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  • विजिलेंस ने जमीन फर्जीवाड़े में धरा MLA सुधीर शर्मा का करीबी, 300 रजिस्ट्रियां- 400 कनाल जमीन…

    विजिलेंस ने जमीन फर्जीवाड़े में धरा MLA सुधीर शर्मा का करीबी, 300 रजिस्ट्रियां- 400 कनाल जमीन…

    विजिलेंस ने नेक राम को किया गिरफ्तार, जमीन फर्जीवाड़े में की बड़ी कार्रवाई

    धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण, फर्जी राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने और करोड़ों की बेनामी संपत्ति बनाने के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। विजिलेंस ने इस मामले में धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के बेहद करीबी और पूर्व चालक/सहयोगी रक्कड़ निवासी नेक राम को गिरफ्तार किया है।  

    300 से अधिक संदिग्ध रजिस्ट्रियों और करीब 400 कनाल जमीन के फर्जीवाड़े की प्राथमिक जांच के बाद हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में सियासी हड़कंप मचा दिया है। पुलिस रिमांड अवधि खत्म होने के बाद आरोपी को आज दोबारा धर्मशाला की विशेष अदालत में पेश कर आगे की हिरासत मांगी जा रही है।

    विजिलेंस ब्यूरो ने रक्कड़ स्थित आरोपी नेक राम के घर पर छापेमारी कर जमीन और संपत्तियों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में पाया गया कि धर्मशाला और पालमपुर तहसील के अलग-अलग पटवार सर्किलों में वर्ष 2011 से 2025 के बीच नेक राम, उसकी पत्नी किरण बाला और मां मंगला देवी के नाम पर करीब 400 कनाल जमीन खरीदी गई है।

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    विजिलेंस के अनुसार नेक राम और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर करीब 400 कनाल जमीन होने की जानकारी भी जांच के दायरे में आई है। इसके अलावा रक्कड़ स्थित करोड़ों रुपये की लागत से बनी कोठी के निर्माण में खर्च हुई रकम के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। विजिलेंस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी संपत्तियां खरीदने और निर्माण में इस्तेमाल धन का वास्तविक स्रोत क्या था।

    विजिलेंस ने इस पूरे मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी जमीन को कथित तौर पर गलत तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम म्यूटेशन यानी इंतकाल किया गया और बाद में बिक्री, गिफ्ट डीड या अन्य दस्तावेजों के जरिए उसका हस्तांतरण किया गया। एक मामले में धर्मशाला के घनियारा, चकबन घनियारा और आसपास के क्षेत्रों की जमीन का रिकॉर्ड जांच के दायरे में है। विजिलेंस को संदेह है कि कुछ राजस्व रिकॉर्ड में कथित तौर पर बदलाव कर जमीन के मालिकाना हक अथवा कब्जे से जुड़ी प्रविष्टियां बदली गईं।

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    दूसरी एफआईआर रक्कड़-सिधवारी क्षेत्र की जमीन से जुड़ी बताई जा रही है। विजिलेंस के अनुसार वर्ष 2019 में सरकारी जमीन के एक हिस्से के कथित फर्जी म्यूटेशन के बाद उसी जमीन को नेक राम की पत्नी किरण बाला के नाम खरीदे जाने की बात जांच में सामने आई है। एक अन्य संपत्ति के रिकॉर्ड में नेक राम की मां मंगला देवी का नाम कब्जाधारी के तौर पर दर्ज होने का भी उल्लेख है। इन सभी रिकॉर्ड और लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर विजिलेंस पूरे मामले की तस्वीर तैयार करने में जुटी है।

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    विजिलेंस ने धर्मशाला और पालमपुर तहसील के विभिन्न पटवार सर्किलों में नेक राम, उसकी पत्नी और मां के नाम खरीदी गई जमीन का रिकॉर्ड भी खंगाला है। जांच में सामने आई संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बताई गई है। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और क्या सभी लेन-देन घोषित आय के अनुरूप थे। जांच का दायरा वर्ष 2007 से अब तक के संदिग्ध जमीन लेन-देन तक बढ़ाए जाने की बात भी सामने आई है।

