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  • नोएडा में जल्द गुलजार होंगे दो स्ट्रीट मार्केट:खाने-पीने के साथ मिलेगी पार्किंग, बॉटनिकल गार्डन से जीआईपी के बीच 19 और सेक्टर-18 में 15 कियोस्क चलेंगे

    शहर में खरीदारी और खाने-पीने के शौकीनों के लिए जल्द ही दो नए स्ट्रीट मार्केट शुरू होने जा रहे हैं। बॉटनिकल गार्डन और जीआईपी मॉल के बीच बने कियोस्क के संचालन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी तरह सेक्टर-18 में भी स्ट्रीट मार्केट विकसित किया जाएगा। इन दोनों जगहों पर कुल 34 कियोस्क संचालित किए जाएंगे। बॉटनिकल गार्डन और जीआईपी मॉल के बीच 19 कियोस्क और सेक्टर-18 में 15 कियोस्क बनाए गए हैं। इनका संचालन शुरू होने के बाद शहरवासियों को खुले माहौल में खान-पान और खरीदारी का नया ठिकाना मिलेगा। 17 सितंबर तक कंपनियां कर सकेंगी आवेदन
    नोएडा प्राधिकरण ने कियोस्क संचालन के लिए कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। इच्छुक कंपनियां 17 सितंबर तक आवेदन कर सकती हैं। इसके बाद नियमों और शर्तों के आधार पर कियोस्क का आवंटन किया जाएगा। प्राधिकरण की कोशिश है कि कम लागत में संचालन करने के साथ ज्यादा राजस्व देने वाली कंपनी को प्राथमिकता मिले। इससे प्राधिकरण को भी आमदनी होगी और लोगों को बेहतर स्ट्रीट मार्केट की सुविधा मिल सकेगी। तीन बार निकला टेंडर, नहीं मिलीं कंपनियां
    कियोस्क के संचालन के लिए प्राधिकरण पहले भी तीन बार टेंडर जारी कर चुका है। हालांकि, नियम और शर्तों के मुताबिक कंपनियों के आवेदन नहीं आने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। प्राधिकरण को उम्मीद है कि इस बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबे समय से तैयार कियोस्क लोगों के लिए खोल दिए जाएंगे। इंदौर के 56 मार्केट की तर्ज पर बनेगा ठिकाना
    इन स्ट्रीट मार्केट को इंदौर के 56 मार्केट की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। यहां मुख्य रूप से खाने-पीने की दुकानें होंगी। अलग-अलग तरह के व्यंजनों के साथ लोगों को बैठने और घूमने के लिए बेहतर माहौल देने की तैयारी है। मार्केट शुरू होने के बाद यह युवाओं और परिवारों के लिए शाम के समय घूमने और खाने-पीने का नया ठिकाना बन सकता है। 100 से ज्यादा वाहन खड़े करने की सुविधा
    स्ट्रीट मार्केट आने वाले लोगों के लिए पार्किंग की भी व्यवस्था की जा रही है। यहां 100 से ज्यादा वाहनों की सरफेस पार्किंग बनाई जाएगी। इससे मार्केट में आने वाले लोगों को सड़क किनारे वाहन खड़े करने की परेशानी नहीं होगी। पूरी परियोजना के निर्माण पर करीब 2 करोड़ 23 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। अब कियोस्क के संचालन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोगों को लंबे इंतजार के बाद दोनों स्ट्रीट मार्केट की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
  • अफीम कोठी में धंसा डॉट नाला, गलियों में भरा पानी:घरों की दीवारों-फर्श में आईं दरारें, अब रिश्तेदारों ने आने से किया इनकार

    लक्ष्मीपुरवा के शक्कर मिल खलवा इलाके में जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।अफीमकोठी पेट्रोल पंप के सामने जीटी रोड पर बुधवार को डॉट नाला धंसने से सड़क पर बड़ा गड्ढा हो गया था।नाला धंसने के बाद हालात यह हैं कि आसपास के इलाकों में पानी पहुंच गया है। लोगों को इसी पानी के बीच से होकर आने-जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, इलाके के कुछ घरों की फर्श और दीवारों में दरारें आने से लोगों को मकान धंसने का खतरा भी सता रहा है। देखिए 3 तस्वीरें… शक्कर मिल खलवा की गलियों में भरा पानी स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां कुछ महीने पहले ही सीवर लाइन डाली गई थी। काम के दौरान पानी की लाइन भी टूट गई थी। इसके बाद लगातार पानी रिसने से जमीन के नीचे की मिट्टी धीरे-धीरे कटती चली गई। अब डॉट नाला भी धंस गया। नाला धंसने से जीटी रोड पर बड़ा गड्ढा बन गया और आसपास का पानी शक्कर मिल खलवा की गलियों में भरने लगा। रिश्तेदारों ने आने से किया इंकार मुन्नी देवी ने बताया कि पानी भरने से घर से निकलना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा के काम के लिए भी लोगों को पानी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है। वहीं श्रीराम साहू ने बताया कि रक्षाबंधन पर रिश्तेदारों को घर आना था, लेकिन रास्ते में इतना ज्यादा पानी भरा होने के कारण कई रिश्तेदारों ने आने से ही मना कर दिया। उनका आरोप है कि अधिकारी मौके पर आए थे, लेकिन सिर्फ वीडियो बनाकर लौट गए। इस समस्या का समाधान नहीं हुआ। कई मकानों में आईं दरारें स्थानीय निवासी गुड्डी ने बताया कि कुछ समय पहले इलाके में नाले की लाइन डालने का काम हुआ था। इसके बाद घर की कई दीवारों में अचानक से दरारें आने लगी हैं। अब घर के फर्श में भी दरारें आ गई हैं और उन्हें मकान के धंसने का डर बना हुआ है। जलभराव के बीच से गुजरने को मजबूर लोग स्थानीय संतोष ने बताया कि नाले का पानी सड़क पर भर गया है। इसी पानी के बीच से होकर लोगों को मजबूरी में गुजरना पड़ रहा है। त्योहार के दिन भी यही स्थिति बनी रही। वहीं चंदन ने बताया कि जीटी रोड पर नाला धंसे हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया है। लोगों को मजबूरी में जलभराव के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। जीटी रोड पर लगा जाम, हादसे का खतरा व्यस्त जीटी रोड पर डॉट नाला धंसने से यातायात भी प्रभावित हो रहा है। सड़क पर बने बड़े गड्ढे और जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है। कई बार वाहनों की कतार लगने से जाम की स्थिति बन रही है। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान शहर में डॉट नालों के धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे सड़क की स्थिति खराब होने के साथ ही आसपास रहने वाले लोगों के घरों और जान-माल पर भी खतरा बढ़ रहा है। लोगों ने जलकल विभाग से धंसे डॉट नाले की तत्काल मरम्मत कराने, जलभराव दूर करने और सड़क को सुरक्षित कराने की मांग की है
  • कमीशनबाजी से घिरा कानपुर नगर निगम का अभियंत्रण विभाग:अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई, मुख्य अभियंता एसएफए जैदी भी रडार पर

    कानपुर नगर निगम के अभियंत्रण विभाग में भ्रष्टाचार और कमीशनबाजी ने अब तूल पकड़ लिया है। विभाग के मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत पहुंचने के बाद अभियंताओं से लेकर लिपिक तक की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
    इनके ठेकेदारों के साथ मिलीभगत और कमीशन के खेल ने शहर के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि शहर में जगह-जगह सड़कें टूटी हैं और गड्ढों की समस्या लगातार बढ़ रही है। डेढ़ साल पहले लखनऊ से आए थे मुख्य अभियंता नगर निगम सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी लखनऊ से तबादले पर कानपुर आए थे। अपने साथ तीन चहेते ठेकेदारों को भी कानपुर लेकर आए थे। इसके बाद अभियंत्रण विभाग में उनके काम करने का रास्ता बनाया गया। सूत्रों का दावा है कि इन ठेकेदारों को छोटे से लेकर बड़े तक कई काम दिलाए गए और कमीशनबाजी का जबरदस्त खेल चलता रहा। इनकी शिकायतें आला अधिकारियों के साथ शासन तक भी पहुंचीं। इसी वजह से नगर आयुक्त ने शासन को पत्र लिखकर जांच प्रभावित न हो इसके लिए मुख्य अभियंता स्तर के एक अधिकारी की मांग की थी। पुलिस इन फर्मों की भी कर रही जांच पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य अभियंता के नजदीकी लोग चार फर्में चला रहे हैं। इसमें मेहताब इंटरप्राइजेज लखनऊ, बजरंग ट्रेडर्स, सैय्यद ट्रेडर्स और एसएस इंटरप्राइजेज शामिल हैं। शिकायत में इन फर्मों के पीछे मुख्य अभियंता का प्रभाव होने का आरोप लगाया गया है। पुलिस अब इन चारों फर्मों से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। इसके चलते अभियंत्रण विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी-कर्मचारी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। अभियंता से बाबू तक रडार पर सूत्रों के मुताबिक, अभियंत्रण विभाग के कई अभियंताओं और कर्मचारी भी ठेकेदारों के साथ कमीशनबाजी में शामिल हैं। कहीं रिश्तेदारों के नाम पर फर्में चल रही हैं तो कहीं चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने में मदद की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई अभियंत्रण विभाग में कमीशनबाजी और भ्रष्टाचार के आरोप नए नहीं हैं। लंबे समय से शिकायतें सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विभाग में मनमानी बढ़ती गई। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नगर निगम में वसूली टैक्स पूछने के बाद खलबली मची। इसके बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ अलग-अलग मामलों की जांच के लिए समितियां गठित की गई हैं। अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई? नगर निगम में अब तक हुई कार्रवाई से ऐसा नजर आ रहा है कि निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई तेजी से हो रही है, लेकिन जिन अधिकारियों के स्तर पर टेंडर प्रक्रिया की निगरानी और स्वीकृति की जिम्मेदारी थी, उनकी जवाबदेही अभी तय नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि अगर भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस नीति है तो इसकी आंच अधिकारियों तक कब पहुंचेगी।
  • प्रयागराज मंडल में 55 हजार महिलाओं ने किया मुफ्त सफर:रोडवेज और सिटी बसों में रही भीड़, डबल डेकर बस का हुआ ट्रायल

    रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को मुफ्त यात्रा सुविधा मिलने से शुक्रवार को रोडवेज और शहर की ई-बसों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। प्रयागराज मंडल में पहले ही दिन करीब 55 हजार महिलाओं ने एक सहयोगी के साथ मुफ्त यात्रा का लाभ उठाया। वहीं पहली बार शहर में डबल डेकर बस का ट्रायल भी किया गया, जिसमें महिलाओं को नि:शुल्क सैर कराई गई। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) रवींद्र सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन पर रोडवेज की ओर से बहनों को मुफ्त यात्रा सुविधा दी गई, जिसके चलते बस स्टेशनों और प्रमुख रूटों पर यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। ई-बसों में 8 हजार से ज्यादा महिलाओं ने किया सफर
