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  • आपका पैसा- करोड़पति अपना पैसा कैसे मैनेज करते हैं:क्या वे भी SIP करते हैं, जानें करोड़पतियों के 7 मनी रूल्स, क्या गलतियां न करें

    क्या करोड़पति बनने का तरीका सिर्फ ज्यादा पैसे कमाना है? जवाब है- नहीं। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि कोई व्यक्ति अपने पैसों को कैसे मैनेज करता है। दुनिया के ज्यादातर सफल और संपन्न लोग कमाई के साथ बचत, निवेश और रिस्क मैनेजमेंट पर खास ध्यान देते हैं। वे अपनी कमाई को पहले बचत और निवेश के लिए अलग करते हैं और इसके बाद खर्च की योजना बनाते हैं। नियमित SIP, लंबी अवधि के निवेश, इनकम के कई सोर्स तैयार करना और अनावश्यक कर्ज से बचना उनकी रेगुलर फाइनेंशियल हैबिट्स होती हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक उनकी संपत्ति बढ़ती रहती है। अगर आप भी अपनी फाइनेंशियल कंडीशन मजबूत करना चाहते हैं, तो करोड़पतियों के कुछ आसान, लेकिन असरदार मनी रूल्स अपनाकर शुरुआत कर सकते हैं। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में समझेंगे कि पैसे बचाने और पैसे से पैसा बनाने का हुनर कैसे सीखें। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- क्या करोड़पति सिर्फ कमाई पर ध्यान देते हैं या पैसा भी बेहतर मैनेज करते हैं? जवाब- करोड़पति पैसे कमाने के साथ उन्हें बेहतर ढंग से मैनेज भी करते हैं। मनी मैनेजमेंट पर फेमस किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट टी. कियोसाकी के मुताबिक, अमीर बनने के लिए सिर्फ ज्यादा पैसे कमाना ही नहीं, बल्कि सही फाइनेंशियल मैनेजमेंट भी जरूरी है।’ लगभग हर करोड़पति या अमीर शख्स इस बात को फॉलो करता है। करोड़पति अपना मनी मैनेजमेंट कैसे करते हैं, नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- करोड़पति और आम निवेशकों की सोच में सबसे बड़ा फर्क क्या होता है? जवाब- करोड़पति पैसे को संपत्ति (एसेट) बनाने के साधन के रूप में देखते हैं। पहले निश्चित अमाउंट निवेश करते हैं, फिर खर्च करते हैं। वहीं आम निवेशक पहले पैसे खर्च करते हैं, इसके बाद बचे पैसे इन्वेस्ट करते हैं। सभी फर्क नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- करोड़पति बनने और करोड़पति बने रहने में क्या फर्क है? जवाब- ये दोनों अलग-अलग बाते हैं। इसे ऐसे समझिए– सवाल- क्या सिर्फ ज्यादा आय होने से कोई अमीर बन सकता है? जवाब- नहीं, सिर्फ ज्यादा इनकम काफी नहीं है। अमीर बनने के लिए यह समझ भी जरूरी है कि इनकम का कितना हिस्सा बचाकर निवेश करना है और कितना खर्च करना है, ताकि लंबे समय में पैसा बनाया जा सके। सवाल- करोड़पति अपनी कमाई का कितना हिस्सा बचाते हैं? जवाब- इसका कोई तय प्रतिशत नहीं है। लेकिन इसे ऐसे समझिए– सवाल- क्या करोड़पति लोग भी बजट बनाते हैं? अपने खर्चों को ट्रैक करते हैं? जवाब- हां, करोड़पति बनने के लिए ये बेसिक बातें फॉलो करना बहुत जरूरी है। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि बजट बनाने में और खर्चों में छोटी सी गलती भी भविष्य में बड़े नुकसान की वजह बन सकती है। सवाल- करोड़पति अपना पैसा कहां निवेश करते हैं? जवाब- करोड़पति आमतौर पर पैसे को कई प्रकार के एसेट्स में बांटकर निवेश करते हैं। उनका गोल सिर्फ रिटर्न कमाना नहीं होता, बल्कि पैसे को सुरक्षित रखने के साथ उसे लगातार बढ़ाना होता है। करोड़पति अपने पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा शेयर्स में रखते हैं, क्योंकि लॉन्ग टर्म में इनसे अच्छा रिटर्न मिल सकता है। वे आमतौर पर इन जगहों पर इन्वेस्ट करते हैं- सवाल- करोड़पति निवेश चुनते समय किन बातों पर ध्यान देते हैं? जवाब- वे सिर्फ ये नहीं देखते कि कितना रिटर्न मिलेगा, वे रिस्क का आकलन भी करते हैं। साथ ही ये भी देखते हैं कि पैसा कितने समय के लिए कैश फ्लो में नहीं होगा और निवेश उनकी कंप्लीट स्ट्रेटेजी में कैसे फिट बैठेगा। करोड़पतियों के निवेश करने की आदतें ग्राफिक में देखिए- सवाल- वे जोखिम को कैसे मैनेज करते हैं? जवाब- वे रिस्क से बचने के लिए निवेश से पहले ही कुछ बातों का ध्यान रखते हैं, जैसेकि- 1. सारे पैसे एक जगह नहीं लगाते हैं। 2. अपनी क्षमता के अनुसार ही जोखिम लेते हैं। 3. कैश फ्लो के लिए लिक्विडिटी रखते हैं। 4. इमरजेंसी फंड रखते हैं। 5. कर्ज लेने से बचते हैं। 6. इश्योरेंस रखते हैं। सवाल- क्या करोड़पति SIP करते हैं? जवाब- हां, कई करोड़पति SIP करते हैं। हालांकि वे हमेशा इसे नियमित और अनुशासित निवेश के सिद्धांत की तरह देखते हैं। सवाल- करोड़पति कंपाउंडिंग की ताकत का फायदा कैसे उठाते हैं? जवाब- कंपाउंडिंग यानी ‘पैसे से पैसा कमाने की ताकत।’ इसमें लॉन्ग टर्म में बड़ा मुनाफा मिलता है। करोड़पति या अनुभवी इन्वेस्टर इसका ऐसे फायदा उठाते हैं- सवाल- जल्दी निवेश शुरू करना क्यों जरूरी है? जवाब- कंपाउंडिंग के ज्यादा लाभ के लिए ज्यादा समय चाहिए। जितना अधिक समय तक पैसा इन्वेस्टमेंट में रहेगा, उतना ही अधिक वह ‘रिटर्न पर रिटर्न’ कमाएगा। सवाल- करोड़पति लॉन्ग टर्म निवेश पर इतना जोर क्यों देते हैं? जवाब- अधिकांश बड़ी संपत्तियां एक-दो साल में नहीं, बल्कि दशकों की कंपाउंडिंग से बनती हैं। इसलिए करोड़पति लॉन्ग टर्म निवेश पर ज्यादा जोर देते हैं। सवाल- करोड़पति सिर्फ एक सैलरी पर निर्भर क्यों नहीं रहते? जवाब- मल्टीपल इनकम सोर्स होने पर फाइनेंशियल रिस्क कम हो जाता है। पैसा जल्दी बनता है और फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस भी मिलती है। इसलिए करोड़पति सिर्फ एक सैलरी पर निर्भर नहीं रहते। सवाल- उनके पास आमतौर पर कितने इनकम सोर्स होते हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- वे कितना इमरजेंसी फंड रखते हैं? जवाब- करोड़पति आमतौर पर 6-12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखते हैं। कई लोग 12-24 महीने तक का फंड भी रखते हैं। इसे ऐसी जगह रखा जाता है जहां से आसानी से निकाला जा सके और पूंजी पर ज्यादा रिस्क न हो। सवाल- हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस को वे कितना महत्व देते हैं? जवाब- करोड़पति निवेश से पहले पर्याप्त बीमा कवरेज पर ध्यान देते हैं। वे इन दोनों को फाइनेंशियल सेफ्टी की बुनियाद मानते हैं। क्योंकि- सवाल- क्या करोड़पति फटाफट अमीर बनने वाली स्कीम्स से दूर रहते हैं? जवाब- हां, ज्यादातर करोड़पति और सफल निवेशक पैसा जल्दी दोगुना या तिगुना करने के दावों से सतर्क रहते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- करोड़पतियों की कौन-सी आदतें हर व्यक्ति अपना सकता है? जवाब- उनकी कुछ अच्छी फाइनेंशियल हैबिट्स लंबे समय में आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर आय सीमित है तो हेल्दी फाइनेंशियल आदतें कैसे विकसित करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसेकि- नीचे ग्राफिक में दी ये गलतियां कभी न करें- सवाल- अगर आज शुरुआत करनी हो तो कौन-से कदम उठाएं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- ************ ग्राफिक- विपुल शर्मा ………………………… ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- टाइम पर EMI नहीं चुकाया तो क्या होगा:RBI ने रिकवरी रूल्स में किया बदलाव, जानिए अब बैंक आपके साथ क्या नहीं कर सकता आजकल कोई भी लोन लेना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। लेकिन किसी वजह से EMI मिस हो जाए या लोन डिफॉल्ट हो जाए, तो बैंक ग्राहक के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है। इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर कई सवाल रहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
  • जरूरत की खबर- पेनकिलर खाने से खराब हुई किडनी:डॉक्टर से जानें इसके साइड इफेक्ट्स, कब पेनकिलर लेना सही, बिना दवा दर्द कैसे कम करें

