उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र में शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे एक युवक ने नदी के पुल से छलांग लगा दी। युवक ने पहले पुल पर अपनी साइकिल खड़ी की और कुछ देर टहलने के बाद अचानक नदी में कूद गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय तैराकों व गोताखोरों की मदद से उसकी तलाश शुरू कराई। देर शाम तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका। नदी का बहाव तेज होने के कारण तलाश अभियान में दिक्कत आ रही है। परसंडा के पास नदी में कूदने की मिली सूचना
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे डायल-112 के माध्यम से थाना बिहार को सूचना मिली कि ग्राम परसंडा के पास एक व्यक्ति नदी में कूद गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि करीब 5:30 बजे एक व्यक्ति साइकिल से पुल पर आया था। उसने साइकिल खड़ी की, कुछ देर पुल पर टहला और फिर अचानक नदी में छलांग लगा दी।
संजू के रूप में हुई युवक की पहचान
पुलिस ने आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने के बाद युवक की पहचान संजू पुत्र रामखेलावन लोध (35) निवासी ग्राम साहबगंज, थाना बिहार के रूप में की। घटना की जानकारी मिलते ही उसके परिजन भी मौके पर पहुंच गए। युवक के नदी में कूदने की जानकारी से परिवार में हड़कंप मच गया।
तैराकों और गोताखोरों ने नदी में की तलाश
पुलिस ने स्थानीय तैराकों और गोताखोरों को नदी में उतारकर संजू की तलाश कराई। काफी प्रयास के बावजूद देर शाम तक उसका पता नहीं चल सका। तेज बहाव के कारण सर्च ऑपरेशन में परेशानी आ रही है। पुलिस टीम नदी के आसपास के हिस्सों में भी लगातार युवक की तलाश कर रही है। एनडीआरएफ को दी सूचना
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना पुलिस ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) को भी सूचना दी है। पुलिस के मुताबिक, प्रशिक्षित टीम की मदद से नदी में व्यापक स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा। थानाध्यक्ष राहुल सिंह ने बताया कि मौके पर पुलिस बल तैनात है और कानून-व्यवस्था से संबंधित कोई समस्या नहीं है।
पूरे मामले की कड़ी हरियाणा में पकड़ी गई नशीली दवाओं की एक खेप की जांच से जुड़ती है। हरियाणा पुलिस द्वारा हाल ही में नशे के लिए दुरुपयोग होने वाली दवाओं की खेप पकड़े जाने के बाद जांच आगे बढ़ी।
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हिमाचल प्रदेश में चेन स्नैचिंग और महिलाओं को निशाना बनाकर होने वाली लूट की घटनाओं को लेकर पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के शक्तिपीठों, पर्यटन स्थलों, बड़े बाजारों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
पुलिस को विशेष रूप से उन स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश हैं जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसरों, बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, पार्किंग स्थलों और पर्यटन स्थलों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ ही उपलब्ध सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है। संदिग्ध गतिविधियों और बाहरी नंबर वाले वाहनों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय का यह रुख ऊना के बड़ूही में 14 अगस्त को हुई वारदात के बाद और महत्वपूर्ण हो गया है।
