Category: himachal

  • खेल दिवस: पहाड़ के हौसलों ने चूमा आसमान, हिमाचल के खिलाड़ियों का विश्व में डंका, पढ़ें सफलता की कहानी

    देवभूमि हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों का आज विश्व पटल पर डंका बज रहा है। विश्व विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम हो या फिर विश्व विजेता कबड्डी की टीम, हिमाचल की खिलाड़ियों का योगदान दोनों टीमों में महत्वपूर्ण रहा है। प्रतियोगिता में तलवार की धार दिखानी हो या शूटिंग में निशाना साधना हो, उसमें भी देवभूमि के खिलाड़ी किसी से कम नहीं हैं। वाॅलीबाल में भी सूबे के खिलाड़ी अब देश की टीम की कमान संभाल रहे हैं। हाॅकी में भी हिमाचल के खिलाड़ियों का जलवा रहा है। दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद जिला सिरमौर के खिलाड़ियों के हौसले असीमित हैं। पगडंडियों से लेकर विश्व पटल तक जिले के खिलाड़ियों के कदम बढ़ रहे हैं।

  • हिमाचल: नेपाल से युवक ने की व्हाट्सएप काॅल, बोला-26 बिजली प्रोजेक्ट बह गए; दूसरी जगह था, सुरक्षित हूं मां…

    मां मैं सुरक्षित हूं, दूसरी नदी पर बन रही टनल में था तो बच गएझ नेपाल में एक प्रोजेक्ट में काम कर रहे चंबा के सलूणी के युवक ने की व्हाट्सएप काॅल की तो परिजनों की सांस में सांस आई।
  • लाहौल: 33 साल में 176 प्रतिशत बढ़ी घेपन घाट झील, घाटी के लोगों की चिंता बढ़ी, लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

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     नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद लाहौल घाटी की संवेदनशील घेपन घाट लेक एक बार फिर चर्चा में है। सैटेलाइट अध्ययन में सामने आया है कि पिछले 33 वर्षों में इस हिमनदीय घेपन झील का दायरा करीब 176 फीसदी बढ़ चुका है। वर्तमान में झील का क्षेत्रफल 101.30 हेक्टेयर, लंबाई 2.464 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई करीब 625 मीटर है। झील में करीब 35.08 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी होने का अनुमान है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण झील के लगातार बढ़ते आकार को देखते हुए केंद्र सरकार यहां पहली बार अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की तैयारी कर रही है। तकनीक का ट्रायल सिस्सू झील के समीप किया जा रहा है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडैक) समेत विभिन्न संस्थान लंबे समय से क्षेत्र की हिमनदीय झीलों और ग्लेशियरों का अध्ययन कर रहे हैं।

    चिनाब घाटी के लिए गंभीर खतरा

    नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार घेपन घाट झील के टूटने की स्थिति में चिनाब घाटी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि झील का आकार बढ़ने और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से पानी का स्तर लगातार बढ़ता रहा तो हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (ग्लोफ) का खतरा भी बढ़ सकता है। झील टूटने की स्थिति में इसका प्रभाव केवल लाहौल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चिनाब नदी के साथ जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों और आगे पाकिस्तान तक पड़ सकता है।

    सैटेलाइट से मिलेगी आपदा की पूर्व सूचना

    लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना ने बताया कि विशेषज्ञों और तकनीकी टीम ने दो बार घेपन झील का निरीक्षण किया है। जल्द ही यहां हिमाचल का पहला अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह प्रणाली सैटेलाइट आधारित तकनीक से झील के जलस्तर और संभावित बदलावों पर नजर रखने में मदद करेगी और खतरे की स्थिति में मौसम विभाग तथा जिला प्रशासन को पहले ही सूचना मिल सकेगी। झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग को पत्र लिखा गया है।

    सिस्सू झील के समीप चल रहा सिस्टम का ट्रायल

    सीडैक के वैज्ञानिक डॉ. अनीश सत्यान ने बताया कि फिलहाल सिस्सू झील के समीप अर्ली वार्निंग सिस्टम को ट्रायल के तौर पर स्थापित किया गया है। ट्रायल के परिणामों का अध्ययन किया जा रहा है। केंद्र सरकार से अनुमति मिलते ही इसी तकनीक को घेपन घाट लेक में स्थापित किया जाएगा।

