हिमाचल में बादल फटने से मची त***ी: फ्लैश फ्लड से 4 हाइड्रो प्रोजेक्ट को नुकसान; लोगों में मची अफरा तफरी 

हिमाचल में बादल फटने से मची तबाही: फ्लैश फ्लड से 4 हाइड्रो प्रोजेक्ट को नुकसान; लोगों में मची अफरा तफरी 

रामपुर बुशहर के काशापाट क्षेत्र में नोगली खड्ड में फ्लैश फ्लड

रामपुर बुशहर (शिमला)। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाता नजर आया है। शिमला जिले के रामपुर बुशहर के काशापाट क्षेत्र में शुक्रवार रात बादल फटने के बाद नोगली खड्ड अचानक उफान पर आ गई। देखते ही देखते खड्ड में इतना तेज फ्लैश फ्लड आया कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। पानी के साथ भारी मात्रा में गाद, मलबा और गंदा पानी नीचे की ओर आया, जिसकी चपेट में क्षेत्र में संचालित कई हाइड्रो पावर परियोजनाएं आ गईं।

काशापाट क्षेत्र के सगेती कंडे में बादल फटने के बाद बारिश का पानी बेहद तेजी से नोगली खड्ड में पहुंचा। स्थानीय लोगों के अनुसार रात में खड्ड की तरफ से पानी और मलबे के तेज बहाव की डरावनी आवाजें सुनाई दे रही थीं। अंधेरे में अचानक आए इस सैलाब ने लोगों को सहमा दिया। कई लोग पूरी रात स्थिति पर नजर बनाए रहे। काशापाट पंचायत के प्रधान प्यासू मल के अनुसार चोटी की तरफ बादल फटने के बाद खड्ड में भारी मात्रा में पानी और मलबा आया।

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नोगली खड्ड में अचानक आए फ्लैश फ्लड का सीधा असर क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ा है। पानी में भारी मात्रा में गाद और मलबा आने के कारण परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा। प्रभावित परियोजनाओं में कुंदन ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड राजपुरा (9.9 मेगावाट), साईं इलेक्ट्रिक हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (4.5 मेगावाट), जीसी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (5 मेगावाट) और ग्रीको जोगणी (16 मेगावाट) शामिल हैं। 

फ्लैश फ्लड की सूचना मिलते ही परियोजना प्रबंधन और प्रशासन हरकत में आ गए। नोगली खड्ड के किनारे रह रहे परियोजना के मजदूरों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया। कुंदन ग्रीन एनर्जी के परियोजना प्रमुख विनोद के अनुसार शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे प्रशासन की ओर से खड्ड में भारी फ्लैश फ्लड आने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही मजदूरों को वहां से हटाया गया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से किसी बड़ी जनहानि को टाल दिया गया।

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काशापाट में बादल फटने के बाद आई बाढ़ का असर गंगदारी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पर भी पड़ा है। परियोजना की इंटेक संरचना को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
प्लांट इंचार्ज धीरज वर्मा के अनुसार बाढ़ के तेज बहाव से इंटेक के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम राफ्ट के साथ बॉटम कन्वेयंस चैनल क्षतिग्रस्त हुआ है। चैनल के तल में भी काफी कटाव हुआ है। पानी का बहाव इतना शक्तिशाली था कि कुछ क्रेट्स तक बह गए। बाढ़ के बाद परियोजना स्थल पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। अब नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने स्थानीय लोगों को भी डरा दिया। पहाड़ी इलाकों में रात के समय अचानक बढ़ता जलस्तर और मलबे का तेज बहाव किसी बड़े खतरे की आशंका पैदा कर देता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, खड्ड और नालों के किनारे जाने से पूरी तरह बचें। खासकर बारिश के दौरान पानी का स्तर देखने या वीडियो बनाने के लिए खड्ड के नजदीक जाना जानलेवा साबित हो सकता है।

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मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश को अब तक भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान झेलना पड़ा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार मानसून के दौरान प्रदेश में करीब 1,237 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंच चुका है, जबकि 267 लोगों की जान जा चुकी है। 

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