
औरैया में शनिवार को मां की मौत के बाद 7 बेटियों ने बारी-बारी से अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया। शमशान घाट पहुंचने पर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई। इसी बीच जब मुखाग्नि देने की बात आई तो सब लोग सोच में पड़ गए कि चिता को आग कौन लगाएगा? चर्चा के बाद सबसे छोटी बेटी ने फैसला लिया कि वह मां की चिता को मुखाग्नि देगी, किसी पुरुष रिश्तेदार का सहारा क्यों लें। बड़ी बहनों ने भी छोटी बहन के फैसले का समर्थन किया। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे छोटी बेटी ने मां की चिता को आग लगाई। मामला दिबियापुर इलाके का है। अब जानिए पूरा मामला… पिता के निधन के बाद मां ने अकेले पाला दुर्गा नगर निवासी कृष्ण देवी (59) के पति रामकिशोर सविता फौज में थे। रिटायर होने के कुछ साल पहले उनका निधन हो गया था। उस समय सामाजिक रीति-रिवाजों के कारण रामकिशोर के अंतिम संस्कार में परिवार के भतीजे की मदद ली गई थी। क्योंकि रामकिशोर के कोई बेटा नहीं था। पति की मौत के बाद कृष्ण देवी ने अकेले ही अपनी 7 बेटियों की परवरिश की। बेटियों के लिए मां ही उनका सहारा और मार्गदर्शक थीं। कृष्णा देवी काफी समय से बीमार चल रही थीं। उनकी बेटियां मिलकर इलाज और घर का खर्च चला रही थीं। छोटी बेटी सोनी सविता (25) मायके में रहकर मां की देखभाल कर रही थी। उनके पति आगरा में प्राइवेट नौकरी करते हैं। मां की अर्थी को सातों बहनों ने दिया कंधा शनिवार सुबह कृष्ण देवी का निधन हो गया। अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान मुखाग्नि देने की चर्चा हुई। गांववालों और परिवार में किसी पुरुष रिश्तेदारों से यह जिम्मेदारी निभाने की बात चली। इसी बीच कृष्ण देवी की सबसे छोटी बेटी सोनी सविता ने सबको टोक दिया। कहा- जब मां ने हमें बेटों की तरह पाला। वह कहती थीं, तुम सब बहने मेरे लिए बेटे ही हो। हमने भी कभी उन्हें बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। उनके अंतिम संस्कार के लिए किसी और का सहारा क्यों लिया जाए। बेटी ने पूरे रीति-रिवाज के साथ मां को मुखाग्नि दी सामाजिक रीति-रिवाजों को दरकिनार करते हुए कृष्ण देवी की 7 बेटियों ने मां की अर्थी को बारी-बारी से कंधा दिया। गांव वालों और परिवार के लोगों ने भी उनकी मदद की। पार्थिव शरीर को लेकर सभी लोग दिबियापुर के मुक्तिधाम पहुंचे। मुक्तिधाम में कृष्ण देवी की सबसे छोटी बेटी सोनी ने पूरे रीति-रिवाज के साथ मां को मुखाग्नि दी। बेटियों ने दिया जिम्मेदारी निभाने का संदेश सातों बेटियों के इस फैसले ने समाज में बेटियों की भूमिका को लेकर एक संदेश दिया। गांववालों के मुताबिक, मां ने जीवनभर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया। उनके लिए हर मुश्किल में खड़ी रहीं। बेटियों ने भी अंतिम समय में मां के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। —————————————– ये खबर भी पढ़ेंः- ‘चंपत राय बेदाग-निष्कलंक, उनका भोलापन मुसीबत बना’:उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की; महासचिव बनने के बाद गोविंद देव गिरि का पहला इंटरव्यू
‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’ ‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’ ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं। जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले दैनिक भास्कर से बात की। पढ़ें पूरी खबर
‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’ ‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’ ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं। जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले दैनिक भास्कर से बात की। पढ़ें पूरी खबर
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