    मध्य प्रदेश के इंदौर में रहने वाले 31 वर्षीय नंदराम को बुखार और हाथ-पैर में दर्द था। पेन रिलीफ के लिए उन्होंने मेडिकल स्टोर से खरीदकर पेनकिलर खाना शुरू कर दिया। दवा खाने पर कुछ समय के लिए आराम मिलता, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा दर्द होने लगता। वे हर बार पेनकिलर ले लेते। धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन गई। एक महीने में उन्होंने करीब 13 बार पेनकिलर खा ली। कुछ समय बाद उन्हें पेट में तेज दर्द शुरू हुआ। जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। करीब एक साल तक डायलिसिस के बाद उनकी मां ने अपनी किडनी देकर उन्हें नई जिंदगी दी। अक्सर लोग सुरक्षित दवा समझकर बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर खा लेते हैं, जबकि जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक खाने पर यह दवा किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में पेनकिलर के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अजय नायर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- पेनकिलर क्या है? जवाब- पेनकिलर ऐसी दवाएं हैं, जो दर्द से राहत दिलाती हैं और उसे कंट्रोल करने में मदद करती हैं। कुछ पेनकिलर्स सूजन को कम करने में भी मदद करती हैं। इन्हें मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बांटा जाता है- डॉक्टर जरूरत के अनुसार इसे लेने की सलाह देते हैं। सवाल- किन हेल्थ कंडीशंस में डॉक्टर पेनकिलर देते हैं? जवाब- डॉक्टर दर्द की वजह और गंभीरता के आधार पर पेनकिलर देते हैं, जैसेकि- सवाल- बतौर मेडिसिन पेनकिलर के क्या फायदे हैं? जवाब- पेनकिलर दवाएं दर्द के लक्षणों को कम करके मरीज को राहत देती हैं। इसके फायदे ऐसे समझिए- सवाल- पेनकिलर के साइड इफेक्ट या नुकसान क्या हैं? जवाब- ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में जुलाई, 2021 में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, लंबे समय तक पेनकिलर लेने से लिवर और किडनी डैमेज का रिस्क होता है। इससे हार्ट डिजीज का रिस्क भी बढ़ता है। बार-बार या जरूरत से ज्यादा पेनकिलर खाने के सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन समस्याओं में लोग अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेते हैं? जवाब- बहुत से लोग मामूली या बार-बार होने वाली तकलीफों में खुद ही मेडिकल स्टोर से पेनकिलर खरीदकर खा लेते हैं। ग्राफिक में समस्याओं की लिस्ट देखिए- सवाल- पेनकिलर का किडनी पर क्या असर होता है? इंदौर में सिर्फ 13 दिन पेनकिलर लेने से व्यक्ति की किडनी क्यों डैमेज हो गई? जवाब- कुछ पेनकिलर, खासकर नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs), किडनी में ब्लड फ्लो कम कर सकती हैं। इससे किडनी की कार्यक्षमता अचानक प्रभावित होती है। हालांकि, सिर्फ 13 दिन दवा लेने से किडनी डैमेज होना काफी रेयर है। इस मामले में पेनकिलर की मात्रा, प्रकार, डिहाइड्रेशन, पहले से मौजूद हेल्थ कंडीशन और अन्य कारणों की भी भूमिका हो सकती है। सवाल- पेनकिलर्स सिर्फ किडनी को डैमेज करती हैं या शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचाती हैं? जवाब- पेनकिलर्स का जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी के अलावा शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। डिटेल ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या पेनकिलर से होने वाला किडनी डैमेज स्थायी होता है? जवाब- डॉक्टर अजय नायर बताते हैं कि अगर समय रहते दवा बंद कर इलाज शुरू हो जाए तो किडनी की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है। कुछ मामलों में किडनी डैमेज स्थायी भी हो सकता है। सवाल- क्या कभी-कभार पेनकिलर लेने से भी किडनी डैमेज हो सकती है? जवाब- आमतौर पर स्वस्थ व्यक्ति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार कभी-कभार पेनकिलर लेने से किडनी डैमेज का रिस्क नहीं होता है। हालांकि, कुछ लोगों में कम समय में भी किडनी पर बुरा असर हो सकता है। सवाल- किन लोगों के लिए पेनकिलर लेना ज्यादा रिस्की है? जवाब- डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर लेना हर किसी के लिए रिस्की है। लेकिन कुछ लोगों में इसके साइड इफेक्ट का जोखिम ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- पेनकिलर लेने के बाद कौन-से लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? जवाब- पेनकिलर लेने के बाद कुछ असामान्य या गंभीर लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज न करें। ग्राफिक में ऐसे लक्षण देखिए- सवाल- किन दवाओं के साथ पेनकिलर लेना ज्यादा रिस्की हो सकता है? जवाब- कुछ दवाओं के साथ पेनकिलर लेने पर साइड इफेक्ट और किडनी डैमेज का रिस्क बढ़ता है। हालांकि कौन-सी दवाएं साथ में सुरक्षित हैं, यह पेनकिलर के प्रकार और व्यक्ति की हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता है। ग्राफिक में इंटरैक्ट करने वाली दवाएं देखिए- सवाल- पेनकिलर्स लेने का सही तरीका क्या है? जवाब- पेनकिलर्स डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें। जरूरत के मुताबिक, कम डोज और कम-से-कम समय के लिए इस्तेमाल करना बेहतर है। सवाल- जिन सामान्य स्थितियों में लोग थोड़ा भी दर्द सहने के बजाय तुरंत पेनकिलर लेते हैं, उनमें दर्द से राहत पाने का दूसरा सेफ तरीका क्या है? जवाब- हल्के और सामान्य दर्द में हर बार पेनकिलर लेने की जरूरत नहीं होती। दर्द की वजह के अनुसार कुछ दूसरे उपाय भी राहत दे सकते हैं, जैसेकि- **************** ग्राफिक्स- अजीत सिंह ……………………. ये खबर भी पढ़ें…. जरूरत की खबर- OMAD डाइट से घटाया 38 किलो वजन:क्या ये सेफ है, इसे कैसे फॉलो करें, क्या सावधानी रखें, डाइटीशियन से जानें सबकुछ हाल ही में कंटेंट क्रिएटर जेफिन ने अपनी वेट लॉस जर्नी के बारे में बताया। उन्होंने एक साल में 38 किलो वजन कम किया। इसके लिए उन्होंने OMAD (वन मील अ डे) डाइट अपनाई। इसमें पूरे दिन में सिर्फ एक मील खाई जाती है। यह तेजी से वेट लॉस का पॉपुलर तरीका है। पूरी खबर पढ़ें…
  • Overeating on Raksha Bandhan: राखी पर कहीं ज्यादा तो नहीं खा गए आप? ऐसे करें बॉडी डिटॉक्स

    राखी पर मिठाई, नमकीन चीजें, दही-भल्ला, चाट-पकौड़ी या दूसरी चीजों को लोग शौक-शौक में खाते जाते हैं. फेस्टिवल के रंग में ये ज्यादातर ये भूल जाते हैं कि वो ओवरईटिंग कर रहे हैं. कुछ देर बाद अपच, मतली या फिर उल्टी आना फील होने लगता है. एसिडिटी का लगातार बना रहना भी परेशान करता है. वैसे आजकल त्योहार पर ज्यादा खा लेने के बाद बॉडी डिटॉक्स के तरीके को बहुत फॉलो किया जाता है.

    डिटॉक्सिफाइंग के जरिए शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जाता है. लेकिन कुछ चीजें या ऐसे तरीके भी हैं जिन्हें अपनाकर खाने से हुए भारीपन को कुछ हद तक कम या दूर किया जा सकता है. चलिए आपको बताते हैं..

