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  • CM सुक्खू के जिला का हाल: 3 सचिवों संग पंचायत घर में जाम छलका रही थी महिला प्रधान!

    CM सुक्खू के जिला का हाल: 3 सचिवों संग पंचायत घर में जाम छलका रही थी महिला प्रधान!

    सीएम सुक्खू के गृह जिला की पंचायत से सामने आया मामला, पुलिस कर रही जांच

    हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर में पंचायत कार्यालय से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। विकासखंड सुजानपुर के तहत भेरड़ा पंचायत में अवकाश के दिन पंचायत कार्यालय के भीतर चार लोगों की मौजूदगी और कथित तौर पर शराब के सेवन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले को लेकर पंचायत प्रधान अनु देवी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

    शिकायत में पंचायत कार्यालय के भीतर स्थानीय पंचायत सचिव समेत दो अन्य सचिवों और एक अन्य पंचायत की महिला प्रधान के मौजूद होने तथा शराब का सेवन किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, शराब सेवन के आरोपों की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और मौके पर मौजूद चारों लोगों का मेडिकल करवाया गया है।

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    मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और पंचायत कार्यालय में छुट्टी के दिन चार लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    भेरड़ा पंचायत की प्रधान अनु देवी के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली थी कि अवकाश के दिन पंचायत भवन में चार लोग मौजूद हैं। इसके बाद वह कुछ लोगों के साथ मौके पर पहुंचीं। वहां लोगों की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद विवाद की स्थिति पैदा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई। पंचायत प्रधान की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यालय में मौजूद लोगों ने शराब का सेवन किया था। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और चारों लोगों का मेडिकल परीक्षण करवाया।

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    मामले में पुलिस को पंचायत भवन के रेफ्रिजरेटर से बीयर के दो कैन भी मिले हैं। पुलिस ने इन्हें जांच के दायरे में शामिल कर लिया है। हालांकि, केवल बीयर के कैन बरामद होने से यह साबित नहीं होता कि मौके पर मौजूद चारों लोगों ने ही उनका सेवन किया था। यही कारण है कि पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना रही है।

    हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर चारों लोगों का मेडिकल करवाया गया है। पंचायत घर में रखे रेफ्रिजरेटर से बीयर के दो कैन भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने बरामद सामग्री को जांच में शामिल किया है और मामले के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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    घटनाक्रम से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर और ज्यादा चर्चा में आ गया है। वीडियो में पंचायत कार्यालय में लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई देने वाली परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में यह भी जांच का विषय है कि आखिर छुट्टी के दिन पंचायत भवन में चारों लोग किस उद्देश्य से मौजूद थे। क्या वहां कोई आधिकारिक काम चल रहा था या निजी तौर पर लोग एकत्रित हुए थे, पुलिस इन तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।

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    फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी मेडिकल रिपोर्ट मानी जा रही है। शिकायत में शराब सेवन के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। पुलिस मेडिकल रिपोर्ट, पंचायत प्रधान की शिकायत, मौके से बरामद बीयर के कैन, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध तथ्यों को आधार बनाकर जांच आगे बढ़ा रही है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत कार्यालय में मौजूद लोगों ने शराब का सेवन किया था या नहीं।

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    भेरड़ा पंचायत का यह मामला अब केवल चार लोगों की मौजूदगी तक सीमित नहीं रह गया है। पंचायत कार्यालय जैसे सार्वजनिक संस्थान में कथित शराब सेवन के आरोप सामने आने से सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली और मर्यादा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

  • CM सुक्खू के जिला का हाल: 3 सचिवों संग पंचायत घर में जाम छलका रही थी महिला प्रधान! FIR दर्ज

    CM सुक्खू के जिला का हाल: 3 सचिवों संग पंचायत घर में जाम छलका रही थी महिला प्रधान! FIR दर्ज

    सीएम सुक्खू के गृह जिला की पंचायत से सामने आया मामला, पुलिस कर रही जांच

    हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर में पंचायत कार्यालय से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। विकासखंड सुजानपुर के तहत भेरड़ा पंचायत में अवकाश के दिन पंचायत कार्यालय के भीतर चार लोगों की मौजूदगी और कथित तौर पर शराब के सेवन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले को लेकर पंचायत प्रधान अनु देवी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

