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  • कहीं बस पिलर से टकराई, कहीं डंपर से भिड़ी… रक्षाबंधन के दिन UP अलग-अलग सड़क हादसों में 5 की मौत

    Lucknow News: रक्षाबंधन के त्योहार पर जब भाई-बहन एक-दूसरे से मिलने के लिए घरों से निकल रहे थे, उसी दौरान उत्तर प्रदेश में कई सड़क हादसों ने खुशियों को मातम में बदल दिया. आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर रोडवेज बस हादसे में चालक और एक महिला यात्री की मौत हो गई, जबकि कई यात्री घायल हुए. वहीं बुलंदशहर में रोडवेज बस डंपर से टकरा गई, जिसमें एक बच्ची समेत दो लोगों की मौत और करीब 20 यात्रियों के घायल हो गए. मुरादाबाद में मायके राखी बांधने जा रही महिला की कंटेनर की चपेट में आने से मौत हो गई. इस तरह इन हादसों में कुल पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

    आजमगढ़: पिकअप को बचाने में पिलर से टकराई रोडवेज बस

    आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर गुरुवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हुआ. लखनऊ से बलिया जा रही बेल्थरा रोड डिपो की रोडवेज बस पिकअप वाहन को बचाने के प्रयास में एक्सप्रेसवे किनारे बने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के पिलर से टकरा गई. बताया गया कि हादसा एक्सप्रेसवे पर स्टोन नंबर 191 के पास हुआ. बस लखनऊ से आजमगढ़ होते हुए बलिया जा रही थी. इसी दौरान आगे चल रहे पिकअप वाहन की गति अचानक अनियंत्रित हो गई. पिकअप को बचाने की कोशिश में बस चालक ने बस को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन बस अनियंत्रित होकर पिलर से जा टकराई. टक्कर इतनी तेज थी कि बस में सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

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    चालक और महिला यात्री की मौत, कई यात्री घायल

    हादसे की सूचना मिलने के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की एंबुलेंस टीम और पवई थाना पुलिस मौके पर पहुंची. राहतकर्मियों ने बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और घायलों को अस्पताल पहुंचाया. हादसे में बस चालक और एक महिला यात्री की मौत हो गई. करीब दो दर्जन यात्री घायल हो गए. इनमें कुछ घायलों की हालत गंभीर है. गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया.

    मुरादाबाद: भाइयों को राखी बांधने जा रही महिला की मौत

    मुरादाबाद के पाकबड़ा थाना क्षेत्र में रक्षाबंधन के दिन एक महिला की सड़क हादसे में मौत हो गई. बिजनौर जिले के मंडावर थाना क्षेत्र के भीकनपुर गांव की रहने वाली पूनम त्यागी अपने पति बिरजू त्यागी के साथ बाइक से मुरादाबाद स्थित मायके जा रही थीं. डींगरपुर-पाकबड़ा मार्ग पर एक एलपी कंटेनर वाहन की चपेट में आने से पूनम की मौत हो गई, जबकि उनके पति घायल हो गए. हादसे की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया. पूनम अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए मायके जा रही थीं.

    परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    हादसे के बाद मृतका के भाइयों रिंकू त्यागी और विजय त्यागी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर था, इसके बावजूद आरोपी वाहन और चालक को पकड़ने में तत्काल कार्रवाई नहीं की गई. परिजनों का यह भी आरोप है कि उनके पहुंचने से पहले ही पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उनका कहना है कि उन्होंने कुछ समय रुकने का अनुरोध किया था, लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं मानी. परिजनों ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने और आरोपी वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

    बुलंदशहर: डंपर से टकराई रोडवेज बस

    बुलंदशहर में भी रक्षाबंधन से पहले NH-34 पर बड़ा हादसा हुआ. खुर्जा क्षेत्र में बधरई कट के पास एक रोडवेज बस आगे चल रहे डंपर से टकरा गई. हादसा रात करीब 11:30 बजे हुआ. टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. हादसे में 7 वर्षीय राधिका और 35 वर्षीय बबली की मौत हो गई. बताया गया कि बबली ने इलाज के दौरान दम तोड़ा. करीब 20 यात्री घायल हो गए. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. एसपी देहात अंतरिक्ष जैन ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया. घायलों को आसपास के अस्पतालों में इलाज के लिए भेजा गया.

