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  • तरक्की, जलन और 20 दिन का वो म*त के बाद ‘जिंदा’ रखने का नाटक… प्रयागराज के आलोक गुप्ता ह*******ड की खुलीं नई परतें

    Prayagraj Photographer Murder Case: प्रयागराज में एक युवा फोटोग्राफर अचानक लापता हो गया, जिसके बाद उसके परिवार वाले पुलिस के पास पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बद पुलिस मामले की जांच शुरू की. जांच में सामने आया है कि 27 वर्षीय फोटोग्राफर आलोक गुप्ता की हत्या कर दी गई. उसकी हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके ही दोस्त ने की.

    पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए हत्याकांड के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाला. इसमें तीन लोग एक बड़ा नीला बैग ले जाते हुए दिखाई दिए. पुलिस ने सबूत इकट्ठा करना शुरू किया. उसी समय सूचना मिली कि मध्य प्रदेश के रीवा में एक अज्ञात शव मिला है. पुलिस ने दोनों घटनाओं के बीच संबंध की जांच शुरू की.

    गोली मारकर की हत्या

    इसके बाद आलोक गुप्ता की हत्या का मामला सुलझ गया. पुलिस के मुताबिक, शुभान तिवारी ने अपने दोस्तों शुभम यादव और अंकुश यादव की मदद से अपने दोस्त आलोक की गोली मारकर हत्या कर दी. फिर तीनों ने आलोक के शव को एक नीले बैग में भरकर कार में रखा और उसे ठिकाने लगाने के लिए प्रयागराज से सैकड़ों किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के रीवा जिले में ले गए.

    आलोक एक पेशेवर फोटोग्राफर था और शादियों और अन्य कार्यक्रमों की तस्वीरें खींचकर अपना जीवन यापन करता था. हत्या के समय आलोक की प्रेमिका उनसे बात रही थी. शव को ठिकाने लगाते समय आरोपियों को आलोक का मोबाइल फोन मिला. आलोक के जीवित होने का दिखावा करने और हत्या की बात को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए आरोपियों ने आलोक के फोन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.

    20 दिनों तक आरोपियों ने की आलोक के फोन से बात

    आलोक के जीवन के सामान्य रूप से चलने का नाटक करते हुए, उन्होंने 20 दिनों तक आलोक के मोबाइल फोन पर उसकी प्रेमिका और कई अन्य लोगों से बातचीत की. हालांकि, आलोक के परिवार ने पहले ही गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करा दी थी. इसलिए पुलिस जांच में कोई ढिलाई नहीं बरती गई. आलोक के मोबाइल फोन की गतिविधि ने पुलिस को मामले की तह तक पहुंचने में काफी मदद की.

    आखिरकार, पुलिस ने सभी आरोपियों को सुबेदारगंज स्थित पुल के नीचे से गिरफ्तार कर लिया. उनके पास से एक अवैध पिस्तौल और कारतूसों का जखीरा बरामद किया गया है. पुलिस जांच में सामने आया कि आलोक की आमदनी अच्छी थी, जिससे शुभम के मन में उसके प्रति नाराजगी और जलन बढ़ती चली गई. इसी रंजिश के चलते शुभम ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया.

  • किदवई नगर में श्याम रसोई आयोजन:श्री श्याम जी सेवा समिति द्वारा जरूरतमंदों को निःशुल्क भोजन वितरित किया

    कानपुर के किदवई नगर में श्री श्याम जी सेवा समिति द्वारा आयोजित श्री श्याम रसोई के तहत निःशुल्क भोजन वितरण किया गया। अंजनी चौधरी द्वारा श्री श्याम जी सेवा समिति ने श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों के बीच हलवा, पूड़ी और सब्जी का प्रसाद बांटा। समिति के विशाल हरलालका ने बताया कि संस्था लगातार ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों के माध्यम से सेवा भाव को बढ़ावा देती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
  • कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट, सहारनपुर जा रही थीं सपा MP

    उत्तर प्रदेश में शामली कैराना सांसद इकरा हसन को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया है. इकरा हसन सहारनपुर जा रही थी. पुलिस ने उन्हें देर रात हाउस अरेस्ट किया. फिलहाल, उनके घर पर भारी पुलिस बल तैनात है. दरअसल, सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार सुबह अचानक बुलडोजर एक्शन में बदल गया. इकरा हसन यहीं पर जा रही थीं.