    नेक राम की गिरफ्तारी ने इस मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्हें धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा का करीबी बताया जाता है। यही वजह है कि जमीन मामले में विजिलेंस की कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुधीर शर्मा स्वयं आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं। 

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    गिरफ्तारी से पहले विजिलेंस टीम ने रक्कड़ स्थित नेक राम के घर पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जमीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया। परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की गई है। जांच एजेंसी अब जब्त दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का मिलान कर रही है। विजिलेंस की नजर इस बात पर भी है कि कथित जमीन सौदों से वास्तविक आर्थिक लाभ किसे मिला और किसी संपत्ति के पीछे कोई वास्तविक लाभार्थी छिपा हुआ है या नहीं।

    मामले की जांच केवल नेक राम और उनके परिवार की संपत्तियों तक सीमित नहीं है। विजिलेंस कथित तौर पर यह भी पता लगा रही है कि राजस्व रिकॉर्ड में यदि कोई हेरफेर हुआ तो वह किस स्तर पर हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। जाली दस्तावेज, कथित फर्जी हस्ताक्षर, मुख्तारनामा और मूल राजस्व रिकॉर्ड के गायब होने जैसे आरोपों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अब आने वाले दिनों में जमीन के सौदों, बैंकिंग लेन-देन, राजस्व रिकॉर्ड और संभावित अन्य आरोपियों से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना है।

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    विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार नेक राम को 1 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और अदालत ने उन्हें 5 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा था। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी को कई अहम सुराग मिलने की बात कही गई है। अब आरोपी को दोबारा अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत रिमांड की मांग की जा सकती है। विजिलेंस का फोकस फिलहाल कथित जमीन घोटाले में धन के स्रोत, संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थियों और राजस्व रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर की पूरी कड़ी जोड़ने पर है।

  • हिमाचल का बेटा विकास भारतीय सेना में बना बड़ा अधिकारी, अग्निवीर से शुरू किया था सफर

    प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत से कई शानदार उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने क्रॉस-कंट्री दौड़ में अकादमी का नेतृत्व किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अपनी बेहतरीन फिटनेस के लिए उन्हें पीटी मेरिट कार्ड से भी सम्मानित किया गया।
  • हिमाचल में बादल फटने से मची त***ी: फ्लैश फ्लड से 4 हाइड्रो प्रोजेक्ट को नुकसान; लोगों में मची अफरा तफरी 

    हिमाचल में बादल फटने से मची तबाही: फ्लैश फ्लड से 4 हाइड्रो प्रोजेक्ट को नुकसान; लोगों में मची अफरा तफरी 

    रामपुर बुशहर के काशापाट क्षेत्र में नोगली खड्ड में फ्लैश फ्लड

    रामपुर बुशहर (शिमला)। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाता नजर आया है। शिमला जिले के रामपुर बुशहर के काशापाट क्षेत्र में शुक्रवार रात बादल फटने के बाद नोगली खड्ड अचानक उफान पर आ गई। देखते ही देखते खड्ड में इतना तेज फ्लैश फ्लड आया कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। पानी के साथ भारी मात्रा में गाद, मलबा और गंदा पानी नीचे की ओर आया, जिसकी चपेट में क्षेत्र में संचालित कई हाइड्रो पावर परियोजनाएं आ गईं।

    काशापाट क्षेत्र के सगेती कंडे में बादल फटने के बाद बारिश का पानी बेहद तेजी से नोगली खड्ड में पहुंचा। स्थानीय लोगों के अनुसार रात में खड्ड की तरफ से पानी और मलबे के तेज बहाव की डरावनी आवाजें सुनाई दे रही थीं। अंधेरे में अचानक आए इस सैलाब ने लोगों को सहमा दिया। कई लोग पूरी रात स्थिति पर नजर बनाए रहे। काशापाट पंचायत के प्रधान प्यासू मल के अनुसार चोटी की तरफ बादल फटने के बाद खड्ड में भारी मात्रा में पानी और मलबा आया।

