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  • ‘जज अंकल! मम्मी ने पापा को मारा है’, मासूम बेटे की गवाही से खुला हत्या का राज, पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद

    अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से पति की हत्या के एक मामले में अदालत का महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। मामले में पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी करार देते हुए अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

    इस मामले में सबसे भावुक कर देने वाला पक्ष मृतक के मासूम बेटे की गवाही रही। सुनवाई के दौरान जब जज ने बच्चे से पूछा कि वह क्या चाहता है, तो उसने कथित तौर पर कहा, “जज अंकल! मम्मी ने पापा को मारा है, इन्हें फांसी दे दो।” बच्चे की बात सुनकर कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया।

    पत्नी और प्रेमी पर लगा पति की हत्या का आरोप

    मामला 10 जुलाई 2026 की सुबह का बताया गया है। खबर के मुताबिक, विजय सिंह अपने भाई सुरेश के घर के बाहर मौजूद थे। इसी दौरान सुरेश की पत्नी बीना के दरवाजे पर खड़े होने की बात सामने आई।

    आरोप है कि इसी दौरान बीना का प्रेमी मनोज वहां पहुंचा। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने पहले से सुरेश की हत्या की साजिश रची थी। घटना के दौरान मनोज ने कथित तौर पर सुरेश पर गोली चला दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

    हत्या के बाद दोनों हो गए थे फरार

    घटना के बाद बीना और मनोज के मौके से फरार होने की बात सामने आई। पुलिस जांच के दौरान मामले में कई साक्ष्य जुटाए गए। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य भी पेश किए गए।

    मासूम बेटे की गवाही बनी अहम कड़ी

    इस केस में मृतक के 15 वर्षीय बेटे नितेश की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। उसने अदालत में घटना से जुड़ी जानकारी विस्तार से बताई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाह पेश किए गए, जिनमें मृतक के परिवार के सदस्य और अन्य संबंधित गवाह शामिल थे।

    अदालत के सामने पेश किए गए सबूतों और गवाहियों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी माना गया।

    फैसला सुनते ही रोने लगी बीना

    जब अदालत ने बीना और मनोज को उम्रकैद की सजा सुनाई, तो बीना के भावुक होकर रोने की बात सामने आई। वहीं कोर्ट में मौजूद बच्चों का अपनी मां की ओर देखते रहना भी चर्चा का विषय बना।

    अदालत ने दोनों दोषियों को उम्रकैद के साथ 35-35 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में मासूम बच्चों की गवाही ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी भावुक बना दिया।

    नोट: यह लेख आपके द्वारा भेजी गई समाचार-कतरन में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों और अदालती फैसले से जुड़े अंतिम तथ्यों के लिए आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।

  • हिमाचल में 2 बच्चों की मां की दूसरी शादी की कोशिश पर मचा हंगामा, मंडप में पहुंचा पहला पति

    बैजनाथ: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला कथित तौर पर अपने पहले पति से बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने जा रही थी। शादी की रस्में चल रही थीं, तभी उसका पहला पति अपने दोनों बच्चों के साथ मौके पर पहुंच गया। इसके बाद शादी समारोह में जमकर हंगामा हो गया।

    बताया जा रहा है कि महिला की शादी पहले से हो चुकी थी और उसके दो बच्चे भी हैं। इसके बावजूद वह कथित तौर पर दूसरी शादी के लिए मंडप में पहुंची थी। जब पहला पति अपने बच्चों के साथ वहां पहुंचा तो उसने इस शादी पर आपत्ति जताई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद लोगों के बीच भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

    मंडप में पहुंचते ही बदल गया माहौल

    शादी समारोह में उस समय तक रस्में चल रही थीं। परिवार और रिश्तेदार शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन पहले पति के पहुंचते ही पूरा माहौल बदल गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और मामला बढ़ता देखकर पुलिस को मौके पर बुलाया गया।

    पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। विवाद के बीच प्रस्तावित शादी को आगे नहीं बढ़ाया जा सका और बताया जा रहा है कि दूल्हा बिना फेरे लिए ही वहां से चला गया।