    शुक्रवार रात से ही मस्जिद को गिराए जाने की अफवाह शहर में तेजी से फैल रही थी. रात बढ़ने के साथ कलेक्ट्रेट के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ती गई. शनिवार तड़के करीब चार बजे प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. सुबह तक मस्जिद का एक हिस्सा जमींदोज किया जा चुका था. पूरी इमारत को हटाने के लिए 6 बुलडोजर लगाए गए हैं.

    हाई अलर्ट पर सहारनपुर

    कार्रवाई के बीच पूरे सहारनपुर जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. संवेदनशील स्थानों पर PAC और RRF की तैनाती की गई है. दमकल की गाड़ियां भी अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई हैं. पुलिस प्रशासन ने किसी भी तरह की भीड़ या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं.

    रात में बंद कर दिए गए कलेक्ट्रेट के पांच गेट

    कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील परिसर में शुक्रवार रात अचानक भारी पुलिस फोर्स की तैनाती से अफवाहों को और हवा मिली. कलेक्ट्रेट के पांचों गेट बंद कर दिए गए. नेताओं और स्थानीय लोगों को परिसर के अंदर जाने से रोक दिया गया. बाहर भी पुलिस और RRF की तैनाती कर दी गई.

    मामले की जानकारी मिलने के बाद सपा विधायक आशु मलिक, सपा MLC शाहनवाज खान समेत कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन उन्हें गेट के बाहर ही रोक दिया गया. देर रात कई नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात भी हुई.

    नेताओं की ओर से मस्जिद पर तत्काल कार्रवाई की आशंका जताई गई थी. उस समय प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई, जिससे मुस्लिम पक्ष के लोगों को तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होने की उम्मीद बनी रही. हालांकि, शनिवार तड़के करीब चार बजे बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई.

    दो दिन पहले जिला जज ने खारिज की थी अपील

    मस्जिद पर हुई कार्रवाई के पीछे करीब डेढ़ साल से चल रहा कानूनी विवाद है. जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था.

    सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण माना था. आदेश में 30 दिन के भीतर परिसर खाली करने के निर्देश के साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी.

    150 साल पुरानी मस्जिद होने का दावा

    मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ 20 जुलाई को जिला अदालत में अपील दाखिल की थी. इस मामले में कुल 17 तारीखों पर सुनवाई हुई. मस्जिद पक्ष की ओर से संपत्ति को वक्फ की जमीन बताते हुए करीब 150 वर्ष पुरानी मस्जिद होने का दावा किया गया था, हालांकि अदालत में इस दावे के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके.

    देर रात से ही फैल गई थी कार्रवाई की खबर

    शुक्रवार रात अचानक सोशल मीडिया और शहर में यह खबर फैलने लगी कि कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को प्रशासन रात में ही गिराने जा रहा है. इसके बाद कलेक्ट्रेट के आसपास राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गईं.

    कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर मस्जिद प्रकरण पर अपनी बात रखी. सपा MLC शाहनवाज खान, विधायक आशु मलिक और पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान समेत कई नेताओं ने भी घटनाक्रम को लेकर अधिकारियों से रात में ही बात की.

    कैराना सांसद इकरा हसन के भी सहारनपुर आने की तैयारी की जानकारी सामने आई. जानकारी मिली है कि उन्हें कैराना में ही रोक दिया गया है नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी सहारनपुर पहुंचने की बात कह रहे है. इस बीच प्रशासन ने जिले में किसी भी तरह के राजनीतिक जमावड़े को रोकने के लिए कई नेताओं के आवास के बाहर भी पुलिस बल तैनात कर दिया.

    2025 में शुरू हुआ था विवाद

    कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद हुई थी. 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दाखिल हुआ था.

    लंबी सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था. मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज कर दी.

    जिला अदालत के फैसले के दो दिन बाद शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी. कार्रवाई के बाद सहारनपुर में तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है. फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर और जिले के संवेदनशील इलाकों में पुलिस, PAC और RRF की तैनाती जारी है.