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  • हवाई सेवा: धर्मशाला-चंडीगढ़ के बीच 15 दिन बाद फिर उड़ान भरेगा इंडिगो का विमान, शेड्यूल जारी

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    धर्मशाला-चंडीगढ़ हवाई सेवा 15 दिन के अंतराल के बाद पहली सितंबर से फिर बहाल होने जा रही है। इंडिगो ने सप्ताह में चार दिन उड़ानें संचालित करने का शेड्यूल जारी किया है, जिससे यात्रियों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बरसात के मौसम में हवाई सेवा बंद थी। अब विमानन कंपनी इंडिगो ने इस हवाई रूट पर दोबारा उड़ानें शुरू करने का शेड्यूल तय कर दिया है। कंपनी सप्ताह में चार दिन धर्मशाला और चंडीगढ़ के बीच हवाई सेवा उपलब्ध करवाएगी। वेबसाइट पर जारी शेड्यूल के मुताबिक यह उड़ानें सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को धर्मशाला (गगल एयरपोर्ट) से चंडीगढ़ के लिए संचालित होंगी।

    विमान दोपहर 1:10 बजे गगल एयरपोर्ट से चंडीगढ़ के लिए उड़ान भरेगा। वहीं, चंडीगढ़ से वापसी की उड़ान दोपहर 2:45 बजे होगी। इस दौरान यात्रियों से 3,500 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक किराया भरना होगा। करीब 15 दिन तक हवाई सेवा बंद रहने के कारण यात्रियों को चंडीगढ़ जाने के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ रहा था। धर्मशाला-चंडीगढ़ रूट बंद होने से सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को उठानी पड़ी, जिन्हें चंडीगढ़ से आगे दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू समेत अन्य शहरों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़नी होती है। सड़क मार्ग से चंडीगढ़ पहुंचने में अधिक समय लगने के कारण यात्रियों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा था।

    वहीं अब विमानन कंपनी इंडिगो की सेवा दोबारा शुरू होने से धर्मशाला एयरपोर्ट की हवाई कनेक्टिविटी में सुधार होगा। चंडीगढ़ के लिए सीधी उड़ान मिलने से यात्रियों को कम समय में गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी। लंबे समय से इस रूट की उड़ान बहाल होने का इंतजार कर रहे यात्रियों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा धर्मशाला और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के लिए भी चंडीगढ़ हवाई कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। इससे होटल, टैक्सी और पर्यटन से जुड़े अन्य कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

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  • आईआईटी मंडी का शोध: हिमालयी झीलों की गहराई और जल क्षमता का आकलन करेगा सोनार

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    हिमालय की ऊंचाई पर स्थित झीलों की गहराई और जल क्षमता का आकलन अब कम लागत वाली तकनीक से किया जा सकेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने मानव रहित सतही नौका (यूएसवी) पर सोनार लगाकर हिमालयी झीलों का सर्वेक्षण किया है। शोध में यह तरीका कम लागत और कम जोखिम के साथ झीलों की गहराई, आयतन (वाल्यूम) और भौतिक संरचना का विस्तृत आकलन करने में प्रभावी पाया गया है। यह शोध ईजीयू जनरल असेंबली 2026 में प्रकाशित हुआ है।


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    आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिमी हिमालय की तीन झीलों को अध्ययन के लिए चुना। इनमें लाहौल-स्पीति में बारालाचा ला के पास 3,770 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दीपक ताल, 4,777 मीटर की ऊंचाई वाली सूरज ताल और मंडी में पराशर झील के पास 2,592 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक छोटी झील शामिल रही। सर्वेक्षण के दौरान डीपर प्रो प्लस सोनार को मानव रहित सतही नौका पर लगाया गया। दीपक ताल में 25 हजार से अधिक गहराई के बिंदु जुटाए गए।

