Category: himachal

  • HRTC बस पहाड़ी से टकराई, 16 यात्री घायल:कुल्लू में ब्रेक फेल होने से हादसा; ड्राइवर की सूझबूझ से टली घटना

    कुल्लू में रक्षाबंधन के दिन एक सड़क हादसा हुआ। कुल्लू-भेखली-ब्यासर मार्ग पर बजोहन के पास हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की एक बस अनियंत्रित होकर पहाड़ी से टकरा गई। इस दुर्घटना में बस में सवार 16 यात्री घायल हो गए, जिनमें से 4 की हालत गंभीर है। बस में 20 यात्री सवार थे। ब्रेक फेल होने के बाद ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को ढांक से टकराकर रोक दिया। हादसे के तुरंत बाद लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। उन्होंने प्रशासन को घटना की सूचना दी। जानकारी मिलते ही 108 एम्बुलेंस और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। घायलों को अस्पताल में करवाया भर्ती घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) कुल्लू के अनुसार, घटना की जानकारी बस अड्डा प्रभारी खूब राम से प्राप्त हुई थी।
  • हिमाचल: बहू ने बांधे हाथ…. कलियुगी बेटे ने आंखों में डाला मिर्ची पाउडर, फिर बुजुर्ग पिता की जमकर…..

    हिमाचल: बहू ने बांधे हाथ…. कलियुगी बेटे ने आंखों में डाला मिर्ची पाउडर, फिर बुजुर्ग पिता की जमकर…..

    देवभूमि हिमाचल में जमकर तार तार हुआ पिता पुत्र का रिश्ता

    मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जोगेंद्रनगर उपमंडल के मुशैहरा गांव में एक बुजुर्ग पिता ने अपने ही बेटे और बहू पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, बेटे ने पहले बुजुर्ग पिता की आंखों में मिर्ची पाउडर डाल दिया और फिर उन्हें बेरहमी से पीटा।

    आरोप है कि इस दौरान बहू ने भी पति का साथ दिया और बुजुर्ग के दोनों हाथ बांध दिए, ताकि वह अपना बचाव न कर सकें। घटना के बाद पीड़ित ने जोगेंद्रनगर पुलिस थाने का रुख किया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी बेटे और बहू के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, पीड़ित लेखराज रात के समय अपने कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान उनका बेटा राहुल वहां पहुंचा। आरोप है कि राहुल ने अचानक पिता की आंखों में मिर्ची पाउडर डाल दिया। आंखों में मिर्च पड़ने के बाद बुजुर्ग को तेज जलन होने लगी और कुछ समय के लिए उन्हें दिखाई देना भी मुश्किल हो गया। शिकायत के अनुसार, इसी स्थिति का फायदा उठाकर बेटे ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

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    पीड़ित पिता ने अपनी शिकायत में अपनी बहू ममता पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब बेटा उनके साथ मारपीट कर रहा था, उस दौरान बहू ने कथित तौर पर उनका साथ दिया और उनके दोनों हाथ बांध दिए। आरोप है कि हाथ बंधे होने के कारण बुजुर्ग खुद को बचाने में असमर्थ हो गए। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई।

    शिकायत के अनुसार, मारपीट के दौरान लेखराज के सिर पर गंभीर चोट लगी, जिससे काफी खून बहने लगा। बुजुर्ग ने आरोप लगाया है कि घटना के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी और आरोपी बेटे तथा बहू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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    जोगेंद्रनगर पुलिस ने लेखराज की शिकायत के आधार पर राहुल और ममता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

    जांच के दौरान पुलिस घटना के कारणों, मारपीट की परिस्थितियों और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की भी पड़ताल करेगी। मामले में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मंडी जिले के ग्रामीण क्षेत्र से सामने आई इस घटना ने पारिवारिक रिश्तों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस बेटे से बुजुर्ग माता-पिता बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद रखते हैं, उसी पर पिता के साथ कथित तौर पर मारपीट करने का आरोप लगा है। वहीं, बहू पर भी ससुर के हाथ बांधकर पति का साथ देने का आरोप सामने आया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

  • हिमाचल: धोखाधड़ी के मामले में जालंधर के आभूषण व्यापारियों की याचिका खारिज, जानें हाईकोर्ट के बड़े फैसले