    त्योहार से पहले कई परिवारों में पसरा मातम

    रक्षाबंधन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर और रिश्तेदारों के यहां जाने के लिए सफर कर रहे थे. ऐसे में सड़क हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. पुलिस और प्रशासन की ओर से सभी मामलों में हादसों के कारणों की जांच की जा रही है. शुरुआती जानकारी के आधार पर अलग-अलग कारण सामने आए हैं, लेकिन दुर्घटनाओं की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

    (इनपुट- शारिक सिद्दीकी-मुरादाबाद/अवनीश उपाध्याय-आजमगढ़/सुमित शर्मा- बुलंदशहर)

  • Firozabad News: बाबा नीम करौली की जन्मस्थली पर संपत्ति विवाद, 6 पोतियां पहुंचीं DM के पास; ट्रस्ट बोला- सब कानूनी

    Baba Neem Karoli: देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक पहचान रखने वाले बाबा नीम करौली महाराज की जन्मस्थली को लेकर विवाद सामने आया है. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की टूंडला तहसील के अकबरपुर गांव स्थित बाबा की पैतृक संपत्ति के अधिकार और प्रबंधन को लेकर परिवार और ट्रस्ट आमने-सामने हैं. बाबा नीम करौली महाराज के छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों ने जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा को प्रार्थना पत्र देकर पैतृक मकान, मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों के अधिकार की जांच कराने की मांग की है.

    परिवार ने श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट पर संपत्ति के प्रबंधन और संचालन में दखल का आरोप लगाया है. वहीं, ट्रस्ट ने परिवार के आरोपों को गलत बताया है. ट्रस्ट का कहना है कि बाबा का घर, मंदिर और डाक बंगला कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रस्ट को दिया गया है. ऐसे में अब प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

    6 पोतियों ने उठाया संपत्ति के अधिकार का सवाल

    बाबा नीम करौली महाराज के छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, रितु तिवारी और रिचा रावत हैं. इन सभी ने प्रशासन के सामने पैतृक संपत्ति के अधिकार से जुड़ा मामला उठाया है. परिवार का कहना है कि अकबरपुर गांव में स्थित बाबा के पैतृक मकान और उससे जुड़ी संपत्तियों को ट्रस्ट को दान किए जाने का कोई स्पष्ट आधार उनके संज्ञान में नहीं है.

    इसके बावजूद ट्रस्ट से जुड़े लोगों द्वारा वहां बने मकान और पूजा स्थलों का संचालन किया जा रहा है. परिजनों ने मांग की है कि राजस्व अभिलेखों, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और ट्रस्ट को वहां संचालन का अधिकार किस आधार पर मिला.

    DM ने 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई

    परिवार की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है. कमेटी की अध्यक्षता एडीएम (न्यायिक) अरविंद द्विवेदी करेंगे. कमेटी में एसडीएम टूंडला दिव्या सिंह और जिला पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव को सदस्य बनाया गया है. प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच के दौरान मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुना जाएगा. कमेटी राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, ट्रस्ट से संबंधित कागजात और संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी. दस्तावेजों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

    परिवार ने प्रशासन की निगरानी में प्रबंधन का सुझाव दिया

    परिवार की ओर से जन्मस्थली के प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन के सामने सुझाव रखा गया है. भावना रावत के पति मनोज रावत भी मुंबई से फिरोजाबाद पहुंचे और जिलाधिकारी के सामने परिवार का पक्ष रखा. परिवार का कहना है कि बाबा नीम करौली की जन्मस्थली धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं और आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है. ऐसे में परिवार ने सुझाव दिया है कि जन्मस्थली के संरक्षण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और संपत्ति के प्रबंधन के लिए प्रशासन की निगरानी में पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए.

    14 अगस्त को अकबरपुर पहुंचा था परिवार

    परिजनों के अनुसार, छहों बहनें अपनी मां की पुण्यतिथि के अवसर पर 14 अगस्त को अकबरपुर पहुंची थीं. इसी दौरान उन्होंने पैतृक संपत्ति और उससे जुड़े अधिकारों को लेकर जानकारी जुटाई. इसके बाद परिवार की ओर से इस मामले को प्रशासन के सामने रखने का फैसला किया गया. 21 अगस्त को परिवार ने जिलाधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर संपत्ति के अधिकार और प्रबंधन की जांच की मांग की. परिवार का कहना है कि वह दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना चाहता है.

    ट्रस्ट ने परिवार के आरोपों को बताया गलत

    दूसरी ओर, श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल का कहना है कि बाबा का घर, मंदिर और डाक बंगला कानूनी तौर पर ट्रस्ट को दिया गया है. ट्रस्ट का कहना है कि वह लंबे समय से इन स्थानों की देखरेख कर रहा है. वहां धार्मिक गतिविधियों का संचालन किया जाता है. ट्रस्ट के अनुसार, इन संपत्तियों का निजी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.