    शिकायत में पंचायत कार्यालय के भीतर स्थानीय पंचायत सचिव समेत दो अन्य सचिवों और एक अन्य पंचायत की महिला प्रधान के मौजूद होने तथा शराब का सेवन किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, शराब सेवन के आरोपों की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और मौके पर मौजूद चारों लोगों का मेडिकल करवाया गया है।

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    मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और पंचायत कार्यालय में छुट्टी के दिन चार लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    भेरड़ा पंचायत की प्रधान अनु देवी के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली थी कि अवकाश के दिन पंचायत भवन में चार लोग मौजूद हैं। इसके बाद वह कुछ लोगों के साथ मौके पर पहुंचीं। वहां लोगों की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद विवाद की स्थिति पैदा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई। पंचायत प्रधान की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यालय में मौजूद लोगों ने शराब का सेवन किया था। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और चारों लोगों का मेडिकल परीक्षण करवाया।

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    मामले में पुलिस को पंचायत भवन के रेफ्रिजरेटर से बीयर के दो कैन भी मिले हैं। पुलिस ने इन्हें जांच के दायरे में शामिल कर लिया है। हालांकि, केवल बीयर के कैन बरामद होने से यह साबित नहीं होता कि मौके पर मौजूद चारों लोगों ने ही उनका सेवन किया था। यही कारण है कि पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना रही है।

    हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर चारों लोगों का मेडिकल करवाया गया है। पंचायत घर में रखे रेफ्रिजरेटर से बीयर के दो कैन भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने बरामद सामग्री को जांच में शामिल किया है और मामले के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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    घटनाक्रम से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर और ज्यादा चर्चा में आ गया है। वीडियो में पंचायत कार्यालय में लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई देने वाली परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में यह भी जांच का विषय है कि आखिर छुट्टी के दिन पंचायत भवन में चारों लोग किस उद्देश्य से मौजूद थे। क्या वहां कोई आधिकारिक काम चल रहा था या निजी तौर पर लोग एकत्रित हुए थे, पुलिस इन तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।

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    फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी मेडिकल रिपोर्ट मानी जा रही है। शिकायत में शराब सेवन के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। पुलिस मेडिकल रिपोर्ट, पंचायत प्रधान की शिकायत, मौके से बरामद बीयर के कैन, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध तथ्यों को आधार बनाकर जांच आगे बढ़ा रही है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत कार्यालय में मौजूद लोगों ने शराब का सेवन किया था या नहीं।

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    भेरड़ा पंचायत का यह मामला अब केवल चार लोगों की मौजूदगी तक सीमित नहीं रह गया है। पंचायत कार्यालय जैसे सार्वजनिक संस्थान में कथित शराब सेवन के आरोप सामने आने से सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली और मर्यादा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

  • CM सुक्खू के जिले में हुआ खेला: एक वोट से पलटा गेम – भाजपा ने कब्जाई अध्यक्ष की कुर्सी..

    CM सुक्खू के जिले में हुआ खेला: एक वोट से पलटा गेम – भाजपा ने कब्जाई अध्यक्ष की कुर्सी..

    बिझड़ी ब्लाक विकास समिति चुनाव में हुआ बड़ा राजनीतिक उलटफेर

    हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला में आज एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। जहां सिर्फ एक वोट के चलते कांग्रेस को बीडीसी चुनाव में अध्यक्ष पद की कुर्सी नसीब ना हो सकी। मामला हमीरपुर के बड़सर उपमंडल का है। यहां बिझड़ी ब्लाक विकास समिति (बीडीसी) के चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाना था। मगर यहां आखिरी वक्त में राजनीतिक समीकरण कुछ इस तरह से बदले कि भाजपा भी हैरान रह गई। 

    तो, पिछले तीन महीनों से बिझड़ी बीडीसी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव लटका हुआ था। इस दौरान भाजपा की तरफ से लगातार इस बात का दावा किया जा रहा था कि उनके पास कुल 18 सदस्यों का समर्थन है। इसी कारण से इस चुनाव लटकाया जा रहा है। 