बड़ूही-जोल सड़क पर नीलकंठ महादेव मंदिर के समीप बाइक सवार दो युवकों ने कार को रुकवाकर हथियार के बल पर महिला के गले से सोने की चेन छीन ली थी। आरोपियों ने महिला और उसकी बेटी को डराने के लिए पिस्तौल का इस्तेमाल किया। घटना के बाद आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें संदिग्ध बाइक सवार दिखाई दिए। मामले में ऊना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी सुखदेव सिंह उर्फ केवा को पंजाब के कपूरथला से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार वारदात में दो बाइक सवार शामिल थे और दूसरे आरोपी की तलाश जारी है। जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार असली था या खिलौना पिस्तौल, इसकी भी जांच की जा रही है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर लिया गया है। प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने लोगों से अधिक भीड़भाड़ और सुनसान क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों को सुनसान स्थानों पर अकेले आभूषण पहनकर जाने से बचने, संदिग्ध बाइक सवारों से सावधान रहने और किसी भी वारदात या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने का आग्रह किया है।
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अलीगढ़ के क्वार्सी इलाके में मैरिस रोड स्थित मैलरोज-इन होटल के कमरे में चल रहे जुए के अड्डे पर पुलिस की कार्रवाई के बाद पकड़े गए सभी 17 आरोपियों को जेल भेज दिया गया। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपियों को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। आरोपियों के पैरोकारों ने जमानत अर्जी दाखिल की, लेकिन न्यायालय ने सभी की जमानत खारिज कर दी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया। कमरे में चल रहा था जुए का खेल क्वार्सी पुलिस को होटल में जुआ खेले जाने की सूचना कई दिनों से मिल रही थी। पुलिस ने पहले रैकी की। सूचना की पुष्टि होने के बाद बृहस्पतिवार देर शाम होटल में छापा मारा गया। पुलिस टीम होटल की दूसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर 202 में पहुंची। यहां जुआ खेलते हुए 15 लोगों को पकड़ा गया। मौके से एक होटल रिसेप्शनकर्मी और होटल के बाहर रैकी कर रहा एक व्यक्ति भी पकड़ा गया। इस तरह पुलिस ने कुल 17 आरोपियों को हिरासत में लिया। रातभर थाने में रखा, शुक्रवार को कोर्ट में पेश कार्रवाई के बाद सभी आरोपियों को क्वार्सी थाने लाया गया। उन्हें रातभर पुलिस हिरासत में रखा गया। शुक्रवार दोपहर सभी को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। आरोपियों की ओर से पैरवी करने पहुंचे पैरोकारों ने जमानत के लिए अर्जी दाखिल की, लेकिन न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद सभी 17 आरोपियों को जेल भेज दिया गया। कोर्ट परिसर में आरोपियों के पैरोकारों की भीड़ लगी रही। दो आरोपी अभी फरार सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार, होटल में जुआ खेलने के मामले में दो आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि होटल में जुए का यह खेल कब से चल रहा था और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों और मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में हिमकेयर योजना के तहत इलाज के भुगतान को लेकर नया आदेश जारी किया है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार अब हिमकेयर के तहत सरकारी संस्थानों के इलाज के लिए वास्तविक खर्च और निर्धारित पैकेज रेट में से जो कम होगा, उसी के आधार पर प्रतिपूर्ति का दावा किया जा सकेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और डेंटल कॉलेज हिमकेयर के तहत किए गए इलाज के बिलों में वास्तविक खर्च की राशि के साथ हिमकेयर साथी का निर्धारित पारिश्रमिक क्लेम कर सकेंगे। मरीजों को इन संस्थानों में हिमकेयर के तहत कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। सरकारी सप्लाई की दवाओं का अलग से क्लेम नहीं सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीज के इलाज से संबंधित ऐसी दवाइयां, सामान, कंज्यूमेबल और सर्जिकल आइटम, जो पहले से सरकारी सप्लाई में उपलब्ध हैं या राज्य सरकार अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के बजट से अलग से उपलब्ध कराए गए हैं, उनका भुगतान अस्पताल हिमकेयर के तहत अलग से क्लेम नहीं कर सकेंगे। 