    दो बच्चों के भविष्य को लेकर भी सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महिला के दोनों बच्चों को लेकर हो रही है। पहले पति के साथ दोनों बच्चों के मौके पर पहुंचने से मामला और भी संवेदनशील हो गया। परिवार के बीच हुए इस विवाद का असर बच्चों पर भी पड़ने की बात कही जा रही है।

    फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया से जुड़ गया है। दूसरी शादी को लेकर लगाए गए आरोपों और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

    नोट: यह लेख उपलब्ध जानकारी और बताए गए घटनाक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित पुलिस या कानूनी रिकॉर्ड से ही मानी जानी चाहिए।

  • यूपी के इस जज ने सिर्फ 4 महीने में 22 दोषियों को सुनाई मौत की सजा, अब करीब 100 हत्या के केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर… आखिर क्यों?

    उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जज ने बीते 4 महीने में 22 कैदियों को मौत की सजा सुनाई. इसके बाद उनके पास लंबित हत्या के करीब 100 मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में ट्रांसफर कर दिए गए. न्यूज एजेंसी PTI ने अधिकारियों के हवाले से इसकी जानकारी दी. एक सरकारी वकील ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि मौत या उम्रकैद की सजा वाले अपराधों से जुड़े केस एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर से डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिए गए हैं. डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट प्रमोद त्यागी ने बताया कि वकीलों और केस करने वालों में इस बात को लेकर डर था कि कहीं कोर्ट मौत की सजा न दे दे.

    कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?
    जज रवि कुमार दिवाकर अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं. साल 2022 वह वाराणसी के ज्ञानवापी कॉम्प्लेक्स का वीडियोग्राफी सर्वे करने का ऑर्डर पास करने के लिए खबरों में थे. लखनऊ के रहने वाले 46 साल के जज ने 2009 में आजमगढ़ में एडिशनल सिविल जज के तौर पर शुरुआत की थी. इसके बाद मई 2015 में उन्हें सुल्तानपुर में सिविल जज और करीब पांच महीने बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के तौर पर प्रमोट किया गया.जज रवि दिवाकर के पास BCom और LLM की डिग्री है. वह नवंबर 2025 से मुजफ्फरनगर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज के तौर पर काम कर रहे हैं.

    10 मामलों में 22 को मौत की सजा
    बीते 13 अगस्त को उन्होंने 12 साल पुराने मर्डर केस में चार लोगों को मौत की सजा सुनाई. उन्होंने पवन कुमार की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए दोषियों (रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार) पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. आरोपी 14 जुलाई 2014 को शामली जिले में कुमार के घर में घुसे और कथित तौर पर पुरानी दुश्मनी के चलते हुए हमले के दौरान फायरिंग की. गोलीबारी में कुमार की मौत हो गई, जबकि उनके भाई अशोक कुमार को गोली लगी. वहीं, 1999 में फिरौती के लिए लकड़ी व्यापारी की हत्या करने वाले को भी मौत की सजा सुनाई गई.

    12 अगस्त को उन्होंने लगभग 27 साल पहले फिरौती के लिए एक लकड़ी व्यापारी को किडनैप करने और उसकी हत्या करने वाले एक आदमी को मौत की सज़ा सुनाई. उन्होंने आरोपी शाहनवाज को 1999 में सलीम की हत्या का दोषी ठहराया. सलीम को 5 लाख रुपये की फिरौती के लिए किडनैप किया गया था और बाद में 9 दिसंबर 1999 को छपार के एक जंगल में उसका गला काटकर हत्या कर दी गई थी.

    2011 के किसान मर्डर केस में 4 को मौत की सजा
    17 जुलाई को उन्होंने 2011 में शामली जिले में लूट की कोशिश के दौरान एक किसान की हत्या के लिए चार लोगों को मौत की सजा सुनाई. किसान राज सिंह 20 अगस्त 2011 को अपने दोस्त बिजेंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर अपनी बहन के घर जा रहे थे, तभी अनजान हमलावरों ने उन्हें रोक लिया. आरोपियों ने उन्हें लूटने की कोशिश की. विरोध करने पर राज सिंह को गोली मार दी गई, जबकि बिजेंद्र को बांधकर पास के गन्ने के खेत में फेंक दिया गया.