    पानी ज्यादा पिएं

    बॉडी को डिटॉक्स करने का सबसे बढ़िया और आसान तरीका है ज्यादा से ज्यादा पानी पीना. खाने से हुए भारीपन में एक साथ ज्यादा पानी पीया नहीं जा सकता. लेकिन आप धीरे-धीरे इसे पीकर पेट को हल्का महसूस करा सकते हैं. त्योहार मनाने के बाद पानी पिएं क्योंकि इससे बॉडी हाइड्रेट रहती है और किडनी नॉर्मल तरीके से टॉक्सिन्स को बाहर निकाल पाती है. किडनी अपना काम ठीक से करेगी तो आपको जल्दी ही अच्छा और हल्का महसूस होने लगेगा.

    फाइबर है जरूरी

    त्योहार वाले दिन जमकर मीठा और स्नैक्स खा लिए है तो ऐसी चीजें खाएं जिनमें फाइबर ज्यादा हो. इसमें आपके काम सेब, अमरूद, नाशपाती, पपीता और मौसमी जैसे फल आ सकते हैं. इनका जूस निकालकर पीने की गलती न करें क्योंकि डिटॉक्स ड्रिंक पीने के बजाय फाइबर का इंटेक बढ़ाएं. फाइबर ठीक से मिलता है तो पाचन क्रिया ठीक से हो पाती है और अगले दिन पेट साफ हो पाता है. आप चाहे तो रात में सोने से पहले दूध या गुनगुने पानी में इसबगोल को मिलाकर पी सकते हैं.

    पपीता और दही का कॉम्बो

    ज्यादा तला-भुना या मीठा खाने से पेट में भारीपन महसूस हो रहा है तो हल्की चीजों को खाएं. इसके लिए पपीता खा सकते हैं क्योंकि ये फाइबर का बेस्ट सोर्स है. इसके अलावा दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आंतों की हेल्थ को बेहतर बनाते हैं. वैसे जिन्हें दही से गैस या दूसरी प्रॉब्लम हो उन्हें अपनी सेहत को ध्यान में रखकर इसे खाना चाहिए.

    हरी सब्जियां हैं रामबाण इलाज

    पालक, लौकी, तोरई, भिंडी या दूसरी सीजनल वेजिटेबल्स को खाएं. क्योंकि इनमें फाइबर के अलावा कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स होते हैं. ऐसा करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और ज्यादा कैलोरी वाले त्योहार के खाने के बाद डाइट को बैलेंस करने में मदद करते हैं.

    नारियल पानी पिएं

    वैसे बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए आप नारियल पानी को पी सकते हैं. इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स काफी होते हैं जिनकी वजह से बॉडी नेचुरली हाइड्रेट रहती है. इसके अलावा आप हर्बल टी को पी सकते हैं. अदरक, सौंफ और जीरा जैसी देसी चीजों का पानी तैयार करें और हर्बल ड्रिंक को सिप-सिप करके पिएं. वैसे इन्हें टॉक्सिन्स निकालने वाली जादुई ड्रिंक मान लेना सही नहीं है.

    सैर है सबसे जरूरी

    खानपान का ध्यान रखने के अलावा कुछ देर की सैर भी करनी चाहिए. ऐसा करने से शरीर हल्का महसूस करता है और मीठी-नमकीन चीजें आसानी से पचने लगती है. त्योहार वाले दिन भले ही जमकर खाया हो लेकिन वॉक शरीर को रिलैक्स फील करा सकती है. वैसे एक दिन की सैर में बदलाव आना मुश्किल है, इसलिए रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें. 21 दिन बाद आप शरीर में कई बड़े बदलाव देख पाएंगे.

    बता दें कि डिटॉक्स शब्द के साथ ये स्पष्ट रखना बेहतर है कि कोई एक चीज शरीर से चीनी को जादुई तरीके से बाहर नहीं निकालती. पर ये चीजें शरीर को हाइड्रेटेड रखने, ब्लड शुगर स्पाइक के बाद संतुलित डाइट पर लौटने और पाचन को बेहतर रखने में मदद कर सकती हैं.

  • आपका पैसा- टाइम पर EMI नहीं चुकाया तो क्या होगा:RBI ने रिकवरी रूल्स में किया बदलाव, जानिए अब बैंक आपके साथ क्या नहीं कर सकता

    आजकल कोई भी लोन लेना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। लेकिन किसी वजह से EMI मिस हो जाए या लोन डिफॉल्ट हो जाए, तो बैंक ग्राहक के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है। इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर कई सवाल रहते हैं। एक जरूरी सवाल यह है कि क्या बैंक या रिकवरी एजेंट लोन की रकम वसूलने के लिए ग्राहक के मोबाइल, लैपटॉप या दूसरे डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल कर सकते हैं? इन्हीं सवालों के बीच हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन रिकवरी से जुड़े नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों का मकसद ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा करना और लेंडर्स की जिम्मेदारियां स्पष्ट करना है। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में RBI के नए रिकवरी रूल्स पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- हाल ही में RBI ने लोन डिफॉल्ट को लेकर एक नया फैसला लिया है। इसकी पूरी डिटेल बताएं? जवाब- RBI ने लोन डिफाॅल्ट और रिकवरी से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पहले बैंक लोन वसूली के लिए ग्राहकों को किन तरीकों से परेशान करते थे? जवाब- बैंक और लोन लेंडिंग कंपनियां लोन रिकवरी के लिए ये तरीके आजमाती थीं- 1. फोन को दूर से लॉक कर देना। ग्राहक फोन हाथ में होने पर भी उसे यूज नहीं कर पाते थे। अब क्या होगा: अब फोन लॉक नहीं किया जा सकेगा। 2. डिवाइस की कुछ सुविधाएं बंद कर देना। यह तरीका लोन पर डिवाइस लेने पर इस्तेमाल किया जाता था। अब क्या होगा: RBI ने अब इस तरह के तकनीकी प्रतिबंधों के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया तय की है। 3. बार-बार रिकवरी कॉल करना रिकवरी के लिए ग्राहकों को बार-बार फोन किया जाता था। अब क्या होगा: RBI के नए नियमों में अब रिकवरी कॉल का रिकॉर्ड रखने और कॉल रिकॉर्ड करने का प्रावधान है। 4. लगातार दबाव बनाना और धमकाना रिकवरी एजेंट ग्राहकों को डराते-धमकाते और आक्रामक व्यवहार करते थे। अब क्या होगा: RBI ने साफ किया है कि रिकवरी का तरीका ग्राहक के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ नहीं होना चाहिए। 5. परिवार या दूसरे लोगों से संपर्क करना रिकवरी एजेंट परिवार, दोस्तों को फोन कर ग्राहक पर दबाव बनाते थे। अब क्या होगा: नए नियमों में ऐसे उत्पीड़न पर ज्यादा स्पष्ट सीमाएं लगाई गई हैं। 6. फोन के पर्सनल डेटा का इस्तेमाल अब तक डिवाइस में मौजूद कॉन्टैक्ट, एसएमएस, कॉल लॉग, फोटो और लोकेशन हिस्ट्री जैसे डेटा को रिकवरी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अब क्या होगा: बैंक ने साफ किया है कि ये पर्सनल डेटा लोन रिकवरी के लिए यूज नहीं किया जा सकता। सवाल- यह नियम किस तरह के लोन पर लागू होगा? जवाब- यह नियम उन सभी लोन पर लागू होगा, जिनकी रिकवरी RBI के रेगुलेटेड बैंक, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) और अन्य वित्तीय संस्थान करते हैं। सवाल- RBI को ये फैसला लेने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- लोन रिकवरी को लेकर पहले क्या स्थिति थी? जवाब- पहले इसके लिए बैंक और फाइनेंस कंपनियों के पास सामान्य अधिकार थे। लेकिन डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट और एकसमान नियम नहीं थे। खासकर EMI पर खरीदे गए मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप के मामलों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाते थे। इसी वजह से RBI ने अब इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सवाल- क्या अब किसी भी स्थिति में मोबाइल या लैपटॉप लॉक नहीं किया जा सकेगा? जवाब- नहीं, RBI के नए नियमों में कुछ अपवाद भी हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की कुछ सर्विसेस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके लिए RBI ने स्पष्ट शर्तें तय की हैं। सवाल- अगर फोन या लैपटॉप EMI पर खरीदा गया हो तो क्या होगा? जवाब- डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक या फाइनेंस कंपनी उसकी कुछ सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा सकती है। हालांकि ऐसा तभी किया जा सकेगा, जब इसकी शर्त लोन एग्रीमेंट में पहले से स्पष्ट रूप से शामिल हो और RBI के तय नियमों का पालन किया जाए। इसके अलावा डिवाइस पर प्रतिबंध लगाने से पहले ग्राहक को नोटिस देना भी जरूरी होगा। सवाल- डिवाइस लॉक होने पर कौन-सी सुविधाएं चालू रहनी चाहिए? जवाब- RBI के मुताबिक, अगर किसी डिवाइस पर प्रतिबंध लगाया भी जाता है, तब भी कुछ जरूरी सुविधाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- लोन डिफॉल्ट से रिकवरी के लिए अब बैंकों के पास क्या अधिकार होंगे? जवाब- RBI के नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि बैंक या फाइनेंस कंपनियां लोन की वसूली नहीं कर सकेंगी। उन्हें अब भी बकाया राशि वसूलने के लिए कई अधिकार प्राप्त रहेंगे। लेकिन यह प्रक्रिया तय नियमों और ग्राहक के अधिकारों को ध्यान में रखकर पूरी करनी होगी। लोन रिकवरी के लिए बैंक के पास कौन-से अधिकार हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या इस फैसले का मतलब ये है कि EMI न भरने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी? जवाब- नहीं, RBI के नए नियम सिर्फ लोन रिकवरी के तरीके तय करते हैं, लोन चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं करते। अगर कोई व्यक्ति EMI नहीं भरता है, तो उसे डिफॉल्टर माना जा सकता है और उसके खिलाफ नियमानुसार रिकवरी प्रक्रिया जारी रह सकती है। सवाल- EMI न भरने पर ग्राहक को क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- इससे सिर्फ पेनल्टी ही नहीं लगती, बल्कि क्रेडिट हिस्ट्री पर भी इसका असर पड़ता है। लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक या फाइनेंस कंपनी रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है। ग्राफिक में देखिए EMI न भरने पर ग्राहक को क्या नुकसान हो सकते हैं- सवाल- लोन की EMI नहीं चुकाने पर क्या बैंक घर, कार या दूसरी संपत्ति जब्त कर सकता है? जवाब- हां, लेकिन यह लोन के प्रकार पर निर्भर करता है। अगर आपने होम लोन, कार लोन या किसी अन्य सिक्योर्ड लोन के बदले कोई संपत्ति गिरवी रखी है, तो लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत उस संपत्ति पर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, बैंक तुरंत घर या कार जब्त नहीं कर सकते। इसके लिए नोटिस देने जैसी अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है। वहीं पर्सनल लोन जैसे इनसिक्योर्ड लोन में बैंक के पास कोई गिरवी संपत्ति नहीं होती। ऐसे मामलों में बैंक रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं, लेकिन सीधे किसी संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते। सवाल- लोन लेने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- लोन लेते समय सिर्फ EMI की रकम नहीं, बल्कि उसकी पूरी जिम्मेदारी को समझना भी जरूरी है। समय पर भुगतान और सही वित्तीय योजना से डिफॉल्ट की स्थिति से बचा जा सकता है। ग्राफिक में देखिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए- RBI का यह फैसला याद दिलाता है कि लोन लेते समय सिर्फ रकम और EMI नहीं, बल्कि उससे जुड़ी शर्तों को समझना भी जरूरी है। जागरूक उधारकर्ता अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है और अनावश्यक विवादों से बच सकता है। ***** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………… ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- इंवेस्टमेंट के 7 आसान नियम:एक्सपर्ट से समझें पैसा कब होगा डबल, कितना करें निवेश और कितना रिस्क लेना सही हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा समय के साथ दोगुना, तीन गुना या चार गुना हो जाए। इसके लिए कुछ लोग जल्दबाजी में बिना प्लानिंग के निवेश शुरू कर देते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि उन्हें अलग-अलग जगहों से अलग-अलग सलाह मिलती है। पूरी खबर पढ़ें…
  • आपका पैसा- टाइम पर EMI नहीं चुकाया तो क्या होगा:RBI ने रिकवरी रूल्स में किया बदलाव, जानिए अब बैंक आपके साथ क्या नहीं कर सकता

