Category: himachal

  • वीडियो: मनाली में पहली बार होगा पैराग्लाइडिंग प्री-वर्ल्ड कप, सोलंगनाला में 5 से 8 अक्तूबर तक होगा आयोजन

    वीडियो: मनाली में पहली बार होगा पैराग्लाइडिंग प्री-वर्ल्ड कप, सोलंगनाला में 5 से 8 अक्तूबर तक होगा आयोजन
  • शिमला: बंदरों के हमले में तीन मंजिला मकान से गिरी बुजुर्ग महिला की म*त, एक सप्ताह से आईसीयू में थी भर्ती

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    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के शांति विहार वार्ड के समिट्री क्षेत्र में बंदरों के हमले के बाद गंभीर रूप से घायल हुई बुजुर्ग महिला सत्या देवी की शनिवार दोपहर करीब 12:00 बजे मौत हो गई। तीन मंजिला मकान से नीचे गिरने से सत्या देवी के सिर और छाती पर गंभीर चोटें लगी थीं। इन्हें आईजीएमसी में भर्ती करवाया था। सात दिन से महिला आईसीयू में भर्ती थी। गंभीर चोटों के कारण शनिवार को महिला ने दम तोड़ दिया। स्थानीय पार्षद विनीत शर्मा के अनुसार 63 वर्षीय सत्या देवी 30 अगस्त की सुबह करीब 7:30 बजे मकान की छत पर रखी पानी की टंकियों को देखने गई थीं।


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    वहां बंदरों का झुंड बैठा था जो सत्या देवी पर झपट पड़ा। इस हमले से घबराकर सत्या देवी तीन मंजिला मकान से नीचे आंगन में गिर गईं। पड़ोसियों ने उन्हें गिरते हुए देखा था। महिला के परिजन तुरंत घायल अवस्था में सत्या देवी को आईजीएमसी अस्पताल ले आए। यहां उनकी बेटी रजनी भी उनके साथ थीं। डॉक्टरों के अनुसार गंभीर चोटों के चलते महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। सातवें दिन शनिवार को महिला ने दम तोड़ दिया। पार्षद विनीत शर्मा ने शनिवार को फिर मौके का दौरा किया। स्थानीय लोगों ने कहा कि इस क्षेत्र में बंदरों के साथ कुत्तों का भी आतंक है। लोगों ने मांग की कि उन्हें इनसे राहत दिलाई जाए।

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    नगर निगम और वन विभाग मौन, पार्षद भड़के

    शहर के समिट्री क्षेत्र में बंदरों के हमले के कारण महिला की मौत के बाद पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा और साथ लगते भट्ठाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि घटना के बाद नगर निगम के अधिकारियों को इसकी सूचना दी थी लेकिन मदद के लिए न निगम आगे आया और न वन विभाग। बंदरों को पकड़ने या कुत्तों को भगाने के लिए कर्मचारी तक नहीं भेजे गए।

    बंदरों के हमले से अब तक पांच मौतें, रोज लहूलुहान हो रहे लोग

    शिमला के उत्पाती बंदर अब जानलेवा हो गए हैं। बंदरों के हमले के कारण बुजुर्ग महिला सत्या देवी से पहले भी शहर में एक बच्चे समेत तीन महिलाएं अपनी जान गंवा चुकी हैं। पांच मौतों के बावजूद वन विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन मौन बैठे हैं। हालात यह हैं कि अब शहर में बंदरों की नसबंदी तक नहीं हो रही है। केंद्र सरकार ने बंदरों को वन्यजीव की श्रेणी से बाहर कर दिया है। इसके बाद से न तो वन विभाग इन्हें पकड़ रहा है और न ही नगर निगम कोई कार्रवाई कर रहा है। शहरवासी रोजाना बंदरों के हमले से लहूलुहान हो रहे हैं। शहर में हर महीने बंदरों के काटने के 30 से 40 मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वन विभाग के अनुसार वर्ष 2019 में शिमला शहर में करीब 2,000 बंदर थे। अब सात साल में इनकी संख्या बढ़ गई है। शहर के जाखू, बैनमौर, छोटा शिमला, अपर ढली, लक्कड़ बाजार, बालूगंज, कसुम्पटी, संजौली समेत साथ लगते इलाकों में बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा है।