    ट्रस्ट के मुताबिक, बाबा नीम करौली की पत्नी रामबेटी ने वर्ष 1996 में श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट का गठन किया था. वर्तमान में ट्रस्ट में 18 सदस्य बताए गए हैं. बाबा की बेटी गिरजा भटेले को ट्रस्ट का अध्यक्ष बताया गया है. ट्रस्ट का कहना है कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और कानूनी स्थिति जांच के दौरान सामने रखी जा सकती है.

    कौन थे बाबा नीम करौली महाराज?

    बाबा नीम करौरी महाराज को देश और विदेश में एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत के रूप में जाना जाता है. उनका वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा बताया जाता है. परिवार के अनुसार, उनका जन्म करीब वर्ष 1900 में फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था. बाबा के परिवार में दो पुत्र बताए जाते हैं. इनमें बड़े पुत्र अनेग सिंह शर्मा और छोटे पुत्र धर्म नारायण शर्मा थे. वहीं एक पुत्री गिरजा भाटेले (गिरजा शर्मा) हैं. अनेग सिंह शर्मा के एक बेटा और एक बेटी हैं, जबकि धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां हैं. धर्म नारायण शर्मा वन विभाग में रेंजर थे.

    अकबरपुर स्थित पैतृक मकान को बाबा की जन्मस्थली और उनके शुरुआती जीवन से जुड़ा स्थान माना जाता है. परिवार के अनुसार, मकान में बाबा और उनकी पत्नी की पूजा स्थली भी बनी हुई है. मकान के कुछ हिस्सों में पुजारियों के रहने की व्यवस्था होने की बात भी सामने आई है.

    कैंची धाम से जुड़ी है बाबा की पहचान

    बाबा नीम करौली महाराज की सबसे ज्यादा पहचान उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम से जुड़ी है. कैंची धाम आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है. बताया जाता है कि बाबा ने 1960 के दशक में कैंची में आश्रम की स्थापना की थी. इसके बाद कैंची धाम उनकी आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया.

    यही वजह है कि अकबरपुर को बाबा की जन्मस्थली और कैंची धाम को उनकी प्रमुख कर्मभूमि के रूप में देखा जाता है. अकबरपुर की पैतृक संपत्ति को लेकर सामने आया विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह बाबा के शुरुआती जीवन और उनकी विरासत से जुड़ा हुआ है.

    संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे

    फिलहाल इस मामले में परिवार और ट्रस्ट के दावे अलग-अलग हैं. परिवार का कहना है कि पैतृक मकान और उससे जुड़ी संपत्ति को ट्रस्ट को दिए जाने का स्पष्ट आधार उनके सामने नहीं है. वहीं ट्रस्ट का दावा है कि घर, मंदिर और डाक बंगला कानूनी तौर पर ट्रस्ट को दिया गया है. ऐसे में संपत्ति के वास्तविक अधिकार का फैसला मौजूदा दावों के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगा.

  • राखी की थाली लेकर निकली यशी, अचानक धंस गया आंगन… 22 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर मौत

    Kanpur News: रक्षाबंधन के त्योहार पर कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव में दर्दनाक हादसा हो गया. यहां घर के आंगन में अचानक जमीन धंसने से यशी सविता (18) करीब 20 से 22 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी. हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई. कई घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यशी को बाहर निकाला गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

    पूजा की थाली लेकर निकली थी यशी

    परिजनों के मुताबिक, रक्षाबंधन के दिन घर में त्योहार की तैयारियां चल रही थीं. यशी पूजा की थाली लेकर घर से बाहर आंगन की तरफ निकली थी. बताया जा रहा है कि वह बाथरूम से निकलकर अपने माता-पिता को बुलाने जा रही थी. इसी दौरान अचानक आंगन की जमीन धंस गई. देखते ही देखते यशी मिट्टी के साथ गहरे गड्ढे में समा गई. घटना के बाद परिवार के लोगों ने शोर मचाया. यशी को बचाने के लिए आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए.

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    करीब 20 से 22 फीट गहरा था गड्ढा

    हादसे की सूचना मिलते ही महाराजपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. फायर ब्रिगेड की टीम को भी बुलाया गया. शुरुआत में ग्रामीणों ने अपने स्तर पर युवती को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन गड्ढा काफी गहरा होने के कारण रेस्क्यू में मुश्किल आई. बाद में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. टीमों ने बेहद सावधानी के साथ गड्ढे के आसपास खुदाई की, ताकि मिट्टी दोबारा न धंसे और युवती तक सुरक्षित पहुंचा जा सके.

    22 फीट तक खुदाई के बाद निकाली गई यशी

    रेस्क्यू टीमों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद करीब 22 फीट तक खुदाई की. इसके बाद यशी को गड्ढे से बाहर निकाला गया. उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. यशी की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. रक्षाबंधन के दिन हुए इस हादसे से पूरे गांव में मातम पसर गया.