    आजकल कोई भी लोन लेना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। लेकिन किसी वजह से EMI मिस हो जाए या लोन डिफॉल्ट हो जाए, तो बैंक ग्राहक के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है। इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर कई सवाल रहते हैं। एक जरूरी सवाल यह है कि क्या बैंक या रिकवरी एजेंट लोन की रकम वसूलने के लिए ग्राहक के मोबाइल, लैपटॉप या दूसरे डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल कर सकते हैं? इन्हीं सवालों के बीच हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन रिकवरी से जुड़े नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों का मकसद ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा करना और लेंडर्स की जिम्मेदारियां स्पष्ट करना है। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में RBI के नए रिकवरी रूल्स पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- हाल ही में RBI ने लोन डिफॉल्ट को लेकर एक नया फैसला लिया है। इसकी पूरी डिटेल बताएं? जवाब- RBI ने लोन डिफाॅल्ट और रिकवरी से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पहले बैंक लोन वसूली के लिए ग्राहकों को किन तरीकों से परेशान करते थे? जवाब- बैंक और लोन लेंडिंग कंपनियां लोन रिकवरी के लिए ये तरीके आजमाती थीं- 1. फोन को दूर से लॉक कर देना। ग्राहक फोन हाथ में होने पर भी उसे यूज नहीं कर पाते थे। अब क्या होगा: अब फोन लॉक नहीं किया जा सकेगा। 2. डिवाइस की कुछ सुविधाएं बंद कर देना। यह तरीका लोन पर डिवाइस लेने पर इस्तेमाल किया जाता था। अब क्या होगा: RBI ने अब इस तरह के तकनीकी प्रतिबंधों के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया तय की है। 3. बार-बार रिकवरी कॉल करना रिकवरी के लिए ग्राहकों को बार-बार फोन किया जाता था। अब क्या होगा: RBI के नए नियमों में अब रिकवरी कॉल का रिकॉर्ड रखने और कॉल रिकॉर्ड करने का प्रावधान है। 4. लगातार दबाव बनाना और धमकाना रिकवरी एजेंट ग्राहकों को डराते-धमकाते और आक्रामक व्यवहार करते थे। अब क्या होगा: RBI ने साफ किया है कि रिकवरी का तरीका ग्राहक के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ नहीं होना चाहिए। 5. परिवार या दूसरे लोगों से संपर्क करना रिकवरी एजेंट परिवार, दोस्तों को फोन कर ग्राहक पर दबाव बनाते थे। अब क्या होगा: नए नियमों में ऐसे उत्पीड़न पर ज्यादा स्पष्ट सीमाएं लगाई गई हैं। 6. फोन के पर्सनल डेटा का इस्तेमाल अब तक डिवाइस में मौजूद कॉन्टैक्ट, एसएमएस, कॉल लॉग, फोटो और लोकेशन हिस्ट्री जैसे डेटा को रिकवरी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अब क्या होगा: बैंक ने साफ किया है कि ये पर्सनल डेटा लोन रिकवरी के लिए यूज नहीं किया जा सकता। सवाल- यह नियम किस तरह के लोन पर लागू होगा? जवाब- यह नियम उन सभी लोन पर लागू होगा, जिनकी रिकवरी RBI के रेगुलेटेड बैंक, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) और अन्य वित्तीय संस्थान करते हैं। सवाल- RBI को ये फैसला लेने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- लोन रिकवरी को लेकर पहले क्या स्थिति थी? जवाब- पहले इसके लिए बैंक और फाइनेंस कंपनियों के पास सामान्य अधिकार थे। लेकिन डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट और एकसमान नियम नहीं थे। खासकर EMI पर खरीदे गए मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप के मामलों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाते थे। इसी वजह से RBI ने अब इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सवाल- क्या अब किसी भी स्थिति में मोबाइल या लैपटॉप लॉक नहीं किया जा सकेगा? जवाब- नहीं, RBI के नए नियमों में कुछ अपवाद भी हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की कुछ सर्विसेस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके लिए RBI ने स्पष्ट शर्तें तय की हैं। सवाल- अगर फोन या लैपटॉप EMI पर खरीदा गया हो तो क्या होगा? जवाब- डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक या फाइनेंस कंपनी उसकी कुछ सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा सकती है। हालांकि ऐसा तभी किया जा सकेगा, जब इसकी शर्त लोन एग्रीमेंट में पहले से स्पष्ट रूप से शामिल हो और RBI के तय नियमों का पालन किया जाए। इसके अलावा डिवाइस पर प्रतिबंध लगाने से पहले ग्राहक को नोटिस देना भी जरूरी होगा। सवाल- डिवाइस लॉक होने पर कौन-सी सुविधाएं चालू रहनी चाहिए? जवाब- RBI के मुताबिक, अगर किसी डिवाइस पर प्रतिबंध लगाया भी जाता है, तब भी कुछ जरूरी सुविधाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- लोन डिफॉल्ट से रिकवरी के लिए अब बैंकों के पास क्या अधिकार होंगे? जवाब- RBI के नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि बैंक या फाइनेंस कंपनियां लोन की वसूली नहीं कर सकेंगी। उन्हें अब भी बकाया राशि वसूलने के लिए कई अधिकार प्राप्त रहेंगे। लेकिन यह प्रक्रिया तय नियमों और ग्राहक के अधिकारों को ध्यान में रखकर पूरी करनी होगी। लोन रिकवरी के लिए बैंक के पास कौन-से अधिकार हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या इस फैसले का मतलब ये है कि EMI न भरने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी? जवाब- नहीं, RBI के नए नियम सिर्फ लोन रिकवरी के तरीके तय करते हैं, लोन चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं करते। अगर कोई व्यक्ति EMI नहीं भरता है, तो उसे डिफॉल्टर माना जा सकता है और उसके खिलाफ नियमानुसार रिकवरी प्रक्रिया जारी रह सकती है। सवाल- EMI न भरने पर ग्राहक को क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- इससे सिर्फ पेनल्टी ही नहीं लगती, बल्कि क्रेडिट हिस्ट्री पर भी इसका असर पड़ता है। लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक या फाइनेंस कंपनी रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है। ग्राफिक में देखिए EMI न भरने पर ग्राहक को क्या नुकसान हो सकते हैं- सवाल- लोन की EMI नहीं चुकाने पर क्या बैंक घर, कार या दूसरी संपत्ति जब्त कर सकता है? जवाब- हां, लेकिन यह लोन के प्रकार पर निर्भर करता है। अगर आपने होम लोन, कार लोन या किसी अन्य सिक्योर्ड लोन के बदले कोई संपत्ति गिरवी रखी है, तो लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत उस संपत्ति पर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, बैंक तुरंत घर या कार जब्त नहीं कर सकते। इसके लिए नोटिस देने जैसी अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है। वहीं पर्सनल लोन जैसे इनसिक्योर्ड लोन में बैंक के पास कोई गिरवी संपत्ति नहीं होती। ऐसे मामलों में बैंक रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं, लेकिन सीधे किसी संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते। सवाल- लोन लेने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- लोन लेते समय सिर्फ EMI की रकम नहीं, बल्कि उसकी पूरी जिम्मेदारी को समझना भी जरूरी है। समय पर भुगतान और सही वित्तीय योजना से डिफॉल्ट की स्थिति से बचा जा सकता है। ग्राफिक में देखिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए- RBI का यह फैसला याद दिलाता है कि लोन लेते समय सिर्फ रकम और EMI नहीं, बल्कि उससे जुड़ी शर्तों को समझना भी जरूरी है। जागरूक उधारकर्ता अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है और अनावश्यक विवादों से बच सकता है। ***** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………… ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- इंवेस्टमेंट के 7 आसान नियम:एक्सपर्ट से समझें पैसा कब होगा डबल, कितना करें निवेश और कितना रिस्क लेना सही हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा समय के साथ दोगुना, तीन गुना या चार गुना हो जाए। इसके लिए कुछ लोग जल्दबाजी में बिना प्लानिंग के निवेश शुरू कर देते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि उन्हें अलग-अलग जगहों से अलग-अलग सलाह मिलती है। पूरी खबर पढ़ें…
  • जरूरत की खबर- FDA ने रोकी धतूरे की ऑनलाइन बिक्री:जानिए यह कितना खतरनाक, अगर गलती से खा लिया तो तुरंत क्या करें