8 अप्रैल के आदेश को किया गया सुपरसीड यह आदेश चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से 8 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के स्थान पर लागू किया गया है। अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी की गई है। सरकार ने विभिन्न विभागों को भेजी ऑर्डर की कॉपी सरकार ने आदेश की प्रतियां महालेखाकार, हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, डेंटल हेल्थ सर्विसेज निदेशक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक समेत संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी हैं। पहले क्या था? सरकारी अस्पताल में हिमकेयर मरीज का इलाज करता था। इलाज में खर्च हुई दवाइयों, सामान आदि का वास्तविक खर्च हिमकेयर के तहत क्लेम किया जा सकता था। अब क्या बदला है? वास्तविक खर्च और पैकेज रेट में जो कम होगा, उतना ही भुगतान मिलेगा। मान लीजिए किसी इलाज का हिमकेयर पैकेज रेट ₹50,000 है, लेकिन सरकारी अस्पताल का वास्तविक खर्च ₹40,000 आया है तो अस्पताल को ₹40,000 ही क्लेम करने की अनुमति होगी। अगर पैकेज रेट ₹50,000 है और वास्तविक खर्च ₹60,000 आया, तो भी ₹50,000 तक ही क्लेम होगा।
लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में सीमेंट से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली चोरी करने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। ट्रैक्टर-ट्रॉली में अल्ट्राटेक सीमेंट की 200 बोरियां लदी थीं। पुलिस ने GPS लोकेशन और CCTV फुटेज की मदद से आरोपियों को मलिहाबाद के ईसापुर नजर नगर से पकड़ा। उनके पास से चोरी का ट्रैक्टर-ट्रॉली, पूरा सीमेंट और वारदात में इस्तेमाल चोरी की बाइक बरामद हुई है। आलमनगर सीमेंट गोदाम के पास खड़ी थी ट्रैक्टर-ट्रॉली
हरदोई के बघौली थाना क्षेत्र के महरी गांव निवासी विक्रम प्रताप सिंह ने 27 अगस्त को ठाकुरगंज थाने में ट्रैक्टर-ट्रॉली चोरी होने की सूचना दी थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका ट्रैक्टर, जिसकी रजिस्ट्रेशन संख्या UP30BT3651 है, आलमनगर स्थित सीमेंट गोदाम के पास खड़ा था। ट्रॉली में अल्ट्राटेक सीमेंट की 200 बोरियां लदी थीं।
सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं मिली तो उन्होंने आसपास तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। ठाकुरगंज पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की। GPS लोकेशन से मलिहाबाद पहुंची पुलिस ट्रैक्टर-ट्रॉली की तलाश के लिए पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही चोरी किए गए ट्रैक्टर की GPS लोकेशन भी ट्रेस की गई। लोकेशन मलिहाबाद क्षेत्र में मिलने पर ठाकुरगंज पुलिस ने मलिहाबाद पुलिस से संपर्क किया।
संयुक्त टीम ने ईसापुर नजर नगर इलाके में घेराबंदी कर तीन संदिग्धों को पकड़ लिया। उनकी पहचान हरदोई के अतरौली निवासी छत्रपाल (25), बाराबंकी के जितेंद्र कुमार (30) और लखनऊ के रहीमाबाद निवासी लालजी (31) के रूप में हुई। पुलिस ने उनके कब्जे से चोरी का ट्रैक्टर-ट्रॉली और उसमें लदा 200 बोरी सीमेंट बरामद कर लिया। वारदात में इस्तेमाल बाइक भी चोरी की निकली पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ट्रैक्टर-ट्रॉली चोरी करने में इस्तेमाल की गई बाइक भी चोरी की है। पुलिस ने UP32PW0552 नंबर की बाइक बरामद की है। इसके संबंध में पारा थाने में पहले से चोरी का मुकदमा दर्ज है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी लालजी का पहले से आपराधिक इतिहास भी है। उसके खिलाफ मलिहाबाद और तालकटोरा थाने में मारपीट, धमकी और चोरी से जुड़े तीन मुकदमे दर्ज हैं।