     

    वर्ष 2014 : मिडिल बाजार में महिला की मौत

    चार नवंबर 2014 को मिडिल बाजार में एक महिला की बंदर के हमले के कारण मौत हो गई थी। महिला ममता (38) अपने घर की छत से कपड़े उठा रही थीं कि अचानक बंदर ने उन पर हमला कर दिया। बंदर को देखकर ममता डर गईं। इससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर पड़ीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी।

     

    जुलाई 2020 : कुफ्टाधार में महिला की मौत

    कुफ्टाधार में 9 जुलाई 2020 को बंदरों के हमले के कारण छत पर काम कर रही 56 वर्षीय राजबाला नीचे गिर गईं थीं। हरियाणा के यमुनानगर की रहने वाली राजबाला की इस हादसे में मौत हो गई थी। वर्ष 2020 में ही संजौली में भी एक बच्चा बंदरों से डरकर घर के लेंट्र से नीचे गिर गया था। बाद में पीजीआई में उसकी मौत हो गई थी।

    वर्ष 2023 : ढांडा में युवती ने गंवाई जान

    शहर के ढांडा क्षेत्र में बंदरों के हमले के कारण 19 वर्षीय हिमांशी ने भी अपनी जान गंवाई। हिमांशी अपने घर की तीसरी मंजिल पर कपड़े सुखाने गई थीं। इस दौरान बंदरों ने उन पर हमला कर दिया। डरकर हिमांशी अचानक तीसरी मंजिल से नीचे गिर गईं। लहूलुहान हालत में हिमांशी को आईजीएमसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    लोअर बाजार में 71 वर्षीय महिला की मौत

    सितंबर 2025 में बंदर के हमले में घायल हुई 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला मधु की आईजीएमसी में हृदयघात से मौत हो गई थी। बुजुर्ग महिला घर की सीढ़ियों पर चल रही थीं कि अचानक बंदर ने उन्हें धक्का मार दिया। घायल महिला ने कुछ दिन बाद दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने कहा कि बंदरों के हमले के कारण सीधे तौर पर उनकी मृत्यु नहीं हुई बल्कि चोट के बाद स्वास्थ्य में उत्पन्न जटिलताओं के चलते कार्डियक अरेस्ट हुआ।

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  • कुल्लू: बीस भादो पर तीर्थ स्थलों में उमड़ा आस्था का स***ब, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

    कुल्लू: बीस भादो पर तीर्थ स्थलों में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
  • हिमाचल पुलिस: वर्ष 2027 में तीन आईपीएस और 14 एचपीएस अधिकारी होंगे सेवानिवृत्त, यहां देखें सूची

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    हिमाचल प्रदेश कैडर के तीन आईपीएस अधिकारी वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। इसके अतिरिक्त  प्रदेश पुलिस सेवा के 14 अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। राज्य सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गर्ग 31 जुलाई 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। गर्ग वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी एन. वेणुगोपाल 31 दिसंबर 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। वेणुगोपाल भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय जांच ब्यूरो कोलकाता जोन में संयुक्त निदेशक के रूप में तैनात हैं। 2008 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी डीके चौधरी भी 31 दिसंबर 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। वे हिमाचल प्रदेश में पुलिस महानिरीक्षक, संचार एवं तकनीकी सेवाएं, हमीरपुर के पद पर कार्यरत हैं। 

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  • हिमाचल: लोक अदालतों के बाद भी राजस्व मामले लंबित रहे तो तय होगी डीसी की जवाबदेही

    राजस्व लोक अदालत और विशेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से प्रदेश में लाखों लंबित मामलों का निपटारा किया जा चुका है, बावजूद इसके सरकार को अभी भी प्रदेश के कई क्षेत्रों से राजस्व मामलों के समय पर न निपटने की सूचनाएं मिल रही हैं।
  • हिमाचल: शिक्षा के सितारों को सलाम, 32 शिक्षकों को मिला राज्य स्तरीय पुरस्कार, जानें उपलब्धियां

    पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल करने की ओर बढ़ रहे हिमाचल में कई शिक्षक सरकारी ड्यूटी से आगे बढ़कर शिक्षा की लौ जला रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों में ये शिक्षक मिसाल पेश कर रहे हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कोई अपनी पगार खर्च रहा है, तो कोई स्कूल में पढ़ाने के बाद भी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहा है। किसी ने पढ़ाने के साथ-साथ देश के लिए खिलाड़ी तराशे हैं, किसी ने डिजिटल लर्निंग और नवाचार में उदाहरण पेश किए हैं। ऐसे ही शिक्षकों को शनिवार को शिक्षक दिवस पर शिमला के लोकभवन में भव्य राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने राज्य शिक्षक पुरस्कार और विशेष सम्मान से अलंकृत किया। इस दाैरान स्कूल, कॉलेज, तकनीकी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े 32 शिक्षक, संकाय सदस्य और प्रशिक्षक राज्य स्तर पर सम्मानित किए गए। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, एमसी शिमला मेयर सुरेंद्र चाैहान सहित शिक्षा सचिव राकेश कंवर, दोनों निदेशालयों के निदेशक व अन्य गणमान्य लोग माैजूद रहे।

  • शिमला: चूड़धार यात्रा पर गई युवती की पहाड़ी से गिरकर म*त, पैर फिसलने से हुआ ह***ा

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     चूड़धार यात्रा पर गई एक 27 वर्षीय युवती की पहाड़ी से गिरने के कारण मौत हो गई। यह हादसा यात्रा के रास्ते पर मंडाहलाणी के पास हुआ। मृतक युवती की पहचान प्रेशिता मेहता पुत्री शैलेंद्र मेहता,  निवासी गांव चायल डूबलू जिला शिमला के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, प्रेशिता मेहता शनिवार सुबह अपने दो अन्य साथियों के साथ चूड़धार की ओर जा रही थीं। मंडाहलाणी से कुछ आगे पहुंचने पर अचानक उनका पैर फिसल गया। वह पहाड़ी से नीचे जा गिरी।


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    हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मृतक के परिजनों को हादसे की जानकारी दी। शव को नागरिक अस्पताल चौपाल पहुंचाया गया है। पुलिस घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। हादसे की सूचना मिलने के बाद प्रेशिता मेहता के परिवार में मातम पसरा हुआ है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

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  • राजनीति: जयराम ठाकुर बोले- कुर्सी बचाने में जुटे हैं सुक्खू, प्रदेश चलाने का विजन नहीं

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    पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर हमला बोलते हुए कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा अपनी कुर्सी बचाना रह गया है। सुंदरनगर में पूर्व कर्मचारी प्रकोष्ठ के जिला स्तरीय सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चार साल से गिरते-पड़ते चल रही है और मुख्यमंत्री जनहित के बजाय सरकार बचाने में व्यस्त हैं। प्रदेश में विकास कार्य प्रभावित हैं और सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है। मंडी सहित कई क्षेत्रों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं, जबकि तीखे मोड़ों पर सुरक्षा इंतजाम और पैरापिट तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लाइफलाइन मानी जाने वाली सड़कें अब हादसों का कारण बन रही हैं।


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    उन्होंने कर्मचारियों, पेंशनरों और बेरोजगार युवाओं की लंबित मांगों को लेकर भी सरकार को घेरा। कहा कि कर्मचारी और पेंशनर मांगों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं तथा पूर्व कर्मचारियों को पेंशनरी लाभ और मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर तथ्य सामने आए हैं। भाजपा रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन कर रही है और तथ्यों के साथ सरकार की वित्तीय स्थिति जनता के सामने रखेगी। दावा किया कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम कांग्रेस के खिलाफ जनभावना का संकेत हैं। दस जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनावों में भाजपा ने नौ स्थानों पर जीत हासिल की है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी।

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  • आईआईटी के प्रोफेसर का दावा: लांगटांग ग्लेशियर को गोरखा भूकंप ने किया था कमजोर, टूटने से नेपाल में मची त***ी