    कर्नाटक के फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अमेजन, स्विगी, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। जांच में पता चला कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे के फल और बीज खाने-पीने के प्रोडक्ट्स की कैटेगरी में बेचे जा रहे थे। मामला तब सामने आया, जब एक महिला की मां ने धतूरे को सामान्य फल समझकर खा लिया और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद फूड सेफ्टी अधिकारियों ने जांच शुरू की। दरअसल, धतूरा एक टॉक्सिक प्लांट है। इसके सेवन से गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ऐसे में इसके बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में धतूरा पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. एम.के सिंह, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- धतूरा क्या है? जवाब- धतूरा एक टॉक्सिक प्लांट है, जो भारत समेत दुनिया के कई देशों में उगता है। बड़े सफेद या बैंगनी फूल और कांटेदार फल इसकी पहचान हैं। यह नाइटशेड (Solanaceae) परिवार का सदस्य है, जिसमें टमाटर, आलू और बैंगन जैसे पौधे भी शामिल हैं। हालांकि, धतूरा इन पौधों से अलग है, क्योंकि इसके बीज, पत्तियां, फूल, फल और जड़, सभी में जहरीले रसायन पाए जाते हैं। सवाल- इसे जहरीला क्यों माना जाता है? जवाब- धतूरे के सभी हिस्सों में जहरीले केमिकल होते हैं। ये ब्रेन और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इसलिए धतूरे को जहरीला पौधा माना जाता है। सवाल- धतूरे को खाने की चीज बताकर ऑनलाइन बेचने का पूरा मामला क्या है? क्या ये सिर्फ मिस्टेक है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- क्या यह सिर्फ गलती थी? फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने इसे साधारण गलती नहीं माना है। डिपार्टमेंट का कहना है कि धतूरा एक जहरीला पौधा है। अगर कोई प्लेटफॉर्म उसे खाने वाले प्रोडक्ट की तरह दिखाता है, तो इससे लोगों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है। इसी वजह से अधिकारियों ने केवल लिस्टिंग हटाने के बजाय लाइसेंस निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई भी की है। सवाल- धतूरे में कौन-से जहरीले तत्व होते हैं? जवाब- धतूरे में ‘ट्रोपेन एल्कलॉइड्स’ नाम के जहरीले केमिकल कंपाउंड्स होते हैं। ये केमिकल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं और धतूरे की टॉक्सिसिटी के लिए जिम्मेदार होते हैं। ग्राफिक में इस समूह के सभी जहरीले तत्व देखिए- सवाल- अगर कोई गलती से धतूरा खा ले सेहत पर क्या असर होगा? जवाब- धतूरा खाने के बाद उसके जहरीले केमिकल पेट और आंतों से ब्लड में पहुंच जाते हैं। इसके बाद ये पूरे शरीर में फैलकर नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने लगते हैं। इसे थोड़ा विस्तार से समझिए- 1. जहर ब्लड में पहुंचता है 2. शरीर के सामान्य सिग्नल गड़बड़ होने लगते हैं 3. ब्रेन पर असर शुरू होता है 4. हार्ट और शरीर पर असर बढ़ता है 5. गंभीर टॉक्सिसिटी सवाल- धतूरा खाने पर कौन-से शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं? जवाब- धतूरा टॉक्सिसिटी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति ने धतूरे की कितनी मात्रा खाई है। उसके शरीर में जहर कितना फैल चुका है। ग्राफिक में सभी लक्षण देखिए- सवाल- धतूरा खाने के कितनी देर बाद लक्षण दिख सकते हैं? जवाब- आमतौर पर इसके शुरुआती लक्षण 30 मिनट से 2 घंटे के भीतर दिखने शुरू हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इन्हें उभरने में इससे ज्यादा समय भी लग सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति ने धतूरे का कौन-सा हिस्सा खाया है, कितनी मात्रा में खाया है और उसकी उम्र और हेल्थ कंडीशन कैसी है। सवाल- क्या धतूरा जानलेवा भी हो सकता है? जवाब- हां, इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें मौजूद जहरीले रसायनों की मात्रा का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। यही कारण है कि डॉक्टर धतूरा टॉक्सिसिटी के हर केस को मेडिकल इमरजेंसी मानते हैं। सवाल- अगर कोई गलती से धतूरा खा ले तो तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- इसे मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए। घरेलू इलाज या लक्षणों के दिखने का इंतजार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। क्या करना चाहिए और क्या नहीं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या धतूरे को छूने से भी नुकसान हो सकता है? जवाब- पौधे को छूने के बाद अगर हाथ धोए बिना आंख, नाक या मुंह को छू लिया जाए तो समस्या हो सकती है। सवाल- क्या आयुर्वेद या पारंपरिक चिकित्सा में धतूरे का कोई इस्तेमाल है? जवाब- हां, आयुर्वेद में धतूरे का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे सामान्य जड़ी-बूटी की तरह नहीं माना जाता। ‘जर्नल ऑफ आयुर्वेदिक एंड इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंस’ (JIMS) में पब्लिश एक रिव्यू के मुताबिक, आयुर्वेद में धतूरे को सेमी-पॉइजनस कैटेगरी में रखा गया है। यानी यह ऐसा पदार्थ है, जिसमें औषधीय गुण भी हैं और विषैले गुण भी। इसके पत्ते, फूल, बीज और जड़ का यूज अलग-अलग आयुर्वेदिक दवाओं में होता है। हालांकि, आयुर्वेद में भी धतूरे का उपयोग बहुत सावधानी से किया जाता है। पहले विशेष प्रक्रियाओं से इसकी टॉक्सिसिटी कम की जाती है। साथ ही इसकी मात्रा का सख्ती से पालन किया जाता है, क्योंकि थोड़ी सी चूक भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। सवाल- किसी जहरीले पौधे को फूड सप्लीमेंट बताकर बेचने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- ऐसे मामलों में फूड सेफ्टी अधिकारी जांच कर सकते हैं और कई सख्त कदम उठा सकते हैं, जैसेकि- सवाल- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसा प्रोडक्ट मिलने पर ग्राहक इसकी शिकायत कहां कर सकते हैं? जवाब- ग्राहक इसकी शिकायत सीधे FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल पैकेज्ड फूड, ऑनलाइन एग्रीगेटर और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़ी शिकायतों के लिए बनाया गया है। ग्राहक शिकायत के साथ प्रोडक्ट की फोटो, स्क्रीनशॉट, बिल या अन्य सबूत भी अपलोड कर सकते हैं। ***** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- 4,000 किलो मिलावटी खोया जब्त:ऐसे करें असली खोया की पहचान, मिठाई खरीदते समय बरतें ये 8 जरूरी सावधानियां हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी खोया के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की। कानपुर, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद से अब तक करीब 4,000 किलो मिलावटी खोया जब्त करके उसे नष्ट किया जा चुका है। पूरी खबर पढ़ें…
  • डैंड्रफ और हेयर फॉल एक साथ हो रहा है तो क्या करें? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें

