झांसी में आगामी चुनावों को लेकर भाजपा ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। शनिवार को महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह ने सिविल लाइन मंडल के विभिन्न शक्ति केंद्रों का दौरा कर बूथ समितियों की स्थिति जानी। उन्होंने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने और आम लोगों से संपर्क बढ़ाने को कहा। सुधीर सिंह ने शक्ति केंद्र क्रमांक 49 सिविल लाइन पश्चिम, मिशन कंपाउंड और शक्ति केंद्र क्रमांक 21 सिमरधा-करारी, पाल कॉलोनी में बैठकें कीं। इस दौरान शक्ति केंद्र संयोजकों और बूथ समितियों का भौतिक सत्यापन किया गया। बूथ स्तर पर पार्टी की गतिविधियों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता की भी समीक्षा हुई।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सुधीर सिंह ने कहा कि मजबूत बूथ संगठन ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से नियमित रूप से अपने क्षेत्रों में प्रवास करने और लोगों से सीधे संवाद बनाए रखने को कहा। साथ ही केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके बाद भाजपा महानगर कार्यालय में नशा मुक्ति अभियान के तहत युवा संवाद कार्यक्रम हुआ। यहां अध्यक्ष सुधीर सिंह ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, नवाचार और राष्ट्रसेवा में लगाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जागरूक युवा ही मजबूत समाज और विकसित झांसी की नींव रख सकते हैं।
कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष एवं मंडल प्रभारी अभिषेक जैन, संतराम पेंटर, पार्षद कैलाश, दीपक पाल, सहप्रभारी अंकित साहू, प्रवासी मुकुल द्विवेदी, मंगल श्रीवास्तव, पार्षद सुशीला दुबे, गोकुल दुबे, प्रदीप गुप्ता, ऋषिकेश नायक, जेपी राजपूत, गोविंद शर्मा और डीके पाल समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग की है। संघ ने शनिवार को मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के जरिए भेजा। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर 15 सितंबर तक शासनादेश में बदलाव कर प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुनील तिवारी और अध्यक्ष वसीम अहमद ने बताया कि शिक्षामित्र पिछले 26 सालों से परिषदीय स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। वे जनगणना, बालगणना, चुनाव ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा ड्यूटी और दूसरे राष्ट्रीय कामों को भी पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब परिषदीय स्कूलों के दूसरे अध्यापकों, विशेष शिक्षकों, संविदा और डेलीवेजेज पर काम करने वाले स्पेशल एजुकेटर्स को स्पेशल टीईटी में शामिल किया गया है, तो प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखना सही नहीं है। संघ ने 2 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश में बदलाव की मांग की है। इसमें कहा गया है कि स्नातक और बीटीसी की योग्यता रखने वाले सेवारत शिक्षामित्रों को भी स्पेशल टीईटी परीक्षा में शामिल किया जाए। नेताओं ने फिर चेतावनी दी कि अगर 15 सितंबर तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया, तो शिक्षामित्र अपने हक के लिए आंदोलन करेंगे।