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    बहरहाल, आज जब शनिवार को वोटिंग का दिन आया तो भाजपा का दावा बुरी तरह से फेल होता नजर आया। हालांकि, नतीजा फिर भी भाजपा के पक्ष में रहा और भाजपा के समर्थन वाले सिर्फ के वोट से जीतने में सफल हो गए। मगर इसमें चौंकाने वाली बात ये रही कि उन्हें केवल 12 सदस्यों का ही वोट हासिल हो सका और उनके विपक्ष में खड़े हुए राजेश मांगा 11 वोट पाकर भी चुनाव हार गए। 

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    वहीं, अध्यक्ष पद के चुनाव में मुंह की खाने के बाद कांग्रेस के खेमे में संतोष इस बात का रहा कि उपाध्यक्ष पद की कुर्सी उनके खाते में आई। भाजपा समर्थित उम्मीदवार पंकज मांगा को कांग्रेस के सपोर्ट वाले पवन शर्मा ने ठीक उसी तरह से हराया जैसा अध्यक्ष पद की रेस में हुआ था। उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में 12 वोट पड़े और भाजपा उम्मीदवार 11 सदस्यों का समर्थन पाते हुए भी चुनाव हार गए। 

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    आपको बता दें कि अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने वाले रमेश शर्मा भाजपा से सम्बन्ध रखने वाले पूर्व विधायक बलदेव शर्मा के खासम ख़ास लोगों में गिने जाते हैं। वहीं, उपाध्यक्ष पद की कुर्सी कब्जाने वाले पवन शर्मा कांग्रेस के पूर्व विधायक सुभाष डढवालिया के समर्थक हैं। ऐसे में इस चुनाव को दो राजनीतिक ध्रुवों के टकराव के रूप में देखा जा रहा था। 

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    वहीं, ये चुनाव मुख्यमंत्री के गृह जिले से जुड़ा था इसलिए इसकी राजनीतिक अहमियत और अधिक बढ़ गई थी। हालांकि, चुनाव में हो रही देरी के बीच भाजपा की तरफ से जिन 18 सदस्यों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा था। वो दावा आखिर समय पर फुस्स साबित हुआ। वहीं, उपाध्यक्ष पद के चुनाव में जीते कांग्रेस समर्थित पवन शर्मा को तो सिर्फ 6 वोट ही मिलने वाले थे। मगर जब आखिर वक्त में उन्हें एक्स्ट्रा वोट पड़ गए, तो सभी की हैरत हुई और इसी बात ने अब इस चुनाव को चर्चाओं में ला दिया है।

  • हिमाचल: एक गांव से निकली 3-3 अ*र्थियां, चीखों से दहला इलाका; रात भर खाई में पड़े रहे थे तीनों युवक

    हिमाचल: एक गांव से निकली 3-3 अ*र्थियां, चीखों से दहला इलाका; रात भर खाई में पड़े रहे थे तीनों युवक

    एक युवक अपने परिवार का था इकलौटा सहारा, तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

    शाहपुर कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शुक्रवार देर रात हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक साथ तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के दरिणी इलाके में भलेड़ पावर हाउस के समीप एक बाइक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में बाइक सवार एक ही गांव के तीन युवकों की मौत हो गई।

    सबसे दर्दनाक बात यह रही कि हादसा रात के अंधेरे और खराब मौसम के बीच हुआ और इसकी जानकारी कई घंटे तक किसी को नहीं मिल पाई। तीनों युवक खाई में पड़े रहे। शनिवार सुबह सड़क से गुजर रहे लोगों की नजर जब नीचे खाई में पड़ी बाइक और टूटी झाड़ियों पर गई, तब इस भयावह हादसे का पता चला।

    बताया जा रहा है कि तीनों युवक शुक्रवार रात किसी धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए घर से निकले थे। कार्यक्रम से लौटते समय भलेड़ के समीप पहाड़ी सड़क पर बाइक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। रात का अंधेरा, बारिश और पहाड़ी रास्ते की मुश्किल परिस्थितियां ऐसी थीं कि हादसे के बाद किसी को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। बाइक के साथ तीनों युवक खाई में जा गिरे और रातभर वहीं पड़े रहे।

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    शनिवार सुबह एक वाहन चालक की नजर सड़क किनारे टूटी झाड़ियों और नीचे खाई में पड़ी बाइक पर गई। शक होने पर उसने वाहन रोका और स्थानीय लोगों को मौके पर बुलाया। जब लोग नीचे खाई में पहुंचे तो वहां तीन युवक गंभीर हालत में पड़े मिले। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और स्थानीय लोगों की मदद से तीनों को शाहपुर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

