
आगरा शहीद स्मारक पर चल रहे सवर्ण समाज के सत्याग्रह में शनिवार को जमकर हंगामा हो गया। मंच से ही नेताओं में तकरार शुरू हो गई और आंदोलन दो धड़ों में बंटता नजर आया। करणी सेना के उपाध्यक्ष ने मोर्चा खोल दिया। इस दौरान वे एक बार नहीं बलकि बार बार योगेंद्र उपाध्याय को चोर कहते हुए नजर आए। सवर्ण समाज का सत्याग्रह दोपहर होते-होते बिखरता नजर आया। अब मैदान खाली दिखने लगा है। एक युवक ने कहा-नेता बनने चले थे, लेकिन चार लोग भी नहीं जुटा पाए। अब पढ़े पूरा मामला… दरअसल, 5 सितंबर को UGC रोलबैक और आरक्षण में बदलाव को लेकर सत्याग्रह चल रहा था। इसी दौरान ब्राह्मण नेता पवन समाधिया ने मंच से कहा कि पुलिस-प्रशासन का कोई भी अधिकारी किसी अन्य व्यक्ति से बात न करे। इस आंदोलन का नेतृत्व 5 लोग कर रहे हैं, और उन्होंने जिन 5 लोगों के नाम लिए, वो सभी ब्राह्मण समाज से थे। इससे पहले क्षत्रिय समाज से आने वाली विधायक रानी पक्षालिका को लेकर भी मंच से टिप्पणी हुई थी, जिससे क्षत्रिय समाज के लोग पहले से नाराज थे। इसी बात को लेकर आगरा करणी सेना के उपाध्यक्ष राजीव चौहान ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने दक्षिण विधानसभा के विधायक और कैबिनेट उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का नाम लेते हुए मंच से कहा- योगेंद्र उपाध्याय चोर है। यहां मंच से रानी पक्षालिका का नाम क्यों ले रहे है। वो हमारी नेता है, जब किसी नाम नहीं लिया जा रहा तो उनका क्यों। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विधायक रानी पक्षालिका को लेकर टिप्पणी हुई, तब भी क्षत्रिय समाज चुप रहा। लेकिन अब जब आंदोलन में सभी समाज शामिल हैं, तो केवल ब्राह्मण नेताओं के नाम क्यों लिए जा रहे हैं। “अपने नेता योगेंद्र उपाध्याय का नाम इस मंच से क्यों नहीं लिया जा रहा, वह तो चोर है। इसके बाद मंच पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ ब्राह्मण नेताओं ने उनसे माइक लेने की कोशिश की। इस घटना से नाराज होकर क्षत्रिय महासभा के लोग सत्याग्रह छोड़कर चले गए, जिससे पूरा आंदोलन बिखरता दिखा।
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