    शहर में संचालित 50 ई-बसों में भी दिनभर यात्रियों की भीड़ रही। सिटी बस सेवा के आंकड़ों के अनुसार करीब 10,600 यात्रियों ने सफर किया, जिनमें 8,315 महिलाएं शामिल रहीं। नैनी, फाफामऊ, झूंसी, सिविल लाइंस और धूमनगंज रूटों पर सबसे अधिक भीड़ दर्ज की गई। डबल डेकर बस का सफल ट्रायल
    महाकुंभ के दौरान मिली डबल डेकर बस का पहली बार शहरी परिवहन में ट्रायल किया गया। सिविल लाइंस से अलोपीबाग और फिर अलोपीबाग से पत्थर गिरजाघर तक चलाए गए ट्रायल में करीब 90 महिलाओं ने मुफ्त यात्रा की। यात्रियों ने डबल डेकर बस के संचालन को लेकर उत्साह जताया। पहले रूट की बाधा बनी थी अड़चन
    महाकुंभ के दौरान प्रयागराज को 26 ई-अटल बसें मिली थीं, जिनमें दो डबल डेकर बसें भी शामिल थीं। हालांकि बिजली के तार, आरयूबी-आरओबी और ऊंचाई संबंधी बाधाओं के कारण इनके संचालन के लिए उपयुक्त रूट तय नहीं हो पा रहा था। अब इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पत्थर गिरजाघर-झूंसी रूट को अंतिम रूप दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल सफल रहने के बाद शहर में डबल डेकर बसों के नियमित संचालन की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
  • 18 फीट गड्ढे में बैठने वाले सपा MLA का इंटरव्यू:हसन रूमी बोले- सड़क दरक रही थी; अफसरों को बताया, नहीं आए तो उतर गया

    कानपुर की जाजमऊ सरैया वीआईपी रोड पर सड़क धंसने के विरोध में समाजवादी पार्टी के विधायक हसन रूमी करीब 18 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर 4.5 घंटे तक बैठे रहे। दैनिक भास्कर ने बातचीत कर जानने की कोशिश की आखिर विधायक गड्ढे में क्यों उतरे। विधायक के मुताबिक, गड्ढे के अंदर सफोकेशन था। ऑक्सीजन की कमी महसूस हो रही थी। इस दौरान पीछे ओर दाईं तरफ से सड़क लगातार दरक रही थी। हसन रूमी का कहना है कि गड्ढे में उतरना पहले से तय कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने मौके पर जाने से पहले नगर आयुक्त, एक्सईएन और संबंधित अधिकारियों को फोन किया था। करीब एक घंटे इंतजार के बाद भी अधिकारी नहीं पहुंचे तो उन्होंने विरोध के तौर पर गड्ढे में उतरने का फैसला किया।
    पढ़िए विधायक हसन रूमी से बातचीत के सवाल-जवाब… सवाल: आप 4.5 घंटे तक 18 फीट गहरे गड्ढे में बैठे रहे। उस दौरान क्या महसूस हुआ?
    जवाब- मैं गड्ढे में बैठने के इरादे से नहीं गया था। जब वहां पहुंचा, उससे पहले संबंधित विभाग के मुखिया और नगर आयुक्त को फोन किया था। मैंने कहा था कि दो दिन से गड्ढा हुआ है। क्षेत्रीय विधायक होने के नाते चाहता था कि संबंधित अधिकारी मौके पर आएं और लोगों को आश्वासन दें कि काम शुरू हो जाएगा। जब मैं वहां पहुंचा तो करीब एक घंटे तक कोई नहीं आया। इसके बाद मैंने लोकतंत्र में मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए विरोध के लिए गड्ढे में उतरने का फैसला किया। सवाल: जब गड्ढे के अंदर पहुंचे डर नहीं लगा? जवाब-अंदर काफी सफोकेशन था। गैस भी थी। लेकिन जब विरोध होता है तो किसी चीज से डरा नहीं जाता। मुझे लगा कि मैं जितनी देर यहां बैठा हूं और अधिकारी नहीं आ रहे हैं, इससे उनकी निष्क्रियता दिखाई दे रही है। मुझे कई बार डर भी लगा। पीछे से सड़क धंस रही थी। दाईं तरफ का हिस्सा दरक भी रहा था। एक जगह पर बैठना मुश्किल था। मेरे साथ जो लोग थे, उनसे कहा कि आप लोग बाहर चले जाएं। अगर एक साथ सड़क कोलैप्स हो गई तो बाहर निकलने में दिक्कत होगी। सवाल: क्या आपको अपनी जान का खतरा महसूस हुआ?
    जवाब- कई बार डर का अहसास हुआ। अंदर का वातावरण भयावह था। गड्ढा बहुत गहरा था। दाएं-बाएं भी गड्ढे थे। सड़क बार-बार दरक रही थी। ऑक्सीजन की कमी महसूस हो रही थी। ऊपर वाले का करम था। मैं ईमानदारी से वहां बैठा था। मैं इसलिए बैठा था कि अपने क्षेत्र की जनता और वहां से गुजरने वाले हजारों-लाखों लोगों को परेशानी न हो। जिस रास्ते से पानी निकला, उससे मुख्य सड़क के भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा था। सवाल: आप गड्ढे में कब उतरे और कब बाहर निकले?
    जवाब- जब अधिकारियों का इंतजार करने के बाद भी कोई नहीं आया, तो करीब 12:30 से 12:35 बजे के बीच मैं गड्ढे में उतरा। करीब 4:45 से 5 बजे के बीच वहां से बाहर निकला। सवाल: क्या अधिकारियों को पहले से पता था कि आप मौके पर पहुंच रहे हैं?
    जवाब- हां, लेकिन मेरा कोई प्रायोजित कार्यक्रम नहीं था। मैं ईमानदारी से संबंधित विभाग के अधिकारियों को जानकारी देकर वहां गया था। नगर आयुक्त को फोन किया, एक्सईएन को फोन किया और संबंधित अधिकारियों को भी फोन किया, लेकिन कोई जल्दी नहीं पहुंचा। मेरी जिम्मेदारी थी कि वहां जाकर लोगों को भरोसा दिलाऊं कि सड़क और गड्ढे का काम जल्दी शुरू होगा। अगर मेरे जाने के बाद सिर्फ लीपापोती हो जाए और लोगों को आश्वासन न मिले, तो यह बेईमानी होती। सवाल: आपने गड्ढे में उतरने का फैसला क्यों किया?