देवरिया में शनिवार को सदर में समाधान दिवस आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता डीएम मधुसूदन हुल्गी ने की। एसपी अभिजीत आर. शंकर भी मौजूद रहे। दोपहर 3 बजे तक अधिकारियों ने लोगों की शिकायतें सुनीं। इस दौरान 13 कानूनगो समय पर नहीं पहुंचे। डीएम ने सभी का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए। 42 शिकायतें पहुंचीं, 9 का मौके पर निस्तारण समाधान दिवस में कुल 42 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें राजस्व विभाग की 24, पुलिस की 7, विकास विभाग की 2 और अन्य विभागों की 9 शिकायतें शामिल रहीं। अधिकारियों ने मौके पर ही 9 मामलों का निस्तारण कर दिया। बाकी शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को सौंपते हुए निर्धारित समय सीमा में निस्तारण के निर्देश दिए गए। बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाएं फरियादी डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हर शिकायत की सही स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। लंबित मामलों की लगातार समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी डीएम ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पुलिस से जुड़ी शिकायतों की एसपी ने की समीक्षा एसपी अभिजीत आर. शंकर ने पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों को सुना और उनकी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामलों का जल्द निस्तारण करने और शिकायतकर्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के निर्देश दिए।
हरदोई में एक सफाईकर्मी का अपहरण कर उसे नशीला पदार्थ खिलाकर बंधक बनाने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने उससे 20 लाख रुपये और एक प्लॉट मांगा। इस वारदात की साजिश का मुख्य आरोपी पीड़ित का बीडीसी चाचा है। पीड़ित की शिकायत और कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह रिपोर्ट शाहाबाद कोतवाली में शनिवार दोपहर 1:31 बजे दर्ज की गई। सैयापुरवा निवासी विकेश कुमार (36) शाहाबाद के फिरोजपुर कला में सफाईकर्मी हैं। दावा है कि 17 जून 2026 की सुबह जब वह ड्यूटी पर निकले, तो ऑटो से उतरते ही उनके चाचा राकेश कुमार (जो बीडीसी और मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स सफाईकर्मी हैं), राकेश के बहनोई राजीव कुमार और राजीव के साले की बेटी रूपा ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि तीनों ने विकेश को बहला-फुसलाकर नशीला पदार्थ खिला दिया। इसके बाद उसे बेहोश कर एक अज्ञात जगह पर बंधक बना लिया। 344बंधक बनाने के बाद आरोपियों ने विकेश का मोबाइल छीन लिया और उसके परिवार से संपर्क तोड़ दिया। जब विकेश को होश आया, तो आरोपियों ने उससे 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। उन्होंने शहर में एक प्लॉट रूपा के नाम करने और उससे शादी करने का दबाव भी बनाया। मांग पूरी न होने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। 24 जून को विकेश किसी तरह उनके चंगुल से छूटकर आया। उसने पहले स्थानीय पुलिस और फिर पुलिस अधीक्षक से मदद मांगी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। घटना के 48 दिन बाद कोर्ट के दखल से यह मामला दर्ज हुआ। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नशीला पदार्थ देकर असहाय करने, अपहरण कर बंधक बनाने, जबरन रंगदारी वसूलने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक अरविंद राय ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर तीन आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
उन्नाव के विकासखंड सुमेरपुर में कार्यरत शिक्षक अक्षय कटियार ने शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए ब्लड बैंक में रक्तदान किया। यह उनके जीवन का 29वां रक्तदान था। इस अवसर पर संकल्प सेवा समिति के अध्यक्ष संतोष सिंह चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय संयुक्त मंत्री अक्षय कटियार ने रक्तदान के बाद संदेश देते हुए कहा, “शिक्षक का कार्य केवल नौनिहालों को शिक्षित करना ही नहीं, बल्कि समाज और देश को सही दिशा देना भी है। रक्तदान एक पावन कार्य है जिसका कोई विकल्प नहीं है। रक्तदान करने से किसी के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि हम चार लोगों की जान बचा सकते हैं। युवा पीढ़ी को समय-समय पर रक्तदान