न मां बची, न दादा-दादी… मासूम बेटे ने तैरकर बचाई जान,आखिर क्यों पूरे परिवार ने गोदावरी नदी में लगाई छलांग?

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आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी स्थित गोदावरी नदी के किनारे से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली पारिवारिक त्रासदी सामने आई है. पिथापुरम में पदस्थ पंचायत राज विभाग के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नुकाराजू ने अपने परिवार के साथ गोदावरी नदी में कूदकर सामूहिक आत्महत्या का प्रयास किया.

इस दर्दनाक घटना में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले मासूम बच्चे कार्तिकेय को मछुआरों ने तैरते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि उसके दादा नुकाराजू का शव बरामद हुआ है. कार्तिकेय की मां सौजन्या और दादी मीना की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.जो परिवार कल तक एक साथ हंसताखेलता था, वह पल भर में तबाह हो गया.

नदी में बहे कार्तिकेय ने हिम्मत नहीं हारी और तैरता रहा, जिसके बाद स्थानीय मछुआरों ने उसकी जान बचाई. लेकिन अब इस मासूम के सामने अपनों को खोने का पहाड़ जैसा दुख खड़ा है. न मां है, न दादा, न दादी. 5वीं का यह छात्र समझ नहीं पा रहा है कि उसके हंसतेखेलते परिवार को किसकी नजर लग गई. सदमे में डूबा कार्तिकेय न कुछ खा पा रहा है और न सो पा रहा है.

सुसाइड नोट में खौफनाक खुलासा: ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन का दबाव

नुकाराजू और उनकी बेटी सौजन्या द्वारा कथित तौर पर लिखे गए सुसाइड नोट से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. नोट में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति उनके परिवार को लगातार प्रताड़ित कर रहा था. उसने मदद का झांसा देकर बैंक विवरण, पैसे और कीमती सामान हड़प लिए. पत्र में परिवार को जान से मारने की धमकियां देने के साथसाथ धर्म परिवर्तन करने का अनुचित दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है.

सौजन्या के पति की मौत पर भी उठे सवाल, हत्या की आशंका

इस त्रासदी के तार एक अन्य संदिग्ध मामले से भी जुड़ रहे हैं. सौजन्या के पति जगदीश रेड्डी का इसी साल जुलाई में निधन हो गया था. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जगदीश रेड्डी के पिता भास्कर रेड्डी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके बेटे की सामान्य मौत नहीं हुई थी, बल्कि उसे जहरीला इंजेक्शन देकर मारा गया था. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जगदीश रेड्डी की मौत के मामले की भी नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी है.

मानसिक तनाव और समाज के लिए बड़ा सवाल

यह घटना इस बात का दुखद उदाहरण है कि जब कोई परिवार भारी मानसिक तनाव और धमकियों से जूझ रहा होता है, तो समय पर मदद न मिलने से क्या अंजाम हो सकता है. आंकड़ों के मुताबिक, देश में रोजाना सैकड़ों लोग मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याओं के कारण कठोर कदम उठाते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के अचानक शांत हो जाने या असहाय महसूस करने के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति संकट में है, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत अपनों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लें. फिलहाल आंध्र प्रदेश पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है.

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