    जवाब- मैंने जनता से वादा किया है कि हर समस्या के लिए उनकी लड़ाई लड़ूंगा। अगर किसी समस्या के सामने डरकर भाग जाऊं कि मेरे साथ हादसा हो सकता है, तो मेरा वादा झूठा हो जाएगा।
    मैं जनता को यह भी बताना चाहता था कि मुख्य मार्ग तक की अनदेखी हो रही है। यह रास्ता कानपुर को जाजमऊ से जोड़ता है और यहां से बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। जब मुख्य मार्ग की यह स्थिति है तो छोटी सड़क, गली और नाली की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल: नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री भी अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। कानपुर में नगर निगम के हाल कैसे हैं?
    जवाब- मैंने विधानसभा में अपने अधिकारों के तहत नगर निगम के कामकाज को लेकर कई बार शिकायत की है। नियम के तहत भी मुद्दे उठाए हैं। नगर निगम के कॉर्पोरेटरों ने भी शिकायतें की हैं। जब अपनी ही पार्टी के लोगों को लगा कि घपला, घोटाला और भ्रष्टाचार हो रहा है, तो उन्होंने भी शिकायत की। इससे विपक्ष की शिकायतों को भी कहीं न कहीं पार्टी के लोगों ने सही माना। सवाल: सड़क की गुणवत्ता और निर्माण को लेकर आपका क्या आरोप है?
    जवाब- यह सड़क करीब डेढ़-दो साल पुरानी है। करीब डेढ़ महीने पहले यहां एक छोटा-सा छेद हुआ था और उससे पानी का रिसाव हो रहा था। नगर निगम के लोग आए और लीपापोती कर दी। मेरा सवाल है कि वीआईपी रोड पर इस तरह की लीपापोती करने की हिम्मत कैसे हो जाती है? अगर किसी ऐसी सड़क पर कच्चा काम किया जाए जहां ट्रैफिक कम हो, तो शायद वह कुछ समय चल जाए। लेकिन इस मार्ग पर ऐसी लापरवाही जल्दी सामने आ जाती है। सवाल: आपने भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या कहना है?
    जवाब- मेरा आरोप है कि विकास के काम में जिस प्रोजेक्ट के लिए पैसा आवंटित होता है, उसका पूरा पैसा जमीन पर नहीं लगता। करीब 40% पैसा प्रोजेक्ट पर लगता है और 60% विभागीय स्तर पर और सत्ता के संरक्षण में चला जाता है। कई ठेकेदार पर कार्रवाई हुई है, कई पर होनी है।
  • हर शुक्रवार को गोरखपुर से मुंबई के लिए चलेगी अमृत-भारत:यात्री बोले- अंदर शानदार व्यवस्था है, 875 रुपये में मुंबई तक सफर

    गोरखपुर से मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए शुक्रवार को बड़ी सुविधा शुरू हो गई। गोरखपुर जंक्शन से गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस-गोरखपुर अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस का नियमित संचालन शुरू हुआ। सुबह ट्रेन के रवाना होने के दौरान स्टेशन पर यात्रियों में काफी उत्साह देखने को मिला। ट्रेन नंबर 15085/15086 अब गोरखपुर और बांद्रा टर्मिनस के बीच हर सप्ताह चलेगी। गोरखपुर से ट्रेन प्रत्येक शुक्रवार और बांद्रा टर्मिनस से प्रत्येक शनिवार को रवाना होगी। इससे गोरखपुर और मुंबई के बीच सफर करने वाले यात्रियों को नियमित रेल सेवा का लाभ मिलेगा। ट्रेन के अंदर की व्यवस्था देखकर खुश हुए यात्री नई अमृत भारत ट्रेन से सफर कर रहे यात्रियों ने ट्रेन के अंदर की व्यवस्था की तारीफ की। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के अंदर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है। स्लीपर कोच में भी साफ-सुथरा माहौल देखने को मिल रहा है। यात्रियों का कहना था कि मुंबई जैसे लंबे सफर के लिए ट्रेन में बेहतर व्यवस्था होना काफी राहत देने वाला है। यात्रियों ने स्लीपर श्रेणी में साफ-सफाई और सुविधाओं को अच्छी पहल बताया। गोरखपुर से मुंबई का किराया 875 रुपये यात्रियों के अनुसार गोरखपुर से मुंबई तक स्लीपर श्रेणी का किराया करीब 875 रुपये रखा गया है। यात्रियों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी के सफर में स्लीपर कोच में साफ-सुथरी व्यवस्था और सुविधाएं मिलना काफी अच्छी बात है। गोरखपुर से सुबह 7:50 बजे रवाना होगी ट्रेन ट्रेन संख्या 15085 गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस प्रत्येक शुक्रवार को गोरखपुर से सुबह 7:50 बजे रवाना होगी। इसके बाद ट्रेन खलीलाबाद से 8:29 बजे, बस्ती से 8:57 बजे और गोंडा से 10:15 बजे रवाना होगी। आगे