    3 साल पहले कराई गई थी बोरिंग

    परिजनों ने बताया कि करीब तीन साल पहले घर के आंगन में बोरवेल के लिए बोरिंग कराई गई थी. वहां काम सफल नहीं हुआ तो बाद में घर के बाहर दूसरी जगह बोरिंग कराई गई. परिवार को आशंका है कि पुराने बोरिंग वाले हिस्से की जमीन अंदर से कमजोर हो गई थी. हाल में हुई तेज बारिश के बाद मिट्टी और कमजोर हुई और अचानक जमीन धंस गई. हालांकि, जमीन धंसने की सही वजह अभी स्पष्ट नहीं है. इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

    बहन ने बताया कैसे हुआ हादसा?

    यशी की बहन रुचि ने बताया कि यशी मम्मी-पापा को बुलाने के लिए पूजा की थाली लेकर घर से निकली थी. इसी दौरान आंगन की मिट्टी अचानक धंस गई और यशी गड्ढे में गिर गई. घटना के बाद परिवार के लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई. शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए. देखते ही देखते घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई.

    रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदलीं

    रक्षाबंधन के त्योहार पर जहां घर में खुशियों का माहौल था, वहीं अचानक हुए इस हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं. यशी की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पुलिस और प्रशासन की टीम हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है. शुरुआती तौर पर पुराने बोरिंग और बारिश के कारण जमीन कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है. हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी.

  • बिहार के स्कूल की बदहाल तस्वीर ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल, एक ही कमरे में पढ़ते मिले पांच कक्षाओं के बच्चे

    बिहार के स्कूल की बदहाल तस्वीर ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल, एक ही कमरे  में पढ़ते मिले पांच कक्षाओं के बच्चे - India TV Hindi

    मधेपुरा; बिहार के मधेपुरा से शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है, जहां एक ही भवन में कक्षा एक से आठ तक के 159 बच्चों की पढ़ाई महज दो कमरों और एक टीन के शेड के सहारे हो रही है। कमरों की कमी के कारण कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। गर्मी के दिनों में टीन का शेड तपने से बच्चों को परेशानी होती है, लेकिन इसके बावजूद इसी व्यवस्था में स्कूल की पढ़ाई जारी है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत कुल पांच शिक्षक हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो गयी थी, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण नहीं हो सका।

    एक कमरे में पढ़ रहे हैं कक्षा छह से आठ तक के बच्चे
    एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को अलग-अलग विषय पढ़ाए जाने से शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को परेशानी होती है। एक तरफ किसी कक्षा में गणित के सवाल समझाए जाते हैं तो दूसरी ओर भाषा का पाठ पढ़ाया जाता है। इससे बच्चों का पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है। शिक्षक भी सभी कक्षाओं का सिलेबस समय पर पूरा कराने को लेकर परेशान हैं। विद्यालय के शिक्षक राधेश्याम राम ने बताया कि एक कमरे में कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। इससे काफी परेशानी होती है। बच्चों का सिलेबस समय पर पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में शिक्षकों को सामूहिक रूप से ऐसे पढ़ाना पड़ता है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को समझाया जा सके।

    राशि स्वीकृत हुई थी लेकिन भवन का निर्माण नहीं हो सका
    प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने बताया कि विद्यालय में कुल 159 बच्चे नामांकित हैं जिनमें से करीब 90 से 110 बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों की संख्या के मुकाबले में स्कूल में पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण और व्यवस्था में सुधार को लेकर विभाग को कई बार लिखित जानकारी दी गई लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

    प्रधानाध्यापक के मुताबिक, विद्यालय भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका। इसके बाद स्वीकृत राशि वापस लौट गई। ऐसे में फिलहाल बच्चों की पढ़ाई उपलब्ध दो कमरों और टीन शेड में में ही कराई जा रही है।

  • ‘जज अंकल! मम्मी ने पापा को मारा है’, मासूम बेटे की गवाही से खुला हत्या का राज, पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद

    अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से पति की हत्या के एक मामले में अदालत का महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। मामले में पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी करार देते हुए अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

    इस मामले में सबसे भावुक कर देने वाला पक्ष मृतक के मासूम बेटे की गवाही रही। सुनवाई के दौरान जब जज ने बच्चे से पूछा कि वह क्या चाहता है, तो उसने कथित तौर पर कहा, “जज अंकल! मम्मी ने पापा को मारा है, इन्हें फांसी दे दो।” बच्चे की बात सुनकर कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया।