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    नोगली खड्ड में अचानक आए फ्लैश फ्लड का सीधा असर क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ा है। पानी में भारी मात्रा में गाद और मलबा आने के कारण परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा। प्रभावित परियोजनाओं में कुंदन ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड राजपुरा (9.9 मेगावाट), साईं इलेक्ट्रिक हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (4.5 मेगावाट), जीसी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (5 मेगावाट) और ग्रीको जोगणी (16 मेगावाट) शामिल हैं। 

    फ्लैश फ्लड की सूचना मिलते ही परियोजना प्रबंधन और प्रशासन हरकत में आ गए। नोगली खड्ड के किनारे रह रहे परियोजना के मजदूरों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया। कुंदन ग्रीन एनर्जी के परियोजना प्रमुख विनोद के अनुसार शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे प्रशासन की ओर से खड्ड में भारी फ्लैश फ्लड आने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही मजदूरों को वहां से हटाया गया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से किसी बड़ी जनहानि को टाल दिया गया।

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    काशापाट में बादल फटने के बाद आई बाढ़ का असर गंगदारी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पर भी पड़ा है। परियोजना की इंटेक संरचना को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
    प्लांट इंचार्ज धीरज वर्मा के अनुसार बाढ़ के तेज बहाव से इंटेक के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम राफ्ट के साथ बॉटम कन्वेयंस चैनल क्षतिग्रस्त हुआ है। चैनल के तल में भी काफी कटाव हुआ है। पानी का बहाव इतना शक्तिशाली था कि कुछ क्रेट्स तक बह गए। बाढ़ के बाद परियोजना स्थल पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। अब नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

    बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने स्थानीय लोगों को भी डरा दिया। पहाड़ी इलाकों में रात के समय अचानक बढ़ता जलस्तर और मलबे का तेज बहाव किसी बड़े खतरे की आशंका पैदा कर देता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, खड्ड और नालों के किनारे जाने से पूरी तरह बचें। खासकर बारिश के दौरान पानी का स्तर देखने या वीडियो बनाने के लिए खड्ड के नजदीक जाना जानलेवा साबित हो सकता है।

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    मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश को अब तक भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान झेलना पड़ा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार मानसून के दौरान प्रदेश में करीब 1,237 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंच चुका है, जबकि 267 लोगों की जान जा चुकी है। 

  • हिमाचल की मंजरी को राष्ट्रपति ने नेशनल टीचर अवॉर्ड से किया सम्मानित; 31 टीचरों को मिला स्टेट टीचर अवॉर्ड

    शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शॉर्टलिस्ट की सूची में नाम नहीं होने के बावजूद बाद में वीरेंद्र चौहान का नाम शिक्षक पुरस्कार की सूची में शामिल किया गया। उन्होंने राज्यपाल से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
  • सोलन युवक ह*******ड: सबूत जुटाने पहुंची टीम को करना पड़ा महिलाओं के गुस्से का सामना

    सोलन युवक हत्याकांड: सबूत जुटाने पहुंची टीम को करना पड़ा महिलाओं के गुस्से का सामना
  • मंडी में नलवाड़ मेला 17 सितंबर से:प्रशासन ने तैयारी तेज की, 13 से प्लॉटों का आवंटन, पुराने रेट पर ही मिलेगी जमीन