    यहां अधिकतम गहराई 7.44 मीटर और अनुमानित आयतन 41,929.05 घन मीटर पाया गया। सूरज ताल में पांच हजार से अधिक बिंदु दर्ज किए गए। इसकी अधिकतम गहराई 2.56 मीटर और आयतन 9,400.95 घन मीटर रहा। वहीं पराशर झील के पास अध्ययन की गई झील में करीब एक हजार बिंदु दर्ज हुए। इसकी अधिकतम गहराई करीब 1.3 मीटर और आयतन 2,947.53 घन मीटर आंका गया। शोधकर्ताओं ने झीलों में पानी की वास्तविक मात्रा का पता लगाने के लिए सोनार सर्वेक्षण से मिले आंकड़ों की तुलना पारंपरिक फार्मूलों से की।

    अध्ययन में पाया गया कि इन फार्मूलों से निकले अनुमान और वास्तविक सर्वेक्षण के आंकड़ों में भारी अंतर था। इससे संकेत मिलता है कि हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित झीलों का आयतन केवल पारंपरिक फार्मूलों के आधार पर सटीक रूप से तय करना कठिन हो सकता है। शोध में आधुनिक सोनार आधारित सर्वेक्षण तकनीक को अधिक प्रभावी पाया गया। शोध कार्य में आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग की पीएचडी स्कॉलर भावना पाठक शामिल रहीं। 

    क्या है सोनार

    साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग यानी सोनार एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो ध्वनि तरंगों की सहायता से पानी के अंदर मौजूद वस्तुओं की दूरी, दिशा और स्थिति का पता लगाता है। इसे आमतौर पर जहाजों, पनडुब्बियों और समुद्री अनुसंधान कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है।

    सोनार और मानव रहित सतही नौका का संयोजन हिमालयी झीलों की गहराई, जल क्षमता और अन्य भौतिक विशेषताओं का आकलन करने का प्रभावी विकल्प है। इससे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिना बड़े और महंगे सर्वेक्षण उपकरणों के झीलों का अध्ययन किया जा सकता है। -प्रो. डेरिक्स प्रेज शुक्ला, प्रोफेसर, आईआईटी मंडी

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  • हिमाचल: हादसों पर लगेगी लगाम, नए सिरे से चिन्हित किए जाएंगे ब्लैक स्पॉट, सड़क पांच मीटर चाैड़ी होगी

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     हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों को रोकने के लिए ब्लैक स्पॉट को नए सिरे से चिन्हित करने और मौजूदा ब्लैक स्पॉट को सुरक्षित बनाने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश में पहले के चिन्हित 239 ब्लैक स्पॉट को दुरुस्त किया जाएगा। इन स्थानों पर रोड सेफ्टी के लिए उपलब्ध बजट से जरूरी सुधार कार्य किए जाएंगे। दुर्घटना संभावित स्थानों पर सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के साथ-साथ क्रैश बैरियर समेत अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। सड़क सुरक्षा को लेकर लोक निर्माण विभाग, पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। विभागों की ओर से ऐसे स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं या सड़क की बनावट, तीखे मोड़, कम चौड़ाई और सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण दुर्घटना का खतरा अधिक है। इन स्थानों का नए सिरे से चयन भी किया जाएगा, ताकि हादसों की वास्तविक स्थिति के आधार पर ब्लैक स्पॉट की सूची को अपडेट किया जा सके।

    सड़क संकेतक, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग और चेतावनी बोर्ड लेगेंगे

    ब्लैक स्पॉट को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरत के अनुसार सड़क के हिस्से को करीब पांच मीटर तक चौड़ा किया जाएगा। इससे वाहनों को मोड़ काटने और आमने-सामने से आने वाले वाहनों को सुरक्षित तरीके से गुजरने में मदद मिलेगी। जहां सड़क चौड़ी करना संभव नहीं होगा, वहां अन्य इंजीनियरिंग उपायों के माध्यम से दुर्घटना की आशंका कम करने पर जोर रहेगा। इसके अलावा सड़क संकेतक, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग और चेतावनी बोर्ड लगाने जैसे उपाय भी किए जाएंगे।

