लखनऊ में स्वाइन फ्लू से पहली मौत:SGPGI में भी 8 केस मिले, अस्पतालों में हाई अलर्ट, आईसोलेशन वार्ड बनाए गए

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लखनऊ में स्वाइन फ्लू से एक महिला की मौत हो गई है। बलरामपुर अस्पताल में इंदिरानगर की 50 वर्षीय महिला भर्ती थी। उन्होंने गुरुवार शाम को दम तोड़ दिया। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए लखनऊ के अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। बेड रिजर्व किए गए हैं। SGPGI में भी स्वाइन फ्लू के 8 केस सामने आए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वाइन फ्लू यानी H1N1 वायरस बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। इन दिनों इसके मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है। जुकाम, खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखने पर कम से कम 3 दिन खुद को आइसोलेट रखना चाहिए। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर मेडिकल संस्थान SGPGI के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. रुंगमेई एसके मारक से दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने बातचीत की। उन्होंने इससे बचाव, जांच और इलाज से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब दिए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… लखनऊ के SGPGI में हो रही स्वाइन फ्लू की जांच डॉ. मारक ने बताया कि SGPGI में H1N1 की जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसकी जांच RT-PCR के जरिए की जाती है। OPD और भर्ती, दोनों तरह के मरीजों के सैंपल जांच के लिए लिए जाते हैं। हाल के दिनों में अब तक H1N1 के 8 पॉजिटिव केस मिले हैं। इनमें भर्ती मरीजों में 2 पुरुष और 2 महिलाएं हैं। वहीं, OPD से आए मरीजों में 3 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा कोविड और H3N2, H3N1 जैसे अन्य वायरस के मामले भी सामने आए हैं। डॉ. मारक के मुताबिक, रोजाना औसतन 20 सैंपल की जांच हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा आशंका स्वाइन फ्लू की रहती है। डॉक्टर से कंसल्ट कर वैक्सीन लगवाएं डॉ. रुंगमेई एसके मारक ने बताया कि फ्लू और इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह वैक्सीन खासतौर पर फायदेमंद हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि डॉक्टर से परामर्श लेकर वैक्सीन जरूर लगवाएं। उन्होंने बताया कि आमतौर पर यह वैक्सीन अप्रैल के आसपास लगवाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, जो लोग इस साल अब तक वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं, वे अभी भी डॉक्टर की सलाह से इसे लगवा सकते हैं। एयरपोर्ट पर सर्विलांस बढ़ाने से बेहतर मास्क पहनकर यात्रा करें एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाने के सवाल पर डॉ. मारक ने कहा कि इस पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, सबसे अहम है कि यात्रा करने वाले लोग खुद मास्क लगाकर बाहर निकलें। फ्लाइट, ट्रेन या बस में भीड़भाड़ की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे में N-95 मास्क पहनना बेहतर होगा। इससे न केवल आप खुद को, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी सुरक्षित रख सकेंगे। ‘स्वाइन फ्लू से घबराना नहीं है’ लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ. शिव शंकर त्रिपाठी का कहना है कि स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की नहीं। ऑक्सीजन लेवल गिरने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें जुकाम-खांसी के दौरान सांस लेने में दिक्कत या ज्यादा ब्रीदलेसनेस महसूस हो तो तुरंत ऑक्सीजन लेवल चेक करना शुरू करें। अगर ऑक्सीजन लेवल 92 से नीचे जा रहा है तो डॉक्टर से सलाह लें। वहीं, 88 से कम ऑक्सीजन लेवल होने पर बिना देर किए अस्पताल जाने की जरूरत है। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि इस दौरान लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इम्यून सिस्टम मजबूत रखने पर ध्यान दें। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें और खान-पान बेहतर रखें। इससे शरीर को संक्रमण से लड़ने और बीमारी के बाद जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। स्वाइन फ्लू क्या है? स्वाइन फ्लू को आमतौर पर H1N1 फ्लू कहा जाता है। यह इंफ्लूएंजा-A वायरस का एक प्रकार है। यह मुख्य रूप से सांस की नली को प्रभावित करता है। 2009 में H1N1 दुनियाभर में काफी फैला था। इसके बाद H1N1 इंसानों में फैलने वाले मौसमी फ्लू के वायरस का हिस्सा बन गया। फ्लू ज्यादातर लोगों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। क्या हर बुखार H1N1 है? नहीं। बुखार, खांसी और शरीर दर्द होने का मतलब H1N1 होना जरूरी नहीं है। डेंगू, कोविड और दूसरे वायरल संक्रमण में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के खुद से H1N1 मान लेना ठीक नहीं है। ‘मरीज मिले लेकिन घबराने की जरूरत नहीं’ SGPGI प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ओपीडी में कुछ मरीज इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों के साथ आ रहे हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। ये लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं और जांच करने पर कुछ एच1एन1 या कोविड-19 जैसे संक्रमित पाए गए हैं। ऐच्छिक सर्जरी सहित अन्य कारणों से विभिन्न विभागों में भर्ती कुछ मरीजों में भी इसी तरह के लक्षण विकसित हुए और उनकी जांच पॉजिटिव आई। ये छिटपुट मामले मौजूदा मौसमी इन्फ्लूएंजा के कारण आ रहे हैं। ये किसी प्रकोप का संकेत नहीं देते हैं। ऐसे लगभग सभी मरीज सामान्य इलाज से ठीक हो गए हैं। घबराने की कोई बात नहीं है। जनता को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी सलाह के अनुसार मास्क पहनने, हाथ की स्वच्छता, खांसने के शिष्टाचार का पालन करने और लक्षण दिखने पर आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है। सीएम योगी बोले- लक्षणों को नजरअंदाज न करें सीएम योगी ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि अगर स्वाइन फ्लू के लक्षण आ रहे हैं तो इन्हें नजरअंदाज न करें। सीएम ने कहा- स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं। स्वास्थ्य विभाग वर्तमान स्थितियों पर लगातार निगरानी रखे। अस्पतालों में पर्याप्त तैयारी और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाएं। सभी जिलों के डीएम और संबंधित अधिकारी सतर्क रहें।

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