    पूर्व ग्राम प्रधान और उसके साथी को मौत की सजा
    6 जुलाई को उन्होंने 2010 के एक मर्डर केस में एक पूर्व ग्राम प्रधान और उसके साथी को मौत की सजा सुनाई. उन्होंने कहा कि यह केस ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस में आता है. 60 साल के राजबीर सिंह की 24 अगस्त 2010 को पंचायत चुनाव की रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद और उसके साथी सहदेव को बाद में मर्डर के लिए गिरफ्तार किया गया था.

  • हणोगी टनल में दो ट्रकों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत, 4 की मौत, 7 घायल

    हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर हणोगी टनल के अंदर दो ट्रकों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।



    हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। पुलिस और राहत-बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

    बताया जा रहा है कि हादसा सुबह करीब 6:30 से 7:45 बजे के बीच हुआ। हादसे के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। फिलहाल हादसे की सही वजह सामने नहीं आई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    नोट: शुरुआती रिपोर्टों में 2 मौत और 2 गंभीर घायलों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में पुलिस के हवाले से कई मीडिया रिपोर्टों ने 4 मौत और 7 घायलों की पुष्टि की है। इसलिए खबर में अपडेटेड आंकड़े इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।

  • मलबे से ट्रक सहित निकाला चालक का शव, 2 मजदूरों की तलाश जारी

    पांवटा साहिब। जिला सिरमौर के कमरऊ तहसील के बागनधार में चूना पत्थर माइन पर हुए भारी भूस्खलन के दूसरे दिन भी रेस्क्यू जारी रहा। एनडीआरफ की टीम ने पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से एक व्यक्ति का शव मलबे से निकाल लिया है। फिलहाल मालबे में दबे दो अन्य लोगों के खोजने का प्रयास जारी हैं।

    बुधवार को उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा, एसडीम शिलाई सतपाल और डीएसपी पांवटा साहिब मानवेंद्र ठाकुर की मौजूदगी में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। इस दौरान रेस्क्यू टीम ने ट्रक समेत मलबे में दबे एक चालक के शव को निकाला। मृतक का नाम अनिल कुमार है और वह बड़वास का निवासी था। जिला खनन अधिकारी सरित चंद ने बताया कि दुर्घटना किन कारणों से हुई इसकी जांच केंद्रीय एजेंसियां करेंगी। उपायुक्त ने बताया कि मलबे में दबे नेपाली मूल के दो अन्य व्यक्तियों की तलाश जारी है।

  • न मां बची, न दादा-दादी… मासूम बेटे ने तैरकर बचाई जान,आखिर क्यों पूरे परिवार ने गोदावरी नदी में लगाई छलांग?

    आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी स्थित गोदावरी नदी के किनारे से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली पारिवारिक त्रासदी सामने आई है. पिथापुरम में पदस्थ पंचायत राज विभाग के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नुकाराजू ने अपने परिवार के साथ गोदावरी नदी में कूदकर सामूहिक आत्महत्या का प्रयास किया.

    इस दर्दनाक घटना में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले मासूम बच्चे कार्तिकेय को मछुआरों ने तैरते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि उसके दादा नुकाराजू का शव बरामद हुआ है. कार्तिकेय की मां सौजन्या और दादी मीना की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.जो परिवार कल तक एक साथ हंसताखेलता था, वह पल भर में तबाह हो गया.

    नदी में बहे कार्तिकेय ने हिम्मत नहीं हारी और तैरता रहा, जिसके बाद स्थानीय मछुआरों ने उसकी जान बचाई. लेकिन अब इस मासूम के सामने अपनों को खोने का पहाड़ जैसा दुख खड़ा है. न मां है, न दादा, न दादी. 5वीं का यह छात्र समझ नहीं पा रहा है कि उसके हंसतेखेलते परिवार को किसकी नजर लग गई. सदमे में डूबा कार्तिकेय न कुछ खा पा रहा है और न सो पा रहा है.

    सुसाइड नोट में खौफनाक खुलासा: ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन का दबाव

    नुकाराजू और उनकी बेटी सौजन्या द्वारा कथित तौर पर लिखे गए सुसाइड नोट से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. नोट में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति उनके परिवार को लगातार प्रताड़ित कर रहा था. उसने मदद का झांसा देकर बैंक विवरण, पैसे और कीमती सामान हड़प लिए. पत्र में परिवार को जान से मारने की धमकियां देने के साथसाथ धर्म परिवर्तन करने का अनुचित दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है.