ट्रेन बादशाह नगर से दोपहर 1:13 बजे, ऐशबाग से 2:05 बजे और कानपुर सेंट्रल से 3:45 बजे चलेगी। ट्रेन टूंडला से शाम 7:15 बजे, आगरा फोर्ट से रात 8 बजे, बयाना से रात 10:10 बजे और गंगापुर सिटी से रात 11:05 बजे रवाना होगी। दूसरे दिन इन स्टेशनों से होकर बांद्रा पहुंचेगी यात्रा के दूसरे दिन ट्रेन कोटा से रात 1:05 बजे, भवानी मंडी से 2:10 बजे, शामगढ़ से 2:30 बजे और रतलाम से सुबह 5 बजे रवाना होगी। इसके बाद ट्रेन वडोदरा से सुबह 8:55 बजे, सूरत से 11:57 बजे, वलसाड से दोपहर 1:09 बजे, वापी से 1:32 बजे और पालघर से 3:20 बजे रवाना होगी। ट्रेन बोरीवली से शाम 4:48 बजे रवाना होकर शाम 5:45 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। शनिवार रात 9:45 बजे बांद्रा से चलेगी वापसी ट्रेन वापसी में ट्रेन संख्या 15086 बांद्रा टर्मिनस-गोरखपुर अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस प्रत्येक शनिवार को रात 9:45 बजे बांद्रा टर्मिनस से रवाना होगी। ट्रेन बोरीवली से 10:13 बजे, पालघर से 10:56 बजे और वापी से रात 11:49 बजे रवाना होगी। इसके बाद दूसरे दिन वलसाड से रात 12:22 बजे, सूरत से 1:31 बजे, वडोदरा से 3:12 बजे और रतलाम से सुबह 6:50 बजे ट्रेन चलेगी। इसके बाद ट्रेन शामगढ़ से 8:30 बजे, भवानी मंडी से 8:55 बजे, कोटा से सुबह 10:25 बजे और गंगापुर सिटी से दोपहर 12:40 बजे रवाना होगी। आगे ट्रेन बयाना से दोपहर 2 बजे, आगरा फोर्ट से 4:25 बजे, टूंडला से 5:25 बजे और कानपुर सेंट्रल से रात 10:45 बजे चलेगी। तीसरे दिन सुबह 6:45 बजे गोरखपुर पहुंचेगी वापसी यात्रा में ट्रेन तीसरे दिन ऐशबाग से रात 12:58 बजे, बादशाह नगर से 1:21 बजे, गोंडा से 3:40 बजे, बस्ती से 4:53 बजे और खलीलाबाद से 5:16 बजे रवाना होगी। इसके बाद अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस सुबह 6:45 बजे गोरखपुर जंक्शन पहुंचेगी। मुंबई जाने वाले यात्रियों को मिलेगी राहत गोरखपुर और मुंबई के बीच बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार और अन्य कामों के लिए यात्रा करते हैं। नई अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस के नियमित संचालन से इन यात्रियों को एक और विकल्प मिल गया है। हर सप्ताह ट्रेन चलने से यात्रियों को अपनी यात्रा पहले से तय करने में भी सुविधा होगी।
  • गोरखपुर जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू वार्ड बना:10 बेड की सुविधा उपलब्ध, SIC बोले- अभी तक कोई पॉजिटिव केस नहीं

    गोरखपुर जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से बचाव और उससे निपटने के लिए पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। SIC डॉ. आरडी रमन ने बताया कि शासन से मिले निर्देशों के बाद अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल परिसर में 10 बेड का एक अलग स्वाइन फ्लू वार्ड बनाकर तैयार कर दिया गया है। इस वार्ड में मरीजों के इलाज के लिए सभी जरूरी सुविधाएं और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। गाइडलाइन के मुताबिक सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अस्पताल में आने वाले वायरल बुखार के हर मरीज की बहुत बारीकी से जांच की जा रही है। राहत की बात यह है कि अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू का एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अस्पताल में पुख्ता इंतजाम जिला अस्पताल की ओपीडी (OPD) में रोज सैकड़ों मरीज बुखार, सर्दी और जुकाम की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों की तुरंत पहचान करें। अगर किसी मरीज में स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण दिखते हैं, तो उसकी जांच कराई जाएगी। स्वाइन फ्लू वार्ड में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडरों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लाइफ सेविंग दवाओं का स्टॉक भी जमा कर लिया गया है। वार्ड में तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को खास हिदायत दी गई है कि वे मरीजों की देखभाल के दौरान पूरी सावधानी बरतें और खुद भी सुरक्षा किट का इस्तेमाल करें। क्या है स्वाइन फ्लू?