    रिपोर्ट-श्रवण पंडित, शामली

  • सीतापुर में मवेशी चराने गया युवक पिरई नदी में डूबा:स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश जारी, परिजन परेशान

    सीतापुर के इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के पिपरी तिलक सिंह गांव में शनिवार शाम करीब 4 बजे भैंस चराने गया 25 वर्षीय युवक पिरई नदी में डूब गया। युवक के अचानक गहरे पानी में चले जाने से हादसा होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों की मदद से नदी में युवक की तलाश शुरू कर दी। पिपरी तिलक सिंह गांव निवासी रामहेत का बेटा संदीप शनिवार को भैंस चराने के लिए घर से निकला था। वह गांव के पास स्थित पिरई नदी के घटिया घाट की ओर मवेशियों को चराने गया था। इसी दौरान वह नदी के किनारे पहुंचा और अचानक गहरे पानी में चला गया। इसके बाद उसके डूबने की आशंका जताई गई।
    जानकारी होने पर ग्रामीणों ने नदी के आसपास संदीप की तलाश शुरू की और परिजनों को सूचना दी। खबर मिलते ही परिवार के लोग मौके पर पहुंच गए। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना पर इमलिया सुल्तानपुर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों के साथ नदी में युवक की तलाश शुरू कराई। संभावित डूबने वाले स्थान पर विशेष रूप से खोजबीन की जा रही है। स्थानीय गोताखोरों की मदद लेने का भी प्रयास किया जा रहा है।
    घटना के बाद घटिया घाट पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। परिजन और ग्रामीण संदीप के सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। पुलिस और ग्रामीण लगातार उसकी तलाश में जुटे हैं।
  • प्रयागराज के भरद्वाजपुरम में वाटर एटीएम शुरू:200 घरों को रोज मिलेगा 20 लीटर शुद्ध पानी, मेयर ने जनता को समर्पित किया

    प्रयागराज में शहरवासियों को साफ और शुद्ध पीने का पानी देने के लिए नगर निगम ने एक और पहल की है। वार्ड नंबर 69 भरद्वाजपुरम के संजय नगर, अल्लापुर बस्ती में नगर निगम ने एक वाटर एटीएम लगाया है। शनिवार को मेयर गणेश केसरवानी ने इसका उद्घाटन किया। उन्होंने वाटर एटीएम को जनता को समर्पित करते हुए नियमित और अच्छी गुणवत्ता वाला पानी देने के निर्देश दिए। इस वाटर एटीएम से इलाके के करीब 200 घरों को हर दिन 20 लीटर शुद्ध पानी मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों को पीने के साफ पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और उनकी परेशानी कम होगी। उद्घाटन के दौरान मेयर ने कहा कि साफ पीने का पानी हर नागरिक की बुनियादी जरूरत है। नगर निगम कोशिश कर रहा है कि शहर के हर इलाके में लोगों को जरूरी सुविधाएं आसानी से मिलें। इसी कड़ी में अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है और नई सुविधाएं भी दी जा रही हैं। मेयर ने अधिकारियों को वाटर एटीएम के सही रखरखाव और संचालन पर खास ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि नागरिकों को लगातार और अच्छी गुणवत्ता वाला पानी मिले, इसके लिए व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए। नगर निगम के अनुसार, शहर में पीने के पानी के साथ-साथ जल निकासी, साफ-सफाई, लाइट व्यवस्था, सड़क और दूसरी जनसुविधाओं से जुड़े कामों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। वाटर एटीएम जैसी सुविधाओं से उन इलाकों के लोगों को खास राहत मिलेगी, जहां शुद्ध पीने के पानी की ज्यादा जरूरत है। कार्यक्रम में मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम, नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा, अपर नगर आयुक्त राजीव शुक्ला, जलकल विभाग के अधिकारी, क्षेत्रीय पार्षद और स्थानीय नागरिक मौजूद थे। वाटर एटीएम शुरू होने से इलाके के लोगों में भी खुशी दिखी। स्थानीय लोगों ने साफ पीने के पानी की सुविधा देने के लिए नगर निगम और महापौर का आभार जताया।
  • महिला सिपाही से अश्लील इशारे, कार में बैठने का दबाव:अलीगढ़ में शराबी ने बोतल फेंकी, पति ने विरोध किया तो गाली देकर भागा, पुलिस ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच

