Category: health

  • Gut Health Tips: हमारी गट हेल्थ कैसे करती है काम? एक्सपर्ट से जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें​

    Gut Health Tips: हमारी गट हेल्थ कैसे करती है काम? एक्सपर्ट से जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें​

    आज बॉडी को फिट रखने के लिए कई फिटनेस ट्रिक्स आजमाए जाते हैं. इसलिए लोग अब हेल्दी गट हेल्थ, ब्लैक कॉफी से फैटी लिवर रिवर्स जैसे कई ट्रिक्स फॉलो करने लगे हैं. क्या आप जानते हैं कि आखिर में गट हेल्थ होती है क्या है? इसका जवाब पूछा जाए तो ज्यादातर लोग इसे पूरे पेट की हेल्थ पुकारते हैं. असल में गट हेल्थ हमारे इंटेस्टाइन का सिस्टम है. इसमें छोटी आंत और बड़ी आंत की हेल्थ शामिल है.

    अगर गट हेल्थ बिगड़ी हुई है तो शरीर में हर समय अपच, गैस, मतली और कभीकभी उल्टी का मन भी करता है. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं कि आखिर गट हेल्थ कैसे काम करती है. साथ ही जानें इसे ठीक रखने के लिए किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए?

    गट हेल्थ क्या है और कैसे करती है काम

    महेश गुप्ता का कहना है कि गट हेल्थ यानी हमारी छोटी आंत और बड़ी आंत. इसका अपने आप में एक बड़ा निरोनल सिस्टम है. जिस तरह हमारा ब्रेन पूरी बॉडी को कंट्रोल करता है उसी तरह गट हेल्थ हमारे फूड के सिस्टम यानी डाइजेशन को कंट्रोल करता है.

    एक्सपर्ट कहते हैं कि हमारा खाना पेट से आंतो में जाता है. आंतों में बहुत सारे जूसी और एंजाइम सीक्रेट होते हैं और ये खाने को पचाते हैं. ये खाना पचने के बाद इंटेस्टाइन में ऑब्जर्व होता है. तो खाना ऊपर से नीचे की तरफ मूव करता है वो हमारी इंटेस्टाइन की एक मूमेंट होती है.

    क्या आप जानते हैं कि बॉडी की 70 फीसदी कोशिकाएं आंतों से जुड़ी होती हैं. इसलिए गट हेल्थ का असर हमारे इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है.

    गट हेल्थ का कनेक्शन हमारे दिमाग से भी होता है. अगर गट ठीक नहीं है तो तनाव, मूड ठीक न होना और नींद का सिस्टम भी बिगड़ जाता है.

    ऐसे रखें इसका ख्याल

    इस सिस्टम को हेल्दी रखने के लिए हमारी आंतों में गुड बैक्टीरिया का होना जरूरी है. इसके लिए आपका खानपान बेहतर होना चाहिए.

    एक्सपर्ट कहते हैं कि डाइट में ऐसी चीजें जरूर खाएं जिनमें फाइबर हो. क्योंकि इसकी हेल्प से खाना आसानी से पच पाता है.

    बॉडी में पानी की कमी भी आंतों और दूसरे अंगों की हेल्थ को कमजोर बनाती है. सीजनल फ्रूट्स और सब्जियों को खाने के अलावा ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. बॉडी को दिनभर हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी पीना बेस्ट है.

    मानसून के दौरान हमारा पाचन कमजोर होता है. इसलिए ऐसी चीजों को न खाएं जिनमें मसाला और ऑयल ज्यादा हो. ऐसे फूड्स या डिश गट हेल्थ को नुकसान पहुंचाती हैं.