    सौजन्या के पति की मौत पर भी उठे सवाल, हत्या की आशंका

    इस त्रासदी के तार एक अन्य संदिग्ध मामले से भी जुड़ रहे हैं. सौजन्या के पति जगदीश रेड्डी का इसी साल जुलाई में निधन हो गया था. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जगदीश रेड्डी के पिता भास्कर रेड्डी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके बेटे की सामान्य मौत नहीं हुई थी, बल्कि उसे जहरीला इंजेक्शन देकर मारा गया था. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जगदीश रेड्डी की मौत के मामले की भी नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी है.

    मानसिक तनाव और समाज के लिए बड़ा सवाल

    यह घटना इस बात का दुखद उदाहरण है कि जब कोई परिवार भारी मानसिक तनाव और धमकियों से जूझ रहा होता है, तो समय पर मदद न मिलने से क्या अंजाम हो सकता है. आंकड़ों के मुताबिक, देश में रोजाना सैकड़ों लोग मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याओं के कारण कठोर कदम उठाते हैं.

    विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के अचानक शांत हो जाने या असहाय महसूस करने के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति संकट में है, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत अपनों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लें. फिलहाल आंध्र प्रदेश पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है.

  • पीरियड्स के दौरान ना करें ये गलतियां, ट्यूब ब्लॉकेज की हो सकती है समस्या!

    symptoms of fallopian tube blocked

    वर्ल्ड मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे 28 मई को मनाया जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका 28 मई को मनाया जाना सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक समझ है. एक नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल औसतन 28 दिन की होती है और पीरियड्स का ड्यूरेशन औसतन 5 दिन का होता है, इसलिए इसे 28 मई को मनाया जाता है.

    पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान दें
    मेंस्ट्रुअल हाइजीन मेंटेन करना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर हम पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखेंगे तो शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह की परेशानियां हो सकती हैं. शुरुआत में इचिंग, जलन, रैशेज, वेजाइनल डिस्चार्ज, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इन्फेक्शन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. अगर इन इन्फेक्शन्स को बार-बार इग्नोर किया जाए या ये रिपीट होते रहें, तो आगे चलकर पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज, पेल्विक पेन, बुखार, ट्यूब्स में सूजन या ट्यूब ब्लॉकेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसकी वजह से बाद में इन्फर्टिलिटी तक की समस्या हो सकती है. इसलिए मेंस्ट्रुअल हाइजीन को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

    कपड़े वाले पैड्स का ना करें इस्तेमाल
    अब अगर पीरियड प्रोडक्ट्स की बात करें तो मार्केट में कई ऑप्शन्स अवेलेबल हैं. सबसे कॉमन हैं सेनेटरी पैड्स. डिस्पोजेबल पैड्स और कपड़े वाले पैड्स दोनों इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि ये यूज करने में आसान होते हैं. लेकिन कोई भी पीरियड प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले उसका सही साइज चुनना जरूरी है, जो आपकी एज, फ्लो और कम्फर्ट के हिसाब से हो. कपड़े वाले पैड्स को हम बहुत ज्यादा प्रेफर नहीं करते क्योंकि चाहे कितनी भी सफाई कर लें, उन्हें पूरी तरह सैनिटाइज करना मुश्किल होता है और उनमें इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है. चाहे पैड पूरा सोक हुआ हो या नहीं, उसे हर 6 से 8 घंटे में बदल देना चाहिए.अब अगर टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप की बात करें तो ये दोनों प्रोडक्ट्स वेजाइना के अंदर इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना सीखना जरूरी होता है. एक बार गायनाकोलॉजिस्ट से सही तरीका सीख लेना अच्छा रहता है.

    टैम्पोन का इस्तेमाल
    टैम्पोन में एक धागा होता है जिसकी मदद से उसे बाहर निकाला जाता है. टैम्पोन को 4 से 6 घंटे के अंदर बदल देना चाहिए. रात में टैम्पोन यूज करने से बचना चाहिए क्योंकि अगर इसे 8 घंटे से ज्यादा लगातार रखा जाए तो एक सीरियस बीमारी का खतरा हो सकता है जिसे टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम कहते हैं.

    मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल
    मेंस्ट्रुअल कप एक बार समझ आने के बाद काफी आसान और कम्फर्टेबल हो जाता है. इसका फायदा यह है कि यह एनवायरनमेंट फ्रेंडली होता है. कप भरने के बाद उसे निकालकर साफ किया जा सकता है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर सही तरीके से साफ और सैनिटाइज करके रखा जाए तो एक मेंस्ट्रुअल कप 5 से 8 साल तक आराम से चल सकता है.

    पीरियड पैंटीज का इस्तेमाल
    आजकल पीरियड पैंटीज भी अवेलेबल हैं. इन्हें खासकर किशोरियां या जिनके पीरियड्स अभी शुरू हुए हैं, वो लोग ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. अक्सर इन्हें पैड के साथ यूज किया जाता है ताकि लीकेज का डर कम हो जाए. टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप का फायदा यह भी होता है कि ये आमतौर पर ज्यादा लीकेज-प्रूफ होते हैं.

    हाइजीन मेंटेन कैसे करें
    अगर मेंस्ट्रुअल हाइजीन मेंटेन करनी है तो कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. हर पीरियड प्रोडक्ट को समय पर बदलना चाहिए. प्रोडक्ट बदलने से पहले और बाद में हाथ जरूर धोने चाहिए. इस्तेमाल किए हुए पैड या दूसरे प्रोडक्ट्स को पेपर या रैपर में लपेटकर बंद डस्टबिन में डालना चाहिए. इन्हें कभी भी टॉयलेट में फ्लश नहीं करना चाहिए.

    इन बातों का ध्यान देना
    पीरियड्स के दौरान रेगुलर नहाना चाहिए और प्राइवेट पार्ट्स को हल्के गुनगुने पानी से साफ करना चाहिए. प्राइवेट पार्ट्स में ज्यादा साबुन, खासकर परफ्यूम वाले साबुन, डियोड्रेंट, टैल्क या एंटीबायोटिक साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वी-वॉश भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. सिर्फ उन्हीं लोगों को इस्तेमाल करना चाहिए जिन्हें बार-बार इचिंग, रैशेज, डिस्चार्ज या इन्फेक्शन की समस्या होती है. वरना नॉर्मल वेजाइना खुद को नेचुरली क्लीन कर लेती है. डूशिंग भी नहीं करनी चाहिए.

    एक जरूरी बात यह भी है कि सरकार के जन औषधि केंद्रों पर बहुत कम कीमत में सेनेटरी पैड्स उपलब्ध होते हैं. कई जगहों पर लगभग 1 रुपये में एक पैड मिल जाता है ताकि हर महिला तक पीरियड प्रोडक्ट्स की पहुंच हो सके. जन औषधि केंद्र का एक ऐप भी होता है जिसकी मदद से लोग अपने आसपास का सेंटर ढूंढ सकते हैं और वहां से कम कीमत में पीरियड प्रोडक्ट्स और दूसरी दवाइयां ले सकते हैं. अगर हम इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो अच्छी तरह मेंस्ट्रुअल हाइजीन मेंटेन कर सकते हैं.

  • लिपस्टिक खरीदने से पहले पढ़ लें ये लिस्ट, सांवली त्वचा पर सबसे ज्यादा खिलेंगे ये 5 लिपस्टिक शेड्स

    इन गुलाबी न्यूड Lipstick Shades के साथ निखारें अपना लुक!

    सही लिपस्टिक शेड आपके पूरे लुक को बदल सकता है. लेकिन अक्सर सांवली त्वचा वाली महिलाएं इस बात को लेकर उलझन में रहती हैं कि कौन-सा रंग उन पर सबसे अच्छा लगेगा. कई बार सिर्फ ट्रेंड देखकर खरीदा गया शेड चेहरे को फीका दिखाने लगता है. ऐसे में ऐसे रंग चुनना बेहतर होता है जो आपकी स्किन टोन को और निखारें. अगर आपकी त्वचा सांवली (Dusky Skin) है, तो ये 5 लिपस्टिक शेड्स आपकी मेकअप किट में जरूर होने चाहिए.