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ट्रांस हिमालय से जुड़े क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने से बन रहीं झीलें हिमाचल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक नेपाल की तरह तबाही मचा सकती हैं। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के ताजा अध्ययन में अकेले सतलुज बेसिन में ही 2,292 ग्लेशियल झीलें सामने आई हैं। इनमें 1,335 चीन अधिकृत तिब्बत में हैं, जहां भारत का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होने पर निगरानी संभव नहीं है। इस अध्ययन में 470 झीलें स्पीति और 487 किन्नौर के खाब से नीचे हिमाचल प्रदेश में आने वाले सतलुज क्षेत्र में हैं। इनमें से 49 झीलें 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली हैं। सतलुज के अलावा चिनाब और रावी बेसिन के ग्लेशियरों में भी 373 झीलें हैं।
सतलुज बेसिन में 49 झीलें 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैलीं
उपग्रह की तस्वीरों में अकेले सतलुज बेसिन में 2,292 ग्लेशियल झीलें सामने आईं
राज्य सरकार में आपदा नियंत्रण के परामर्शदाता व हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्टे) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. एसएस रंधावा के अनुसार लिस-4 उपग्रह के 5.8 मीटर रिजॉल्यूशन वाले डेटा से 2023 की तस्वीरों के आधार पर परिषद की ओर से किए ताजा अध्ययन में अकेले सतलुज बेसिन में 2,292 ग्लेशियल झीलें सामने आई हैं। लिस-3 उपग्रह डेटा 23.5 मीटर रिजॉल्यूशन वाले डेटा में वर्ष 2019 में चिनाब बेसिन में 242, ब्यास में 93 और रावी में 38 झीलें चिह्नित की जा चुकी हैं। भूकंप के दृष्टि से हिमाचल जोन छह में डाल दिया गया है, जबकि पहले इसे जोन चार और पांच में रखा जाता था। उनके मुताबिक नेपाल जैसी स्थिति में भूकंप के बाद अगर कोई ग्लेशियल झील फटती है तो बड़ी तबाही हो सकती है।
विशेषज्ञों ने ये कहा
आमतौर पर ऐसी झीलों के टूटने के प्रमुख कारण हिमस्खलन और भूकंप होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक हालांकि सभी झीलें खतरे वाली नहीं हैं, लेकिन तेजी से बढ़ रही और अस्थिर झीलों की पहचान सबसे जरूरी है। सतलुज बेसिन में तिब्बत की ओर मौजूद झीलों पर उपग्रह आधारित निगरानी, हिमाचल में संभावित बाढ़ मार्गों की पहचान और पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। तिब्बत में किसी झील के टूटने पर उसका पानी सतलुज के रास्ते हिमाचल में प्रवेश करेगा और इसके बाद इसका असर पंजाब के मैदानी क्षेत्रों तक होगा। हाइड्रो इंजीनियर आरएल जस्टा के मुताबिक सतलुज बेसिन का करीब एक चौथाई क्षेत्र हिमाचल में है, जबकि तीन चौथाई चीन अधिकृत तिब्बत में पड़ता है, इसलिए खतरे का आकलन हिमाचल की सीमा तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
सांगला के देबार कंडे में खतरा बनी यारपाबंग झील
नेपाल में जय प्रलय के बाद से सांगला वैली के लोगों में डर का माहौल है। कारण सांगला के देबार कंडे में बढ़ता जा रहा यारपाबंग झील का क्षेत्रफल है। यहां करीब 550 मीटर लंबी और 260 मीटर चौड़ी झील भूकंप और बाढ़ की स्थिति में बस्पा और सतलुज नदी के मुहाने पर बसे इलाकों में भारी तबाही मचा सकती है। सांगला वैली के लोगों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से यहां सुरक्षा के लिहाज से उचित कार्य करने की मांग की है।
सूबे की चार झीलें सबसे खतरनाक
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हिमाचल की चार झीलों को सबसे खतरनाक माना है। इनकी निगरानी के लिए अर्ली वर्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। कुल्लू जिले की वासुकी झील के अलावा लाहौल-स्पीति की गिपांग झील (घेपल) है। इसका दायरा भी सबसे अधिक 92.09 हेक्टेयर है। किन्नौर जिले में 15,465 फीट की ऊंचाई पर सांगला घाटी में बास्पा झील का क्षेत्रफल 18.88 हेक्टेयर है। सतलुज बेसन पर काशंग गाड़ में कलका नाम की झील का क्षेत्रफल भी 27.89 हेक्टेयर है। अगर ये झीलें टूटीं तो भारी नुकसान हो सकता है।
