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  • हिमाचल: रक्षाबंधन के दिन उजड़ा परिवार, घर लौट रहे सरकारी शिक्षक की नदी में जा गिरी कार

    हिमाचल: रक्षाबंधन के दिन उजड़ा परिवार, घर लौट रहे सरकारी शिक्षक की नदी में जा गिरी कार

    हादसे में शिक्षक की थम गईं सांसें, एक अन्य गंभीर घायल

    कुल्लू। रक्षाबंधन का त्योहार एक परिवार के लिए ऐसी दर्दनाक याद छोड़ गया, जिसे शायद वह पूरी जिंदगी नहीं भुला पाएगा। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में रक्षाबंधन के दिन एक दर्दनाक सड़क हादसे में सरकारी स्कूल में कार्यरत अध्यापक की मौत हो गई। शिक्षक अपने एक साथी के साथ स्कूल से घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे तीर्थन नदी में जा गिरी। हादसे में शिक्षक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ सवार दूसरा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा जिला मंडी के बालीचौकी के समीप सिहड़ा क्षेत्र में हुआ। मृतक की पहचान 51 वर्षीय दीप कुमार पुत्र भीम सैन, निवासी गांव सिहड़ा, डाकघर मंगलौर, तहसील बंजार, जिला कुल्लू के रूप में हुई है। दीप कुमार जिला कुल्लू के बंजार खंड के फगवाना स्कूल में अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।

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    रक्षाबंधन के अवसर पर स्कूल से अपने घर की ओर लौटते समय उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि रास्ते में एक हादसा उनका इंतजार कर रहा है। सिहड़ा के पास पहुंचते ही उनकी कार अचानक अनियंत्रित हो गई और देखते ही देखते सड़क से नीचे तीर्थन नदी में जा गिरी।

    कार के नदी में गिरने से हादसा इतना भीषण था कि दीप कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों ने घायल व्यक्ति को कार से बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। इस हादसे ने रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के पवित्र त्योहार की खुशियों को एक परिवार के लिए अचानक गहरे दुख में बदल दिया। जिस दिन घर में त्योहार की तैयारियां और अपनों के मिलने की उम्मीद थी, उसी दिन परिवार को दीप कुमार की मौत की खबर मिली।

    हादसे में दीप कुमार के साथ सवार 34 वर्षीय सुरेश कुमार पुत्र बेली राम, निवासी गांव सिहड़ा, जिला कुल्लू घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें नेरचौक मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। नेरचौक में भी हालत गंभीर रहने पर सुरेश कुमार को बेहतर उपचार के लिए एम्स बिलासपुर रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है। हादसे में घायल व्यक्ति की स्थिति को लेकर परिजन चिंतित हैं।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल कार के अनियंत्रित होकर नदी में गिरने के पीछे वास्तविक वजह क्या रही, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा।

    रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और परिवार के साथ खुशियां बांटने का पर्व है, लेकिन सिहड़ा के एक परिवार के लिए यही दिन जिंदगी का सबसे दुखद दिन बन गया। परिवार ने अपने एक सदस्य को हमेशा के लिए खो दिया। सरकारी स्कूल के शिक्षक दीप कुमार की अचानक मौत से न केवल उनके परिजनों, बल्कि परिचितों और शिक्षा जगत में भी शोक की लहर है।

  • हिमाचल में 20 वर्षीय युवक लापता, घर से निकला नहीं लौटा घर- चिंता में परिवार

    हिमाचल में 20 वर्षीय युवक लापता, घर से निकला नहीं लौटा घर- चिंता में परिवार

    मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां 20 वर्षीय युवक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है। युवक के अचानक घर से गायब होने के बाद से परिजन परेशान हैं और उसकी तलाश में जुटे हुए हैं। वहीं, पुलिस ने भी मामले को लेकर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, हर्ष कुमार गांव और डाकघर कटौला, उपतहसील कटौला, जिला मंडी का रहने वाला है। उसके पिता नरेश कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि हर्ष 24 अगस्त की शाम करीब 4 बजे घर से बिना बताए कहीं चला गया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह कुछ समय बाद वापस आ जाएगा, लेकिन काफी देर बीत जाने के बाद भी वह घर नहीं लौटा।