    पत्नी और प्रेमी पर लगा पति की हत्या का आरोप

    मामला 10 जुलाई 2026 की सुबह का बताया गया है। खबर के मुताबिक, विजय सिंह अपने भाई सुरेश के घर के बाहर मौजूद थे। इसी दौरान सुरेश की पत्नी बीना के दरवाजे पर खड़े होने की बात सामने आई।

    आरोप है कि इसी दौरान बीना का प्रेमी मनोज वहां पहुंचा। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने पहले से सुरेश की हत्या की साजिश रची थी। घटना के दौरान मनोज ने कथित तौर पर सुरेश पर गोली चला दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

    हत्या के बाद दोनों हो गए थे फरार

    घटना के बाद बीना और मनोज के मौके से फरार होने की बात सामने आई। पुलिस जांच के दौरान मामले में कई साक्ष्य जुटाए गए। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य भी पेश किए गए।

    मासूम बेटे की गवाही बनी अहम कड़ी

    इस केस में मृतक के 15 वर्षीय बेटे नितेश की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। उसने अदालत में घटना से जुड़ी जानकारी विस्तार से बताई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाह पेश किए गए, जिनमें मृतक के परिवार के सदस्य और अन्य संबंधित गवाह शामिल थे।

    अदालत के सामने पेश किए गए सबूतों और गवाहियों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी माना गया।

    फैसला सुनते ही रोने लगी बीना

    जब अदालत ने बीना और मनोज को उम्रकैद की सजा सुनाई, तो बीना के भावुक होकर रोने की बात सामने आई। वहीं कोर्ट में मौजूद बच्चों का अपनी मां की ओर देखते रहना भी चर्चा का विषय बना।

    अदालत ने दोनों दोषियों को उम्रकैद के साथ 35-35 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में मासूम बच्चों की गवाही ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी भावुक बना दिया।

    नोट: यह लेख आपके द्वारा भेजी गई समाचार-कतरन में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों और अदालती फैसले से जुड़े अंतिम तथ्यों के लिए आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।

  • यूपी के इस जज ने सिर्फ 4 महीने में 22 दोषियों को सुनाई मौत की सजा, अब करीब 100 हत्या के केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर… आखिर क्यों?

    उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जज ने बीते 4 महीने में 22 कैदियों को मौत की सजा सुनाई. इसके बाद उनके पास लंबित हत्या के करीब 100 मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में ट्रांसफर कर दिए गए. न्यूज एजेंसी PTI ने अधिकारियों के हवाले से इसकी जानकारी दी. एक सरकारी वकील ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि मौत या उम्रकैद की सजा वाले अपराधों से जुड़े केस एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर से डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिए गए हैं. डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट प्रमोद त्यागी ने बताया कि वकीलों और केस करने वालों में इस बात को लेकर डर था कि कहीं कोर्ट मौत की सजा न दे दे.

    कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?
    जज रवि कुमार दिवाकर अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं. साल 2022 वह वाराणसी के ज्ञानवापी कॉम्प्लेक्स का वीडियोग्राफी सर्वे करने का ऑर्डर पास करने के लिए खबरों में थे. लखनऊ के रहने वाले 46 साल के जज ने 2009 में आजमगढ़ में एडिशनल सिविल जज के तौर पर शुरुआत की थी. इसके बाद मई 2015 में उन्हें सुल्तानपुर में सिविल जज और करीब पांच महीने बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के तौर पर प्रमोट किया गया.जज रवि दिवाकर के पास BCom और LLM की डिग्री है. वह नवंबर 2025 से मुजफ्फरनगर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज के तौर पर काम कर रहे हैं.

    10 मामलों में 22 को मौत की सजा
    बीते 13 अगस्त को उन्होंने 12 साल पुराने मर्डर केस में चार लोगों को मौत की सजा सुनाई. उन्होंने पवन कुमार की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए दोषियों (रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र कुमार) पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. आरोपी 14 जुलाई 2014 को शामली जिले में कुमार के घर में घुसे और कथित तौर पर पुरानी दुश्मनी के चलते हुए हमले के दौरान फायरिंग की. गोलीबारी में कुमार की मौत हो गई, जबकि उनके भाई अशोक कुमार को गोली लगी. वहीं, 1999 में फिरौती के लिए लकड़ी व्यापारी की हत्या करने वाले को भी मौत की सजा सुनाई गई.

    12 अगस्त को उन्होंने लगभग 27 साल पहले फिरौती के लिए एक लकड़ी व्यापारी को किडनैप करने और उसकी हत्या करने वाले एक आदमी को मौत की सज़ा सुनाई. उन्होंने आरोपी शाहनवाज को 1999 में सलीम की हत्या का दोषी ठहराया. सलीम को 5 लाख रुपये की फिरौती के लिए किडनैप किया गया था और बाद में 9 दिसंबर 1999 को छपार के एक जंगल में उसका गला काटकर हत्या कर दी गई थी.