    स्वाइन फ्लू एक सांस से जुड़ा हुआ इन्फेक्शन है, जो एच1एन1 (H1N1) नाम के वायरस से फैलता है। यह एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो हवा के जरिए इसके वायरस दूसरों के शरीर में पहुंच जाते हैं। सही समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह बीमारी फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार जैसे ही होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे पहचान नहीं पाते। जिनमें बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है डॉक्टर का कहना है कि किसी भी बीमारी से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बहुत काम आती हैं। थोड़ा सा ध्यान रखकर इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। उन्होंने सलाह दी…. घबराएं नहीं, सावधानी बरतें
    डॉ. आरडी रमन ने लोगों से अपील की है कि वे बीमारी को लेकर पैनिक न हों। स्वाइन फ्लू का इलाज पूरी तरह से संभव है, बशर्ते सही समय पर डॉक्टर से संपर्क किया जाए। खुद से कोई भी दवा या एंटीबायोटिक खाने की गलती न करें। अगर बुखार दो-तीन दिनों में ठीक न हो या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो बिना देरी किए जिला अस्पताल आएं और अपनी जांच करवाएं। अस्पताल में जांच और इलाज के सारे साधन मौजूद हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है और आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
  • मां-रक्षाबंधन खोकर नहीं थम रहे 11 बहनों के आंसू:सैकड़ों कलाइयां सूनी और आंखों को रास्ते का इंतजार, 50 घंटे बाद कविता का अंतिम संस्कार

    मां-रक्षाबंधन खोकर नहीं थम रहे 11 बहनों के आंसू :::::: खुदखुशी करने वाली कविता का अंतिम संस्कार, 2 दिन बाद भी नहीं मिला रास्ता सैकड़ों कलाइयां सूनी और आंखों को रास्ते का इंतजार, 50 घंटे बाद कविता का अंतिम संस्कार वाराणसी में रास्ता खुलवाने के लिए दो साल संघर्ष के बाद आत्महत्या करने वाली कविता उपाध्याय का 48 घंटे बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार किया। 25 घंटे दरवाजे पर शव पड़े रहने के बाद अगले दिन शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया। देर रात परिजन शव मणिकर्णिका गंगाघाट लेकर गए, जहां पुलिस की मौजूदगी में 50 घंटे बाद मृतका को बेटे ने मुखाग्नि दी। रक्षाबंधन को अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने कविता उपाध्याय के साथ वर्षों के लिए त्योहार भी खो दिया। परिवार में सैकड़ों कलाइयां अनिश्चित काल के लिए सूनी रह गई, वही अहरक खास गांव की तमाम आंखों को अब रास्ते का इंतजार है। आधे गांव में सिर्फ सन्नाटा और बहनों की सिसकियां गूंज रही हैं। मृतका के परिजनों द्वारा पड़ोसी ऋषि उपाध्याय के खिलाफ तहरीर दी गई है। तस्वीरों में देखिए गांव और घटनास्थल… अब जानिए घटना… कविता उपाध्याय का घर वाराणसी में पिंडरा तहसील इलाके के अहरक खास गांव में है। बुधवार शाम करीब 7 बजे उन्होंने टॉयलेट में फांसी लगा ली। जब बेटे विशाल ने टॉयलेट का दरवाजा खोला, तो मां फंदे से लटकती मिली। उसने चिल्लाकर परिवार के लोगों को बुलाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराने की बात कही, तो परिजन ने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारे रास्ते पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। जब रास्ता ही नहीं है, तो शव किस रास्ते से लेकर जाएंगे? पहले विवाद का निपटारा हो, उसके बाद ही शव को पोस्टमॉर्टम या अंतिम संस्कार के लिए ले जाने देंगे।” अफसरों ने समझा-बुझाकर परिजनों को शांत कराया। कार्रवाई के साथ रास्ता दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद परिजन पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तैयार हुए और अगले 50 घंटे बाद कविता का अंतिम संस्कार हो सका। अब विवाद भी समझ लीजिए अहरक में संतोष उपाध्याय का मकान है। संतोष दिल्ली में रहकर नौकरी करते हैं। पिता लक्ष्मी नारायण उपाध्याय का काफी पहले निधन हो चुका है। बेटा विशाल MA की पढ़ाई कर रहा है। विशाल ने बताया कि घर से बाहर 6 फीट चौड़ी सरकारी जमीन थी। इसी से हमारा आना-जाना होता था। 2 साल पहले मनीष और अमित उपाध्याय के परिजनों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया। चारों तरफ दीवार खड़ी कर दी। इसके बाद हमारा रास्ता बंद हो गया। पड़ोसी के खिलाफ परिजनों ने दी तहरीर मृतका के परिजनों द्वारा पड़ोसी ऋषि उपाध्याय के खिलाफ तहरीर दी गई है। परिजनों द्वारा आरोप लगाया गया है कि यदि उनके द्वारा उत्पीड़न नहीं किया जाता और रास्ता बंद नहीं किया जाता तो कविता उपाध्याय आत्महत्या नहीं की होती। इंस्पेक्टर बड़ागांव प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों की तरफ से तहरीर मिली है, जांच की जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सन्नाटा और बहनों की सिसकियां वाराणसी की पिंडरा तहसील के अहरक खास गांव में कविता उपाध्याय (50) की मौत के बाद सिर्फ सन्नाटा और बहनों की सिसकियां गूंज रही हैं। ​मृतका के पति चार भाई हैं और सभी लोग रास्ते की परेशानी से जूझ रहे हैं। चारो भाइयों की कुल मिलाकर परिवार में 11 बेटियां हैं। घटना ने सीमा, अर्चना, सपना, प्रिया, जया, निक्की, राधिका, रिमझिम, स्वीटी, रिया और श्रेया से रक्षाबंधन का पर्व हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया है। बता दें कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार किसी पर्व पर परिवार के सदस्य के असमय चले जाने से उस परिवार में पर्व को तबतक नहीं मनाया जाता जबतक उसी त्योहार पर किसी नए सदस्य का जन्म न हो। बेटियां बोलीं- मां ना लौटेगी ना त्योहार ​मृतका की बेटी स्वीटी उपाध्याय ने बताया कि ‘हमारा रक्षाबंधन तो अब हमेशा के लिए छीन गया। न माँ वापस आ सकती हैं, न हमारा त्योहार लौटेगा। हमारी सरकार से बस इतनी ही गुहार है कि हमें हमारे घर आने-जाने का रास्ता दिलवा दिया जाए, ताकि मां की आत्मा को शांति मिले।’ मौत के तीसरे दिन किया गया अंतिम संस्कार घटना के बाद परिजनों द्वारा आरोप लगाया गया कि घर के सामने का करीब 6 फीट का रास्ता दीवार बनाकर बंद कर दिया गया है। परिवार के पास निकलने के लिए महज दो फीट की बेहद संकरी गली बची है। कविता उपाध्याय की आत्महत्या के बाद परिजन रास्ता खोलने की मांग को लेकर 24 घंटे तक शव दरवाजे पर रखकर अड़े रहे। अंत में शव से दुर्गंध आने लगी तो परिजन अधिकारियों के समझाने और आश्वासन के बाद गुरुवार शाम 7 बजे शव को उसी दो फीट के रास्ते से निकाला गया। उसके बाद शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को मिला तो परिजन सीधे मणिकर्णिका घाट पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। एसडीएम पिंडरा कुंदन राज कपूर ने परिजनों को भरोसा दिलाया है कि तहसीलदार कोर्ट में चल रहे इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक से कराई जाएगी। दस्तावेजों की जांच कर सुखाचार अधिनियम के तहत न्यायसंगत समाधान निकाला जाएगा। ——————— ये खबर भी पढ़ें… वाराणसी में महिला ने सुसाइड किया, बेटा बोला-लाश नहीं उठाएंगे:रास्ते की विवाद की DM-SDM से 100 बार शिकायत की, अब न्याय चाहिए वाराणसी में रास्ते के विवाद से परेशान एक 50 साल की महिला ने टॉयलेट में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। जब बेटे ने शौचालय जाने के लिए दरवाजा खोला, तो मां फंदे से लटकती मिली। उसने चिल्लाकर परिवार के लोगों को बुलाया। पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा। पढ़ें पूरी खबर…
  • गोरखपुर रेलवे स्टेशन से RPF ने पकड़ा शराब:119 पैक छोड़कर फरार हुआ तस्कर; तलाशने में जुटी पुलिस

    गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को आरपीएफ की निगरानी के दौरान लावारिस हालत में पड़े दो झोलों से अंग्रेजी शराब बरामद की गई। दोनों झोलों में कुल 119 टेट्रा पैक 8 PM अंग्रेजी शराब मिली। बरामद शराब की कुल मात्रा 21.420 लीटर बताई गई है। इसकी कीमत करीब 15,470 रुपये है। प्लेटफॉर्म पर निगरानी के दौरान मिले झोले 28 अगस्त को आरपीएफ की टीम गोरखपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या 03/04 पर निगरानी कर रही थी। निगरानी के दौरान प्लेटफॉर्म के बीच में सफेद और काले रंग के दो झोले लावारिस हालत में पड़े दिखाई दिए। टीम ने आसपास मौजूद यात्रियों से झोलों के बारे में पूछताछ की। काफी देर तक निगरानी करने के बाद भी कोई व्यक्ति इन झोलों पर अपना दावा करने के लिए सामने नहीं आया। झोले खोलने पर मिली शराब लावारिस झोलों की नियमानुसार गवाहों की मौजूदगी में जांच की गई। झोलों को खोलने पर उनके अंदर 8 PM ब्रांड की अंग्रेजी शराब के टेट्रा पैक मिले। जांच में कुल 119 टेट्रा पैक बरामद हुए। प्रत्येक टेट्रा पैक में 180 एमएल शराब थी। इस तरह बरामद शराब की कुल मात्रा 21.420 लीटर निकली। प्रत्येक पैक की कीमत 130 रुपये बताई गई है और पूरी बरामद शराब की कीमत करीब 15,470 रुपये है। आरपीएफ ने शराब कब्जे में ली आरपीएफ टीम ने शाम करीब 5:20 बजे गवाहों की मौजूदगी में बरामद शराब को अपने कब्जे में लिया और इसकी फर्द जब्ती तैयार की। इसके बाद बरामद शराब को आरपीएफ पोस्ट गोरखपुर लाया गया। आगे की कार्रवाई के लिए जीआरपी को सौंपी जाएगी शराब आरपीएफ के अनुसार आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद बरामद शराब को अग्रिम कार्रवाई के लिए जीआरपी गोरखपुर को सौंपा जाएगा। फिलहाल यह पता नहीं चल सका है कि शराब से भरे दोनों झोले स्टेशन पर कौन छोड़कर गया था। आरपीएफ और जीआरपी की ओर से नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
  • सिपाही का शव देखने के लिए हाथ जोड़ती रही महिला:बोली- मैं पत्नी हूं, आखिरी बार मिलने दो; रामपुर में फंदे से लटककर जान दी थी