    कॉफी ब्राउन एक क्लासी और एवरग्रीन शेड है. ऑफिस, कॉलेज या रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए यह बेहतरीन माना जाता है. यह रंग चेहरे को नेचुरल और एलिगेंट लुक देता है.

    अगर आप कुछ अलग ट्राई करना चाहती हैं, तो बर्न्ट ऑरेंज या टेराकोटा शेड चुन सकती हैं. यह गर्माहट लिए हुए रंग है, जो सांवली त्वचा की चमक को और उभारता है. खासकर दिन के समय और ट्रेडिशनल आउटफिट्स के साथ यह शेड बेहद खूबसूरत लगता है.

    अगर आपको रेड लिपस्टिक पसंद है, तो ब्रिक रेड सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें हल्का ब्राउन टोन होता है, जो सांवली त्वचा पर बेहद खूबसूरत लगता है. यह शेड पार्टी से लेकर शादी तक हर मौके पर आपके लुक में चार चांद लगा सकता है.

    अगर आपको न्यूड लिपस्टिक पसंद है, तो हल्के पिंक की बजाय वॉर्म कैरेमल न्यूड चुनें. यह आपकी स्किन टोन के साथ आसानी से ब्लेंड हो जाता है और होंठों को फीका नहीं दिखाता.

    फेस्टिव सीजन, डिनर डेट या किसी खास मौके के लिए डीप वाइन शेड शानदार विकल्प है. यह लिपस्टिक चेहरे को रिच और ग्लैमरस लुक देती है और सांवली त्वचा पर बेहद आकर्षक नजर आती है.

  • मच्छरों का भी होता है फेवरेट इंसान! 119 लोगों की स्टडी में सामने आया चौंकाने वाला राज

    मच्छरों का भी होता है फेवरेट इंसान! 119 लोगों की स्टडी में सामने आया चौंकाने वाला राज

    क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि एक ही कमरे में बैठे कई लोगों में से मच्छर किसी एक इंसान को कुछ ज्यादा ही निशाना बनाते हैं? अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ आपका वहम है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. साइंस ने भी अब इस बात पर मुहर लगा दी है. फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने 119 लोगों पर की गई एक रिसर्च किया, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मच्छरों का अपना फेवरेट इंसानी शिकार होता है. आखिर क्यों कुछ खास लोगों का खून मच्छरों को इतना पसंद आता है और क्या आपकी त्वचा से निकलने वाली महक ही इसकी सबसे बड़ी वजह है? आइए जानते हैं इस दिलचस्प स्टडी के पीछे का पूरा सच.

    फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने 119 लोगों पर यह रिसर्च किया, जिसके रिजल्ट ने चौंका दिया. इसमें दुनिया की तीन ऐसी मच्छर प्रजातियों को शामिल किया गया, जो इंसानों में कई गंभीर बीमारियां फैलाने की क्षमता रखती हैं. रिसर्चर्स ने देखा कि इन तीनों प्रजातियों को इंसानों की गंध और शरीर से निकलने वाले अलग-अलग रासायनिक संकेत किस तरह आकर्षित करते हैं.

    रिसर्च में में एडीज एजिप्टी, एडीज एल्बोपिक्टस और क्यूलेक्स क्विनक्वेफैसिएटस को शामिल किया गया. ये तीनों अलग-अलग बीमारियों को फैलाने में का काम करते हैं. इनमें डेंगू, जीका, येलो फीवर और वेस्ट नाइल जैसी बीमारियां शामिल हैं. इसके रिजल्ट हैरान करने वाले थे. तीनों प्रजातियों ने एक जैसे लोगों को पसंद नहीं किया. हर प्रजाति ने इंसानी शरीर की स्मेल को अपने तरीके से पढ़ा और उसके आधार पर तय किया कि किस इंसान के पास जाना है.

    दरअसल इंसानी शरीर से एक हजार से ज्यादा तरह के वाष्पशील कार्बनिक यौगिक निकल सकते हैं. इनमें से कई के बारे में वैज्ञानिक अभी पूरी तरह नहीं जानते. यही रसायन हमारी प्राकृतिक गंध का हिस्सा बनते हैं और मच्छरों के लिए किसी तरह के संकेत का काम कर सकते हैं.