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    धर्मशाला में पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही तीनों युवकों के शव उनके घर पहुंचे तो परिवार की चीखों से पूरा इलाका दहल उठा। अपने लाडलों के शव देख कर उनके परिजन फूट फूट कर रोए। परिवार की चीखों को सुन वहां मौजूद हर शख्स की आंख नम हो गई। सबसे दर्दनाक पहलू उस समय सामने आया, जब एक ही गांव से तीन तीन अर्थियां निकली। एक साथ तीन अर्थियां उठना पूरे क्षेत्र के लिए बेहद पीड़ादायक दृश्य रहा। गांव का कोई ऐसा घर नहीं था जहां इस हादसे की चर्चा के दौरान आंखें नम न हुई हों।

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    मृतकों की पहचान अशोक कुमार (38) पुत्र जोगिंद्र पाल, प्रिंस पुत्र पूरन चंद और पवन कुमार पुत्र केवल कुमार निवासी सल्लि चनैला वार्ड.4 तहसील दरिणी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अशोक कुमार के घर में उसके बेटा बेटी के अलावा माता पिता और दो बहनें हैं। जबकि पवन के घर में माता पिता और भाई है। वहीं इस हादसे में जान गंवाने वाला प्रिंस अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसने हाल ही में जमा दो की परीक्षा पास की थी। प्रिंस के घर में माता पिता और एक बहन है। 

    हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया शाहपुर नागरिक अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और इस दुख की घड़ी में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने प्रशासन से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध करवाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।

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    पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हादसे के कारणों को लेकर पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर खराब मौसम, बारिश, सड़क पर फिसलन और पहाड़ी मोड़ को हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि हादसे की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी। पुलिस ने वाहन चलाने में लापरवाही और हादसे से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • हिमाचल: छोटे से गांव का रितेश भारतीय सेना में बना लेफ्टिनेंट, कंधे पर सितारे सजाते भावुक हुए माता-पिता

    हिमाचल: छोटे से गांव का रितेश भारतीय सेना में बना लेफ्टिनेंट, कंधे पर सितारे सजाते भावुक हुए माता-पिता

    पिता को वर्दी में देख जागा देश सेवा का जुनून कड़ी मेहनत से पूरा किया बचपन का सपना

    भवारना (कांगड़ा)। वीरभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश की मिट्टी में देश सेवा का जज्बा मानो पीढ़ियों से रचा-बसा है। गांवों से निकलने वाले कई युवा सीमित संसाधनों और तमाम चुनौतियों के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और जुनून के दम पर भारतीय सेना में जगह बनाकर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। इसी गौरवशाली परंपरा में कांगड़ा जिले के भवारना क्षेत्र के एक और युवा ने अपना नाम दर्ज करवाया है।

    अटियाला दाई के 23 वर्षीय रितेश राणा ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने बचपन के सपने को साकार किया है, बल्कि अपने परिवार और पूरे क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया है। चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आयोजित पासिंग आउट परेड में रितेश ने भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। अब रितेश देश की सेवा का अपना नया सफर 16 मद्रास रेजिमेंट के साथ शुरू करेंगे।

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    रितेश राणा का सेना में जाने का सपना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। बचपन से ही उनके मन में भारतीय सेना की वर्दी पहनने और देश की सेवा करने की इच्छा थी। इस सपने को मजबूत करने में उनके परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि की बड़ी भूमिका रही। रितेश के पिता विक्रम सिंह भारतीय सेना की 6 जैक राइफल्स में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पिता को लंबे समय तक देश की सेवा करते हुए देखकर रितेश ने भी तय कर लिया था कि वह एक दिन सेना की वर्दी पहनेंगे और अधिकारी बनकर देश की सेवा करेंगे।

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    रितेश ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मरूंह और ठाकुरद्वारा के निजी स्कूलों से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह महाराष्ट्र के पुणे पहुंचे। पुणे में उन्होंने विज्ञान विषय में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा हासिल करने के साथ-साथ उनके मन में सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य लगातार कायम रहा। शैक्षणिक उपलब्धियों और सैन्य सेवा के सपने को साथ लेकर रितेश ने कड़ी मेहनत की और आखिरकार वह मुकाम हासिल कर लिया जिसका सपना उन्होंने बचपन में देखा था।