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    हर्ष के घर वापस न आने पर परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की। उन्होंने आसपास के इलाकों और संभावित स्थानों पर युवक के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल पाया। इसके बाद परिवार ने पुलिस से मदद मांगी और मामले की शिकायत दर्ज करवाई।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि घर से निकलते समय हर्ष अपनी मां की करीब 6 ग्राम सोने की बालियां भी अपने साथ ले गया है। इस जानकारी के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, युवक के लापता होने के पीछे क्या कारण है, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

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    परिजनों की शिकायत मिलने के बाद पधर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की ओर से युवक की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाने के साथ-साथ युवक के बारे में संभावित सुराग तलाश रही है।

    हर्ष के लापता होने के बाद परिवार के लोग लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए हैं। परिजनों को उम्मीद है कि पुलिस की जांच के बाद जल्द ही हर्ष का पता चल जाएगा और वह सुरक्षित घर वापस लौटेगा।

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    SP मंडी विनोद कुमार ने बताया कि पधर पुलिस थाने में युवक के लापता होने को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस युवक की तलाश कर रही है और मामले की जांच जारी है। फिलहाल हर्ष के लापता होने की सही वजह का पता नहीं चल पाया है।

  • नेपाल जलप्रलय में हिमाचल का युवा इंजीनियर लापता, हाइड्रो प्रोजेक्ट में था तैनात, परिवार का नहीं हो रहा संपर्क

    नेपाल जलप्रलय में हिमाचल का युवा इंजीनियर लापता, हाइड्रो प्रोजेक्ट में था तैनात, परिवार का नहीं हो रहा संपर्क

    नेपाल में रह रहे हिमाचलियों ने बताया वहां का भयावह मंजर, बोले लोगों की अधुरी देह ही मिल रही

    ऊना/हमीरपुर:  नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय ने तबाही का ऐसा मंजर पैदा किया है, जिसकी दहशत अब हिमाचल प्रदेश तक महसूस की जा रही है। नेपाल में रोजगार के सिलसिले में रह रहे हिमाचल के कई परिवारों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कोई अपने बेटे की खबर का इंतजार कर रहा है तो कोई भाई, रिश्तेदार या परिचित से संपर्क टूटने के बाद फोन की घंटी बजने की उम्मीद लगाए बैठा है। इसी बीच ऊना जिले से सामने आई एक खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। नेपाल में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा ऊना का 30 वर्षीय युवक सुखविंद्र सिंह जलप्रलय के बाद से लापता है। परिवार का उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है और हर गुजरते पल के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।

    नगर परिषद मैहतपुर-बसदेहड़ा के वार्ड नंबर-8 निवासी सुखविंद्र सिंह पिछले कुछ समय से नेपाल में कार्यरत थे। बताया गया है कि वह वहां त्रिशुली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट-1 में इंजीनियर के पद पर तैनात थे। नेपाल में अचानक आई प्राकृतिक आपदा के बाद जब परिवार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो कोई जवाब नहीं मिला। एक-दो बार नहीं, बल्कि लगातार संपर्क करने के प्रयासों के बावजूद जब सुखविंद्र से बात नहीं हो सकी तो परिजनों की चिंता डर में बदल गई। परिवार को अब यह चिंता सताने लगी है कि आखिर सुखविंद्र कहां हैं और किस हाल में हैं। अपनों से संपर्क टूटने के कारण परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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    सुखविंद्र के लापता होने की सूचना मिलने के बाद परिवार ने ऊना जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क किया है। परिजन चाहते हैं कि सरकारी स्तर पर नेपाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर सुखविंद्र की तलाश की जाए। परिवार के लोग नेपाल के लिए भी रवाना हो गए हैं, ताकि अपने स्तर पर भी सुखविंद्र का पता लगाया जा सके। रिश्तेदार सुनील कुमार के अनुसार सुखविंद्र से संपर्क करने की लगातार कोशिश की जा रही है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। परिवार इस समय बेहद चिंता में है और उन्हें जल्द से जल्द सुखविंद्र की सुरक्षित जानकारी मिलने का इंतजार है।

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    परिवार ने इस मामले को ऊना सदर के पूर्व विधायक सतपाल सिंह रायजादा के समक्ष भी उठाया है। परिजनों ने उनसे प्रशासन और सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप कर सुखविंद्र की तलाश करवाने का आग्रह किया है। पूर्व विधायक ने जिला प्रशासन को मामले की जानकारी दिए जाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भी इस मामले को लेकर बातचीत करेंगे, ताकि नेपाल में लापता युवक का पता लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