करते रहना चाहिए ताकि रक्त की कमी से किसी का जीवन न जाए।” अक्षय कटियार ने संकल्प सेवा समिति के अध्यक्ष संतोष सिंह चौहान को अपना प्रेरणा स्रोत बताते हुए उनका धन्यवाद किया। इस पुनीत कार्य पर संगठन के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय कुमार कनौजिया, जिलाध्यक्ष कृष्ण शंकर मिश्र, महामंत्री दीपक वर्मा पटेल, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार, मंत्री संदीप कटियार, उपाध्यक्ष मदन गोपाल, जितेंद्र सिंह चंदेल, अमित शर्मा, पवन पांडे, स्मिता त्रिपाठी, ममता यादव, शैलेंद्र पटेल, नमो नारायण समेत संगठन की पूरी कार्यकारिणी ने अक्षय कटियार को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गौरतलब है कि संकल्प सेवा समिति अब तक लगभग 283 रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन कर चुकी है, वहीं अध्यक्ष संतोष सिंह चौहान स्वयं 67 बार रक्तदान कर मिसाल पेश कर चुके हैं। इस अवसर पर श्री चौहान ने सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
22 घाव… घर में खून से लथपथ महिला… और फिर पिस्टल लूट की कहानी। चार साल पहले अलीगढ़ के चर्चित सुनीता वार्ष्णेय हत्याकांड में पुलिस ने 400 से ज्यादा CCTV कैमरों की पड़ताल, आरोपियों की गिरफ्तारी और पिस्टल समेत अन्य सामान की बरामदगी को केस की मजबूत कड़ी बताया था। लेकिन अदालत में एक-एक कर इन कड़ियों पर सवाल उठते गए। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 36 पन्नों के फैसले में अभियोजन के साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना और आरोपी मनोज कुमार व कैलाश बाबू को बरी कर दिया। मामले में बचाव पक्ष ने न सिर्फ गिरफ्तारी और फिंगरप्रिंट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, बल्कि वारदात के दो दिन बाद पिस्टल लूट में दिखाई गई बरामदगी और उसी पिस्टल को आरोपियों से बरामद किए जाने की कहानी पर भी सवाल खड़े किए।
7 मार्च की शाम… घर में अकेली थीं सुनीता
देहलीगेट थाना क्षेत्र के रामनगर में 7 मार्च 2022 की शाम पेंट कारोबारी बिजेंद्र कुमार की पत्नी सुनीता वार्ष्णेय घर में अकेली थीं। करीब 7:30 बजे बेटा अनिकेत घर पहुंचा तो मुख्य दरवाजा खुला मिला। अंदर सुनीता खून से लथपथ पड़ी थीं। शरीर पर चाकू के कई वार थे। गला दबाने की कोशिश के भी निशान बताए गए। अस्पताल ले जाने के बाद रात करीब 11 बजे उनकी मौत हो गई। शुरुआती तहरीर में दो दिन पहले घर पर काम करने आए पेंटरों पर शक जताया गया था। इसके बाद पुलिस जांच की दिशा बदल गई।
पुलिस की कहानी- लूट के लिए हत्या और पिस्टल ले गए आरोपी
पुलिस ने विवेचना करते हुए एक पेंट कंपनी के सेल्स एग्जीक्यूटिव मनोज कुमार निवासी सिद्धार्थ नगर चूहरपुर बन्नादेवी और उसके साथी कैलाश बाबू निवासी नई बस्ती बन्नादेवी को आरोपी बताते हुए 13 मार्च को गिरफ्तार दिखाया। पुलिस का दावा था कि मनोज ने पेंट कारोबारी द्वारा की गई बेइज्जती का बदला लेने व खुद पर हुए कर्ज को निपटाने के लिए लूट की नीयत से सुनीता पर हमला किया और घर से लाइसेंसी पिस्टल व नकदी ले गए। यहीं से बचाव पक्ष ने पुलिस की कहानी की टाइमलाइन पर सवाल खड़ा किया।
घटना के दो दिन बाद ही पिस्टल लूट दिखाई गई, फिर आरोपियों से बरामद कैसे?
बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित ने अदालत में पुलिस की उस कहानी पर सवाल उठाया, जिसमें वारदात के बाद पिस्टल लूटे जाने और बाद में उसी पिस्टल को आरोपियों से बरामद दिखाने की बात थी। बचाव पक्ष का तर्क था कि घटना के दो दिन बाद पिस्टल की लूट दिखाए जाने की प्रक्रिया और बाद में आरोपियों के कब्जे से उसकी बरामदगी की कहानी में महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं। सवाल यह उठा कि यदि पिस्टल की लूट और उसकी बरामदगी पुलिस की कहानी का अहम आधार थी, तो उसकी कस्टडी, लूट की सूचना, बरामदगी की परिस्थितियों और आरोपियों से उसके जुड़ाव को अभियोजन किस तरह निर्विवाद रूप से साबित करता है। अदालत में इस बरामदगी को आरोपियों को हत्या से जोड़ने वाली निर्णायक कड़ी के तौर पर स्थापित नहीं किया जा सका।