    रिसर्च में सामने आया कि एडीज एजिप्टी ऐसे लोगों की तरफ ज्यादा आकर्षित हुआ, जिनकी त्वचा में कुछ खास वाष्पशील रसायन कम मात्रा में मौजूद थे और जो शरीर पर कोई अतिरिक्त खुशबू नहीं लगा रहे थे. इस प्रजाति ने पुरुषों की ओर हल्की ज्यादा पसंद भी दिखाई. यह मच्छर दिन के समय ज्यादा एक्टिव रहता है.

    वहीं एडीज एल्बोपिक्टस, जिसे एशियन टाइगर मच्छर भी कहते हैं, इंसान के त्वचा से प्राकृतिक रूप से निकलने वाले कुछ खास केटोन्स और पौधों जैसी गंध वाले रसायनों की तरफ ज्यादा भागते हैं. यह भी दिन में एक्टिव रहने वाली प्रजाति है.

    तीसरी प्रजाति क्यूलेक्स क्विनक्वेफैसिएटस की पसंद और भी अलग निकली. यह मच्छर आमतौर पर रात में ज्यादा एक्टिव होता है और इंसान की स्किन पर मौजूद माइक्रोबायोम यानी बैक्टीरिया, फंगस और दूसरे सूक्ष्मजीवों के समुदाय को पहचानने पर ज्यादा निर्भर करता है.

    हमारी त्वचा पर हमेशा लाखों-करोड़ों सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं. ये माइक्रोब्स हमारी त्वचा की गंध को प्रभावित करते हैं. स्टडी में खुलासा हुआ है कि कुछ बैक्टीरियल परिवार मच्छरों को इंसान की ओर आने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, वहीं कुछ दूसरे बैक्टीरिया उन्हें दूर रखने वाले संकेत दे सकते हैं.

    यह रिसर्च वैज्ञानिक जर्नल आईसाइंस में प्रकाशित हुआ है. रिसर्च टीम का नेतृत्व एफआईयू के न्यूरोजेनेटिसिस्ट मैथ्यू डीगेनारो कर रहे थे, वहीं इस रिसर्च की अगुवाई पीएचडी छात्रा कायली मारेरो ने की. रिसर्चर्स के अनुसार, इसके नतीजे भविष्य में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के नए तरीके विकसित करने में मदद कर सकते हैं.

  • दिन में 6-7 घंटे मोबाइल देखते है बच्चे तो हो जाएं सावधान… रील्स-शॉर्ट्स के चक्कर में घट रही शब्दों की दुनिया

    Kids Reels Addiction : स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दो से पांच वर्ष की उम्र के बच्चे दिन में एक घंटे से अधिक समय मोबाइल और टैबलेट पर वीडियो देखकर बिताते हैं तो उनके मस्तिष्क के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ी है जिन्हें बोलने में देरी की शिकायत के साथ अस्पताल लाया जा रहा है और इनमें कई मामलों में अत्यधिक स्क्रीन देखने तथा माता-पिता के साथ सीमित संवाद जैसी बातें सामने आती हैं। रोहिणी स्थित डॉ.बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल में वरिष्ठ रेजिडेंट बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.राहुल दराल ने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम, खासकर ‘रील्स’ और ‘शॉर्ट्स’ जैसे तेजी से बदलने वाले वीडियो, छोटे बच्चों में बोलने की क्षमता के विकास और एकाग्रता पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं।

    राजधानी से सामने आया हैरान करने वाला मामला
    ऐसा ही एक मामला राष्ट्रीय राजधानी के एक सरकारी अस्पताल में सामने आया। ढाई वर्ष के बच्चे को इसलिए अस्पताल लाया गया क्योंकि वह केवल “मम्मा”, “पापा” और कुछ गिने-चुने शब्द ही बोल पाता था जबकि उसकी उम्र के अन्य बच्चे छोटे-छोटे वाक्य बोलने लगे थे। डॉक्टरों ने बताया कि जांच में उसकी सुनने की क्षमता, दृष्टि, तंत्रिका तंत्र और अन्य विकास संबंधी पहलू सामान्य पाए गए। विस्तृत जानकारी लेने पर पता चला कि वह प्रतिदिन छह से सात घंटे तक मोबाइल फोन पर कार्टून और छोटे वीडियो देखता था। खाना भी वह मोबाइल देखते हुए ही खाता था और फोन हटाने पर चिड़चिड़ा हो जाता था। उन्होंने बताया कि बच्चे में केवल बोलने की क्षमता का विकास अपेक्षाकृत धीमा पाया गया। उसके माता-पिता ने बताया कि दोनों के कामकाजी होने के कारण बच्चे के साथ बातचीत और ‘इंटरैक्टिव’ खेल काफी सीमित हो गए थे।