    नेपाल की त्रासदी का असर केवल ऊना तक सीमित नहीं है। हमीरपुर जिले के भी कई परिवार नेपाल में रहने वाले अपने परिजनों की सलामती को लेकर चिंतित हैं। रंगस निवासी देशराज पिछले करीब एक दशक से नेपाल में रहकर काम कर रहे हैं और पिछले कुछ वर्षों से परिवार सहित वहीं बसे हुए हैं। आपदा के बाद नेपाल से सामने आए हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे बेहद डरावना मंजर बताया। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से मिल रहे शवों और तबाही के दृश्यों ने हिमाचल में बैठे परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है।

    देशराज के अनुसार हमीरपुर के रंगस और जोलसप्पड़ सहित अन्य क्षेत्रों के भी लोग नेपाल में रोजगार से जुड़े हैं। इसके अलावा ऊना और कांगड़ा जिलों से कई लोग नेपाल के विभिन्न हाइड्रो प्रोजेक्टों में इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारियों के रूप में काम कर रहे हैं।

    नेपाल में रह रहे कुछ हिमाचली लोगों से उनके परिवारों का संपर्क हो गया है, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिली है। अजय कुमार, जो नेपाल में निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं, ने बताया कि उनका अपने परिवार से संपर्क हो गया है। हालांकि वह जिस स्थान पर रहते हैं, वह आपदा प्रभावित इलाके से काफी दूर है, लेकिन नेपाल में हुई तबाही ने वहां रह रहे हर व्यक्ति को झकझोर दिया है।

    वहीं, प्रदीप कुमार ने भी अपने ससुराल पक्ष के लोगों से संपर्क किया और सभी के सुरक्षित होने की जानकारी मिली। बावजूद इसके, नेपाल में आई जलप्रलय की तस्वीरों और खबरों ने हिमाचल में बैठे लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

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    नेपाल में पैदा हुए हालात को देखते हुए हमीरपुर जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। एडीसी अभिषेक गर्ग ने जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।

    प्रशासन ने अधिकारियों से कहा है कि यदि उनके क्षेत्र का कोई व्यक्ति नेपाल की यात्रा पर गया है अथवा वहां नौकरी या किसी अन्य कार्य के सिलसिले में रह रहा है और उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो इसकी जानकारी तत्काल जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की जानकारी एकत्र कर जरूरत पड़ने पर उनके परिजनों की मदद करना और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से उनकी स्थिति का पता लगाना है।

  • हिमाचल: स्मार्ट मीटर से इनकार किया तो कट गई बिजली! विद्युत बोर्ड की कार्रवाई पर भड़के लोग

    हिमाचल: स्मार्ट मीटर से इनकार किया तो कट गई बिजली! विद्युत बोर्ड की कार्रवाई पर भड़के लोग

    लोगों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच कर की शिकायत; आंदोलन की दी चेतावनी

    हमीरपुर।  हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद अब सड़क से पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। हमीरपुर शहर के गौड़ा क्षेत्र में कुछ उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार क्या किया, उनके बिजली कनेक्शन काट दिए गए। बिजली जैसी जरूरी सुविधा बंद होने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। नाराज उपभोक्ता उपभोक्ता कल्याण मंच के साथ पुलिस अधीक्षक हमीरपुर के कार्यालय पहुंचे और विद्युत बोर्ड तथा स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।

    गौड़ा क्षेत्र के उपभोक्ताओं का आरोप है कि वे अपने घरों में लगे पुराने बिजली मीटरों को ही जारी रखना चाहते हैं और स्मार्ट मीटर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने के बाद उन्हें पहले नोटिस दिए गए और इसके बाद बिजली आपूर्ति ही काट दी गई।

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    उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली बोर्ड और स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी उन पर स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए दबाव बना रहे हैं। इतना ही नहीं, लोगों ने कर्मचारियों पर डराने और धमकाने के भी आरोप लगाए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली कनेक्शन काटकर उन पर अपनी बात मनवाने का दबाव बनाया जा रहा है।

    उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके पुराने मीटर सही तरीके से काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी इच्छा के खिलाफ नया मीटर लगाने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है, यह समझ से परे है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि उपभोक्ता स्मार्ट मीटर को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा रहे हैं तो उनकी बिजली आपूर्ति काटना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों को रोजमर्रा के कामकाज में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और जिम्मेदार अधिकारियों व कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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    गौड़ा निवासी प्रकाश गौतम ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार करने के कारण क्षेत्र में चार बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं। उनका कहना है कि कनेक्शन कटने के बाद प्रभावित परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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    उन्होंने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत देकर बिजली कनेक्शन काटने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे किसी विवाद के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपनी आपत्ति के बावजूद स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव बनाए जाने को स्वीकार नहीं करेंगे।

