामग्री की आवाजाही तेज और सुगम हो सकेगी। परियोजना के पूरा होने से लाहौल और लेह को रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और देश की सामरिक तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। संवाद

    जिस्पा में पेड़ों और सैपलिंग की गिनती शुरू

    बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन की प्रारंभिक प्रक्रिया के तहत लाहौल के जिस्पा क्षेत्र में पेड़ों की मार्किंग और सैपलिंग (छोटे पौधे। की गिनती का शुरू कर दिया गया है। यह कार्य प्रस्तावित रेल परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रिया का हिस्सा है। -इंद्रजीत सीरा, वनमंडलाधिकारी लाहौल।

    रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android , iOS और अपने मोबाइल पे|
    Get all in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more .

  • हिमाचल प्रदेश: आधार से जोड़ी जाएंगी 72 सरकारी योजनाएं और सेवाएं, लागू होगा नया सिस्टम

    खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

    या
    वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

    हिमाचल प्रदेश के नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों को अब हिम एक्सेस और हिम परिवार पोर्टल पर पंजीकरण व लॉगिन के दौरान आधार आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा मिलेगी। इससे एक ओर जहां फर्जी पहचान और डुप्लीकेट पंजीकरण पर अंकुश लगेगा, वहीं दूसरी ओर पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंचाना भी आसान होगा। सरकारी सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है। सरकार के पोर्टलों पर उपलब्ध 72 विभिन्न सेवाओं को इस प्रणाली के तहत लाया गया है। डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार ने दोनों प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधार प्रमाणीकरण लागू करने का फैसला लिया है।

    यह व्यवस्था भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद लागू की गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार आधार आधारित सत्यापन से उपयोगकर्ताओं की पहचान अधिक सटीक तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी और विभिन्न योजनाओं में अपात्र या फर्जी लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा। आधार प्रमाणीकरण पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। इसका उपयोग केवल पहचान सत्यापन और सेवाओं के प्रभावी वितरण के उद्देश्य से किया जाएगा। जिन नागरिकों के पास आधार संख्या है, वे इसकी मदद से अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे।

    एक क्लिक में सत्यापित होगी पहचान

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार पहचान संबंधी दस्तावेज जमा नहीं कराने पड़ेंगे। आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से उनकी पहचान डिजिटल रूप से सत्यापित हो सकेगी, जिससे सेवा वितरण की प्रक्रिया तेज और सरल बनेगी।

    रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android , iOS और अपने मोबाइल पे|
    Get all in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more .

  • सीपीआरआई शिमला: हाईटेक तकनीक से तैयार आलू बीज देगा बदलते मौसम में भी भरपूर उत्पादन

    खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

    या
    वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

    केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला ने आलू की खेती को जलवायु जोखिमों से बचाने के लिए टिशू कल्चर की मदद से आलू बीज तैयार करने की हाईटेक तकनीक इजाद की है। इस तकनीक से तैयार आलू बीज बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और अनियमित बारिश के बावजूद बेहतर फसल तैयार करने में सक्षम है। इस तकनीक का मकसद कम समय में रोग मुक्त और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री किसानों को उपलब्ध कराना है। सीपीआरआई के वैज्ञानिक प्रयासों से देश में आलू की उत्पादकता बढ़ी है। सीपीआरआई की ओर से आलू बीज उत्पादन के लिए इस्तेमाल की जा रही हाईटेक तकनीक से आलू उत्पादन की दर शुरुआती दशकों के 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर वर्तमान में 35 से 40 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। पारंपरिक बीज उत्पादन में मिट्टी जनित और वायरल रोगों का खतरा बना रहता है। पछेती झुलसा, वायरस और आलू सिस्ट नेमाटोड जैसी समस्याएं बीज की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित करती हैं।

    सीपीआरआई ने नियंत्रित प्रयोगशाला वातावरण में टिशू कल्चर के माध्यम से वायरस-मुक्त रोपण सामग्री तैयार की है। रैपिड मल्टीप्लिकेशन के जरिये कम समय में स्वस्थ सूक्ष्म कंद और जनक बीज बनाए जा रहे हैं। इससे पारंपरिक उत्पादन चक्र पर निर्भरता कम हुई है। किसानों को शुद्ध और रोग मुक्त बीज उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ी है। सीपीआरआई की रणनीति केवल रोग मुक्त बीज तक सीमित नहीं है। टिशू कल्चर से तैयार बीज को गर्मी, सूखे और जल तनाव सहन करने वाली नई किस्मों से जोड़ा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप किस्में विकसित करने के लिए संस्थान स्पीड ब्रीडिंग तकनीक का उपयोग कर रहा है। इसके जरिये एक वर्ष में तीन से चार जेनरेशन तैयार की जा सकती हैं। आलू की खेती में मौसम और रोग प्रबंधन को जोड़ने के लिए सीपीआरआई ने इंडो ब्लाइट कास्ट पूर्वानुमान मॉडल विकसित किया है। इसका इस्तेमाल पछेती झुलसा बीमारी के प्रबंधन में होता है। मौसम की परिस्थितियों के आधार पर रोग के जोखिम का पूर्वानुमान मिलने से किसान समय पर छिड़काव कर सकते हैं।