2000 की बाढ़ में सतलुज 60 फीट चढ़ी
31 जुलाई और एक अगस्त 2000 की बाढ़ में सतलुज का जलस्तर सामान्य से करीब 60 फीट ऊपर पहुंचा, करीब 200 किलोमीटर एनएच-22 प्रभावित हुआ और 20 पुल व 22 झूले बह गए। 135 लोगों की मौत हुई और नुकसान करीब 1,466 करोड़ रुपये आंका गया।
2005 में पारछू टूटी, 10 किमी एनएच-22 बहा
26 जून 2005 को तिब्बत में पारछू झील टूटने के बाद सतलुज में बाढ़ आई, जिसमें वांगतू से समदो के बीच करीब 10 किलोमीटर एनएच-22 बह गया और 10 पुल व 11 रोपवे तबाह हुए। सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान करीब 610 करोड़ रुपये आंका गया।
सरकारों को ठोस नीति बनानी होगी कि नदियों के किनारे सरकारी और गैर सरकारी कोई भी निर्माण न हो। यह सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। अन्यथा इन झीलों में हलचल हुई तो ये बड़ी तबाही ला सकती हैं। हिमाचल से होकर बहने वाली प्रमुख नदियों के बेसिन में 16 ऐसे ग्लेशियर झील आकार ले चुकी हैं, जो कभी भी नेपाल जैसी तबाही मचा सकती हैं। कई झीलों का आकार तीन दशक के अरसे में 44 फीसदी बढ़ गया है। – राजेश्वर सिंह बांश्टू, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग एनआईटी, हमीरपुर
सीएम सुक्खू ने ये कहा
लाहौल-स्पीति में एक झील बनी है। काफी वर्षों से बनी है। उस पर अध्ययन किया गया है। इस बारे में पिछले दिनों भी बैठक ली थी। कुछ जगह ग्लेशियर कम हो रहे हैं। कुछ जगह बढ़ रहे हैं। इसे देखना पड़ेगा कि क्या परिस्थिति है।– मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
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हिमाचल प्रदेश में एक साल से अधिक समय से खाली पड़े मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) और सूचना आयुक्त (IC) के पदों को भरने के लिए सरकार ने चयन समिति गठित कर ली है। प्रशासनिक सुधार विभाग ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति के चेयरमैन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू होंगे, जबकि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल सदस्य होंगे। आदेश के अनुसार यह समिति राज्य के CIC और IC के नामों पर विचार कर उनकी नियुक्ति के लिए सिफारिश करेगी, ताकि राज्य सूचना आयोग को दोबारा पूरी तरह संचालित किया जा सके। अब चयन समिति उन नामों पर विचार करेगी, जिन्होंने सीआईसी और आईसी बनने के लिए आवेदन कर रखा है। एक साल से अधिक समय से इन दोनों पदों के खाली होने से सूचना आयोग दफ्तर सफेद हाथी साबित हो रहा है। सूचना का अधिकार कानून (RTI) के तहत लगभग 1700 अपील पेडिंग है। सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में नियुक्ति के दिए थे निर्देश इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी हिमाचल समेत सभी राज्यों को समयबद्ध तरीके से सीआईसी और आईसी की नियुक्तियां करने का निर्देश दिए हैं। अंजली भारद्वाज बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सभी प्रदेशों को नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर दो सप्ताह के भीतर परिणाम घोषित करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इन आदेशों के बाद राज्य सरकार ने चयन समिति गठित कर दी है। एक साल से खाली हैं दोनों पद हिमाचल में सीआईसी और आईसी के दोनों पद लंबे समय से खाली हैं। पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त आरडी धीमान जून 2025 में रेरा के चेयरमैन नियुक्त हुए थे। वहीं राज्य सूचना आयुक्त एसएस गुलेरिया 3 जुलाई 2025 को रिटायर हुए। इसके बाद आयोग में कोई CIC या IC दोनों का ही कामकाज ठप है। दो बार आवेदन, फिर भी नियुक्ति नहीं हालांकि, इन पदों को भरने के लिए सरकार पहले भी दो बार आवेदन मांग चुकी है। सरकार ने नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। RTI की दूसरी अपीलों पर असर सूचना आयोग का सबसे महत्वपूर्ण काम RTI के तहत आने वाली दूसरी अपीलों और शिकायतों की सुनवाई करना है। जब किसी व्यक्ति को विभाग से मांगी गई सूचना नहीं मिलती या पहली अपील के बाद भी संतोषजनक सूचना नहीं दी जाती, तो वह राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील कर सकता है। मगर यहां अपील सुनने वाला कोई नहीं है।