    मंडी में जिला स्तरीय नलवाड़ मेला ख्योड़ इस बार 17 से 24 सितंबर तक सायर पर्व के साथ धूमधाम से मनाया जाएगा। मेले की तैयारियों को लेकर शनिवार को एसडीएम कार्यालय बासा में एक बैठक हुई। बैठक में मेले की व्यवस्थाओं और अलग-अलग कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई। एसडीएम गोहर देवी सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तहसीलदार वीना ठाकुर, बासा पंचायत प्रधान गायत्री देवी, उपप्रधान धीरज शर्मा के साथ पंचायत प्रतिनिधि और कई विभागों के अधिकारी शामिल हुए। प्लॉटों का आवंटन 13 सितंबर से बैठक में तय किया गया कि मेले के लिए प्लॉटों का आवंटन 13 सितंबर से शुरू होगा। खास बात यह है कि इस बार प्लॉटों के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। पिछले साल की तरह 10×10 फुट का प्लॉट 6500 रुपए में ही मिलेगा। मेले में खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ रात में सांस्कृतिक संध्याएं होंगी। दिन के कार्यक्रमों में रस्साकशी समेत कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। युवाओं और आम लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक भी खास रहेंगे। आपस में तालमेल बैठाएं अधिकारी : एसडीएम मेले के सफल आयोजन के लिए वन, बिजली, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य, बागवानी, पशुपालन, खाद्य एवं आपूर्ति, ब्लॉक कार्यालय, होमगार्ड और जिला लोक संपर्क विभाग से मदद ली जाएगी। इसके अलावा आसपास की पंचायतों और स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की गई। बैठक में एसडीएम ने पीने का पानी, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात, कानून-व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं को ठीक रखने पर खास जोर दिया गया। सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ जिम्मेदारी निभाने को कहा गया। बासा पंचायत प्रधान गायत्री देवी ने कहा कि ख्योड़ नलवाड़ मेला क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपरा और भाईचारे की पहचान है। पंचायत की ओर से मेले को सफल बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
  • जलवायु परिवर्तन: हिमाचल की ग्लेशियर झीलें बनीं टाइम बम, 88 बेहद संवेदनशील, अध्ययन में खुलासा

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    जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों के खतरे को और बढ़ा दिया है। ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में बर्फबारी की जगह बारिश और रेन-ऑन-स्नो जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और झीलों में पानी की मात्रा बढ़ रही है। कमजोर प्राकृतिक बांधों पर बढ़ते पानी के दबाव के साथ भारी बारिश, बादल फटना, भूस्खलन, हिमस्खलन, रॉकफॉल और भूकंपीय गतिविधियां और ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ा रही हैं।

    हिमाचल में 94 ग्लेशियर झीलों का आकलन किया

    आईआईटी रोपड़ और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अध्ययन में हिमाचल प्रदेश की 0.02 वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक क्षेत्र वाली 94 ग्लेशियल झीलों का आकलन किया गया। इनमें 88 झीलें बाढ़ के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील पाई गई हैं। यह अध्ययन 1990 से 2024 तक के 34 वर्षों के उपग्रह और जलवायु आंकड़ों पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ हाइड्रोलॉजी रीजनल स्टडीज में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में आईआईटी रोपड़ की पीएचडी स्कॉलर दीपाली गायकवाड़, दायिशिशा इयावफनियाव, विकास सिंह जादौन और प्रो. बिश्वजीत प्रधान शामिल रहे।

     34 वर्षों में झीलों की संख्या में 525 फीसदी की वृद्धि

    अध्ययन के अनुसार हिमाचल में ग्लेशियल झीलों की संख्या 1990 में 107 थी, जो 2024 में बढ़कर 669 हो गई। यानी 34 वर्षों में 525 फीसदी की वृद्धि हुई। इन झीलों का कुल क्षेत्रफल भी 5.54 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 11.20 वर्ग किलोमीटर हो गया, जो करीब 102 फीसदी की वृद्धि है। बड़ी चिंता छोटी यानी 0.01 वर्ग किलोमीटर से कम क्षेत्र वाली झीलों को लेकर है। इनकी संख्या 1990 में केवल नौ थी, जो 2024 में बढ़कर 487 हो गई। प्राकृतिक बांधों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। अध्ययन में 94 प्रमुख झीलों में से 73 के मोरेन बांधों को संरचनात्मक रूप से अस्थिर पाया गया। 