    टिशू कल्चर-एरोपोनिक्स से आलू बीज उत्पादन को नई रफ्तार

    टिशू कल्चर और एरोपोनिक्स तकनीक के तालमेल से आलू के रोगमुक्त और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को नई गति मिल रही है। टिशू कल्चर तकनीक में प्रयोगशाला के रोगाणुहीन वातावरण में मेरिस्टेम से वायरस-मुक्त छोटे पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें बिना मिट्टी वाले एरोपोनिक्स ग्रीनहाउस में विकसित किया जाता है। यहां पौधों की जड़ों को हवा में लटकाकर पोषक तत्वों की फुहार दी जाती है, जिससे मिनी ट्यूबर तैयार होते हैं। पारंपरिक मिट्टी की खेती में एक पौधे से करीब 8 से 10 कंद मिलते हैं, जबकि एरोपोनिक्स से 40 से 60 मिनी ट्यूबर तक प्राप्त किए जा सकते हैं। इससे बीज उत्पादन की क्षमता कई गुना बढ़ती है।

    आलू बीज उत्पादन के लिए सीपीआरआई हाईटेक तकनीक पर काम कर रहा है। इस तकनीक से आलू बीज की गुणवत्ता में बेहतरीन सुधार हुआ है, जिसके फलस्वरूप आलू उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है।– डाॅ. ब्रजेश सिंह, निदेशक, सीपीआरआई

    रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android , iOS और अपने मोबाइल पे|
    Get all in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more .

  • बड़ा बदलाव: हिमाचल में बैंकिंग-जीआईएस पढ़ेंगे विद्यार्थी, 155 सीबीएसई स्कूलों में नए स्किल विषय

    खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

    या
    वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

    हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में कौशल शिक्षा (स्किल एजुकेशन) के स्वरूप में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य के 155 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाए जा रहे कई व्यावसायिक ट्रेड अब बदले जाएंगे। शिक्षा विभाग ने कौशल विषयों और व्यावसायिक प्रशिक्षकों के युक्तिकरण का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत पुराने और कम प्रासंगिक हो चुके कुछ ट्रेडों को सीबीएसई के मौजूदा स्किल एजुकेशन फ्रेमवर्क में उपलब्ध नए और रोजगारोन्मुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इस प्रस्ताव को राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा कार्यालय की ओर से सरकार को भेजा गया है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे ट्रेड स्कूलों में संचालित हो रहे थे, जो सीबीएसई के वर्तमान कौशल शिक्षा ढांचे में शामिल नहीं हैं या जिनकी उपयोगिता सीमित हो चुकी है। ऐसे में विभाग ने उन्हें आधुनिक और अधिक रोजगारपरक विषयों से बदलने की रणनीति तैयार की है। शिक्षा विभाग का मानना है कि बैंकिंग, पोषण, जियोस्पेशियल तकनीक और इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए विद्यार्थियों को ऐसे विषयों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

    युक्तिकरण प्रस्ताव में सबसे बड़ा सवाल निजी सुरक्षा (प्राइवेट सिक्योरिटी) ट्रेड को लेकर है। यह ट्रेड वर्तमान में कई स्कूलों में संचालित हो रहा है, लेकिन सीबीएसई के मौजूदा स्किल एजुकेशन फ्रेमवर्क में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसी कारण राज्य स्तर पर सीबीएसई मुख्यालय नई दिल्ली से स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने आग्रह किया है कि इस ट्रेड को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि पहले से इस विषय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को परीक्षा, मूल्यांकन, प्रमाणन या आगे की पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। सीबीएसई से जवाब मिलने के बाद ही इस ट्रेड के भविष्य पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    चार पुराने ट्रेडों की जगह आएंगे नए विषय

