AMU में छात्रों की आत्महत्या के बाद जवाबदेही पर सवाल:पिछली मौतों से जुड़े रिकॉर्ड RTI से मांगे गए थे, नहीं मिली सटीक जानकारी

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में एक और छात्र की आत्महत्या की घटना के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। एएमयू के विधि छात्र अमजद अली की RTI के जवाब में मौतों से जुड़ी आंतरिक जांच, जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई। कई छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के पास ऐसे रिकॉर्ड ही नहीं हैं। तीन छात्रों की मौत से जुड़ी जानकारी मांगी थी अमजद अली ने 29 अक्टूबर 2025 को RTI दाखिल कर विश्वविद्यालय में तीन छात्रों की आत्महत्या से जुड़े मामलों की जानकारी मांगी थी। उन्होंने आंतरिक जांच रिपोर्ट, शिक्षकों या अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप में हुई कार्रवाई, छात्र सुरक्षा को लेकर सिफारिशें और पीड़ित परिवारों के साथ हुए पत्राचार की जानकारी मांगी थी। RTI के जवाब में विश्वविद्यालय ने बताया कि उसकी नीति के अनुसार आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां और मीडिया संचार जारी किए जाते हैं। संबंधित जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होने की बात कही गई। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले से संबंधित प्रेस विज्ञप्ति वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है तो इसका अर्थ है कि जनसंपर्क कार्यालय की ओर से उस मामले में कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई। RTI जवाब से उठा बड़ा सवाल अमजद अली का कहना है कि RTI प्रक्रिया से यह सवाल सामने आया है कि छात्रों की मौत के बाद जांच के निष्कर्ष, जिम्मेदारी तय करने, सुधारात्मक कार्रवाई और उसके अनुपालन की निगरानी का कोई एकीकृत रिकॉर्ड है या नहीं। हालांकि, RTI के जवाब के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि विश्वविद्यालय के किसी विभाग के पास जांच या कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। सिर्फ जागरूकता नहीं, संकट के समय तत्काल मदद जरूरी अमजद अली ने कहा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और काउंसलिंग जरूरी हैं। गंभीर संकट से जूझ रहे छात्रों के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय में आपातकालीन संकट प्रतिक्रिया प्रणाली, जोखिम वाले छात्रों की पहचान, नियमित फॉलोअप, काउंसलिंग रेफरल और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता की मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए। RTI पत्राचार में एएमयू के काउंसलिंग सेंटर की ओर से छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आती है। लेकिन इन प्रयासों का छात्रों पर कितना असर हुआ और उनकी प्रभावशीलता का आकलन कैसे किया गया, यह सवाल भी बना हुआ है। हर घटना से संस्थागत स्तर पर सीख लेने की जरूरत अमजद अली का कहना है कि ऐसी प्रत्येक घटना के बाद केवल शोक संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। घटना की जांच, जवाबदेही तय करना, सुधारात्मक कदम उठाना और बाद में उनकी निगरानी करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं के बाद उठाए गए कदमों का दस्तावेजीकरण हो और उनकी समीक्षा भी की जाए, ताकि छात्र सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा सके।

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