    बन्नादेवी थाना क्षेत्र में तीन साल की बेटी के साथ घूम रही महिला सिपाही से कार सवार युवक द्वारा कथित तौर पर अश्लील इशारे करने और उसे कार में बैठने के लिए पैसे ऑफर करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला के विरोध करने पर युवक ने शराब की बोतल गुस्से में फेंक दी और दोबारा कार घुमाकर महिला के सामने आ गया। पति ने विरोध किया तो उसके साथ भी गाली-गलौज की। घटना 2 सितंबर की रात करीब 9 बजे की बताई गई है। मामले में बन्नादेवी पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    पति ने शिकायत में क्या बताया
    महिला सिपाही के पति ने बन्नादेवी थाने में दी शिकायत में बताया कि वह जिला पुलिस में कार्यरत अपनी पत्नी और तीन साल की बेटी के साथ घर के बाहर जीटी रोड पर घूम रहे थे। इसी दौरान UP 81 DX 5999 नंबर की सफेद कार वहां आकर रुकी। शिकायत के मुताबिक, कार में बैठा व्यक्ति शराब पी रहा था। उसने महिला को आवाज देकर कथित तौर पर अश्लील इशारे करना शुरू कर दिया और पैसे का लालच देकर कार में बैठने के लिए कहा। महिला सिपाही ने उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया। आरोप है कि इससे नाराज होकर युवक ने शराब की बोतल गुस्से में फेंक दी और कार को दोबारा घुमाकर महिला के पास ले आया। इसके बाद कार का गेट खोलकर फिर से कथित तौर पर अश्लील इशारे करने लगा।
    पति ने टोका तो बोला- ‘गाड़ी में बैठो, पैसे दूंगा’
    शिकायत में बताया कि जब उसने युवक को ऐसा करने से रोका तो उसने उसके साथ भी अभद्रता की। आरोप है कि युवक ने उसे गाड़ी में बैठकर बात करने और पैसे देने की बात कही। विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए वहां से चला गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। सीओ द्वितीय धनंजय के अनुसार पुलिस कार नंबर और शिकायत में बताए गए घटनाक्रम के आधार पर आरोपी की पहचान और घटना की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि विवेचना के बाद ही होगी।
  • मिर्जापुर के क्रेशर प्लांट में ब*****टिंग के दौरान ह***ा, 4 मजदूरों की म*त

    Mirzapur stone plant accident: उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र के भगौतीदेई स्थित एसएस रंजन स्टोन प्लांट में शनिवार को भीषण हादसा हो गया. ब्लास्टिंग के दौरान हुए कंपन के चलते क्रेशर प्लांट का ऑफिस और उससे जुड़े अन्य निर्माण अचानक भरभराकर गिर गए. इस दौरान वहां काम कर रहे चार मजदूर मलबे में दब गए. हादसे के बाद प्लांट में चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

    हादसे की जानकारी मिलते ही प्लांट के संचालक और कर्मचारियों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया. जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर चारों मजदूरों को बाहर निकाला गया. इसके बाद सभी को इलाज के लिए वाराणसी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया.

    मृतकों की पहचान सोनभद्र जिले के जुगैल थाना क्षेत्र के बड़गांवा गांव निवासी लाल बहादुर, अशोक, राकेश और दुर्योधन के रूप में बताई गई है. चारों मजदूर रोज की तरह प्लांट में काम कर रहे थे. इसी दौरान ब्लास्टिंग हुई और कंपन के चलते प्लांट का एक हिस्सा अचानक ढह गया. देखते ही देखते चारों मजदूर मलबे के नीचे दब गए.

    मौके पर पहुंचे एसडीएम समेत कई अधिकारी

    घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. चुनार एसडीएम अनेग सिंह, तहसीलदार इवेंद्र कुमार, क्षेत्राधिकारी मो. फहीम और अहरौरा थाना प्रभारी अजय कुमार मिश्रा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से हादसे की जानकारी ली और प्लांट संचालक से भी पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ की.

    प्रशासन को आशंका थी कि कहीं कोई अन्य मजदूर भी मलबे में न दबा हो. इसके बाद जेसीबी और पोकलैंड मशीनों की मदद से पूरे मलबे को हटाकर सर्च ऑपरेशन चलाया गया. राहत एवं बचाव अभियान के दौरान घटनास्थल पर सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए.

    दोषियों के खिलाफ की जाएगी कार्रवाई

    चुनार एसडीएम अनेग सिंह के मुताबिक, हादसे में चार मजदूरों की दबकर मौत हुई है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ब्लास्टिंग के कंपन के कारण हादसा हुआ. फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है. प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं.

    अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा है, वहीं घटना ने क्रेशर प्लांटों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

  • आगरा नगर निगम ने बल्केश्वर में चलाया अतिक्रमण पर ड**ा:सामान हटवाकर फुटपाथ कराया खाली, जुर्माना भी वसूला

    आगरा के बल्केश्वर रोड पर सड़क किनारे पटरी और फुटपाथ पर सामान रखकर कब्जा करने वालों के खिलाफ नगर निगम ने शनिवार को अभियान चलाया। टीम ने मौके पर पहुंचकर फुटपाथ और सड़क किनारे किए गए अस्थायी अतिक्रमण को हटवाया। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों और अन्य अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा रहा। नगर निगम की टीम ने अतिक्रमण करने वालों से जुर्माना भी वसूला। अतिक्रमण की मिली शिकायत
    नगर निगम को बल्केश्वर रोड पर सड़क किनारे और फुटपाथ पर सामान रखकर अतिक्रमण किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके चलते शनिवार को क्षेत्रीय एसएफआई के नेतृत्व में प्रवर्तन टीम मौके पर पहुंची। टीम को देखते ही कई दुकानदार अपना सामान समेटने लगे। इसके बावजूद जिन स्थानों पर फुटपाथ और पटरी पर सामान रखकर रास्ता बाधित किया गया था, वहां टीम ने कार्रवाई करते हुए सामान हटवाया और फुटपाथ को खाली कराया। नगर निगम की कार्रवाई के दौरान सड़क और फुटपाथ पर रखे सामान को हटवाने के साथ ही अतिक्रमणकारियों को दोबारा कब्जा नहीं करने की चेतावनी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि फुटपाथ पैदल राहगीरों के आवागमन के लिए है। इस पर दुकानों का सामान रखकर रास्ता रोकने से लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे जाम के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। टीम ने जुर्माना भी वसूला
    अभियान के दौरान नगर निगम टीम ने अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए हजारों रुपये का जुर्माना भी वसूला। टीम की कार्रवाई से कुछ समय के लिए बाजार में अफरातफरी की स्थिति बनी रही। कार्रवाई समाप्त होने के बाद फुटपाथ काफी हद तक अतिक्रमण मुक्त नजर आया। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर के प्रमुख मार्गों और बाजारों में सड़क की पटरियों व फुटपाथों पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाने के साथ अन्य कार्रवाई भी की जाएगी। नगर आयुक्त ने दी चेतावनी नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने कहा है, शहर में सड़क, पटरी और फुटपाथ पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए हैं, इसलिए इन पर सामान रखकर रास्ता बाधित करने वालों के खिलाफ नियमित रूप से अभियान चलाया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा न हो, इसकी भी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
  • पिता पर ज*****ा ह**ा करने वाला बेटा गिरफ्तार:लोहे की पाइप से ह**ा करके किया था, 24 घंटे में पुलिस ने भेजा जेल

    गोंडा कोतवाली देहात क्षेत्र में मामूली विवाद के बाद एक बेटे ने अपने पिता पर लोहे के पाइप से हमला कर दिया। घटना शुक्रवार शाम करीब 8 बजे टेपरा दुल्लापुर तरहर गांव में हुई। हमले में पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने आरोपी बेटे को 24 घंटे के भीतर शनिवार शाम करीब 6 बजे गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हमले में इस्तेमाल लोहे का पाइप भी बरामद किया गया है। घर में रखे लोहे के पाइप से किया हमला टेपरा दुल्लापुर तरहर गांव निवासी काशीराम यादव पर उनके बेटे श्यामू यादव ने 4 सितंबर की शाम हमला किया था। बताया गया कि मामूली विवाद के बाद श्यामू ने घर में रखे लोहे के पाइप (फुकनी) से पिता के सिर पर कई वार कर दिए। इससे काशीराम गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। परिजनों ने घायल काशीराम को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। उनका इलाज गोंडा मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। बेनीपुरवा चौराहे से आरोपी गिरफ्तार काशीराम यादव की शिकायत पर कोतवाली देहात पुलिस ने श्यामू यादव के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। शनिवार को पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बेनीपुरवा चौराहे के पास भागने की कोशिश कर रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल लोहे का पाइप भी बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी श्यामू यादव को गोंडा न्यायालय में पेश किया। कोर्ट के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। देहात कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। घायल काशीराम यादव का गोंडा मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है।
  • रातभर अफवाह, सुबह एक्शन… सहारनपुर में मस्जिद पर क्यों चला बुलडोजर? समझिए पूरा विवाद

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार सुबह अचानक बुलडोजर एक्शन में बदल गया. देर रात से ही सोशल मीडिया और शहर में मस्जिद को जमींदोज किए जाने की अफवाह फैल रही थी. रात बढ़ने के साथ कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास पुलिस बल की मौजूदगी भी बढ़ती गई. शनिवार तड़के करीब चार बजे से मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. सुबह तक मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया था. पूरी इमारत को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से छह बुलडोजर लगाए गए हैं.

    कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील परिसर में रात के समय अचानक भारी पुलिस फोर्स की तैनाती ने अफवाहों को और हवा दी. सामान्य दिनों में रात के समय कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहती. मुस्लिम पक्ष के लोगों और स्थानीय नेताओं को जब पुलिस बल की तैनाती और गेट बंद किए जाने की जानकारी मिली तो वे भी सक्रिय हो गए.

    जिला जज ने बरकरार रखा था सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश

    मस्जिद पर शनिवार को हुई कार्रवाई के पीछे करीब डेढ़ साल से चल रहा कानूनी विवाद है. जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था. जिला अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी भूमि माना. मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को अपील दाखिल की थी और अदालत में कुल 17 तारीखों पर सुनवाई हुई.

    अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश

    सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था. आदेश में 30 दिन में परिसर खाली करने के निर्देश के साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी. मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए दलील दी गई थी. पक्ष ने मस्जिद के करीब 150 वर्ष पुरानी होने का दावा भी किया था, लेकिन अदालत में इस दावे के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके.

    देर रात फैल गई मस्जिद गिराने की खबर

    शुक्रवार रात अचानक यह बात फैलने लगी कि कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को प्रशासन रात में ही गिराने जा रहा है. देखते ही देखते यह चर्चा शहर और सोशल मीडिया तक पहुंच गई. इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर नेताओं और लोगों की हलचल बढ़ गई.

    कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर मस्जिद प्रकरण पर अपनी बात रखी. उनके दामाद शायान मसूद ने भी लाइव के माध्यम से घटनाक्रम की जानकारी दी. मुस्लिम पक्ष के नेताओं में भी बेचैनी बढ़ गई.

    रात में सपा विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए निकले, लेकिन उन्हें परिसर के गेट के बाहर ही रोक दिया गया. कलेक्ट्रेट के पांच गेट बंद कर दिए गए और पुलिस बल तैनात कर दिया गया. स्थिति को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स की भी तैनाती की गई.

    डीएम से मुलाकात के बाद भी बदला पूरा घटनाक्रम

    देर रात सपा के कई नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात की बात भी सामने आई. नेताओं की ओर से मस्जिद को लेकर कार्रवाई की आशंका जताई गई. बताया गया कि प्रशासन की ओर से उस समय यह भरोसा दिया गया कि मस्जिद को केवल सील किया जा रहा है और तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होगी. इसी वजह से रात में मौजूद मुस्लिम पक्ष के लोगों में यह उम्मीद बनी रही कि सुबह मस्जिद को नहीं गिराया जाएगा. लेकिन शनिवार तड़के हालात पूरी तरह बदल गए.

    सुबह चार बजे शुरू हुआ एक्शन

    शनिवार सुबह करीब चार बजे से कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई शुरू हो गई. कलेक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई. परिसर के भीतर अधिकारी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे. बाहर भी भारी पुलिस फोर्स तैनात रही. इसके बाद बुलडोजर मस्जिद तक पहुंचाए गए और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई. शुरुआती कार्रवाई में मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया. पूरी इमारत को हटाने के लिए छह बुलडोजर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है. कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा इतनी कड़ी रही कि सामान्य लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई. पुलिस ने किसी भी तरह की भीड़ को परिसर के आसपास एकत्र होने से रोकने की कोशिश की.

    इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा

    मामले को लेकर राजनीतिक सक्रियता भी देर रात बढ़ गई. कैराना सांसद इकरा हसन के भी सहारनपुर आने की तैयारी की जानकारी सामने आई, लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया गया. इस घटनाक्रम से साफ हो गया कि प्रशासन किसी भी तरह की भीड़ या राजनीतिक जमावड़े को कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास नहीं होने देना चाहता था.

    2025 में शुरू हुआ था विवाद

    कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी. इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दाखिल हुआ था. लंबी सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था.

    मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी. करीब डेढ़ महीने की सुनवाई के बाद जिला जज की अदालत ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा.

    अब शनिवार सुबह शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर शहर के केंद्र में ला दिया है. एक तरफ अदालत के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष की ओर से कानूनी और राजनीतिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है. फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात है.

    रिपोर्ट/सुधीर नामदेव