
ग्राम पंचायतों में बनाई जा रही डिजिटल लाइब्रेरी की भी अब जांच शुरू होगी। पंचायत के अधिकारी गांवों में जाकर इसके निर्माण की स्थिति और गुणवत्ता पर फोकस करेंगे। इसके साथ ही बारातघरों की भी जांच की जाएगी। निदेशालय के अधिकारियों और मंडलीय उपनिदेशकों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। निरीक्षण के बाद रिपोर्ट निदेशालय को भेजनी होगी। पंचायती राज निदेशक की ओर से इस बारे में पत्र जारी कर विस्तृत दिशा निर्देश दिए गए हैं। हर महीने मंडल के जनपदों का भ्रमण करना होगा और विभागीय योजनाओं के प्रगति की समीक्षा करनी होगी। अधिकारी डिजिटल लाइब्रेरी की गुणवत्ता, रखरखाव आदि के बारे में जानकारी लेंगे। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी और सभी सहायक विकास अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में निर्माणाधीन अथवा टेंडर प्रक्रिया में शामिल उत्सव भवनों की प्रगति और गुणवत्ता की जांच होगी। जिन भवनों का डीपीआर तैयार किया जा रहा है, उनकी स्थिति भी रिपोर्ट में दर्ज करनी होगी। इसी तरह निर्मित और निर्माणाधीन बरातघरों के निर्माण की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। डीपीआर तैयार होने वाले बरातघरों की प्रगति भी देखी जाएगी। तीनों बिंदुओं की पृथक निरीक्षण आख्या तैयार करनी होगी। प्रत्येक बिंदु के कम से कम पांच फोटो रिपोर्ट के साथ राज्य स्तरीय मानीटरिंग सेल तथा विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उप निदेशक पंचायती राज हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि शासन के निर्देश पर मंडल में बने डिजिटल लाइब्रेरी की जांच की जाएगी। इसके साथ ही उत्सव भवन और बारातघरों का भी निरीक्षण होगा। निरीक्षण के दौरान भवनों के रख-रखाव आदि के बारे में जानकारी ली जाएगी। हर महीने इस तरह की जांच होगी और इसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी।
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