    2011 के किसान मर्डर केस में 4 को मौत की सजा
    17 जुलाई को उन्होंने 2011 में शामली जिले में लूट की कोशिश के दौरान एक किसान की हत्या के लिए चार लोगों को मौत की सजा सुनाई. किसान राज सिंह 20 अगस्त 2011 को अपने दोस्त बिजेंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर अपनी बहन के घर जा रहे थे, तभी अनजान हमलावरों ने उन्हें रोक लिया. आरोपियों ने उन्हें लूटने की कोशिश की. विरोध करने पर राज सिंह को गोली मार दी गई, जबकि बिजेंद्र को बांधकर पास के गन्ने के खेत में फेंक दिया गया.

    पूर्व ग्राम प्रधान और उसके साथी को मौत की सजा
    6 जुलाई को उन्होंने 2010 के एक मर्डर केस में एक पूर्व ग्राम प्रधान और उसके साथी को मौत की सजा सुनाई. उन्होंने कहा कि यह केस ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस में आता है. 60 साल के राजबीर सिंह की 24 अगस्त 2010 को पंचायत चुनाव की रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद और उसके साथी सहदेव को बाद में मर्डर के लिए गिरफ्तार किया गया था.

  • न मां बची, न दादा-दादी… मासूम बेटे ने तैरकर बचाई जान,आखिर क्यों पूरे परिवार ने गोदावरी नदी में लगाई छलांग?

    आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी स्थित गोदावरी नदी के किनारे से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली पारिवारिक त्रासदी सामने आई है. पिथापुरम में पदस्थ पंचायत राज विभाग के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नुकाराजू ने अपने परिवार के साथ गोदावरी नदी में कूदकर सामूहिक आत्महत्या का प्रयास किया.

    इस दर्दनाक घटना में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले मासूम बच्चे कार्तिकेय को मछुआरों ने तैरते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि उसके दादा नुकाराजू का शव बरामद हुआ है. कार्तिकेय की मां सौजन्या और दादी मीना की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.जो परिवार कल तक एक साथ हंसताखेलता था, वह पल भर में तबाह हो गया.

    नदी में बहे कार्तिकेय ने हिम्मत नहीं हारी और तैरता रहा, जिसके बाद स्थानीय मछुआरों ने उसकी जान बचाई. लेकिन अब इस मासूम के सामने अपनों को खोने का पहाड़ जैसा दुख खड़ा है. न मां है, न दादा, न दादी. 5वीं का यह छात्र समझ नहीं पा रहा है कि उसके हंसतेखेलते परिवार को किसकी नजर लग गई. सदमे में डूबा कार्तिकेय न कुछ खा पा रहा है और न सो पा रहा है.

    सुसाइड नोट में खौफनाक खुलासा: ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन का दबाव

    नुकाराजू और उनकी बेटी सौजन्या द्वारा कथित तौर पर लिखे गए सुसाइड नोट से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. नोट में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति उनके परिवार को लगातार प्रताड़ित कर रहा था. उसने मदद का झांसा देकर बैंक विवरण, पैसे और कीमती सामान हड़प लिए. पत्र में परिवार को जान से मारने की धमकियां देने के साथसाथ धर्म परिवर्तन करने का अनुचित दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है.

    सौजन्या के पति की मौत पर भी उठे सवाल, हत्या की आशंका

    इस त्रासदी के तार एक अन्य संदिग्ध मामले से भी जुड़ रहे हैं. सौजन्या के पति जगदीश रेड्डी का इसी साल जुलाई में निधन हो गया था. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जगदीश रेड्डी के पिता भास्कर रेड्डी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके बेटे की सामान्य मौत नहीं हुई थी, बल्कि उसे जहरीला इंजेक्शन देकर मारा गया था. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जगदीश रेड्डी की मौत के मामले की भी नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी है.

    मानसिक तनाव और समाज के लिए बड़ा सवाल

    यह घटना इस बात का दुखद उदाहरण है कि जब कोई परिवार भारी मानसिक तनाव और धमकियों से जूझ रहा होता है, तो समय पर मदद न मिलने से क्या अंजाम हो सकता है. आंकड़ों के मुताबिक, देश में रोजाना सैकड़ों लोग मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याओं के कारण कठोर कदम उठाते हैं.

    विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के अचानक शांत हो जाने या असहाय महसूस करने के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति संकट में है, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत अपनों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लें. फिलहाल आंध्र प्रदेश पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है.