    उपभोक्ता कल्याण मंच के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि हमीरपुर शहर के एक अन्य क्षेत्र में भी स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध करने वाले कुछ उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे गए थे। उन्होंने दावा किया कि एक परिवार को करीब एक महीने तक बिजली के बिना रहना पड़ा और बाद में अदालत के हस्तक्षेप के बाद उनकी बिजली आपूर्ति बहाल हुई।

    सुरेश ठाकुर का कहना है कि उपभोक्ता अपने पुराने मीटरों को ही रखना चाहते हैं। उनके अनुसार, सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास और विरोध करने पर बिजली काटना उपभोक्ताओं की समस्या को और गंभीर बना रहा है।

    गौड़ा निवासी पुरुषोत्तम प्रकाश ने स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पुराने मीटर ठीक तरीके से चल रहे हैं तो उन्हें हटाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं की सहमति और उनकी चिंताओं को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। उपभोक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे स्मार्ट मीटर को लेकर अपनी आपत्तियों का समाधान चाहते हैं और जबरन मीटर लगाए जाने का विरोध करेंगे।

    पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत देने के बाद उपभोक्ता कल्याण मंच ने चेतावनी दी है कि यदि काटे गए बिजली कनेक्शन जल्द बहाल नहीं किए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बिजली बोर्ड के अधिकारियों का घेराव किया जाएगा और कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है।

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    हमीरपुर में स्मार्ट मीटर को लेकर सामने आया यह विवाद अब केवल कुछ उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच का मामला नहीं रह गया है। उपभोक्ता कल्याण मंच के हस्तक्षेप के बाद मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच चुका है। एक तरफ स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर काम आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ उपभोक्ता पुराने मीटरों को बदलने का विरोध कर रहे हैं।

  • सुक्खू सरकार ने बदल दिया हिमकेयर योजना में उपचार के भुगतान का गणित, आदेश जारी; जानें नए नियम

    सुक्खू सरकार ने बदल दिया हिमकेयर योजना में उपचार के भुगतान का गणित, आदेश जारी; जानें नए नियम

    अब वास्तविक खर्च या पैकेज रेट में जो कम होगा, उसका ही मिलेगा पैसा

    शिमला। हिमाचल प्रदेश में पूर्व जयराम सरकार के समय शुरू की गई हिमकेयर योजना को लेकर सुक्खू सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में हिमकेयर के तहत मरीजों के इलाज के भुगतान की व्यवस्था अब पहले जैसी नहीं रहेगी। प्रदेश सरकार ने इलाज की प्रतिपूर्ति को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। अब सरकारी संस्थानों को हिमकेयर के तहत इलाज पर वास्तविक खर्च या निर्धारित पैकेज रेट में से जो राशि कम होगी, उतनी ही राशि का दावा करने की अनुमति होगी।

    चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हिमकेयर योजना समय-समय पर भुगतान, बिलों और कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रही है। हालांकि नई अधिसूचना का मुख्य फोकस सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को स्पष्ट करना है।

    नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज हिमकेयर के मरीज का इलाज करने के बाद इलाज पर हुए वास्तविक खर्च और योजना के तहत निर्धारित पैकेज रेट के आधार पर भुगतान का दावा कर सकेंगे। लेकिन दोनों में से जो राशि कम होगी, वही प्रतिपूर्ति के लिए मान्य होगी। यानी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि पैकेज की तय सीमा से अधिक खर्च होने की स्थिति में भी सरकारी संस्थान पैकेज रेट से ज्यादा राशि हिमकेयर के तहत क्लेम नहीं कर पाएंगे।

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    सरकार के नए नियम को एक उदाहरण से समझें। यदि किसी उपचार के लिए हिमकेयर के तहत पैकेज रेट 50 हजार रुपये निर्धारित है और सरकारी अस्पताल में उस इलाज पर वास्तविक खर्च 40 हजार रुपये आता है, तो अस्पताल 40 हजार रुपये का ही दावा कर सकेगा। वहीं, यदि उसी उपचार में अस्पताल का वास्तविक खर्च बढ़कर 60 हजार रुपये हो जाता है, तब भी हिमकेयर के तहत अधिकतम 50 हजार रुपये यानी निर्धारित पैकेज रेट तक ही दावा किया जा सकेगा। इस तरह अब सरकारी संस्थानों के लिए भुगतान की अधिकतम सीमा पैकेज रेट और वास्तविक खर्च में से कम राशि होगी।