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    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोने की किट्टी स्कीम के नाम पर हुई लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पंजाब (जालंधर) के आभूषण व्यापारियों की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश विरेंद्र सिंह की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए साफ किया है कि भले ही आरोपी व्यापारी जालंधर से अपना कारोबार चलाते हों, लेकिन उनके खिलाफ मुकदमा हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में ही चलेगा। भुंतर के आभूषण कारोबारी ने जालंधर की एक कंपनी के मालिकों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि पंजाब के इन व्यापारियों ने भुंतर आकर उन्हें एक किट्टी स्कीम में शामिल होने का लालच दिया था।


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    उसने स्कीम के तहत कुल 2,823 ग्राम सोना जमा कराया, जिसमें से आरोपियों ने 1,803 ग्राम तो वापस कर दिया, लेकिन बचा हुआ करीब 65,28,000 रुपये कीमत का 1,020 ग्राम सोना वापस नहीं किया। जालंधर के व्यापारियों ने पहले कुल्लू की अदालत में अर्जी लगाई थी कि उनका सारा कारोबार पंजाब में है, इसलिए कुल्लू कोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई का कानूनी अधिकार (क्षेत्राधिकार) नहीं है। निचली अदालत ने उनकी अर्जी को खारिज कर दिया। इसी आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने उनकी दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चूंकि इस मौखिक समझौते की शुरुआत और डील भुंतर (कुल्लू) स्थित नरेंद्र राणा की दुकान पर हुई थी, इसलिए इस मामले का मुख्य कारण हिमाचल में ही पैदा हुआ है।

    पक्षपात के आधार पर एथलीट को हॉस्टल से निकालने का आदेश रद्द

     प्रदेश हाईकोर्ट ने बिलासपुर स्पोर्ट्स हॉस्टल से एक युवा एथलीट को बाहर करने के राज्य खेल विभाग के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने फैसले में साफ किया कि कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि खिलाड़ी और कोच दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए थे, इसलिए उस कोच को स्क्रीनिंग कमेटी का हिस्सा नहीं होना चाहिए था।

    अदालत ने कहा कि जहां कोच और खिलाड़ी के बीच परस्पर आरोप थे, वहां उक्त कोच को निष्कासन कमेटी का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए था। केवल इसी आधार पर 16 जून 2026 का निष्कासन आदेश रद्द किया जाता है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को हॉस्टल से निकालने के 16 जून 2026 के आदेश को निरस्त कर दिया है।

     

    अदालत ने राज्य सरकार व खेल विभाग को निर्देश दिया है कि यदि वे खिलाड़ी के प्रदर्शन का पुनर्मूल्यांकन करना चाहते हैं, तो कानून के दायरे में निष्पक्ष सदस्यों की नई कमेटी का गठन करें। यह संपूर्ण प्रक्रिया अगले 3 सप्ताह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए गए हैं। याचिकाकर्ता अर्पितांश पाठक 7 जून 2024 को बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल में बतौर एथलीट चयनित हुए थे। वे बिलासपुर के एक स्कूल में 10+2 के छात्र हैं। खेल विभाग ने 16 जून 2026 को खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए उन्हें हॉस्टल से बाहर करने का आदेश जारी किया था। एथलीट ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि मई 2025 में याचिकाकर्ता ने अपने कोच के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके जवाब में कोच ने भी छात्र के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बावजूद, 1 अप्रैल 2026 को एथलीट के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी में उसी कोच को सदस्य बनाया गया।

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  • हिमाचल में टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल खत्म:जयराम ने जूस पिला समाप्त करवाया आंदोलन; परमिट अवधि बढ़ाने को लेकर किया प्रदर्शन