  • Pregnancy Health Tips: फोलिक एसिड ही नहीं….प्रेगनेंसी में ये पोषक तत्व भी हैं जरूरी, एक्सपर्ट ने बताया​

    Pregnancy Health Tips: फोलिक एसिड ही नहीं….प्रेगनेंसी में ये पोषक तत्व भी हैं जरूरी, एक्सपर्ट ने बताया​

    मां बनना एक खूबसूरत एहसास है लेकिन इससे पहले शरीर में कई बदलाव होते हैं. इसलिए हेल्थ को लेकर काफी सीरियस होना जरूरी है. प्रेगनेंसी में महिलाओं के शरीर को पोषक तत्वों की ज्यादा जरूरत होती है. देखा जाए तो बेबी प्लान करने से कंसीव करने तक महिलाओं को गायना फोलिक एसिड लेने की सलाह देती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रेगनेंसी में और भी कई दूसरे पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है. डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला का शरीर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मेहनत करता है.

    इस समय बेबी का विकास, मां की ऊर्जा, खून की पर्याप्त मात्रा, हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी हद तक सही पोषण पर निर्भर करती है. हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है, लेकिन इन नौ महीनों में कुछ पोषक तत्व ऐसे हैं, जिनकी जरूरत हर होने वाली मां को होती है. आइए जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान सबसे जरूरी 7 पोषक तत्वों के बारे में.

    प्रेगनेंसी में बेहद जरूरी हैं ये 7 पोषक तत्व

    फोलिक एसिड प्रेगनेंसी के शुरुआती तीन महीनों में फोलिक एसिड बेहद जरूरी होता है. यह बेबी के दिमाग और रीढ़ की हड्डी के सही विकास में मदद करता है. इसलिए डॉक्टर अक्सर प्रेगनेंसी की प्लानिंग के समय से ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं. हरी पत्तेदार सब्जियां और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत हैं.

    आयरन प्रेगनेंसी के दौरान मां और बेबी दोनों के लिए शरीर को अधिक खून की जरूरत होती है. आयरन हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी और एनीमिया हो सकता है. पालक, गुड़, अंडा, चिकन और मछली आयरन के अच्छे स्रोत हैं.

    कैल्शियम कैल्शियम बेबी की हड्डियों और दांतों के विकास में अहम भूमिका निभाता है. साथ ही यह मां की हड्डियों को भी मजबूत बनाए रखता है. अगर शरीर को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो बेबी की जरूरत पूरी करने के लिए मां की हड्डियों से कैल्शियम लिया जा सकता है. दूध, दही, पनीर, रागी और हरी सब्जियां इसके अच्छे स्रोत हैं.

    विटामिन डी विटामिन D शरीर में कैल्शियम के बेहतर अवशोषण में मदद करता है. यह हड्डियों की मजबूती, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है. धूप इसका सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है. इसके अलावा अंडा, फोर्टिफाइड दूध और फैटी फिश से भी इसकी पूर्ति की जा सकती है.

    प्रोटीन प्रोटीन बेबी के अंगों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य हिस्सों के विकास के लिए जरूरी है. यह प्रेगनेंसी के दौरान मां के शरीर में होने वाले बदलावों को भी सहारा देता है. दाल, अंकुरित अनाज, पनीर, अंडा, मेवे और बीज प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं.

    ओमेगा3 ओमेगा3 फैटी एसिड, खासकर डीएचए , बेबी के दिमाग और आंखों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अखरोट, चिया सीड्स और कम पारे वाली मछलियां इसके अच्छे स्रोत हैं. शाकाहारी महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट ले सकती हैं.

    आयोडीन आयोडीन थायरॉयड को स्वस्थ रखने में मदद करता है, जो बेबी के मस्तिष्क के विकास के लिए बेहद जरूरी है. आयोडीन युक्त नमक, दूध से बने उत्पाद और अंडा इसके अच्छे स्रोत हैं. प्रेगनेंसी में स्वस्थ रहने का मतलब ज्यादा खाना नहीं, बल्कि सही और पौष्टिक भोजन करना है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर सप्लीमेंट लें और अपने रोज़ाना के भोजन में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें. यही स्वस्थ मां और स्वस्थ बेबी की मजबूत नींव है.