    प्रस्ताव के अनुसार चार प्रमुख ट्रेडों को नए कौशल विषयों से प्रतिस्थापित किया जाएगा। इसमें बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा) के तहत संचालित माइक्रोफाइनेंस एग्जीक्यूटिव, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट और बिजनेस फैसिलिटेटर ट्रेड को अब बैंकिंग सेल्स एग्जीक्यूटिव (बैंकिंग प्रोडक्ट्स) से जोड़ा जाएगा। फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में संचालित जैम, जेली एवं केचप तकनीशियन तथा सोया उत्पाद प्रोसेसर ट्रेड की जगह फूड, न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स असिस्टेंट डाइटिशियन विषय प्रस्तावित किया गया है। प्लंबिंग सेक्टर के असिस्टेंट प्लंबर जनरल और प्लंबर जनरल ट्रेड को हटाकर जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी जीआईएस ऑपरेटर लाने की तैयारी है, जो डिजिटल मैपिंग और भू-स्थानिक तकनीक से जुड़ा आधुनिक क्षेत्र है। इसी तरह टेलीकॉम सेक्टर के ऑप्टिकल फाइबर स्प्लाइसर और टेलीकॉम तकनीशियन (आईओटी डिवाइस एवं सिस्टम) ट्रेड की जगह इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी फील्ड तकनीशियन विषय प्रस्तावित किया गया है।

    प्रशिक्षकों के तबादले नहीं, स्कूलों में ही होगा समायोजन

    सरकार फिलहाल व्यावसायिक प्रशिक्षकों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में भेजने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय सीबीएसई स्कूलों के भीतर ही उनके अनुभव और योग्यता के अनुसार नए कौशल विषयों से जोड़ा जाएगा। इससे प्रशिक्षकों की सेवाओं का बेहतर उपयोग हो सकेगा और स्कूलों में वर्षों से विकसित कौशल शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी। साथ ही विद्यार्थियों को बीच सत्र में विषय परिवर्तन या प्रशिक्षकों की कमी जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android , iOS और अपने मोबाइल पे|
    Get all in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more .

  • हिमाचल सुक्खू सरकार: वर्ष 2027 के चुनावी समीकरणों में उलझा मंत्रिमंडल विस्तार, जानें पूरा मामला

    खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

    या
    वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे और कांग्रेस आलाकमान के साथ हुई बैठकों के बावजूद हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के बजाय क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन के सभी पहलुओं पर मंथन कर रहा है। इसी कारण मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के फेरबदल पर अंतिम फैसला अभी टलता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व का फोकस वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों पर है। पार्टी चाहती है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर विभिन्न क्षेत्रों, जातीय समूहों और सामाजिक वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले, ताकि चुनावी दृष्टि से मजबूत संदेश दिया जा सके। 

    समीकरण साधना चुनौतीपूर्ण बना

    यही वजह है कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को अवसर देने और मौजूदा शक्ति संतुलन को बनाए रखने के बीच समीकरण साधना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ मंत्रियों के विभागों में संभावित फेरबदल पर भी विचार-विमर्श हुआ। सरकार के प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रभावशीलता को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम विभागों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ऐसे संकेत हैं कि आने वाले दिनों में विभागों का पुनर्गठन और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मंत्रिमंडल विस्तार का मुद्दा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के विचाराधीन है, लेकिन अंतिम निर्णय के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। उधर, दिल्ली बैठकों में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के हिमाचल दौरों पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी इसी माह सोलन में बड़ी जनसभा को संबोधित कर सकते हैं, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा का मंडी दौरा पहले से प्रस्तावित कार्यक्रमों में शामिल है।

    चंडीगढ़ से सड़क मार्ग होते शिमला लौटे सुक्खू

     मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ अहम बैठकों के बाद शुक्रवार शाम को शिमला लौटे। चंडीगढ़ से वह सड़क मार्ग से राजधानी पहुंचे। दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल से मुलाकात की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार भी बैठकों में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री सुक्खू की राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ अलग से भी विस्तृत चर्चा हुई।

    रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android , iOS और अपने मोबाइल पे|
    Get all in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more .

  • हिमाचल के रामपुर में बादल फटा, हाइड्रो प्रोजेक्ट को नुकसान:लोगों में अफरातफरी, 2 जिलों में बारिश की चेतावनी; कल से कमजोर पड़ेगा मानसून