    ‘एक बार मुझे ऊपर जाने दो… मैं अरुण की पत्नी हूं। हमारी आर्य समाज मंदिर में शादी हुई थी। मैं हाथ जोड़ रही हूं, मुझे आखिरी बार अरुण को देख लेने दो…।’ कभी SP, तो कभी पुलिसकर्मियों से रिक्वेस्ट करती यह महिला खुद भी पुलिसकर्मी है। रामपुर में गुरुवार (27 अगस्त) को हेड कॉन्स्टेबल अरुण शुक्ला (40) ने सुसाइड कर लिया था। मौत के कुछ घंटे बाद ही हड़बड़ाई हुई एक महिला पहुंची। एसपी जांच करके सीढ़ियों से नीचे आ रहे थे। दोनों का आमना-सामना हुआ। एसपी ने कुछ पूछताछ की और पुलिस महिला को लेकर चली गई। यह पूरी बातचीत दैनिक भास्कर रिपोर्टर के सामने हुई। मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है। पहले 2 तस्वीरें देखिए… दोस्त बुलाने पहुंचा, तो बंद मिला दरवाजा अरुण 2005 बैच के सिपाही थे। वह 6 फरवरी, 2026 से रामपुर के SP ऑफिस में तैनात थे। वह आवास विकास कॉलोनी में किराए के मकान में फर्स्ट फ्लोर पर रहते थे। गुरुवार शाम 7 बजे उनका दोस्त नितिन बैटमिंटन खेलने के लिए बुलाने पहुंचा। काफी देर तक खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, तो फोन किया। फोन भी नहीं उठा, तो मकान मालिक को फोन करके गेट खुलवाया। अंदर बेडरूम में अरुण का शव बेडशीट के सहारे पंखे से लटका मिला। घटना के समय मकान में उनके अलावा कोई मौजूद नहीं था। पुलिस फोर्स के साथ पुलिस अफसर भी मौके पर पहुंचे। शव को फंदे से नीचे उतरवाया गया। बरेली में रह रहे अरुण के परिवार को भी सूचना दी गई। शाहजहांपुर से आकर बरेली रहने लगा था परिवार अरुण का परिवार मूलरूप से शाहजहांपुर का रहने वाला था। पिता श्रीकृष्ण कुमार शुक्ला भी पुलिस में थे, जिनकी मौत हो चुकी है। अरुण की मां अपने बड़े बेटे अनिल के परिवार के साथ बरेली में रह रही हैं। 2 बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। अरुण की शादी साल-2012 में सुकीति के साथ हुई थी। सुकीति के पिता भी पुलिस विभाग में हैं। अरुण और सुकीति का एक 11 साल का एक बेटा भी है। बेटे के जन्म के बाद ही शुरू हो गया झगड़ा बेटे के जन्म के 1 साल बाद ही अरुण और सुकीति में झगड़े शुरू हो गए। पहले तो परिवारवालों ने समझा दिया, लेकिन कुछ दिन बाद ही सुकीति पीलीभीत में अपने मायके में जाकर रहने लगीं। बेटा भी मां के साथ ही रहता है। पिछले साल अरुण और सुकीति का तलाक हो गया, लेकिन पत्नी इससे सहमत नहीं थी। उन्होंने हाईकोर्ट में तलाक के खिलाफ अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई चल रही थी। जब एसपी पहुंचे, तभी आई महिला रात करीब 9:30 पर एसपी अनिल सिंह सिसोदिया मौके पर पहुंचे। वह ऊपर कमरे में गए, जहां अरुण का शव लटका था। ठीक इसी समय पीला टॉप और काली पैंट पहने एक महिला हड़बड़ाई हुई वहां पहुंची। वहां मौजूद लोगों से ऊपर जाने की जिद करने लगी। लोगों ने कुर्सी डाली और बैठने के लिए कहा, तो उनसे हाथ जोड़कर रिक्वेस्ट करने लगी। इसके बाद भागते हुए अरुण के कमरे की तरफ जाने लगी। ठीक उसी समय एसपी भी ऊपर से नीचे आ रहे थे। एक पुलिसकर्मी ने महिला को ऊपर जाने से रोका। एसपी नीचे आए और कुछ सेकेंड महिला से पूछताछ की। बोली- मेरी अरुण से शादी हो चुकी है महिला कैसे भी ऊपर जाना चाह रही थी। उसने कहा कि अरुण मेरा पति था। आर्यसमाज मंदिर में हमारी शादी हो चुकी है। प्लीज, मुझे ऊपर जाने दीजिए। एसपी को अरुण और उनकी पत्नी के बीच चल रहे तलाक के केस के बारे में पता था। इसलिए उन्होंने महिला को ऊपर जाने से रोक दिया। पुलिस की गाड़ी में बैठाकर महिला को थाने भेजा इसके बाद महिला को पुलिस की गाड़ी में बैठाकर सिविल लाइंस थाने भेज दिया गया। रात होने की वजह से कुछ देर बाद उसे महिला थाने में भेज दिया गया। एसपी अनिल सिंह सिसोदिया ने महिला के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने बस इतना बताया कि महिला भी पुलिसकर्मी है और मुरादाबाद में तैनात है। 28 अगस्त की सुबह खुद को अरुण की पत्नी बताने वाली महिला को फिर से सिविल लाइंस थाने लाया गया। यहां उससे पूछताछ की गई। फिर ब्लैक कलर की स्कॉर्पियों में बैठाकर दरोगा और कुछ पुलिसकर्मी उसे लेकर मुरादाबाद रवाना हो गए। वहीं, कुछ लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि महिला आर्य समाज मंदिर में शादी होने की बात कह रही थी। शादी कब हुई, अरुण को कबसे जानती है, यह सब नहीं बताया। बताया जा रहा है कि अरुण का इस महिला से काफी समय से अफेयर चल रहा था। लेकिन, महिला पिछले कुछ समय से किसी दरोगा के संपर्क में थी। इस बात को लेकर उसका अरुण का झगड़ा होता था। घटना वाले दिन भी दोनों का झगड़ा हुआ था और अरुण ने सुसाइड करने की बात कही थी। इसके बाद अरुण ने बेडशीट से फंदा बनाकर जान दे दी। महिला को अनहोनी की आशंका हो गई थी। इसी वजह से जानने वालों में सबसे पहले वही मौके पर पहुंची। मां को लेकर पहुंचा बड़ा भाई पुलिस ने घटना की जानकारी अरुण के घरवालों को दी। अरुण का भाई अनिल अपनी मां और बहन-बहनोई के साथ रामपुर पहुंचा। रक्षाबंधन से एक दिन पहले भाई की मौत पर बहन बिलखकर रो पड़ी। वहीं, पुलिस ने रात करीब 2.30 बजे शव का पोस्टमॉर्टम कराकर घरवालों को दे दिया। इसके बाद घरवाले शव लेकर बरेली रवाना हो गए। एडिशनल एसपी अनुराग सिंह ने बताया कि… अरुण के परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है। खुलासे के लिए टीम लगी हुई है। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है। ——————— यह खबर भी पढ़ें… मुजफ्फरनगर में रिटायर्ड दरोगा के घर 2.5 करोड़ की चोरी:70 तोला सोना, डायमंड और 5 किलो चांदी की ज्वेलरी समेट ले गए मुजफ्फरनगर में रिटायर्ड दरोगा के घर से चोरों ने करीब 2.5 करोड़ रुपए की सोने-चांदी और डायमंड की ज्वेलरी चुरा ली। चोरी के वक्त दरोगा का परिवार घर पर नहीं था। चोरों ने घर के मेन गेट का ताला तोड़ा। अंदर जाकर चार कमरों के ताले तोड़े और अलमारी व बक्सों में रखी ज्वेलरी पर हाथ साफ कर दिया। चोर नई नवेली दुल्हन के लिए लाया गया लहंगा और गाउन भी उठा ले गए। पढ़ें पूरी खबर…