  • बीवी के चीथड़े उड़ाकर नहाया और खून से सने कपड़े, ऑनलाइन मंगाया था चाकू बेटे ने बताया मां उर्मिला का कैसे किया बाप ने कत्ल

    बीवी के चीथड़े उड़ाकर नहाया और खून से सने कपड़े, ऑनलाइन मंगाया था चाकू बेटे ने बताया मां उर्मिला का कैसे किया बाप ने कत्ल

    मध्य प्रदेश के इंदौर में डाक विभाग की महिला अधिकारी उर्मिला सैनी की हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस हत्याकांड के बाद जहां परिवार गहरे सदमे में है, वहीं घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।

    मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के करीब 48 घंटे बीत जाने के बाद भी मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आए पीड़िता के पति की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

    परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। इस बीच मृतका की बेटी ने अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आरोपों की जांच अभी जारी है और आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक कानून की नजर में वह निर्दोष माना जाएगा।

    पोस्ट ऑफिस में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट थीं उर्मिला सैनी

    जानकारी के अनुसार उर्मिला सैनी इंदौर के संयोगितागंज थाना क्षेत्र स्थित ‘डाक कुंज’ में भारतीय डाक विभाग में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत थीं। वह लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रही थीं और विभाग में जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जानी जाती थीं।

    उनकी अचानक हुई हत्या ने न केवल परिवार बल्कि सहकर्मियों और पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और विभिन्न पहलुओं से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    48 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश

    मामले में मुख्य संदिग्ध के रूप में उर्मिला सैनी के पति अखिलेश सैनी का नाम सामने आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द कार्रवाई करेगी।

    लेकिन घटना के लगभग 48 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई।इसी को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया।

    प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच की जाए तथा यदि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों तो आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाए।

    परिवार का कहना है कि गिरफ्तारी के बिना उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद अधूरी लग रही है।

    बेटी ने लगाए गंभीर आरोप

    मामले में सबसे भावुक और गंभीर बयान मृतका की बेटी प्रेक्षा सैनी का सामने आया है।प्रेक्षा ने आरोप लगाया कि उसके पिता लंबे समय से उसकी मां को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे और उन पर बेबुनियाद शक करते थे।

    उसके अनुसार इसी वजह से घर में अक्सर विवाद होते रहते थे।प्रेक्षा का दावा है कि उसकी मां की हत्या बेहद निर्ममता से की गई और इसके लिए दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

    उसने यह भी आरोप लगाया कि हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसकी पहले से योजना बनाई गई थी।

    ऑनलाइन चाकू मंगाने का भी दावा

    बेटी ने यह भी आरोप लगाया कि हत्या को अंजाम देने के लिए पहले से तैयारी की गई थी और आरोपी ने कथित तौर पर ऑनलाइन चाकू मंगवाए थे।हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं की जांच कर रही है और डिजिटल रिकॉर्ड सहित अन्य साक्ष्यों को भी खंगाल रही है।

    घटना के बाद क्या हुआ?

    परिजनों का आरोप है कि अपराध के बाद आरोपी ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की।उनका दावा है कि घटना के बाद आरोपी ने स्नान किया और खून से सने कपड़ों को नाली में बहा दिया।

    पुलिस जांच में जुटी

    इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है।जांच अधिकारी घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डाटा और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

    हालांकि, इन आरोपों की भी पुष्टि जांच पूरी होने और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।जांच एजेंसियां घटनास्थल से मिले सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं।

    परिवार की एक ही मांग-जल्द मिले न्याय

    उर्मिला सैनी के परिजनों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच है।परिवार का कहना है कि जब तक मामले में कानूनी कार्रवाई तेज नहीं होगी, तब तक उन्हें न्याय मिलने का भरोसा नहीं होगा।प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों ने भी पुलिस से अपील की कि मामले में किसी तरह की ढिलाई न बरती जाए और दोषी को जल्द कानून के दायरे में लाया जाए।

    घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना पर फिर उठे सवाल

    इस घटना ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों को लेकर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी परिवार में लगातार मानसिक तनाव, हिंसा या उत्पीड़न जैसी स्थिति बनी रहती है, तो समय रहते कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता लेना जरूरी होता है।

    कई मामलों में समय पर हस्तक्षेप बड़ी घटनाओं को रोक सकता है।

    कानून क्या कहता है?