    पेरेंट्स के लिए खास सलाह
    हालांकि मनोरंजन के लिए स्क्रीन का उपयोग पूरी तरह बंद करने, भोजन के दौरान किसी भी प्रकार की स्क्रीन का उपयोग न करने, प्रतिदिन कम से कम एक घंटे तक माता-पिता द्वारा बच्चे के साथ इंटरैक्टिव खेल खेलने, रोज़ाना चित्रों वाली किताबें पढ़कर सुनाने, रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान बच्चे से लगातार बातचीत करने और ‘स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी’ शुरू करने की सलाह दी गई जिससे उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले। डॉ. दराल ने कहा कि अत्यधिक ‘स्क्रीन टाइम’ के कारण आमने-सामने की बातचीत, कहानी सुनाना, किताबें पढ़ना और खेल जैसी गतिविधियां कम हो जाती हैं और यही गतिविधियां शुरुआती वर्षों में भाषा सीखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए लंबे समय तक स्क्रीन देखने से भाषा का विकास प्रभावित हो सकता है।

    बच्चों के मानसिक विकास पर असर डाल रही रील्स
    उनके अनुसार, ‘रील्स’ और ‘शॉर्ट्स’ जैसे वीडियो हर कुछ सेकेंड में नया कंटेंट दिखाते हैं जिससे मस्तिष्क को लगातार उत्तेजक संकेत मिलते हैं और बच्चों को पढ़ाई, किताबें या अन्य ऐसी गतिविधियां, जिनका परिणाम धीरे-धीरे मिलता है, अपेक्षाकृत कम रोचक लगने लगती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा, “ध्यान केंद्रित करने में कमी के लिए केवल ‘रील्स’ या ‘शॉर्ट्स’ को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि, पालन-पोषण का तरीका और घर का वातावरण भी उतने ही महत्वपूर्ण कारक हैं।” डॉ दराल ने बताया, “लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करने से मस्तिष्क का ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ बार-बार सक्रिय होता है। मस्तिष्क तुरंत मिलने वाले ‘रिवॉर्ड’ का अभ्यस्त हो सकता है। इसके कारण गृह कार्य, पढ़ाई, किताबें पढ़ना या संगीत का अभ्यास जैसी गतिविधियां बच्चों को कम आकर्षक लग सकती हैं।”

    2 से कम उम्र वाले बच्चोंं के लिए खतरनाक स्क्रीन
    उन्होंने सलाह दी कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मनोरंजन के लिए स्क्रीन से दूर रखा जाना चाहिए और दो से पांच वर्ष की आयु के बच्चों में मनोरंजन के लिए स्क्रीन का समय आदर्श रूप से प्रतिदिन एक घंटे से कम होना चाहिए। डॉक्टर ने कहा कि बड़े बच्चों में यह सुनिश्चित करना अधिक महत्वपूर्ण है कि स्क्रीन टाइम के कारण उनकी नींद, पढ़ाई, शारीरिक गतिविधि और परिवार के साथ बिताया जाने वाला समय प्रभावित न हो।

    डॉ दराल ने कहा, “समस्या का समाधान केवल मोबाइल छीन लेना नहीं, बल्कि स्वस्थ डिजिटल आदतें विकसित करना है। इसके लिए भोजन के समय और शयनकक्ष को स्क्रीन-मुक्त रखा जाए, सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दी जाए, बच्चों को प्रतिदिन कम से कम एक घंटा बाहर खेलने या शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित किया जाए तथा रोजाना कहानी सुनाने, किताब पढ़ने और बातचीत के लिए समय निकाला जाए।” उन्होंने कहा कि माता-पिता स्वयं भी संतुलित स्क्रीन उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत करें क्योंकि बच्चे सबसे अधिक सीख अपने आसपास के लोगों को देखकर ही लेते हैं।