पुलिस ने कहा था- मसूदाबाद से पकड़े, वहीं से बरामदगी
पुलिस का दावा था कि दोनों आरोपियों को मसूदाबाद बस स्टैंड के पास गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से पिस्टल, नकदी, कैंची, रस्सी और खून से सने कपड़े बरामद किए गए। लेकिन बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की जगह और समय पर भी सवाल उठाया। बचाव पक्ष ने साबित किया कि मनोज को मैनपुरी के कुरावली से और कैलाश बाबू को गाजियाबाद की दुकान से पुलिस ले गई थी। यानी गिरफ्तारी की जगह से लेकर बरामदगी तक पुलिस की कहानी को बचाव पक्ष ने अदालत में चुनौती दी।
फिंगरप्रिंट में मैनिपुलेशन का सवाल
केस में फिंगरप्रिंट को वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किया गया। लेकिन बचाव पक्ष ने इसकी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए फिंगरप्रिंट में मैनिपुलेशन साबित किया। इससे आरोपियों को घटनास्थल से जोड़ने वाले वैज्ञानिक साक्ष्य की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। हत्या जैसे गंभीर मामले में जब केस मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिका हो, तो ऐसी कड़ी का कमजोर होना अभियोजन के लिए बड़ा झटका बना।
400 CCTV खंगाले, लेकिन चेहरे की पहचान नहीं हो सकी
पुलिस ने दावा किया था कि 400 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों तक पहुंचा गया।
लेकिन अदालत में फुटेज की गुणवत्ता और पहचान को लेकर सवाल सामने आए। फुटेज में अंधेरा था और संदिग्धों के चेहरे मास्क से ढके थे। ऐसे में केवल CCTV के आधार पर आरोपियों की पहचान निर्णायक रूप से साबित नहीं हो सकी। बचाव पक्ष के तर्क पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रमाणिकता को लेकर भी अभियोजन को कानूनी कसौटी का सामना करना पड़ा।
‘मनोज मुझे मत मारो’ वाला बयान भी सवालों में
बेटे अनिकेत ने अदालत में कहा कि अस्पताल ले जाते समय उसकी मां ने कथित तौर पर ‘मनोज मुझे मत मारो’ कहा था। बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि यह बात शुरुआती FIR और पुलिस के प्रारंभिक बयानों में दर्ज क्यों नहीं थी। इसके अलावा घटना के बाद आरोपी मनोज के अंतिम संस्कार और उठावनी में शामिल होने की बात भी सामने आई।
अभियोजन इन परिस्थितियों को आरोपी के खिलाफ निर्णायक रूप से स्थापित नहीं कर सका।
शुरुआती शक वाले पेंटरों की जांच भी बनी सवाल
परिजनों ने शुरुआती तहरीर में दो दिन पहले घर पर आए पेंटरों पर शक जताया था। लेकिन पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि उन पेंटरों की जांच किस स्तर तक हुई और उन्हें संदेह से बाहर करने का ठोस आधार क्या था।
कोर्ट-परिस्थितियों की पूरी कड़ी नहीं बनी अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामले में साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित होनी चाहिए। इस केस में मोटिव, CCTV पहचान, फिंगरप्रिंट, गिरफ्तारी, पिस्टल की बरामदगी, कथित बयान और अन्य परिस्थितियों को जोड़कर अभियोजन आरोपियों का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
चार साल बाद पुलिस के ‘खुलासे’ का कोर्ट में उलटफेर
2022 में पुलिस ने जिस मामले को तेजी से सुलझाने और आरोपियों को पकड़ने का दावा किया था, उसमें चार साल बाद अदालत ने दोनों को बरी कर दिया। हत्या हुई थी, सुनीता की जान गई थी और वारदात बेहद गंभीर थी, लेकिन अदालत के सामने सवाल यह था कि क्या अभियोजन ने मनोज और कैलाश को ही हत्यारा साबित करने वाली हर कड़ी विश्वसनीय तरीके से जोड़ दी है?
