मंडी में तेंदुए का सफल रेस्क्यू:आबादी क्षेत्र में पशुओं को बना रहा था शिकार, दो टीमें कैमरों से कर रही थीं निगरानी

मंडी जिले के राव-नसलोह क्षेत्र में पशुधन का लगातार शिकार कर रहे एक तेंदुए को वन विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया। तेंदुए की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद मंडी वन मंडल ने वैज्ञानिक और डेटा आधारित तरीके से पूरे क्षेत्र की निगरानी शुरू की थी। वन विभाग के अनुसार, पूरे अभियान में मानव सुरक्षा और वन्यजीव के सुरक्षित प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई। यह रेस्क्यू ऑपरेशन तकनीक, फील्ड निगरानी, जीआईएस विश्लेषण और विशेषज्ञ परामर्श के समन्वित इस्तेमाल का एक सफल उदाहरण रहा। पकड़ने के लिए बनाई गई थी दो टीमें यह ऑपरेशन मंडी वन मंडल के मंडल वन अधिकारी संजीव शर्मा के मार्गदर्शन में तथा सहायक वन संरक्षक नवजोत सिंह मियां के समन्वय एवं पर्यवेक्षण में चलाया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी मंडी अजय चंदेल की अध्यक्षता में दो फील्ड टीमें गठित की गईं, जिनकी कमान वन खंड अधिकारी चिंता देवी और कमल सिंह को सौंपी गई थी। इन टीमों ने दिन-रात गश्त कर तेंदुए के पदचिह्न, स्कैट, स्क्रैपिंग मार्क्स और पशुधन के शिकार वाले स्थानों जैसे महत्वपूर्ण संकेतों को रिकॉर्ड किया। इन स्थानों को Google Earth पर जियो-रेफरेंस करके तेंदुए के संभावित मूवमेंट कॉरिडोर और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई। पांच कैमरे लगाकर किया गया ट्रैप इसके बाद, रणनीतिक स्थानों पर पांच कैमरा ट्रैप लगाए गए। कैमरों से मिली तस्वीरों और वीडियो के आधार पर तेंदुए की आवाजाही, उसके सक्रिय होने का समय और संभावित रास्तों का पता लगाया गया। ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया गया। प्राप्त जानकारी के आधार पर दो उपयुक्त स्थानों पर पिंजरे लगाए गए। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक तरीके से की गई ट्रैप प्लेसमेंट रणनीति के परिणामस्वरूप, शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे तेंदुआ पिंजरे में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया। वन विभाग ने उसे सुरक्षित रूप से अपनी अभिरक्षा में ले लिया है।

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