  • Health Care Tips in Fever: बुखार आने पर क्यों मर जाती है भूख? एक्सपर्ट ने समझाया पूरा लॉजिक​

    Health Care Tips in Fever: बुखार आने पर क्यों मर जाती है भूख? एक्सपर्ट ने समझाया पूरा लॉजिक​

    बुखार आने पर कभीकभी कुछ भी खाने का मन नहीं करता है. इसे आम भाषा में भारतीय बुखार में भूख का मर जाना कहते हैं. क्या आपने सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक शरीर में ऐसा होना एक वैज्ञानिक प्रतिक्रिया है. दरअसल, जब हमारे शरीर में इंफेक्शन होता है तो बुखार आने लगता है. हमारा शरीर इंफेक्शन फैलाने वाले वायरल और बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए टेंपरेचर को बढ़ाता है. ऐसे में बुखार आने लगता है और सिर में दर्द, शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द और भूख न लगने जैसे लक्षण भी नजर आने लगते हैं.

    इस कंडीशन में भी लिक्विड चीजें खाने की सलाह दी जाती है. लेकिन अधिकतर लोगों की भूख मर जाती है और शरीर और डाउन फील करने लगता है. हमारी बॉडी में ऐसा क्यों होता है, चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं…

    बुखार में भूख क्यों नहीं लगती?

    डॉक्टर रविंद्र गुप्ता कहते हैं कि बुखार का कारण इंफेक्शन होता है. इंफेक्शन से लड़ने के लिये हमारे शरीर मे कुछ कैमिकल बनते है, जिन्हे हम सायटोकाइन कहते है. ये सायटोकाइन हमारे मस्तिष्क मे भूख सैंटर को दबा देते हैं. यह इसलिए होता है ताकि शरीर की एनर्जी खाना हजम करने से ज्यादा इंफेक्शन के कीटाणुऔं को अटैक करने के लिए काम आ सके. आसान भाषा में कहे तो तो हमारा शरीर एनर्जी को डाइजेशन में खर्चने के बजाय इंफेक्शन से लड़ने में खर्च करने लगता है.

    दूसरा, कई बार लिवर पर बैक्टीरिया या वायरस का हमला भी भूख कम कर देता है. तीसरा, जब इंफेक्शन हमारी सूंघने और स्वाद की कोशिकाओं को कम या खत्म कर देता है तो भी भूख पर असर होता है. ऐसे में खाना फीका लगता है और भूख अपने आप कम हो जाती है. इसके अलावा कमजोरी, बदन दर्द, थकान, मतली और थ्रोट इंफेक्शन जैसी दिक्कतों के चलते भी खाने की इच्छा मर जाती है.

    इन बातों का रखें ध्यान

    डॉ. आर. आर. दत्ता कहते हैं कि भले ही भूख कम लगे, लेकिन शरीर को पोषण की जरूरत पहले से ज्यादा होती है. लंबे समय तक खाना न खाने से शरीर कमजोर हो सकता है और रिकवरी में देरी हो सकती है. मरीज को थोड़ीथोड़ी मात्रा में हल्का भोजन लेते रहना चाहिए.

    पर्याप्त मात्रा में पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और प्रोटीन का इंटेक किसी न किसी तरीके से करना चाहिए. इस तरह शरीर तेजी से रिकवर कर पाता है. भूल से भी हैवी मील न लें. ऐसी चीजें खाएं जो आसानी से पच पाएं और पोषण भी दें.

    बुखार में क्या खाना चाहिए?

    मूंग दाल की खिचड़ी

    दलिया या ओट्स

    दही

    सूप

    नारियल पानी

    ताजे फलों का सेवन

    उबली हुई सब्जियां

    केला, सेब और पपीता

    अगर कई दिनों तक भूख बिल्कुल न लगे, तेज बुखार बना रहे या लगातार उल्टी और कमजोरी हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.