    रोज हमारे बाल गिरते हैं लेकिन अगर ऐसा ज्यादा हो तो ये हेयर फॉल कहलाता है. परेशानी या चिंता जब और बढ़ जाती है जब डैंड्रफ और हेयर फॉल एक साथ हो रहे हो. ये क्यों होता है, इस कंडीशन में क्या करना चाहिए, इस पर टीवी9 ने डॉक्टर आरजू पाहवा (कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, कैलाश दीपक हॉस्पिटल) से बातचीत की. डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर आपको एक ही समय पर डैंड्रफ और हेयर फॉल दोनों हो रहे हैं, तो सबसे पहले मैं यही कहूंगी कि घबराने की जरूरत नहीं है और यह मानकर न चलें कि एक ही समस्या दूसरी की वजह है.

    डैंड्रफ अपने आप में आमतौर पर हमेशा के लिए बाल झड़ने का कारण नहीं बनता. हालांकि, जब स्कैल्प में बहुत ज्यादा खुजली होती है, तो हम बार बार उसे खुजलाने लगते हैं. इससे स्कैल्प में जलन और सूजन हो सकती है और ज्यादा गंभीर मामलों में बालों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बाल ज्यादा झड़ सकते हैं.

    सबसे पहले डैंड्रफ को करें कंट्रोल

    इसलिए सबसे पहले हमें डैंड्रफ को कंट्रोल करना जरूरी है और उससे भी ज्यादा जरूरी है यह समझना कि इसकी वजह क्या है. जो चीज सामान्य डैंड्रफ जैसी दिख रही है, वह कभी कभी सेबोरिक डर्मेटाइटिस भी हो सकती है. यह स्किन की एक ऐसी समस्या है जिसमें स्कैल्प में खुजली, पपड़ी और कभी कभी चिपचिपापन भी हो सकता है. इसके अलावा स्कैल्प सोरायसिस, एक्जिमा और फंगल इंफेक्शन जैसी दूसरी समस्याएं भी डैंड्रफ जैसी दिख सकती हैं और इनके साथ हेयर फॉल भी हो सकता है.

    अगर डैंड्रफ हल्का है, तो आप सेलेनियम या जिंक जैसे इंग्रीडिएंट वाला ओवर द काउंटर एंटी डैंड्रफ शैंपू इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ लोगों को केटोकोनाजोल वाला एंटी फंगल शैंपू भी जरूरत पड़ सकता है. लेकिन अगर डैंड्रफ लगातार बना हुआ है या बहुत ज्यादा है, तो मैं डॉक्टर से सलाह लेने की बात कहूंगी. शैंपू को उसके निर्देश के अनुसार इस्तेमाल करें और स्कैल्प पर उसे काम करने के लिए जितनी देर रखने को कहा गया है, उतनी देर जरूर रखें.

    भूल से भी न करें ये गलतियां

    कृपया स्कैल्प को खुजलाने, बालों को जोर से ब्रश करने, बालों को बार बार खींचने या बहुत टाइट हेयरस्टाइल बनाने से बचें, क्योंकि इससे स्कैल्प में और जलन हो सकती है और बालों को नुकसान पहुंच सकता है. अगर बाल गुच्छों में झड़ रहे हैं, खुजली बहुत ज्यादा है, या डैंड्रफ ठीक होने के बाद भी हेयर फॉल जारी है, तो मैं आपको डर्मेटोलॉजिस्ट को दिखाने की सलाह दूंगी. ऐसे में हमें हेयर फॉल की कोई दूसरी वजह भी देखनी होगी, बजाय इसके कि हर बार इसका कारण सिर्फ डैंड्रफ को मान लिया जाए.

  • डैंड्रफ और हेयर फॉल एक साथ हो रहा है तो क्या करें? डर्माटोलॉजिस्ट से जानें

    रोज हमारे बाल गिरते हैं लेकिन अगर ऐसा ज्यादा हो तो ये हेयर फॉल कहलाता है. परेशानी या चिंता जब और बढ़ जाती है जब डैंड्रफ और हेयर फॉल एक साथ हो रहे हो. ये क्यों होता है, इस कंडीशन में क्या करना चाहिए, इस पर टीवी9 ने डॉक्टर आरजू पाहवा (कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, कैलाश दीपक हॉस्पिटल) से बातचीत की. डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर आपको एक ही समय पर डैंड्रफ और हेयर फॉल दोनों हो रहे हैं, तो सबसे पहले मैं यही कहूंगी कि घबराने की जरूरत नहीं है और यह मानकर न चलें कि एक ही समस्या दूसरी की वजह है.

    डैंड्रफ अपने आप में आमतौर पर हमेशा के लिए बाल झड़ने का कारण नहीं बनता. हालांकि, जब स्कैल्प में बहुत ज्यादा खुजली होती है, तो हम बार बार उसे खुजलाने लगते हैं. इससे स्कैल्प में जलन और सूजन हो सकती है और ज्यादा गंभीर मामलों में बालों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बाल ज्यादा झड़ सकते हैं.

    सबसे पहले डैंड्रफ को करें कंट्रोल

    इसलिए सबसे पहले हमें डैंड्रफ को कंट्रोल करना जरूरी है और उससे भी ज्यादा जरूरी है यह समझना कि इसकी वजह क्या है. जो चीज सामान्य डैंड्रफ जैसी दिख रही है, वह कभी कभी सेबोरिक डर्मेटाइटिस भी हो सकती है. यह स्किन की एक ऐसी समस्या है जिसमें स्कैल्प में खुजली, पपड़ी और कभी कभी चिपचिपापन भी हो सकता है. इसके अलावा स्कैल्प सोरायसिस, एक्जिमा और फंगल इंफेक्शन जैसी दूसरी समस्याएं भी डैंड्रफ जैसी दिख सकती हैं और इनके साथ हेयर फॉल भी हो सकता है.

    अगर डैंड्रफ हल्का है, तो आप सेलेनियम या जिंक जैसे इंग्रीडिएंट वाला ओवर द काउंटर एंटी डैंड्रफ शैंपू इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ लोगों को केटोकोनाजोल वाला एंटी फंगल शैंपू भी जरूरत पड़ सकता है. लेकिन अगर डैंड्रफ लगातार बना हुआ है या बहुत ज्यादा है, तो मैं डॉक्टर से सलाह लेने की बात कहूंगी. शैंपू को उसके निर्देश के अनुसार इस्तेमाल करें और स्कैल्प पर उसे काम करने के लिए जितनी देर रखने को कहा गया है, उतनी देर जरूर रखें.

    भूल से भी न करें ये गलतियां

    कृपया स्कैल्प को खुजलाने, बालों को जोर से ब्रश करने, बालों को बार बार खींचने या बहुत टाइट हेयरस्टाइल बनाने से बचें, क्योंकि इससे स्कैल्प में और जलन हो सकती है और बालों को नुकसान पहुंच सकता है. अगर बाल गुच्छों में झड़ रहे हैं, खुजली बहुत ज्यादा है, या डैंड्रफ ठीक होने के बाद भी हेयर फॉल जारी है, तो मैं आपको डर्मेटोलॉजिस्ट को दिखाने की सलाह दूंगी. ऐसे में हमें हेयर फॉल की कोई दूसरी वजह भी देखनी होगी, बजाय इसके कि हर बार इसका कारण सिर्फ डैंड्रफ को मान लिया जाए.