     58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में

    58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में हैं। 52 झीलों में आइस-कोर यानी बर्फ की आंतरिक परत के पिघलने से रिसाव और बांध टूटने का जोखिम है। वहीं, 44 झीलों की ढलानों पर रॉकफॉल का खतरा दर्ज किया गया है। जोखिम की गंभीरता के आधार पर नौ झीलों को अति उच्च, 18 को उच्च और 26 को मध्यम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश, बादल फटने, भूस्खलन या हिमस्खलन से अचानक बड़ी मात्रा में पानी झील में पहुंचने पर प्राकृतिक बांध टूट सकता है। ऐसी स्थिति में नीचे की ओर बसे क्षेत्रों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य ढांचों को भारी नुकसान हो सकता है। 

    उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार

    अध्ययन में ब्यास और सतलुज नदी बेसिन की दो उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार किया गया। प्रोबेबल मैक्सिमम फ्लड यानी पीएमएफ की स्थिति में पंडोह बांध तक अधिकतम जलप्रवाह 17,086 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और भाखड़ा बांध तक 23,478 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पहुंचने का अनुमान लगाया गया। सबसे खराब स्थिति में यदि झील फटने और अत्यधिक बारिश की घटना एक साथ होती है तो ब्यास बेसिन में जलप्रवाह 17,356 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और सतलुज बेसिन में 24,723 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है। ऐसे भयावह जलप्रवाह की स्थिति में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं, धार्मिक स्थलों और नदी के बहाव क्षेत्र में मौजूद 680 से अधिक ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

    निगरानी और आपदा प्रबंधन मजबूत करने की जरूर

    शोध में सामने आए आंकड़े हिमाचल के लिए ग्लेशियल झीलों की निगरानी, प्राकृतिक बांधों की नियमित जांच, संवेदनशील क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। खासकर बदलते मौसम में बारिश के बढ़ते पैटर्न और तेजी से पिघलते ग्लेशियलों को देखते हुए उच्च जोखिम वाली झीलों की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

     

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  • हिमाचल में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज: आज कई इलाकों में बरसेंगे मेघ- 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट

    तापमान की बात करें तो अगले 3 से 4 दिनों में न्यूनतम तापमान में ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है। अगले 48 घंटों तक अधिकतम तापमान भी लगभग सामान्य रह सकता है। इसके बाद तापमान में करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आने की संभावना है।
  • जलवायु परिवर्तन: हिमाचल की ग्लेशियल झीलें बनीं टाइम बम, 88 बेहद संवेदनशील, अध्ययन में खुलासा

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    जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों के खतरे को और बढ़ा दिया है। ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में बर्फबारी की जगह बारिश और रेन-ऑन-स्नो जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे ग्लेशियल तेजी से पिघल रहे हैं और झीलों में पानी की मात्रा बढ़ रही है। कमजोर प्राकृतिक बांधों पर बढ़ते पानी के दबाव के साथ भारी बारिश, बादल फटना, भूस्खलन, हिमस्खलन, रॉकफॉल और भूकंपीय गतिविधियां और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ा रही हैं।

    हिमाचल में 94 ग्लेशियर झीलों का आकलन किया

    आईआईटी रोपड़ और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अध्ययन में हिमाचल प्रदेश की 0.02 वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक क्षेत्र वाली 94 ग्लेशियल झीलों का आकलन किया गया। इनमें 88 झीलें बाढ़ के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील पाई गई हैं। यह अध्ययन 1990 से 2024 तक के 34 वर्षों के उपग्रह और जलवायु आंकड़ों पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ हाइड्रोलॉजी रीजनल स्टडीज में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में आईआईटी रोपड़ की पीएचडी स्कॉलर दीपाली गायकवाड़, दायिशिशा इयावफनियाव, विकास सिंह जादौन और प्रो. बिश्वजीत प्रधान शामिल रहे।