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    चेन्नई में आयोजित पासिंग आउट परेड रितेश के लिए ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण पल रहा। सैन्य प्रशिक्षण की कठिन प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब रितेश ने अधिकारी के रूप में कमीशन हासिल किया तो परिवार की वर्षों की उम्मीद और उनकी मेहनत एक उपलब्धि में बदल गई। रितेश के लेफ्टिनेंट बनने की खबर जैसे ही उनके पैतृक क्षेत्र में पहुंची, बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

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    रितेश की सफलता में उनके पिता की सैन्य पृष्ठभूमि की झलक साफ दिखाई देती है। जिस वर्दी को उनके पिता ने वर्षों तक पहनकर देश की सेवा की, उसी वर्दी को अब उनका बेटा अधिकारी के रूप में पहनने जा रहा है। यह उपलब्धि परिवार के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि रितेश ने अपने पिता से प्रेरणा लेकर सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित किया और उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की। उनकी माता रजनी कुमारी गृहिणी हैं, जबकि बहन ममता राणा विवाहित हैं।

    लेफ्टिनेंट बनने के बाद रितेश राणा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और गुरुजनों को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के बिना यह उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं था। उन्होंने अपने माता-पिता, बहन, स्वर्गीय दादा अमीन चंद, दादी सरस्वती देवी और गुरुजनों के योगदान को विशेष रूप से याद किया। रितेश के अनुसार, परिवार से मिला संस्कार और मार्गदर्शन ही उन्हें अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ाता रहा।

  • हिमाचल-डिप्टी CM के सुरक्षा अधिकारी की गाड़ी का टायर फटा:खेतों में पलटने से बाल-बाल बचे; उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिली

    हिमाचल के डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री के मुख्य सुरक्षा अधिकारी DSP बिन्नी मिन्हास की बोलेरो गाड़ी का टायर फट गया। इससे गाड़ी अनियंत्रित होकर हरोली-रामपुर पुल के पास खेतों में जा गिरी। इस हादसे में बिन्नी मिन्हास बाल-बाल बच गए। उन्हें इलाज के लिए रीजनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। यह घटना शनिवार को हुई, जब डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री हरोली विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। डीएसपी बिन्नी मिन्हास की गाड़ी उनके काफिले में शामिल थी। हरोली-रामपुर पुल के पास अचानक टायर फटने से गाड़ी खेतों में जा गिरी। इस हादसे में बिन्नी मिन्हास सुरक्षित रहे। गाड़ी के चालक को कोई चोट नहीं आई है। हादसे की खबर मिलते ही डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री अपना दौरा बीच में छोड़कर रीजनल अस्पताल ऊना पहुंचे। उन्होंने बिन्नी मिन्हास का हालचाल पूछा और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। डॉक्टरों ने उनका सीटी स्कैन और अन्य जरूरी जांचें कीं। डॉक्टरों ने बताया कि बिन्नी मिन्हास को कोई गंभीर चोट नहीं आई है। इसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। एक घंटे तक रीजनल अस्पताल में रहे डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री करीब एक घंटे तक रीजनल अस्पताल में मौजूद रहे। वह लगातार डॉक्टरों से बिन्नी मिन्हास के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेते रहे। अपने सुरक्षा अधिकारी की जांच पूरी होने तक डिप्टी सीएम अस्पताल में ही रुके रहे।
  • ‘कानों पर जू नहीं रेंगती?’: ‘मेरे से ज्यादा अच्छी एक्टिंग तो आप लोग करते हैं’, कंगना ने अफसरों को लगाई फटकार

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    हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रणाैत जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में अधिकारियों पर जमकर बरसीं। सांसद निधि और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और स्वीकृत राशि खर्च नहीं  होने पर उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा कि फालतू के जुमले और स्पष्टीकरण नहीं, धरातल पर काम चाहिए। कंगना ने कहा कि बैठकों में बार-बार वही बातें दोहराई जा रही हैं, लेकिन जमीन पर काम नजर नहीं आ रहा। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उन्हें एक दिन के लिए प्रशासनिक काम संभालने का मौका मिले तो सभी लंबित फाइलों का निपटारा कर देंगी।