    शिमला के चौड़ा मैदान में परमिट अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर चल रही टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल समाप्त हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने धरनास्थल पर पहुंचकर ऑपरेटरों से बातचीत की और उनकी मांगों को सुना। इसके बाद उन्होंने जूस पिलाकर आंदोलन खत्म करवाया। टैक्सी ऑपरेटर लंबे समय से परमिट की अवधि बढ़ाने और वाहनों को फिटनेस के आधार पर संचालित करने की अनुमति देने की मांग कर रहे थे। उनकी मुख्य मांग है कि परमिट की अवधि 12 साल से बढ़ाकर 15 साल की जाए। ऑपरेटरों का तर्क है कि मौजूदा नियमों के कारण परमिट अवधि समाप्त होने के बाद उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है। परमिट अवधि पूरी होने के बाद भी, यदि वाहन फिटनेस मानकों पर खरा उतरता है, तो उसे सड़क पर चलाने की अनुमति दी जाए। जयराम ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा जयराम ठाकुर ने बताया कि उन्होंने टैक्सी ऑपरेटरों की इस मांग को विधानसभा में सरकार के समक्ष उठाया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी रखा जाएगा ताकि ऑपरेटरों को राहत मिल सके। ठाकुर ने जोर दिया कि यह केवल टैक्सी ऑपरेटरों के व्यवसाय का मामला नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। मौजूदा नियमों में भी बदलाव की मांग उन्होंने सरकार से ऑपरेटरों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। ऑपरेटरों ने हिमाचल प्रदेश में बस, ट्रक, ऑटो, मालवाहक और अन्य व्यावसायिक वाहनों के परमिट से संबंधित मौजूदा नियमों में भी बदलाव की मांग की है। व्यावसायिक वाहनों को अधिक अवधि तक चलाने की अनुमति ऑपरेटरों ने बताया कि अन्य राज्यों में व्यावसायिक वाहनों को अधिक अवधि तक चलाने की अनुमति है, और वे हिमाचल में भी ऐसी ही राहत चाहते हैं। बातचीत के बाद, ऑपरेटरों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की, जिसके उपरांत जयराम ठाकुर ने उन्हें जूस पिलाकर हड़ताल खत्म करवाई।
  • मंडी की पेयजल-सीवरेज व्यवस्था होगी हाईटेक:सितंबर में ‘हिम जलदूत’ एप होगा लॉन्च; डिप्टी CM बोले-10,900 उपभोक्तओं को मिलेगा लाभ

    हिमाचल के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने घोषणा की है कि मंडी शहर की पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए जल शक्ति विभाग सितंबर में ‘हिम जलदूत मंडी’ मोबाइल एप लॉन्च करेगा। यह एप नगर निगम मंडी के 13 वार्डों के लगभग 10,900 उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ेगा। उप मुख्यमंत्री ने मंडी के सर्किट हाउस में जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के साथ योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य लोगों को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना और जलापूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा त्वरित शिकायत निवारण सुनिश्चित करना है। बरसात का मौसम खत्म होते ही इस डिजिटल प्रणाली को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। एप से मिलेगी पानी की आपूर्ति के शेड्यूल की जानकारी इस एप के जरिए उपभोक्ताओं को पानी की आपूर्ति का शेड्यूल, वर्तमान स्थिति, पानी की गुणवत्ता और अन्य महत्वपूर्ण अपडेट मोबाइल नोटिफिकेशन के माध्यम से प्राप्त होंगे। पानी की गुणवत्ता का लाइव स्टेटस भी देखा जा सकेगा, जिसमें क्लोरीन की मात्रा, पीएच वैल्यू और टर्बिडिटी जैसी जानकारी शामिल होगी। यदि पाइपलाइन टूटने, लीकेज या सीवरेज संबंधी कोई समस्या आती है, तो उपभोक्ता फोटो और जियो-टैग लोकेशन के साथ शिकायत दर्ज कर सकेंगे। दर्ज की गई शिकायत के निवारण की स्थिति भी एप पर लाइव ट्रैक की जा सकेगी। जलापूर्ति व्यवस्था की प्रभावी निगरानी जलापूर्ति व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए जल रक्षकों और स्लूस वाल्व को भी एप से एकीकृत किया गया है। जल रक्षक के निर्धारित वाल्व पर पहुंचने की जियो लोकेशन सत्यापित होने के बाद ही पानी छोड़ने का स्टेटस दर्ज होगा, जिसके बाद उपभोक्ताओं को पानी की आपूर्ति शुरू होने की सूचना मिलेगी। 20 टैंकरों से होती है पानी की सप्लाई विभाग के अनुसार, ढांगसीधार और कांगनीधार जल स्रोतों को भी इस प्रणाली से जोड़ा गया है। इन स्रोतों से मंडी शहर के लगभग 20 पानी के टैंकों को आपूर्ति की जाती है। विभागीय अधिकारी आर.के. सैनी ने बताया कि इस ऐप का उपयोग पंजीकृत उपभोक्ताओं के साथ-साथ गेस्ट यूजर भी कर सकेंगे। आम नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर पानी की बर्बादी, पाइपलाइन लीकेज या सीवरेज संबंधी शिकायतें फोटो और लोकेशन के साथ दर्ज करवा सकेंगे।
  • हिमाचल के ड्राइवर की हादसे में मौत:दिल्ली में बस दुर्घटनाग्रस्त, परिवार में अकेला कमाने वाला; 2 बच्चे का पिता

    हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के सुजानपुर क्षेत्र के 35 वर्षीय बिक्रम की दिल्ली के पास एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वह ग्राम पंचायत चमियाणा का निवासी था और दिल्ली में बस ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। ग्राम पंचायत प्रधान सागर सडयाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह बिक्रम के परिजनों को सूचना मिली कि जिस बस को वह चला रहा था वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। इस हादसे में बिक्रम की जान चली गई। सूचना मिलते ही परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बिक्रम अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी, एक 3 वर्षीय बेटा और एक 1 वर्षीय बेटी छोड़ गया है। बताया जा रहा है कि वह परिवार में एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। गांव में शोक व्यापत युवक की मौत की खबर से परिवार के साथ-साथ गांव में भी शोक का माहौल है। पंचायत प्रधान सागर सडयाल ने बताया कि बिक्रम का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
  • आईआईटी मंडी: झील की हर हलचल की खबर देगा फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम, नेपाल जैसी त्रासदी में कारगर

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    नेपाल जैसी प्राकृतिक त्रासदी और हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से बढ़ते खतरे के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जो झील की हर हलचल पर नजर रखेगी। झील के पानी में असामान्य बदलाव होते ही फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम सक्रिय हो जाएगा और संभावित बाढ़ की स्थिति में यह भी बता सकेगा कि पानी कितनी तेजी से नीचे की ओर बढ़ रहा है और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कितना समय लग सकता है।


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    हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से होने वाली अचानक बाढ़, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) कहा जाता है, का खतरा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इसे देखते हुए आईआईटी मंडी एक स्टार्टअप के लिए अत्याधुनिक फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित कर रहा है। यह सिस्टम अभी परीक्षण और विकास के चरण में है।

    दूरदृष्टि नाम के इस सिस्टम को ग्लेशियर झील के आउटलेट, मोरेन से बने बांध वाले हिस्से या संवेदनशील डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के पास स्थापित किया जा सकता है। यह सौर ऊर्जा से संचालित एक स्वायत्त निगरानी इकाई होगी, जो लगातार जलस्तर, पानी के बहाव की गति और आसपास की परिस्थितियों पर नजर रखेगी। सिस्टम में बिना पानी के सीधे संपर्क में आए जलस्तर मापने के लिए रडार आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, डॉप्लर रडार के माध्यम से पानी की सतह के बहाव की गति पर नजर रखी जाएगी। इसके साथ एआई आधारित ऑप्टिकल कैमरा भी लगाया जाएगा, जो असामान्य गतिविधियों की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकेगा।

    यदि जलस्तर में अचानक तेजी से बढ़ोतरी या गिरावट होती है। पानी के बहाव की गति असामान्य रूप से बढ़ती है। मलबा बहने लगता है या झील के आउटलेट पर रुकावट जैसी स्थिति बनती है तो सिस्टम उच्च आवृत्ति पर निगरानी शुरू कर देगा। ऐसी स्थिति में कैमरे भी सक्रिय होकर फोटो और वीडियो उपलब्ध कराएंगे, जिससे कंट्रोल सेंटर से वास्तविक स्थिति की पुष्टि की जा सके। इस तकनीक में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। एआई फोटो और वीडियो का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश करेगा कि जलस्तर में बदलाव किसी सामान्य कारण, जैसे तेज हवा या लहरों की वजह से हुआ है या वास्तव में कोई गंभीर खतरा पैदा हुआ है। इससे केवल किसी एक सेंसर की गलत रीडिंग के कारण अनावश्यक चेतावनी जारी होने की संभावना भी कम होगी।