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    नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और तबाही के पीछे केवल जलवायु परिवर्तन ही नहीं, बल्कि 11 साल पहले वर्ष 2015 में आया विनाशकारी गोरखा भूकंप भी बड़ी वजह है। इस भूकंप ने लांगटांग ग्लेशियर की संरचना को ही कमजोर कर दिया था, जिसके टूटने से नेपाल में तबाही मच गई। यह दावा आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के संस्थापक अध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डेरेक्स पी. शुक्ला ने किया है। उन्होंने सैटेलाइट चित्रों और भूवैज्ञानिक तकनीकों से किए प्रारंभिक आकलन के आधार पर यह खुलासा किया है।

    प्रोफेसर शुक्ला ने ये कहा

    प्रोफेसर शुक्ला के अनुसार गोरखा भूकंप के बाद ग्लेशियर का एक हिस्सा अपनी मूल संरचना से अलग होकर हैंगिंग ग्लेशियर की स्थिति में पहुंच गया और लंबे समय तक अस्थिर बना रहा। 26 अगस्त को उत्तरी हिस्से के टूटने पर भारी मात्रा में बर्फ, मलबा और बड़े बोल्डर नीचे की ओर बह गए, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में विनाशकारी स्थिति पैदा हुई। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार इस घटना में अब तक 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है और 4,875 अब भी लापता हैं। प्रोफेसर शुक्ला का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन ही इस घटना की मुख्य वजह होती तो आसपास के अन्य ग्लेशियरों में भी इसी प्रकार के व्यापक बदलाव दिखाई देते।

    भूकंप के बाद ग्लेशियर की संरचना में बदलाव के संकेत मिले

    उन्होंने बताया कि आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक, सैटेलाइट चित्रों, उपलब्ध फोटो और वीडियो के साथ भूवैज्ञानिक तथ्यों का विश्लेषण कर ग्लेशियर की पुरानी और वर्तमान स्थिति की तुलना की गई। प्रारंभिक तकनीकी आकलन में वर्ष 2015 के भूकंप के बाद ग्लेशियर की संरचना में बदलाव के संकेत मिले हैं। हालांकि, घटना के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन अभी जारी है। गोरखा भूकंप के दौरान वर्ष 2015 में लांगटांग ग्लेशियर के दक्षिणी हिस्से की ओर भी भारी टूट-फूट हुई थी। इसके बाद बर्फ, पत्थर और मलबे ने नीचे स्थित गोंपा और लांगटांग क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था। अब 26 अगस्त को उत्तरी मुख की ओर का हिस्सा टूटकर गिरा। इस बार भी भारी मात्रा में मलबा और बड़े बोल्डर नीचे की ओर बहने से जानमाल का बड़ा नुकसान हुआ।

    हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से बढ़ जाता है खतरा

    प्रो. शुक्ला के अनुसार सामान्य ग्लेशियर के टूटने की तुलना में ऊंचाई पर अस्थिर स्थिति में मौजूद हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से तबाही का दायरा बढ़ जाता है। इसके टूटने पर बर्फ के साथ भारी मात्रा में पत्थर और मलबा तेजी से नीचे की ओर आता है। उन्होंने बताया कि लांगटांग क्षेत्र में पहले भी फ्लैश फ्लड की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में इस क्षेत्र की भौगोलिक अस्थिरता को समझने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।

    हिमालयी क्षेत्रों में हो रहे भौगोलिक बदलावों का अध्ययन करते हैं शुक्ला

    प्रो. डेरेक्स पी. शुक्ला की विशेषज्ञता रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम, भूस्खलन, परमा फ्रॉस्ट, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरण भूविज्ञान में है। वह सैटेलाइट चित्रों और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में हो रहे भौगोलिक बदलावों का अध्ययन करते हैं।

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  • विक्रमादित्य सिंह के PWD में लागू हुई नई डिजिटल व्यवस्था, अब हाईटेक होगी पहाड़ी सड़कों की निगरानी

    विक्रमादित्य सिंह के PWD में लागू हुई नई डिजिटल व्यवस्था, अब हाईटेक होगी पहाड़ी सड़कों की निगरानी