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    स्वीकृत राशि का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं हो पाया: कंगना

    कंगना ने कहा कि केंद्र सरकार से मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए करीब 11 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, लेकिन इसका आधा हिस्सा भी खर्च नहीं हो पाया। मार्च-अप्रैल की समीक्षा में 5.50 करोड़ रुपये में से महज 50 से 60 लाख रुपये ही खर्च हुए थे। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर दिशा बैठक में एक जैसी स्थिति सामने आ रही है। हम एक ही जगह खड़े हैं और सर्किल में घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया में भी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं और पूरे देश में मजाक बन रहा है। अधिकारियों पर तंज कसते हुए सांसद ने कहा कि उनसे अच्छी एक्टिंग तो बैठक में बैठे अधिकारी कर लेते हैं।

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    विकास कार्य लटकाने वाले विभागों को भी आड़े हाथों लिया

    सांसद ने भू-अधिग्रहण, परमिशन और एनओसी के नाम पर विकास कार्य लटकाने वाले विभागों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्य के लिए पैसा लिया गया है तो काम शुरू होना चाहिए अन्यथा राशि वापस की जाए। जिन लोगों ने सरकारी पैसा लेने के बावजूद जमीन या अनुमति की समस्या के कारण काम शुरू नहीं किया है, उनसे राशि तत्काल वापस लेने के निर्देश दिए। उन्होंने फर्जी तरीके से सरकारी पैसा लेने वालों पर जुर्माना लगाने और उन्हें सांसद निधि के कार्यों से हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट करने को कहा। कंगना ने कहा कि किसी काम को एक-दो महीने या सालभर तक अटकाए रखना स्वीकार्य नहीं है। कार्य शुरू करने के लिए एक सप्ताह का समय पर्याप्त है।

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    बीडीओ को खड़ा कर पूछा – वेतन किस बात का?

    सांसद ने खंड विकास अधिकारियों और संबंधित स्टाफ को खड़ा कर जवाबदेही तय की। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि वेतन लेने के बावजूद काम जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा। कंगना ने कहा कि दो साल के कार्यों में औसतन 50 प्रतिशत प्रगति होना गंभीर स्थिति है। उन्होंने अब प्रत्येक अधिकारी की क्षेत्रवार और प्रतिशतवार प्रगति रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें 60, 40 और 20 प्रतिशत तक काम करने वाले अधिकारियों की अलग-अलग रिपोर्ट तैयार होगी। खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के नाम रिकॉर्ड में दर्ज कर रिपोर्ट सीधे केंद्र सरकार को भेजने की बात कही। देखें वीडियो…

     

    बैठक में पहुंचे सिर्फ तीन विधायक

    बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूलों में बच्चों की लगातार घटती संख्या को लेकर भी सवाल किए गए। सांसद ने केंद्र सरकार की योजनाओं के संचालन के दौरान स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी या बढ़ोतरी का तुलनात्मक डाटा अगली बैठक में पेश करने के निर्देश दिए।  दिशा समिति की बैठक में भाजपा के बल्ह विधायक इंद्र सिंह गांधी, द्रंग विधायक पूर्ण चंद ठाकुर और सरकाघाट विधायक दलीप ठाकुर ही मौजूद रहे। अन्य विधायकों के बैठक में न पहुंचने पर सांसद कंगना रणौत नाराज नजर आईं। उन्होंने कहा कि विधायक अपनी राजनीति में व्यस्त हैं और उन्हें लोगों की चिंता नहीं है। उन्होंने जनहित के कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।