अदालत का निष्कर्ष अभियोजन के पक्ष में नहीं गया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित के अनुसार नतीजा पुलिस का 2022 का खुलासा कोर्ट में साक्ष्यों की कसौटी पर टिक नहीं सका और दोनों आरोपी बरी कर दिए गए।
मिर्जापुर में शिक्षक दिवस के मौके पर पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रानी कर्णावती की प्रधानाध्यापिका मधुरिमा तिवारी को सम्मानित किया गया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है। भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सरोज ने उन्हें यह सम्मान दिया। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार और राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित प्रधानाध्यापिका मधुरिमा तिवारी को भाजपा जिलाध्यक्ष ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ विद्यालय पहुंचकर शॉल और सम्मान देकर शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं। भाजपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सरोज ने कहा कि समाज और देश बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे खास है। शिक्षक सिर्फ बच्चों को किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को भी दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रानी कर्णावती में शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूल का माहौल और बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाएं देखकर लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहतर शिक्षा के सपने को जमीन पर सच किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानाध्यापिका मधुरिमा तिवारी के काम की तारीफ करते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल को कॉन्वेंट स्कूलों से भी बेहतर बनाने की दिशा में उनका प्रयास तारीफ के काबिल है। स्कूल में शिक्षा का जो मॉडल तैयार किया गया है, वह सिर्फ जिले तक न रहकर प्रदेश और पूरे देश में पहचान बनाए, यही उनकी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि मधुरिमा तिवारी का काम बहुत अच्छा है और इससे दूसरे शिक्षकों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में जो कोशिशें कर रही है, उनका फायदा बच्चों तक पहुंचाना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष उदयभान तिवारी, सुनीता शर्मा, पूनम चौरसिया, विजय शक्ति दूबे, शुभम जायसवाल, पुष्पेंद्र द्विवेदी, जय प्रकाश भारती, कृष्ण कुमार सिंह सहित कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
दुद्धी पुलिस ने”ऑपरेशन शुद्धि”के तहत एक अंतर्राज्यीय डोडा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है।पुलिस ने रजखड़ घाटी से शनिवार को सुबह 1 क्विंटल 38 किलो 538 ग्राम अवैध डोडा के साथ दो तस्करों अनूप साहू और राहुल को गिरफ्तार किया है। थाना दुद्धी के प्रभारी निरीक्षक विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम रजखड़ तिराहे पर थी।वे अपराधियों को रोकने और संदिग्ध गाड़ियों की जांच कर रहे थे।इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि विंढमगंज की ओर से एक सफेद रंग की आर्टिका कार (UP16-GT4953) आ रही है।इसमें संदिग्ध नशीला पदार्थ है और यह गाड़ी हाथीनाला की ओर जाने वाली थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने गहन जांच शुरू की। कुछ देर बाद सफेद आर्टिका कार आती दिखी। पुलिस टीम ने कार को रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने कार रोकने के बजाय तेज रफ्तार से रजखड़ घाटी की ओर बढ़ा दी। पुलिस टीम ने तुरंत कार का पीछा किया.रजखड़ घाटी दुद्धी में चढ़ाई से पहले मोड़ पर कार को रोक लिया गया।कार चालक और उसके बगल में बैठे व्यक्ति ने गाड़ी से उतरकर भागने की कोशिश की,लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उन्हें मौके पर पकड़ लिया। पुलिस टीम ने आर्टिका कार (UP16-GT4953) की तलाशी ली।तलाशी में कार की पिछली सीट हटाकर रखी 9 प्लास्टिक की बोरियों में कुल1कुंतल 38 किलो 538 ग्राम अवैध डोडा मिला। बरामद डोडा से भरी सभी 9 बोरियों को पुलिस ने जब्त कर नियमानुसार सील किया। गिरफ्तार अभियुक्तों की तलाशी में 2 एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी मिले।अवैध मादक पदार्थ के परिवहन में इस्तेमाल की गई आर्टिका कार को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है। गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ करने पर चालक अनूप साहू द्वारा बताया गया कि वह अपने साथी राहुल मौर्या के साथ आर्टिका कार से झारखण्ड के डाल्टेनगंज क्षेत्र से डोडा लेकर बरेली जा रहा था। पूछताछ में अभियुक्त द्वारा बताया गया कि दोनों लोग 2 सितम्बर को बरेली से बिहार के रास्ते डाल्टेनगंज, झारखण्ड गए थे, जहां उन्हें डोडा से भरी 09 प्लास्टिक की बोरियां उपलब्ध कराई गई थीं, जिन्हें आर्टिका कार की पिछली सीट निकालकर उसमें रखा गया था। आरोपी ने यह भी बताया कि उक्त माल को लेकर वे दुद्धी के रास्ते सोनभद्र होते हुए बरेली जा रहे थे।