     34 वर्षों में झीलों की संख्या में 525 फीसदी की वृद्धि

    अध्ययन के अनुसार हिमाचल में ग्लेशियल झीलों की संख्या 1990 में 107 थी, जो 2024 में बढ़कर 669 हो गई। यानी 34 वर्षों में 525 फीसदी की वृद्धि हुई। इन झीलों का कुल क्षेत्रफल भी 5.54 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 11.20 वर्ग किलोमीटर हो गया, जो करीब 102 फीसदी की वृद्धि है। बड़ी चिंता छोटी यानी 0.01 वर्ग किलोमीटर से कम क्षेत्र वाली झीलों को लेकर है। इनकी संख्या 1990 में केवल नौ थी, जो 2024 में बढ़कर 487 हो गई। प्राकृतिक बांधों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। अध्ययन में 94 प्रमुख झीलों में से 73 के मोरेन बांधों को संरचनात्मक रूप से अस्थिर पाया गया। 

     58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में

    58 झीलें सक्रिय भूकंपीय गतिविधियों और टेक्टोनिक फॉल्ट के खतरे वाले क्षेत्र में हैं। 52 झीलों में आइस-कोर यानी बर्फ की आंतरिक परत के पिघलने से रिसाव और बांध टूटने का जोखिम है। वहीं, 44 झीलों की ढलानों पर रॉकफॉल का खतरा दर्ज किया गया है। जोखिम की गंभीरता के आधार पर नौ झीलों को अति उच्च, 18 को उच्च और 26 को मध्यम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश, बादल फटने, भूस्खलन या हिमस्खलन से अचानक बड़ी मात्रा में पानी झील में पहुंचने पर प्राकृतिक बांध टूट सकता है। ऐसी स्थिति में नीचे की ओर बसे क्षेत्रों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य ढांचों को भारी नुकसान हो सकता है। 

    उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार

    अध्ययन में ब्यास और सतलुज नदी बेसिन की दो उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन भी तैयार किया गया। प्रोबेबल मैक्सिमम फ्लड यानी पीएमएफ की स्थिति में पंडोह बांध तक अधिकतम जलप्रवाह 17,086 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और भाखड़ा बांध तक 23,478 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पहुंचने का अनुमान लगाया गया। सबसे खराब स्थिति में यदि झील फटने और अत्यधिक बारिश की घटना एक साथ होती है तो ब्यास बेसिन में जलप्रवाह 17,356 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड और सतलुज बेसिन में 24,723 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है। ऐसे भयावह जलप्रवाह की स्थिति में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं, धार्मिक स्थलों और नदी के बहाव क्षेत्र में मौजूद 680 से अधिक ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

    निगरानी और आपदा प्रबंधन मजबूत करने की जरूर

    शोध में सामने आए आंकड़े हिमाचल के लिए ग्लेशियल झीलों की निगरानी, प्राकृतिक बांधों की नियमित जांच, संवेदनशील क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। खासकर बदलते मौसम में बारिश के बढ़ते पैटर्न और तेजी से पिघलते ग्लेशियलों को देखते हुए उच्च जोखिम वाली झीलों की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

     

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  • हिमाचल के कई शहरों में आज बारिश का अलर्ट:31 अगस्त से मानसून फिर होगा एक्टिव; अगले 4 दिन जमकर बरसेंगे बादल

    हिमाचल के कई जिलों में शनिवार को बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार आज प्रदेश के कुछ जिलों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मंडी जिले में भी आज हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट है। अगले 4 दिन भारी बारिश की चेतवानी दी गई है। आज निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर वर्षा हो सकती है। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है। 30 अगस्त से प्रदेश में मानसून की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। 30 अगस्त से 3 सितंबर तक कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने 31 अगस्त, 1, 2 और 3 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा गिरने का खतरा बढ़ती बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा गिरने का खतरा बना रह सकता है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतने की सलाह दी है। भारी बारिश की स्थिति में नदी-नालों में जलस्तर और बहाव बढ़ने की भी संभावना है। न्यूनतम तापमान में बड़े बदलाव की संभावना तापमान की बात करें तो, अगले 3-4 दिनों में न्यूनतम तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। वहीं, अगले 48 घंटों में अधिकतम तापमान में भी कोई विशेष बदलाव नहीं होगा, जबकि इसके बाद इसमें 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। कुल मिलाकर, आज मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने के बाद आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है।