    कंगना बोलीं- कांग्रेस सरकार ने प्रदेश का बेड़ा गर्क करके रख दिया

    भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रणाैत ने एक बार फिर प्रदेश सरकार पर जुबानी हमला बोला है। मंडी में दिशा कमेटी की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कंगना ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने प्रदेश का बेड़ा गर्क करके रख दिया है। उनके पास लोग प्रदेश सरकार की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। सरकार और अधिकारियों में कोई तालमेल नहीं और दोनों ही पूरी तरह से फेल हो गए हैं। प्रदेश सरकार केंद्र के खिलाफ साजिशें रचने का काम कर रही है। केंद्र की योजनाओं को यहां सही ढंग से अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। जो कुछ योजनाएं चल रही हैं उनपर कांग्रेसी अपने नाम के फट्टे लगा रहे हैं। कंगना ने कहा कि अगर श्रेय ही चाहिए तो विकास कार्यों पर अड़ंगा मत लगाइए।  कंगना ने कहा कि दिशा कमेटी की बैठकों से कांग्रेसी विधायक नदारद रह रहे हैं। बहुत सी छोटी-छोटी बातों का विधायकों को ही पता होता है। यदि वे आकर नहीं बताएंगे तो फिर बात नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार और इसके विधायकों को सिर्फ घटिया राजिनीति आती है और वे वही कर रहे हैं।


    स्थानीय विधायकों पर जनहित के कार्यों में रुचि न लेने का आरोप लगाया

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कंगना ने कहा कि करीब 75 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना समेत कई परियोजनाओं में अड़चनें आ रही हैं। उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार और स्थानीय विधायकों पर जनहित के कार्यों में रुचि न लेने और शिलान्यास की राजनीति करने का आरोप लगाया। कंगना ने प्रशासनिक स्तर पर बाबू संस्कृति और सुस्ती को केंद्रीय योजनाओं के प्रभावित होने का कारण बताया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा दीवारों और बुनियादी सुविधाओं का काम भी अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। सांसद ने चेतावनी दी कि अगली दिशा बैठक से पहले जमीन पर बदलाव दिखाई देना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर लापरवाह अधिकारियों की रिपोर्ट केंद्र सरकार के समक्ष रखी जाएगी।

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  • हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: नियमितीकरण के बाद पूरी अनुबंध सेवा होगी मान्य, तीन माह में बकाया वित्तीय लाभ

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    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के हित में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारियों की नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत विज्ञापन जारी कर, पूरी चयन प्रक्रिया अपनाकर और स्वीकृत पदों पर की गई है, तो नियमितीकरण के बाद उनकी पूरी अनुबंध अवधि को सेवा लाभों के लिए गिना जाएगा। इसमें वरिष्ठता, सालाना वेतन वृद्धि, वेतन निर्धारण, पदोन्नति और पेंशन संबंधी लाभ शामिल हैं। न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई थी ऐसे में अनुबंध अवधि को सेवा लाभों से अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता समय रहते न्यायालय की शरण में आए थे, इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से देय सभी वित्तीय लाभ दिए जाएं।


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    अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर कर्मचारियों के बकाया वित्तीय लाभ का भुगतान किया जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। यह फैसला मनोज कुमार, अजय कुमार और भूपेंद्र पाल की ओर से दायर विभिन्न याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2010 में जारी विज्ञापन के आधार पर भाषा अध्यापक, टीजीटी (मेडिकल) और ड्रॉइंग मास्टर के पदों के लिए आवेदन किया था। उन्होंने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत आयोजित लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की थी। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें तत्काल नियमित नियुक्ति देने के बजाय वर्ष 2012 में 13,500 रुपये के निश्चित वेतन पर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया। बाद में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं, लेकिन अनुबंध अवधि को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों में शामिल नहीं किया गया। इसी को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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    बिना परमिट-फिटनेस वाहन चलाना बीमा शर्तों का मूलभूत उल्लंघन : हाईकोर्ट

     प्रदेश हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना दावों से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी परिवहन (कमर्शियल) वाहन बिना वैध रूट परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के सार्वजनिक स्थान पर चलाया जाता है, तो यह बीमा पॉलिसी की शर्तों का मूलभूत उल्लंघन माना जाएगा। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में इंश्योरेंस कंपनी को सीधे तौर पर उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि मुआवजे की असली देनदारी वाहन मालिक की होगी। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर एक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पे एंड रिकवर (भुगतान और वसूली) के सिद्धांत के तहत यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए इंश्योरेंस कंपनी पहले क्लेम की राशि का भुगतान करेगी और बाद में बिना कोई नया मुकदमा दायर किए, सीधे निष्पादन अदालत के जरिए वाहन मालिक से पूरी राशि वसूल कर सकेगी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरटीओ कुल्लू के रिकॉर्ड से यह तथ्य सामने आया कि दुर्घटनाग्रस्त टाटा सूमो एक कमर्शियल मैक्सी कैब के रूप में पंजीकृत थी। इस वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट 6 जुलाई 2005 को ही खत्म हो चुका था और इसका रूट परमिट भी 7 अगस्त 2008 तक ही वैध था। इसके बावजूद,साल 2013 में बिना किसी दस्तावेज के इस गाड़ी को सड़कों पर दौड़ाया जा रहा था। अदालत ने कहा कि कोई भी मालिक यात्रियों, पैदल चलने वालों और आम जनता की जान-माल को जोखिम में डालकर ऐसे वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं दे सकता।