    डिजिटल मैपिंग से सड़क की जमीन होगी सुरक्षित, नुकसान पहुंचाने वालों से होगी वसूली

    शिमला। हिमाचल प्रदेश की दुर्गम पहाड़ी सड़कों को सुरक्षित रखने और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में सुक्खू सरकार ने बड़ा बदलाव शुरू किया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में विभाग अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां सड़कों की निगरानी से लेकर उनकी मरम्मत, निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग और विभागीय फाइलों तक का काम डिजिटल सिस्टम के जरिए किया जाएगा।

    विधानसभा से पारित हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 को इसी दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इसके तहत सड़क अवसंरचना का डिजिटल और जियो-कोऑर्डिनेटेड रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

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    पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण के साथ सबसे बड़ी चुनौती सड़क की जमीन की पहचान और उसकी सुरक्षा को लेकर रहती है। कई स्थानों पर सड़क किनारे निर्माण, अतिक्रमण या अन्य गतिविधियों को लेकर विभाग को मौके पर जाकर सीमांकन करना पड़ता है। 

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    नई व्यवस्था में सड़क की सीमा और उससे जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को जियो-कोऑर्डिनेट के साथ डिजिटल मैप में दर्ज किया जाएगा। एक बार सही तरीके से मैपिंग पूरी हो जाने के बाद प्रत्येक मामले में दोबारा भौतिक सीमांकन कराने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

    नई व्यवस्था का एक अहम पहलू सड़क और उससे जुड़ी संपत्तियों को नुकसान से बचाना है। यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि से सड़क, पुल, जल निकासी व्यवस्था या अन्य सड़क अवसंरचना को नुकसान पहुंचता है तो विभाग को उसकी तत्काल बहाली का अधिकार होगा। मरम्मत के बाद नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति से बहाली की लागत के साथ निर्धारित जुर्माना भी वसूला जा सकेगा। यानी सड़क काटकर निजी गतिविधि करने, अवसंरचना को नुकसान पहुंचाने या नियमों का उल्लंघन करने के बाद उसका पूरा भार सरकारी खजाने पर डालने की व्यवस्था को बदलने की कोशिश की गई है।

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    पहाड़ी सड़कों पर बरसात और भूस्खलन के दौरान कई बार सड़क का कोई हिस्सा यात्रियों के लिए खतरनाक हो जाता है। ऐसी स्थिति में यातायात जारी रखना दुर्घटना को न्योता दे सकता है। संशोधित प्रावधान विभाग को जरूरत पड़ने पर सड़क या उसके किसी हिस्से को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित या बंद करने की अनुमति देते हैं। इसका इस्तेमाल रखरखाव, मरम्मत और सड़क अवसंरचना की सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा।

    व्यवस्था परिवर्तन का असर केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा। संशोधन में आपत्ति और अपील दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर स्तर पर अपीलीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इससे विभागीय आदेश से असंतुष्ट लोगों को अपनी बात रखने के लिए स्पष्ट मंच मिलेगा और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर अधिक सुगम हो सकेगी।

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    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के लिए यह बदलाव केवल कानून में संशोधन नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्य की सड़क व्यवस्था को नई तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक व्यापक पहल के तौर पर सामने आ रहा है। मंत्री का जोर सड़क निर्माण के साथ-साथ उसकी सुरक्षा, रखरखाव, निगरानी और समय पर मरम्मत पर है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जहां बारिश, भूस्खलन, भू-स्खलन और प्राकृतिक आपदाओं से सड़कें लगातार प्रभावित होती हैं, वहां पारंपरिक तरीके से हर समस्या का समाधान करना मुश्किल होता है।

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    सड़क अवसंरचना के कानूनी बदलावों के साथ लोक निर्माण विभाग के अंदर भी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन किया जा रहा है। अब लेखा कार्य, निर्माण कार्यों की निगरानी, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), ई-बिलिंग, एजी इंटीग्रेशन और एमआईएस जैसे महत्वपूर्ण कार्य इसी वेब आधारित व्यवस्था के माध्यम से किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में किसी सड़क का काम कहां पहुंचा, माप कितना हुआ, बिल की स्थिति क्या है और कार्य की मॉनिटरिंग किस स्तर पर है—इन तमाम प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।