  • जरूरत की खबर- रक्षाबंधन पर खेलें फन फैमिली गेम्स:भाई-बहन से लेकर मम्मी–पापा, दादा-दादी को भी करें शामिल, राखी को बनाएं यादगार

    रक्षाबंधन के मौके पर पूरा परिवार एक साथ जुटता है। भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, बुआ, चाचा और अन्य रिश्तेदारों से घर गुलजार हो जाता है। जब पूरा परिवार साथ हो तो क्यों न कुछ मजेदार फन गेम्स हो जाएं। इसलिए इस राखी हम आपके लिए कुछ ऐसे फन गेम्स लेकर आए हैं, जिन्हें बच्चे, युवा और बुजुर्ग समेत परिवार का हर सदस्य साथ मिलकर खेल सकता है। ये गेम्स न सिर्फ हंसी-ठिठोली और मनोरंजन का मौका देंगे, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए पलों को यादगार बना देंगे। तो चलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करते हैं– फैमिली फन गेम की। फैमिली के लिए फन गेम्स पूरे परिवार को एक साथ शामिल करना हो तो डंब शराड्स, पिक्शनरी, अंताक्षरी या पासिंग द पार्सल जैसे गेम्स अच्छे ऑप्शन हैं। इसे एक-एक करके समझिए- डंब शराड्स पिक्शनरी पासिंग द पार्सल इन गेम्स की खासियत ये है कि इन्हें परिवार के अलग-अलग उम्र के लोग एक साथ खेल सकते हैं। ग्राफिक में फन फैमिली गेम्स की लिस्ट देखिए- परफेक्ट गेम कैसे चुनें? गेम चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें- भाई-बहन के बीच मजेदार टक्कर रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को सेलिब्रेट करने का दिन है। इसलिए कुछ गेम्स उनके बीच रखें। ‘हू नोज मी बेटर’ इसका एक बढ़िया विकल्प है। इसमें एक खिलाड़ी अपने बारे में सवाल पूछता है और बाकी लोग उनके जवाब लिखते हैं। जिसके सबसे ज्यादा जवाब सही होते हैं, वह विजेता बनता है। सवाल कुछ इस तरह के हो सकते हैं- हर सही जवाब के लिए एक अंक दें। आखिर में सबसे ज्यादा अंक पाने वाला खिलाड़ी जीत जाता है। रैपिड फायर भी अच्छा विकल्प है। इसमें एक-दूसरे से लगातार छोटे-छोटे सवाल पूछे जाते हैं और जवाब देने के लिए 5-10 सेकेंड का समय दिया जाता है। कम समय में सबसे ज्यादा सही जवाब देने वाला खिलाड़ी विजेता होता है। ग्राफिक में भाई-बहन के लिए फन गेम्स देखिए- घर पर कैसे खेलें ‘ट्रेजर हंट’? अगर परिवार में बच्चे और युवा ज्यादा हैं तो रक्षाबंधन पर ट्रेजर हंट गेम खेला जा सकता है। इसमें- उदाहरण के लिए, पहला क्लू डाइनिंग टेबल के पास रखा जा सकता है। उस पर लिखा हो- “जहां पूरा परिवार रोज साथ बैठकर खाना खाता है, अगला क्लू वहीं मिलेगा।” बचपन की तस्वीरों से यादें होंगी ताजा रक्षाबंधन पर ‘गेस द चाइल्डहुड फोटो’ भी खेल सकते हैं। परिवार के सदस्यों की बचपन की तस्वीरें इकट्ठी करें और एक-एक करके सभी को दिखाएं। बाकी लोग अनुमान लगाएं कि तस्वीर किसकी है। इस गेम को और मजेदार बनाने के लिए तस्वीर के साथ छोटे-छोटे सवाल भी जोड़े जा सकते हैं। जैसेकि- इस गेम के साथ परिवार की पुरानी यादें भी ताजा होंगी। ‘वन-मिनट गेम्स’ से बढ़ाएं कम्पटीशन अगर परिवार में ज्यादा लोग हैं तो ‘वन मिनट गेम्स’ अच्छे विकल्प हैं। इनमें हर खिलाड़ी को एक छोटा टास्क दिया जाता है, जिसे उसे एक मिनट के अंदर पूरा करना होता है। ग्राफिक में वन मिनट गेम्स देखिए- इनमें से ऐसे गेम चुनें, जिनमें चोट लगने का जोखिम न हो। छोटे बच्चों को निगरानी में खेलने को कहें। छोटे बच्चों के लिए मजेदार गेम्स छोटे बच्चों के लिए ऐसे खेल चुनें, जिनमें ज्यादा कठिन नियम न हों। ‘कलर हंट’ इसका एक अच्छा विकल्प है। ग्राफिक में छोटे बच्चों के लिए गेम्स देखिए- बुजुर्गों संग पुरानी यादें करें ताजा बुजुर्गों के लिए याददाश्त, संगीत और बातचीत से जुड़े गेम चुने जा सकते हैं। इसके लिए परिवार के किसी सदस्य से जुड़ी यादों को गेम का हिस्सा बना सकते हैं। बुजुर्ग से ये सवाल पूछ सकते हैं- इस तरह बच्चे और युवा भी परिवार की पुरानी कहानियों के बारे में जान पाएंगे। बुजुर्गों के लिए गेम्स ग्राफिक में देखिए- फैमिली क्विज में पूछें मजेदार और चटपटे सवाल फैमिली क्विज को सामान्य सवालों की जगह परिवार से जुड़े सवालों पर आधारित करें। इससे गेम मजेदार बनेगा। ग्राफिक में फैमिली क्विज के सवाल देखिए- हारने वाले को दें फनी पनिशमेंट गेम में हारने वाले के लिए फनी ‘पनिशमेंट’ भी रखा जा सकता है, लेकिन इसे मजेदार और आसान रखें। ऐसा टास्क न दें, जिससे किसी को असहज महसूस हो। परिवार के सभी सदस्यों की उम्र और सहजता का ध्यान रखें। ग्राफिक में फनी पनिशमेंट आइडियाज देखिए- गेम्स का मकसद जीतना नहीं, साथ समय बिताना फैमिली गेम्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनसे परिवार के सदस्यों को एक साथ समय बिताने का मौका मिलता है। खासकर जब बच्चे और युवा मोबाइल या दूसरे स्क्रीन में ज्यादा समय बिताते हैं, तब ऐसे गेम कुछ समय के लिए सभी का ध्यान एक-दूसरे की तरफ ला सकते हैं। ग्राफिक में फैमिली गेम्स के सभी फायदे देखिए- आखिर में बनाएं ‘फैमिली विनर’ अगर कई गेम्स खेले जा रहे हैं तो हर गेम का अलग विजेता चुनने की बजाय पॉइंट सिस्टम अपनाएं। गेम जीतने वाले को 5 पॉइंट, दूसरे स्थान पर आने वाले को 3 और तीसरे स्थान पर आने वाले को 1 पॉइंट दें। सभी गेम्स खत्म होने पर सबसे ज्यादा पॉइंट हासिल करने वाले को ‘फैमिली विनर’ का टाइटल दें। इसके लिए महंगे गिफ्ट की जरूरत नहीं है। हाथ से बनाया गया सर्टिफिकेट, चॉकलेट या परिवार की तरफ से कोई मजेदार टाइटल भी दे सकते हैं, जैसेकि- रक्षाबंधन सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से तरोताजा करने का मौका है। इस बार महंगे उपहारों से ज्यादा अपना ‘समय’ और ‘खुशियां’ एक-दूसरे को गिफ्ट करें। छोटे-छोटे ये फन गेम्स आपके त्यौहार में वो रंग भर देंगे, जिसकी चमक सालों तक फीकी नहीं पड़ेगी। तो देर किस बात की? इस रक्षाबंधन आप भी मनाइए यादगार राखी! ……………………………… ये खबर भी पढ़ें…
    जरूरत की खबर- इस राखी बिना गैस-ओवन के बनाएं मिठाई:ये 5 मिठाइयां सिर्फ 15 मिनट में होंगी तैयार, शेफ से जानें बनाने का सही तरीका रक्षाबंधन पर घर में मिठाई न हो, ऐसा हो नहीं सकता। लेकिन हर बार पेड़ा, बर्फी, लड्डू या रसगुल्ला बाजार से खरीदकर लाना भी जरूरी नहीं है। अगर इस बार कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो ऐसी मिठाइयां बना सकते हैं, जिनके लिए न गैस जलाने की जरूरत है, न ओवन की। पूरी खबर पढ़ें…
  • मेंटल हेल्थ- 25 साल बाद पेरेंट्स के घर लौटी हूं:यहां मन नहीं लग रहा, अपनी अकेली जिंदगी याद आती है, क्या मैं स्वार्थी हूं