    हादसों के आंकड़ों के आधार पर होगा चयन

    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पहले के चिन्हित और नए ब्लैक स्टाफ चिन्हित कर उन्हें दुरुस्त किया जाना है। जहां सड़क तंग है, उसे भी विभाग को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। नए ब्लैक स्पॉट के चयन में पुलिस और परिवहन विभाग से मिलने वाले हादसों के आंकड़ों को भी आधार बनाया जाएगा। दुर्घटनाओं की संख्या, उनकी गंभीरता और सड़क की स्थिति का अध्ययन कर प्राथमिकता तय होगी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग इन स्थानों पर जरूरी इंजीनियरिंग सुधार करवाएगा। रोड सेफ्टी फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन कार्यों के लिए किया जाएगा।

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  • हिमाचल प्रदेश: पंचायतों को मिलेगा 16वें वित्तायोग का पैसा, सरकार ने जमा कराया उपयोगिता प्रमाणपत्र

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    हिमाचल ने 14वें वित्तायोग का पैसा विकास कार्यों में खर्च कर लिया है। पंचायतीराज विभाग की ओर से केंद्रीय मंत्रालय को उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा कर दिया है। अब केंद्र की ओर से पंचायतों को 16 वें वित्तायोग की पहली किस्त जारी होगी। पुराना पैसा खर्च न किए जाने को लेकर केंद्र सरकार ने हिमाचल की किस्त रोक दी थी। अब केंद्र की गाइडलाइन की अनुसार विकास कार्यों की प्लान केंद्र को भेजा जा रहा है। 31 सितंबर तक विकास कार्यों के प्लान केंद्र को भेजने होंगे।


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    केंद्र से मिलने वाली 16वें वित्तायोग की पहली किस्त से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास हो सकेगा। अगले महीने से पंचायतों में विभिन्न विकास कार्य तेजी से शुरू हो जाएंगे। पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों पर केंद्र सरकार की कड़ी नजर रहेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धनराशि का उपयोग निर्धारित योजनाओं के अनुसार हो। किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक विकास संभव हो सकेगा।

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  • सोलन: भटोलीकलां में नशे की ओवरडोज से युवक की मौत, पुलिस ने शुरू की जांच

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    हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के भटोलीकलां में किराये के मकान में रह रहे 26 वर्षीय युवक की संदिग्ध हालात में नशे की ओवरडोज से मौत हो गई। युवक की पहचान बिहार के अरवल जिले के कुचहरा चिरारी गांव निवासी राहुल के रूप में हुई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, राहुल पिछले कुछ समय से भटोलीकलां में अपने पांच दोस्तों के साथ एक कमरे में रह रहा था। गुरुवार को दिन के समय उसका रूममेट अभिषेक उसे बाजार में मिला।


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    बताया जा रहा है कि राहुल ने अभिषेक को अपने पास नशे का सामान होने की बात कही और कमरे में जाकर नशे की डोज लेने की बात कही। इसके बाद दोनों कमरे में चले गए। पुलिस के अनुसार राहुल ने कमरे में सीरिंज से नशे की डोज ली। इसके बाद वह शौचालय में चला गया। आरोप है कि शौचालय में भी उसने नशे की दूसरी डोज ली, जिसके बाद वह बेहोश होकर गिर गया। काफी देर तक उसके बाहर नहीं आने पर साथियों ने उसे देखा तो वह बेहोशी की हालत में मिला। इसके बाद सोनू और आलोक उसे उपचार के लिए बद्दी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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    राहुल के साथ कमरे में रहने वाले आलोक ने पुलिस को बताया कि उसने कमरे में नशे का इंजेक्शन लिया और इसके बाद वह शौचालय में गिर गया। पुलिस ने घटनास्थल से नशे के इस्तेमाल में लाई गई एक सीरिंज भी बरामद की है। शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई के बाद उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और मौत के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, राहुल पिछले करीब तीन वर्षों से अपने माता-पिता से अलग रह रहा था। उसने माता-पिता को अपने रहने के स्थान और काम के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं दी थी।

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  • हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड: ऑडियो-वीडियो सीसीटीवी की निगरानी में होंगी सितंबर की बोर्ड परीक्षाएं