    वास्तविक खतरे की पुष्टि होने पर फ्लड मॉडल सक्रिय होगा

    वास्तविक खतरे की पुष्टि होने पर फ्लड मॉडल सक्रिय होगा। पानी की गहराई, जलस्तर और बहाव की गति से जुड़ी जानकारी के आधार पर यह अनुमान लगाया जाएगा कि बाढ़ का पानी नीचे बसे गांवों या अन्य क्षेत्रों तक कितनी देर में पहुंच सकता है और उसका संभावित प्रभाव कितना हो सकता है। सिस्टम में 4जी/एलटीई, लोरा और वीसेट सहित कई संचार विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे दूरदराज के हिमालयी क्षेत्रों में भी निगरानी संभव होगी, जहां सामान्य संचार सुविधाएं विश्वसनीय नहीं होतीं। सिस्टम में डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखने की सुविधा भी होगी। खतरे की स्थिति में सिस्टम रियल टाइम जानकारी कंट्रोल सेंटर तक भेजेगा और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट जारी किया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में सायरन के माध्यम से स्थानीय लोगों को चेतावनी भी दी जा सकेगी। इससे प्रशासन को पानी पहुंचने से पहले जरूरी कार्रवाई करने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का समय मिल सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी आपदाओं में जनहानि को कम करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार, सिस्टम की खासियत यह है कि यह बिना सीधे पानी के संपर्क में आए काम करेगा। सौर ऊर्जा से संचालित होने और मौसमरोधी संरचना के कारण इसे अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में भी लगाया जा सकेगा, जहां पारंपरिक सेंसरों का रखरखाव मुश्किल होता है और अत्यधिक बहाव के दौरान उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। 

    कटौला में डेढ़ साल से हो रही टेस्टिंग

    आईआईटी मंडी के समन्वय में विकसित हो रहे इस सिस्टम की टेस्टिंग मंडी की कटौला में करीब डेढ़ साल से की जा रही है। परीक्षण में अब तक अच्छे नतीजे मिले हैं। अगले दो से तीन महीनों में सिस्टम को और विकसित करने का लक्ष्य है। उम्मीद है कि अगले मानसून तक यह तकनीक धरातल पर होगी।– डॉ. विवेक गुप्ता, सहायक प्रोफेसर, जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन केंद्र, आईआईटी मंडी

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  • हिमाचल के ड्राइवर की दिल्ली के पास हादसे में मौत:दिल्ली में बस दुर्घटनाग्रस्त, परिवार में अकेला कमाने वाला; 2 बच्चे का पिता

    हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के सुजानपुर क्षेत्र के 35 वर्षीय बिक्रम की दिल्ली के पास एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वह ग्राम पंचायत चमियाणा का निवासी था और दिल्ली में बस ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। ग्राम पंचायत प्रधान सागर सडयाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह बिक्रम के परिजनों को सूचना मिली कि जिस बस को वह चला रहा था वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। इस हादसे में बिक्रम की जान चली गई। सूचना मिलते ही परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बिक्रम अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी, एक 3 वर्षीय बेटा और एक 1 वर्षीय बेटी छोड़ गया है। बताया जा रहा है कि वह परिवार में एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। गांव में शोक व्यापत युवक की मौत की खबर से परिवार के साथ-साथ गांव में भी शोक का माहौल है। पंचायत प्रधान सागर सडयाल ने बताया कि बिक्रम का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
  • धर्मशाला: फर्जी बिलों से लाखों के सब्सिडी घोटाले में विजिलेंस ने मांगे दस्तावेज, तीन लोगों के खिलाफ दर्ज है क

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    बागवानी विभाग की योजनाओं में फर्जी बिल-वाउचर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिये लाखों रुपये का सरकारी अनुदान लेने के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने संबंधित विभाग से दस्तावेज मांगे हैं। साथ ही मामले में ठेकेदार, फर्म और अन्य मजदूरों को किए गए कार्यों की एवज में किए गए भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। ब्यूरो जिले के जवाली उपमंडल के अंतर्गत क्षेत्र के तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले में पिता-बेटे सहित एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    ब्यूरो जांच में ये खुलासा हुआ