प्रयागराज में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश चुनाव की मतगणना का दूसरा चरण शनिवार को पूरा हो गया। 25वें एलिमिनेशन राउंड में मतों की छंटनी और ट्रांसफर के बाद चुनावी तस्वीर साफ हुई है। इस राउंड में कुल 1,999 मत गिने और ट्रांसफर किए गए। इनमें से 1,919 मत वैध पाए गए, जबकि 80 मत एग्जॉस्टेड हो गए। एग्जॉस्टेड मतों का मतलब है कि उनमें आगे कोई वरीयता उपलब्ध नहीं थी। इस चरण में कम वोट पाने वाले छह प्रत्याशियों को चुनाव से बाहर कर दिया गया। इनमें भारत सिंह, सौरभ यादव, गोपी कांत मिश्रा, तेज सिंह बघेल, प्रेम शंकर कुशवाहा और राकेश शरण मिश्रा शामिल हैं। ये प्रत्याशी रैंक 133 से 138 के बीच थे। इन छह प्रत्याशियों के बाहर होने के बाद अब बार काउंसिल चुनाव में 132 उम्मीदवार बचे हैं। 25वें एलिमिनेशन राउंड के बाद भी कानपुर नगर के अनुराग पांडेय 5,155 वोटों के साथ पहले स्थान पर बने हुए हैं। एलिमिनेशन प्रक्रिया के दौरान दूसरे प्रत्याशियों के वोट नियमों के अनुसार ट्रांसफर हुए। इससे शीर्ष उम्मीदवारों के वोटों में बदलाव आया, लेकिन अनुराग पांडेय ने अपनी बढ़त बनाए रखी। लखनऊ के प्रशांत सिंह ‘अटल’ 4,975 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। प्रयागराज के देवेंद्र मिश्रा ‘नगरहा’ 4,219 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर बने हुए हैं। शीर्ष तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला लगातार कड़ा होता जा रहा है। बार काउंसिल चुनाव की मतगणना में एलिमिनेशन राउंड के दौरान सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशियों को बाहर किया जाता है। बाहर हुए प्रत्याशियों के मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता के आधार पर वोट संबंधित प्रत्याशियों के खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। जिन मतपत्रों में आगे कोई वरीयता नहीं होती, उन्हें एग्जॉस्टेड घोषित कर दिया जाता है। 25वें एलिमिनेशन राउंड के बाद छह प्रत्याशियों के बाहर होने से अब मैदान में 132 उम्मीदवार बचे हैं। जैसे-जैसे एलिमिनेशन राउंड आगे बढ़ेंगे, मुकाबला और भी कड़ा होने की संभावना है।
पीलीभीत के मरौरी विकासखंड के संजय नगर महोफ (न्यूरिया) गांव में शनिवार शाम 6 बजे जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने एक ग्राम चौपाल लगाई। यह चौपाल ग्रामीणों की एक गंभीर शिकायत के बाद लगाई गई थी। जिलाधिकारी ने इस पर तुरंत कार्रवाई की। दरअसल, 3 सितंबर 2026 को गांव के कई लोगों ने प्रशासन को एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें ग्रामीणों ने बताया था कि गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क और अंदर की गलियां आज तक पक्की नहीं बन पाई हैं। बारिश के मौसम में इन कच्चे रास्तों पर बहुत कीचड़ और पानी भर जाता है। चौपाल लगाकर हालात का जायजा लिया इससे न केवल लोगों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है, बल्कि एंबुलेंस, स्कूल वैन और ट्रैक्टर जैसे जरूरी वाहन भी गांव में नहीं आ पाते। जनप्रतिनिधियों के सिर्फ आश्वासन से निराश होकर ग्रामीणों ने पक्की सड़क बनाने की मांग की थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, डीएम ज्ञानेंद्र सिंह शनिवार शाम 6 बजे खुद गांव पहुंचे। उन्होंने चौपाल लगाकर हालात का जायजा लिया। चौपाल के दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधी बात की और उन्हें सड़क बनाने की समस्या जल्द खत्म करने का भरोसा दिया। सड़क के अलावा, जिलाधिकारी ने गांव में पीने के पानी, बिजली सप्लाई, जल निकासी, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था व विधवा पेंशन, राशन वितरण, स्वास्थ्य और प्राथमिक शिक्षा सहित कई दूसरी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का फायदा समय पर मिले और गांव में साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था हो। डीएम की इस तुरंत कार्रवाई और सीधे जुड़ाव से गांव वाले बहुत खुश दिखे। सभी ने प्रशासन का धन्यवाद किया।