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     बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को बोलकर उत्तर बताने या किसी भी तरह नकल कराने की कोशिश अब परीक्षा केंद्रों पर भारी पड़ सकती है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड सितंबर में होने वाली परीक्षाओं के दौरान ऑडियो-वीडियो आधारित लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग का ट्रायल करेगा। परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि परीक्षा कक्ष में होने वाली हर गतिविधि पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।

    इसके लिए बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने सभी परीक्षा केंद्र संचालकों से 5 सितंबर तक सीसीटीवी कैमरों और अन्य व्यवस्थाओं का पूरा ब्योरा ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से मांगा है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा कक्ष में लगाए जाने वाले सीसीटीवी कैमरों का एंगल ऐसा होना चाहिए, जिससे पूरा परीक्षा हॉल और परीक्षार्थियों की गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे। कैमरे की नजर से कोई हिस्सा छूटना नहीं चाहिए। साथ ही परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था बोर्ड के निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने और उनके बीच पर्याप्त दूरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    स्टेट ओपन स्कूल (एसओएस) समेत सभी परीक्षा केंद्रों के पर्यवेक्षकों और निरीक्षकों को परीक्षा ड्यूटी में पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीसीटीवी व्यवस्था, बैठक व्यवस्था या निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित केंद्र के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गूगल फॉर्म भरने या सीसीटीवी व्यवस्था से संबंधित जानकारी देने में तकनीकी परेशानी होने पर परीक्षा केंद्र बोर्ड से संपर्क कर सकते हैं।

    उल्लेखनीय है कि मार्च, 2026 में आयोजित हुई परीक्षाओं के दौरान कांगड़ा जिला के एक स्कूल में एक अध्यापक की ओर से परीक्षा में बोल कर छात्रों को बहुविकल्पीय प्रश्नों के के उत्तरों से अवगत करवाया जा रहा था। इस पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा बोर्ड ने वीडियो के साथ ऑडियो को भी रिकार्ड करने की व्यवस्था शुरू करने की बात कही थी। इस पर अब अमलीजामा पहनाते हुए शिक्षा बोर्ड सितंबर में होने वाली परीक्षाओं के दौरान ट्रायल के आधार पर ऑडियो और वीडियो से लाइव निगरानी करेगा, ताकि नकल को रोका जा सके।

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  • हिमाचल तकनीकी शिक्षा विभाग: लीट और पैट के लिए स्पॉट काउंसलिंग का शेड्यूल जारी

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    हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग ने राजकीय और निजी बहुतकनीकी संस्थानों में खाली सीटों पर प्रवेश के लिए सेंट्रलाइज्ड ऑफलाइन स्पॉट काउंसलिंग राउंड दो की तिथियां जारी कर दी हैं। यह प्रक्रिया राजकीय बहुतकनीकी संस्थान सुंदरनगर में होगी। इंजीनियरिंग डिप्लोमा के दूसरे वर्ष में लेटरल एंट्री (लीट) के माध्यम से प्रवेश के लिए स्पॉट काउंसलिंग 31 अगस्त को होगी।


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    इसमें लीट स्कोर और नॉन-लीट (12वीं/आईटीआई) स्कोर के आधार पर पात्र अभ्यर्थी भाग ले सकेंगे। तीन वर्षीय इंजीनियरिंग डिप्लोमा के प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए पैट और नॉन-पैट अभ्यर्थियों की स्पॉट काउंसलिंग एक सितंबर 2026 को होगी। नॉन-पैट अभ्यर्थियों का चयन दसवीं कक्षा के अंकों के आधार पर किया जाएगा। विभाग ने अभ्यर्थियों को सभी मूल प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के साथ सुबह 11:30 बजे से पहले राजकीय बहुतकनीकी संस्थान सुंदरनगर परिसर में पहुंचने को कहा है।

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    जिन अभ्यर्थियों ने पहले ऑनलाइन काउंसलिंग फीस नहीं भरी है, उन्हें निर्धारित काउंसलिंग फीस के साथ आवेदन फॉर्म जमा करना होगा। नोटिस के अनुसार काउंसलिंग फीस 750 रुपये है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। अधिक जानकारी के लिए हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट और तकनीकी शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रवेश संबंधी सूचना देखी जा सकती है।

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