    भारतीय कानून के तहत हत्या जैसे गंभीर अपराध की जांच पुलिस द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाती है।किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी सिद्ध किए जाने तक निर्दोष माना जाता है।इसलिए जांच पूरी होने और न्यायालय के निर्णय से पहले किसी भी व्यक्ति को कानूनी रूप से दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।

    लोगों में न्याय की उम्मीद

    इंदौर की यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।सोशल मीडिया पर भी लोग मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।उधर परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि जांच जल्द पूरी हो ताकि सच्चाई सामने आ सके।इंदौर में डाक विभाग की अधिकारी उर्मिला सैनी की हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर परिजन आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि जांच सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। मृतका की बेटी द्वारा लगाए गए आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस की जांच जारी है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं तथा कानून के तहत आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

  • आंखों को सामने मां को उठा ले गया तेंदुआ, गांव में पुलिस फोर्स… PAC की टुकड़ी भी तैनात​

    आंखों को सामने मां को उठा ले गया तेंदुआ, गांव में पुलिस फोर्स… PAC की टुकड़ी भी तैनात​

    Moradabad Leopard Attack: मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र स्थित बलिया गांव में तेंदुए के हमले से एक वृद्ध महिला की दर्दनाक मौत हो गई. मंगलवार दोपहर के समय अपने परिजनों के साथ खेत में चारा लेने गई महिला बिरमा देवी पर झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया. 20 लोगों के बीच से तेंदुआ महिला को ले गया. परिजनों के शोर मचाने और भालेबल्लम लेकर दौड़ने पर तेंदुआ महिला को छोड़कर जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ, लेकिन तब तक गंभीर रूप से घायल महिला की जान जा चुकी थी. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है.

    सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है. तेंदुए के बढ़ते खौफ को देखते हुए गांव में पुलिस बल, क्विक रिस्पॉन्स टीम और PAC की टुकड़ी तैनात कर दी गई है. वन विभाग के साथ मिलकर ड्रोन कैमरों से इलाके की निगरानी की जा रही है और तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जा रहे हैं. प्रशासन ने मृतक महिला के परिजनों को दैवीय आपदा के तहत 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है. साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए चौपालें लगाई जा रही हैं और अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी जा रही है.

    परिजनों के द्वारा महिला की मौत को लेकर लगाए गए गंभीर आरोप

    घटना के समय मौजूद मृतक महिला के बेटे प्रेमचंद ने आपबीती बताते हुए कहा. “हम खेत से न्यार लेने गए थे. लगभग 1520 लोग चारा लेने गाड़ियों में एक साथ गए थे. न्यार काटने के बाद जब गड्डी बांध रहे थे. तभी महज एक मीटर की दूरी से तेंदुए ने हमारी मां पर हमला कर दिया है. हम तुरंत भालेबल्लम लेकर उस पर झपटे. तब जाकर वह मां को छोड़कर भागा था.” प्रेमचंद ने वन विभाग की लापरवाही पर गुस्सा जताते हुए कहा कि शाम 6 बजे के बाद गांव में तेंदुए का खतरा बहुत बढ़ जाता है. ग्रामीणों ने बारबार पिंजरे लगाने की गुहार लगाई, लेकिन वन विभाग टालमटोल करता रहा है. अब ग्रामीणों के सामने मवेशियों के लिए चारा लाने का संकट खड़ा हो गया है और खौफ के कारण रात में नींद तक नहीं आ रही है.

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने संभाला मोर्चा

    घटना की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा इंतजामों की जानकारी देते हुए एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया. “थाना ठाकुरद्वारा के बलिया गांव में करीब दोपहर 2:30 बजे एक महिला चारा काटने खेत गई थी. जहां तेंदुए के हमले में उनकी मौत हो गई है.शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है. ग्रामीणों में कुछ रोष था. लेकिन उनसे बातचीत कर स्थिति सामान्य कर ली गई है. एसपी देहात ने बताया कि वन विभाग के साथ समन्वय बनाकर पिंजरे लगवाए जा रहे हैं और ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही है. गांव में सुरक्षा के लिहाज से PAC की प्लाटून, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय पुलिस फोर्स तैनात कर रात में गश्त बढ़ाई गई है. इसके अलावा ग्रामीणों को अकेले न निकलने और समूहों में रहने की हिदायत दी जा रही है.

    प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से किया संवाद

    क्षेत्रीय स्थिति और प्रशासनिक मदद की जानकारी देते हुए एडीएम संगीता गौतम ने कहा कि मृतक महिला बिरमा देवी के परिवार को दैवीय आपदा के तहत कुल 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है. जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलते ही उपलब्ध करा दी जाएगी. एडीएम ने स्पष्ट किया कि मुरादाबाद का यह क्षेत्र जिम कॉर्बेट से सटा है. बारिश और गन्ने के खेतों के कारण लेपर्ड बाहर आ रहे हैं. क्षेत्र में लगभग 2025 तेंदुए होने का अनुमान है. जिनमें से हाल ही में 6 पकड़े गए हैं. प्रभावित इलाकों में 20 पिंजरे लगाए गए हैं और जल्द 10 और लगाए जाएंगे. प्रशासन चौपाल लगाकर लोगों से समूह में बाहर निकलने की अपील कर रहा है.