आगरा। ताजमहल देखने गए 12 वर्षीय अरमान की शुक्रवार को यमुना नदी में डूबने से मौत हो गई। यह घटना एत्माद्दौला क्षेत्र के मेहताब बाग स्थित ग्यारह सीढ़ी घाट पर सुबह करीब 11 बजे हुई। प्रकाश नगर निवासी अरमान पुत्र बादशाह अपने दोस्तों वाहिद, हसन पुत्र नाजिम और हसद पुत्र अकबर के साथ यमुना किनारे ताजमहल देख रहा था। इसी दौरान अरमान का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में जा गिरा। दोस्त को डूबता देख हसद ने उसे बचाने के लिए यमुना में छलांग लगा दी। हसद ने अरमान को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गहरे पानी के कारण वह उसे पकड़ नहीं सका। कुछ देर बाद हसद तैरकर नदी से बाहर आ गया, जबकि अरमान पानी की लहरों में लापता हो गया। हादसे की जानकारी मिलते ही घाट पर अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से अरमान की तलाश शुरू कराई। नदी में स्टीमर भी उतारा गया और पीएसी की बाढ़ राहत टीम को भी सूचित किया गया। देर शाम तक अरमान का कोई सुराग नहीं मिल सका था। बेटे के लापता होने की खबर से मां शकीना और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने बताया कि अरमान के भाई गोविंदा, फरमान और आहिल मानसिक रूप से कमजोर हैं, जिससे परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति में सरकार के हस्तक्षेप से जुड़े कानून को उच्च न्यायालय की ओर से रद्द किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि खुद को कानून का जानकार बताने वाले मुख्यमंत्री बार-बार ऐसे फैसले ले रहे हैं और ऐसे कानून बना रहे हैं, जिनकी न्यायालय में फजीहत हो रही है। नेता विपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी से ही अपनी राजनीति की शुरुआत की थी, इसलिए शायद वह यूनिवर्सिटी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
सरकार को विश्वविद्यालयों के विभागों की तरह चलाने की उनकी कोशिश को उच्च न्यायालय ने एक बार फिर झटका दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को बहुत पढ़ा-लिखा और कानून का जानकार बताते हैं, लेकिन विधानसभा में उनके द्वारा बनाए जा रहे कानून लॉ ऑफ द लैंड की कसौटी पर एक मिनट भी नहीं टिकते और असांविधानिक करार दिए जाते हैं। विपक्ष विधानसभा के अंदर बार-बार सरकार को आगाह करता है कि ऐसे कानून न बनाए जाएं, जो न्यायिक समीक्षा में टिक ही न सकें। इससे केवल सरकार की नहीं, बल्कि विधानसभा की गरिमा भी प्रभावित होती है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इससे पहले पूर्व विधायकों की पेंशन रद्द करने का कानून बनाया गया, जिसे हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया। कर्मचारियों के प्रमोशन के अधिकार को छीनने का प्रयास भी न्यायालय ने रद्द कर दिया। पंचायत चुनावों को लेकर भी सरकार को न्यायालय से लगातार झटके लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार कोई भी निर्णय लेते समय न असांविधानिक सीमाओं का ध्यान रखती है और न ही नैतिक मर्यादाओं का। मुख्यमंत्री को न अपने पद की मर्यादा का ख्याल है और न विधानसभा की गरिमा का। सरकार को समझना चाहिए कि बहुमत के बल पर विधानसभा में कानून पारित किया जा सकता है, लेकिन संविधान के ऊपर कोई नहीं है।
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