    शिमला जिला के रामपुर क्षेत्र के काशपाट में बीती रात में बादल फटने से गंगदारी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की इंटेक को काफी नुकसान पहुंचा है। प्लांट इंचार्ज धीरज वर्मा ने बताया कि बाढ़ से इंटेक के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम राफ्ट के साथ बॉटम कन्वेयंस चैनल को क्षतिग्रस्त हुआ है। बॉटम कन्वेयंस चैनल के तल में भी बहुत कटाव हुआ है। बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि कुछ क्रेट्स भी पानी में बह गए। इससे परियोजना की संरचनाओं को नुकसान पहुंचने के साथ मौके पर काफी मलबा भी जमा हो गया है। रात में बादल फटने के बाद क्षेत्र के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। प्रशासन और स्थानीय लोगों से अपील की जा रही है कि वे खड्डों और नदी-नालों के पास न जाएं। मौसम को देखते हुए सभी को सतर्क रहने को कहा गया है। शिमला में भी सुबह से खराब बना हुआ है मौसम वहीं शिमला समेत राज्य के ज्यादातर भागों में आज सुबह से ही मौसम खराब बना हुआ है। राज्य के कई भागों में आज भी हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग (IMD) ने कांगड़ा और सिरमौर में तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी कर रखा है। अन्य किसी भी जिले में कोई चेतावनी नहीं है। धर्मशाला में 30.2 मिमी बारिश बीती रात में धर्मशाला में सबसे ज्यादा 30.2 मिमी, बिलासपुर में 21.4 मिमी, पालमपुर 12.0, कांगड़ा 7.8 और कसोल में 7.0 मिमी बारिश हुई। IMD के अनुसार, रविवार से मानसून कमजोर पड़ जाएगा। इसके बाद 10 सितंबर तक किसी भी जिले में बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। इस दौरान कुछेक भागों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। ज्यादातर क्षेत्रों में मौसम साफ या हल्के बादल छाए रहने का पूर्वानुमान है। इससे ज्यादातर शहरों के तापमान में दो से तीन डिग्री का उछाल आएगा। मानसून में सामान्य से 9% कम बारिश हिमाचल में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 9% कम बारिश हुई है। चंबा में सामान्य से 2% कम, हमीरपुर में 30% कम, कांगड़ा में 3%, किन्नौर में 3%, लाहौल-स्पीति में 61%, मंडी में 15% और सोलन में 10% कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, चार जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। बिलासपुर में सामान्य से 13% ज्यादा, कुल्लू में 12%, शिमला में 15% और सिरमौर में 6% ज्यादा बारिश हुई है। ऊना में बारिश सामान्य रही। मानसून में 1,237 करोड़ की संपत्ति को नुकसान बेशक, मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश हुई है, लेकिन राज्य के कई भागों में सरकारी और प्राइवेट संपत्ति को काफी नुकसान हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDRF) के मुताबिक, राज्य में अब तक 1,237 करोड़ रुपए की संपत्ति को नुकसान हो चुका है, जबकि 267 लोगों की जान गई है।
  • हिमाचल में हरियाणा के युवक का म***र:च**ू मारा; 2 आरोपी गिरफ्तार, SP बोले- संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ाई पुलिस गश्त

    हिमाचल प्रदेश के सोलन में शुक्रवार देर शाम को एक युवक का चाकू से मर्डर कर दिया गया। मृतक की पहचान हरियाणा के कालका निवासी अमन (24) के तौर पर हुई है। पुलिस ने मामले में सोलन निवासी आरोपी मंथन और अंकुश को गिरफ्तार कर हत्या का मुकद्दमा दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 8:30 बजे चौक बाजार में कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई। देखते ही देखते विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। पुलिस के अनुसार, मंथन ने अमन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर घायल हो गया। झगड़े के दौरान आरोपी मंथन की उंगली भी कट गई। बीच-बचाव करने आए अंकुश को भी चोटें लगीं। घटना के बाद स्थानीय लोग तीनों युवकों को घायल अवस्था में क्षेत्रीय अस्पताल सोलन लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने अमन को मृत घोषित कर दिया। दोनों में किसी बात को लेकर पहले हो चुका था विवाद मृतक अमन हरियाणा के कालका का रहने वाला है। वह टैक्सी चलाता था। पुलिस के अनुसार- घटना से एक दिन पहले दोनों युवकों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था और घटना से कुछ देर पहले एक पक्ष पुलिस चौकी में पहुंचा था। दोनों आरोपी गिरफ्तार: एसपी एसपी सोलन टी साई वर्मा ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों आरोपी मंथन व अंकुश को गिरफ्तार किया। दोनों को प्राथमिक इलाज के बाद पुलिस सदर थाना ले गई है। इन्हें आज कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग की जाएगी। उन्होंने बताया कि युवकों में झगड़े की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। सोलन अस्पताल में होगा पोस्टमार्टम आरोपियों से पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किस बात को लेकर लड़ाई हुई थी। पुलिस ने मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी है। शनिवार को सोलन अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। इसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल सोलन शहर में 24 घंटे के भीतर दो बड़ी वारदातें हुई हैं। इससे पहले गुरुवार रात को एक व्यक्ति के सिर पर बिलचे से हमला किया गया, जिससे शराब के ठेके में काम करने वाला सेल्समैन गंभीर रूप से घायल हो गया। अब उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है। इस मामले में भी पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। एसपी ने कहा कि शहर में इस तरह की घटनाओं को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी। संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां पुलिस की तैनाती भी की जाएगी।