    ब्यूरो जांच में टिशू कल्चर यूनिट की परियोजना लागत कृत्रिम रूप से बढ़ाकर 36.42 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी लेने सहित अन्य योजनाओं में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिकायत की सत्यापन जांच में सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2020 में टिशू कल्चर यूनिट स्थापित करने के लिए करीब 93.48 लाख रुपये का खर्च दर्शाकर 36.42 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त की। जांच में कई बिलों और दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां मिलीं।

    एक व्यक्ति का पंचायत रिकॉर्ड में अस्तित्व नहीं

    एक बिल ऐसे व्यक्ति के नाम से मिला, जिसका पंचायत रिकॉर्ड में कोई अस्तित्व नहीं पाया गया। एक अन्य फर्म के वास्तविक बिल की राशि से कई गुना अधिक रकम विभागीय अभिलेखों में दर्शाई गई। जांच में एक ठेकेदार ने भी अपने नाम से दर्शाए गए लाखों रुपये के कार्य और बिल जारी करने से इन्कार किया। वहीं, आरोपी के पिता के नाम पर तीन पॉलीहाउस और एक फल पौधरोपण परियोजना में करीब 20.30 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त करने का मामला भी जांच के दायरे में आया है।

    मौके पर संरचनाएं स्थापित मिलीं लेकिन जांच में परिवार के सदस्यों की ओर से अलग-अलग नामों से योजनाओं का बार-बार लाभ लेने पर आपसी मिलीभगत और योजनाओं के संगठित दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। एक अन्य मामले में 6.99 लाख रुपये की सब्सिडी से संबंधित पॉलीहाउस मौके पर नहीं मिला। अभिलेख में एक व्यक्ति का नाम और दूसरे व्यक्ति की फोटो मिलने सहित रिकॉर्ड नष्ट किए जाने के तथ्य भी जांच में सामने आए।

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  • शिमला में खाई में गिरी कार, पिता की मौत:बेटे की हालत गंभीर. रामपुर में मोड़ पर वाहन के अनियंत्रित होने से हादसा

    रामपुर उपमंडल के अंतर्गत आते तकलेच क्षेत्र में गुरुवार रात एक कार के अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर जाने से 64 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि हादसे में उनका 40 वर्षीय बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा रात करीब 8:30 बजे उस समय पेश आया जब दोनों पिता-पुत्र कार में सवार होकर अपने घर लौट रहे थे। रामपुर पुलिस थाना के प्रभारी रमेश नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने दुर्घटना के संबंध में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कार के खाई में गिरने के सटीक कारणों (तकनीकी खराबी या मानवीय चूक) का पता लगाने के लिए पुलिस बारीकी से जांच कर रही है। 30 मीटर नीचे खाई में गिरी कार प्राप्त जानकारी के अनुसार, जगदीश चंद (40) पुत्र निका राम, निवासी थेड़ा (तकलेच), गुरुवार रात को अपनी कार चला रहे थे। कार में उनके बुजुर्ग पिता निका राम (64) भी उनके साथ सवार थे। जब वे तकलेच से अपने पैतृक गांव थेड़ा की ओर जा रहे थे, तो अचानक एक तीखे मोड़ पर वाहन अनियंत्रित हो गया और सड़क से करीब 30 मीटर नीचे ढांक (खाई) में जा गिरा। अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम हादसे की आवाज सुनते ही स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर राहत व बचाव कार्य के लिए दौड़े। लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों घायलों को खाई से बाहर निकाला और तुरंत उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तकलेच पहुंचाया। हालांकि, वहां तैनात चिकित्सकों ने जांच के बाद निका राम (64) को मृत घोषित कर दिया। कार चालक जगदीश चंद को भी चोटें आई हैं, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर और स्थिर बताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही रामपुर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए महात्मा गांधी चिकित्सा सेवा परिसर खनेरी (रामपुर) लाया गया है, जहां शुक्रवार को पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।