
सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर मरम्मत और रखरखाव का काम शुरू किया गया है। हाल ही में बाल रोग विभाग के बच्चा वार्ड में छत का प्लास्टर गिरने की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने 50 साल से अधिक पुरानी इमारतों की मरम्मत और उनकी निगरानी तेज कर दी है। प्लास्टर गिरने की घटना के बाद एक बच्चे की मौत को लेकर भी आरोप लगे थे। हालांकि, एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्लास्टर गिरने से किसी की जान जाने से इनकार किया था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के अनुसार, जिस बच्चे को लेकर चर्चा हुई, वह पहले से गंभीर रूप से बीमार था और डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने बच्चे की मौत और प्लास्टर गिरने की घटना के बीच किसी संबंध से इनकार किया था। अब अस्पताल परिसर के जिन हिस्सों में मरम्मत की जरूरत है, वहां काम कराया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, एसएन मेडिकल कॉलेज की कई इमारतें 50 साल से अधिक पुरानी हैं। ऐसे भवनों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है और जरूरत के अनुसार मरम्मत व रखरखाव कराया जाता है। पुरानी इमारतों पर लगातार नजर प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि पुराने भवनों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। जहां भी मरम्मत की जरूरत सामने आ रही है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम कराया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भवनों के रखरखाव का काम आगे भी जारी रहेगा।
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