
गोरखपुर के शास्त्री चौक पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पुतला फूंकने को लेकर शनिवार को दो तस्वीरें सामने आईं। दोपहर में जब करणी सेना के तमाम कार्यकर्ता चौराहे पर पहुँच कर पुतला जलाने का कोशीश करने लगे तो पुलिस ने इस पर रोक लगाते हुए पुतला नहीं चलने दिया। इसके बाद शाम को उसी जगह पर प्रदर्शनकारी दोबारा पहुंचे और अखिलेश यादव की तस्वीर लगा पुतला आसानी से फूंककर चले गए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब पुलिस की व्यवस्था और कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीति गलियारे में चर्चा ये भी है कि जब दोपहर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पुतला फूंकने से रोक दिया था, तो शाम को ऐसा क्या बदला कि प्रदर्शनकारियों ने उसी स्थान पर पुतला फूंक दिया। दोपहर में पुलिस ने छीन लिया था पुतला करणी सेना के कार्यकर्ता दोपहर में शास्त्री चौक पर अखिलेश यादव का प्रतीकात्मक पुतला लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारी पुतला फूंकने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के हाथ से पुतला छीन लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को पुतला दहन करने से रोक दिया गया। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन का यह कार्यक्रम वहीं रोक दिया गया था। शाम को फिर पहुंच गए प्रदर्शनकारी दोपहर की कार्रवाई के कुछ घंटे बाद शाम को प्रदर्शनकारी एक बार फिर शास्त्री चौक पहुंचे। इस बार उनके हाथ में अखिलेश यादव की तस्वीर लगा हुआ पुतला था। प्रदर्शनकारियों ने मौके पर पुतला फूंका और इसके बाद वहां से चले गए। खास बात यह रही कि शाम के समय पुतला दहन को रोकने के लिए दोपहर जैसी पुलिस कार्रवाई नजर नहीं आई। पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल दोपहर और शाम की दोनों घटनाओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब पुलिस को पहले से पता था कि करणी सेना के कार्यकर्ता अखिलेश यादव का पुतला फूंकने की तैयारी कर रहे हैं, तो शाम को दोबारा प्रदर्शन होने की स्थिति में पहले जैसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। क्या शाम के समय पुलिस की मौजूदगी कम थी? क्या पुलिस को प्रदर्शनकारियों के दोबारा पहुंचने की जानकारी नहीं थी? या फिर पुलिस की रणनीति में कोई बदलाव किया गया था। आधिकारिक बयान का इंतजार फिलहाल शाम को हुई पुतला दहन की घटना को लेकर पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है। पुलिस की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि दोपहर में प्रदर्शन रोकने के बाद शाम को पुतला दहन कैसे हुआ और उस समय मौके पर पुलिस की क्या व्यवस्था थी।
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