मंदिर में पूजा-पाठ के साथ देवी-देवताओं की परिक्रमा को भी अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए आपको बताते हैं कौन से देवता की कितनी परिक्रमाएं करनी चाहिए।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मंदिर में दर्शन के बाद लोग भगवान की परिक्रमा जरूर करते हैं। किसी भी देवी-देवता की परिक्रमा को पूजा का ही एक चरण माना जाता है। परिक्रमा लगाने से पूजा का पूर्ण फल और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है।
ज्योतिष में परिक्रमा करने के कुछ नियम बताए गए हैं और उनका पालन जरूरी माना जाता है। हर एक देवी या देवता की परिक्रमा के कुछ नियम हैं। जहां कुछ देवताओं की एक बार परिक्रमा की जाती है, वहीं कुछ की 2 या 3 बार।
यही नहीं कई देवी-देवताओं की 11 बार परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है। आइए जानें कि भगवान शिव से लेकर विष्णु और अन्य देवताओं की कितनी परिक्रमा करना शुभ माना जाता है और क्यों?
गणपति की कितनी परिक्रमा शुभ
मंदिर में गणपति की तीन बार परिक्रमा करने की सलाह दी जाती है। जब भी आप मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं आपको गणपति की पूजा के बाद 3 बार परिक्रमा जरूर करनी चाहिए। इससे उनका आशीर्वाद मिलता है। यदि आप गणपति के मूषक के कान में मनोकामना कहते हैं तो पूर्ति होती है।
भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा
भगवान शिव और माता पार्वती या फिर शिव परिवार की परिक्रमा करती हैं तो आपके लिए तीन परिक्रमाएं करनी चाहिए। वहीं आपको शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। आपको शिव परिवार की हमेशा विषम संख्या में परिक्रमा करनी चाहिए।
भगवान विष्णु की परिक्रमा के नियम
जब आप मंदिर में विष्णु जी की परिक्रमा करें तो हमेशा चार परिक्रमा करनी चाहिए। विष्णु मंदिर में गर्भगृह के चारों ओर हमेशा चार बार परिक्रमा करनी चाहिए।
हनुमान जी और शनि देव
किसी भी मंदिर में पूजन के समय हनुमान जी की तीन और शनिदेव की सात परिक्रमाएं करनी चाहिए। हनुमान जी की परिक्रमा करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
माता दुर्गा की कितनी परिक्रमाएं शुभ हैं?
जब आप दुर्गा माता की परिक्रमा कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि आप माता की चार परिक्रमाएं ही करें। माता दुर्गा के साथ अन्य देवियों की भी चार बार परिक्रमा करना ही शुभ माना जाता है।
पीपल और बरगद की परिक्रमा के नियम
जब हम किसी पेड़ की परिक्रमा की बात करते हैं, तो आमतौर पर पीपल और बरगद के पेड़ों की सात बार परिक्रमाएं करने की सलाह दी जाती है।
देवी-देवताओं की परिक्रमा के नियम
- आप जब भी किसी भी देवी या देवता की परिक्रमा करते हैं आपको ध्यान रखना है कई हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में ही परिक्रमा करें।
- आप जिस स्थान से परिक्रमा शुरू करें एक चक्कर उसी स्थान पर पूर्ण माना जाता है।
- जिन देवी-देवताओं की जितनी संख्या को उचित माना जाता है उतनी ही परिक्रमाएं करें।
- भूलकर भी मंदिर में उल्टी परिक्रमा न करें।
यदि आप मंदिर में दर्शन के साथ सही नियमों के अनुसार परिक्रमा करते हैं तो आपको इसके पूर्ण फल मिलते हैं और ईश्वर का आशीर्वाद भी पाने में मदद मिलती है।