    सवाल- मेरी उम्र 45 साल है। पिछले 25 सालों से मैं घर से दूर रह रही थी। पहले पढ़ाई और फिर जॉब के लिए। एक साल पहले ही मैं अपने होमटाउन में पेरेंट्स के घर में शिफ्ट हुई हूं। लेकिन जैसा मैंने सोचा था, वैसा बिल्कुल फील नहीं हो रहा। मुझे लगा था कि इतने साल बाद घर लौटना अच्छा लगेगा। ज्यादा सुकून और खुशी होगी। लेकिन इसका ठीक उल्टा हुआ है। मुझे ज्यादा तनाव और अकेलापन महसूस होने लगा है। यहां मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता। मुझे अपनी अकेली जिंदगी की याद आती है। बेंगलुरू में मेरा घर और मेरी सिंगल लाइफ। ये बात मैं अपने पेरेंट्स से कैसे कहूं कि मुझे इस घर में रहना अच्छा नहीं लग रहा। मैं अपनी मेंटल हेल्थ को कैसे ठीक रखूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी भावनाएं गलत नहीं हैं। 25 साल तक घर से दूर रहना बहुत लंबा समय होता है। इस दौरान आपने सिर्फ पढ़ाई और नौकरी नहीं की, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी अपने तरीके से जीना सीखा है। आपने तय किया होगा कि कब उठना है, कब खाना है, किससे मिलना है, कब घर से बाहर जाना है, छुट्टी कैसे बितानी है और कितना समय अकेले रहना है। अब एक साल से आप फिर उसी घर में हैं, जहां कभी आपकी जिंदगी की शुरुआत हुई थी। लेकिन इस बीच आप खुद बहुत बदल चुकी हैं। इसलिए घर वही होने के बावजूद आपका अनुभव पहले जैसा नहीं है। यह जरूरी नहीं कि आपका अपने माता-पिता से प्यार कम हो गया है। हो सकता है कि आपको सिर्फ अपनी पुरानी स्वतंत्र जिंदगी की कमी महसूस हो रही हो। घर लौटने की खुशी की जगह तनाव क्यों? लंबे समय तक अकेले रहने के बाद जब कोई व्यक्ति माता-पिता के साथ वापस रहने लगता है तो उसे अपनी आजादी कम होती हुई महसूस हो सकती है। माता-पिता का ये पूछना कि– ये उनका प्यार और चिंता का तरीका हो सकता है। लेकिन इतने साल अपने फैसले खुद लेने के बाद यही बातें आपको रोक-टोक जैसी लग सकती हैं। इसी तरह परिवार के साथ खाना, हर दिन बातचीत करना और अपनी दिनचर्या में दूसरों को शामिल करना माता-पिता के लिए सामान्य हो सकता है। लेकिन आपको अपने अकेलेपन और पर्सनल स्पेस की जरूरत ज्यादा महसूस हो सकती है। इसमें किसी एक को गलत ठहराने की जरूरत नहीं है। दोनों की जरूरतें अलग हो सकती हैं। परेशानी की असल वजह क्या है? पहले यह समझें कि आपको वास्तव में परेशानी किस बात से है, जैसेकि– इन सवालों के जवाब आपको असली समस्या को समझने में मदद करेंगे। माता-पिता से बात कैसे करें? सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता से यह न कहें कि मुझे आपके साथ रहना अच्छा नहीं लगता। ऐसा सुनकर उन्हें लग सकता है कि आप उनके प्यार या घर को अस्वीकार कर रही हैं। इसके बजाय अपनी परेशानी को अपनी जरूरत के रूप में बताएं। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– पहले चिट्‌ठी लिखना भी अच्छा विकल्प अगर आपको लगता है कि आमने-सामने बात करते समय आप अपनी बात ठीक से नहीं कह पाएंगी, तो पहले माता-पिता को एक पत्र भी लिख सकती हैं। यहां मैं आपके लिए एक काल्पनिक खत लिख रहा हूं। आप इसमें अपने मन की बातें लिख सकती हैं। प्यारे मम्मी-पापा, मैं आप दोनों से एक जरूरी बात कहना चाहती हूं। शायद सामने बैठकर मैं इसे ठीक से न कह पाऊं। इसलिए पत्र लिख रही हूं। सबसे पहले मैं आपको बताना चाहती हूं कि इतने साल बाद घर लौटने पर आपने जिस तरह मुझे अपनाया, उसके लिए मैं बहुत आभारी हूं। मुझे पता है कि मेरे लिए आपके मन में बहुत प्यार है और आप चाहते हैं कि मैं आपके साथ रहूं। लेकिन पिछले 25 सालों में मेरी जिंदगी बहुत बदल गई है। मैं लंबे समय तक अकेले रही हूं। मुझे अपने समय, काम, फैसले और निजी जगह को अपने तरीके से संभालने की आदत हो गई है। घर लौटने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं अपनी उस स्वतंत्र जिंदगी को बहुत याद कर रही हूं। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं आपसे दूर होना चाहती हूं। मैं सिर्फ यह समझने की कोशिश कर रही हूं कि आपके साथ रहते हुए अपनी स्वतंत्रता कैसे बनाए रखूं। मैं चाहती हूं कि हम मिलकर कुछ बातें तय करें। जैसे हम कितना समय साथ बिताएं, मुझे कब अपने काम या अकेले रहने का समय चाहिए और किन निजी फैसलों में मुझे अपनी आजादी बनाए रखने की जरूरत है। मैं यह भी समझती हूं कि मेरे घर लौटने के बाद आपको भी अपनी दिनचर्या में बदलाव करना पड़ा होगा। इसलिए मैं सिर्फ अपनी बात नहीं रखना चाहती। मैं आपकी परेशानी भी समझना चाहती हूं। मैं घर छोड़कर आपसे दूर नहीं जाना चाहती। मैं ऐसा रास्ता ढूंढना चाहती हूं, जिसमें हमारा रिश्ता भी अच्छा रहे और मैं अपनी स्वतंत्र पहचान भी बनाए रखूं। प्यार के साथ। घर में तय करें कुछ स्पष्ट सीमाएं माता-पिता के साथ रहने का मतलब यह नहीं है कि आपकी सारी स्वतंत्रता खत्म हो जाए। आप मिलकर कुछ ऐसी बातें तय कर सकते हैं, जिनसे दोनों पक्ष सहज रहें। मसलन– लेकिन सीमाएं तय करते समय सिर्फ अपनी सुविधा के बारे में न सोचें। माता-पिता की भी अपनी दिनचर्या है। 25 सालों में उन्होंने भी अपने घर को अपने तरीके से चलाया होगा। इसलिए उनसे भी यह पूछें— “मेरे यहां रहने से आपको किन बातों से परेशानी हो रही है?” इस सवाल से बातचीत एकतरफा नहीं रहेगी। दोनों पक्ष अपनी जरूरतें समझा पाएंगे। अपनी मेंटल के लिए क्या करें? सबसे पहले खुद को दोष देना बंद करिए। यह मत सोचिए कि “मुझे तो खुश होना चाहिए, फिर मैं दुखी क्यों हूं?” भावनाएं इस तरह काम नहीं करतीं। अपनी पुरानी जिंदगी की वे चीजें वापस अपनी दिनचर्या में शामिल करें, जिनसे आपको अच्छा महसूस होता था। दोस्तों से मिलें, अकेले बाहर जाएं, टहलें, एक्सरसाइज करें, पढ़ें या अपने किसी पुराने शौक के लिए समय निकालें। सबसे जरूरी है कि आपकी पूरी जिंदगी सिर्फ घर और माता-पिता के इर्द-गिर्द न सिमट जाए। आपकी अपनी सामाजिक जिंदगी, काम, दोस्त, रुचियां और निजी समय भी जरूरी है। चार से छह सप्ताह तक कुछ बदलाव करके देखिए। फिर खुद से पूछिए– अगर बदलावों के बाद भी लगातार उदासी बनी रहे, किसी काम में मन न लगे, नींद या भूख में बड़ा बदलाव आए, बहुत ज्यादा चिंता हो, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें या जीवन को लेकर निराशा बढ़ने लगे, तो काउंसिलर से बात करना सही रहेगा। अंतिम बात आखिर में एक बात याद रखिए, माता-पिता से प्यार करने और उनके साथ न रह पाने की इच्छा, दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं। आपको अपने माता-पिता और अपनी स्वतंत्र जिंदगी में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। शायद आपको घर छोड़ने या खुद को बदलने से पहले एक नया तरीका खोजने की जरूरत है— माता-पिता के साथ एक वयस्क बेटी की तरह रहना, न कि 25 साल पहले वाली बेटी की तरह। इससे रिश्ता भी बचेगा, अपनापन भी बना रहेगा और आपकी स्वतंत्र जिंदगी भी रहेगी।