     

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  • हिमाचल: परिवार ने खो दी 27 साल की बेटी, चूड़धार यात्रा पर गई थी – 300 मीटर गहरी खाई में गिरी

    हिमाचल: परिवार ने खो दी 27 साल की बेटी, चूड़धार यात्रा पर गई थी – 300 मीटर गहरी खाई में गिरी

    दो साथियों के साथ चूड़धार यात्रा पर गई थी युवती, रास्ते में पैर फिसलने से खाई में गिरी

    शिमला। हिमाचल प्रदेश के एक परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब धार्मिक यात्रा पर निकली उनकी 27 वर्षीय बेटी की एक दर्दनाक हादसे में जान चली गई। चूड़धार की यात्रा पर अपने दो साथियों के साथ निकली प्रेषिता मेहता को शायद इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस यात्रा पर वह श्रद्धा और आस्था के साथ निकली है, वही उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित हो जाएगी।

    जानकारी के अनुसार प्रेषिता मेहता पुत्री शैलेंद्र मेहता, निवासी गांव चायल डूबलू, जिला शिमला, शनिवार सुबह चूड़धार की ओर रवाना हुई थीं। उनके साथ एक युवक और एक अन्य युवती भी यात्रा कर रहे थे। बताया जा रहा है कि तीनों यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ रहे थे। मंडाहलाणी से कुछ आगे पहुंचने के बाद रास्ते में अचानक प्रेषिता का पैर फिसल गया। पहाड़ी क्षेत्र का कठिन और ढलानदार रास्ता होने के कारण वह खुद को संभाल नहीं सकीं और गहरी खाई में जा गिरीं। कुछ ही पलों में खुशियों और धार्मिक यात्रा का माहौल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया।

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    हादसा इतना गंभीर था कि प्रेषिता करीब 300 मीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरीं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और उनके साथियों ने किसी तरह उन्हें खाई से बाहर निकालने का प्रयास किया। घायल अवस्था में उन्हें उपचार के लिए नागरिक अस्पताल चौपाल ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रेषिता की मौत की खबर सामने आते ही यात्रा मार्ग पर मौजूद लोगों में भी शोक की लहर दौड़ गई।

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    जिस बेटी के सुरक्षित लौटने का परिवार इंतजार कर रहा था, उसके बजाय अस्पताल से उसकी मौत की खबर पहुंची। हादसे की सूचना पुलिस और परिजनों को दी गई। बेटी की मौत की खबर सुनते ही परिवार में मातम पसर गया। जिस प्रेषिता के साथ परिवार ने भविष्य के अनगिनत सपने संजोए थे, उसकी अचानक हुई मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस हादसे की परिस्थितियों और इसके कारणों की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार हादसा रास्ते में अचानक पैर फिसलने के कारण हुआ। पुलिस घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

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    चूड़धार क्षेत्र की यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ कठिन पहाड़ी रास्तों से भी जुड़ी है। ऐसे मार्गों पर कई स्थानों पर ढलान, संकरे रास्ते और गहरी खाइयां होती हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए बेहद सतर्क रहना जरूरी है। प्रेषिता के साथ हुआ हादसा एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा करता है कि कठिन पहाड़ी यात्रा मार्गों पर सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी और प्रभावी इंतजाम कितने जरूरी हैं।

  • वीडियो: सांसद कंगना रणाैत ने विकास कार्यों में देरी पर अधिकारियों को लगाई फटकार

    वीडियो: सांसद कंगना रणाैत ने विकास कार्यों में देरी पर अधिकारियों को लगाई फटकार