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    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए नियम के बावजूद हिमकेयर के तहत सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों में मरीजों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती रहेगी। अस्पताल इलाज से संबंधित वास्तविक खर्च के आधार पर दावा कर सकेंगे। इसके साथ ही अधिसूचना में हिमकेयर साथी के निर्धारित पारिश्रमिक का क्लेम करने की भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है।

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    इसका मतलब यह है कि योजना के तहत इलाज करवाने वाले मरीज को अस्पताल में उपचार के दौरान सीधे भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी, जबकि भुगतान की प्रक्रिया सरकार और संबंधित संस्थान के बीच योजना के नियमों के अनुसार होगी।

    नई अधिसूचना में सरकार ने दवाइयों और मेडिकल सामग्री को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है। इलाज के दौरान ऐसी दवाइयां, कंज्यूमेबल, सर्जिकल सामान और अन्य सामग्री, जो पहले से सरकारी सप्लाई में उपलब्ध हैं या राज्य सरकार अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बजट से अलग से उपलब्ध करवाई गई हैं, उनका भुगतान हिमकेयर योजना के तहत दोबारा क्लेम नहीं किया जा सकेगा। यानी सरकारी संसाधनों से उपलब्ध करवाई जा चुकी सामग्री को हिमकेयर के बिल में अलग से जोड़कर भुगतान लेने की व्यवस्था नहीं होगी।

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    सरकार का यह नया आदेश चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से 8 अप्रैल 2026 को जारी की गई पिछली अधिसूचना को सुपरसीड करता है। यानी अब सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हिमकेयर के तहत भुगतान के लिए नई व्यवस्था प्रभावी होगी। यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी की गई है।

    नई व्यवस्था को लागू करवाने के लिए सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को आदेश की प्रतियां भेज दी हैं। इनमें महालेखाकार, हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, डेंटल हेल्थ सर्विसेज निदेशक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक समेत अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं। 
    इससे साफ है कि सरकार ने हिमकेयर के तहत सरकारी संस्थानों में होने वाले इलाज और उसके भुगतान की प्रक्रिया को एक समान तरीके से लागू करने की तैयारी कर ली है।

    हिमकेयर योजना की शुरुआत हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसका उद्देश्य प्रदेश के पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाना था। अब सत्ता परिवर्तन के बाद सुक्खू सरकार ने योजना की भुगतान व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार के नए आदेश का सीधा असर उन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ेगा, जो हिमकेयर के तहत मरीजों का उपचार कर प्रतिपूर्ति के लिए बिल प्रस्तुत करते हैं।

  • हिमाचल : रात को खाना खाकर सोया युवक, सुबह परिवार को कमरे में मिली लाड़ले की देह; पसरा मातम

    इस मामले में मृतक के परिजनों ने किसी भी व्यक्ति पर कोई शक या आरोप नहीं लगाया है। परिवार की ओर से किसी तरह का संदेह जाहिर नहीं किया गया है। वहीं, पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
  • सुक्खू सरकार ने खोल दिए सरकारी नौकरी के द्वार, 870 पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया; जानें डिटेल

    सुक्खू सरकार ने खोल दिए सरकारी नौकरी के द्वार, 870 पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया; जानें डिटेल

    सुक्खू सरकार सरकारी स्कूलों में करेगी 870 शारीरिक शिक्षकों की भर्ती

    शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सुक्खू सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से चल रही शारीरिक शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने 870 शारीरिक शिक्षक (पीईटी) पदों को भरने की कवायद तेज कर दी है, जिससे शिक्षा विभाग में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

    प्रदेश विधानसभा में इस संबंध में जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है और सभी वर्गों के लिए आरक्षण रोस्टर तथा बैकलॉग को ध्यान में रखते हुए पदों का वर्गीकरण किया गया है।

    सरकारी स्कूलों में खेल गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस भर्ती में कुल 870 पद भरे जाएंगे। लंबे समय से खाली पड़े इन पदों को भरने की मांग उठ रही थी। अब सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद युवाओं में उत्साह का माहौल है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन नियुक्तियों से न केवल बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि स्कूलों में खेल और शारीरिक शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

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    भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नीति का पूरा ध्यान रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए सबसे अधिक पद निर्धारित किए गए हैं, जबकि अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी पर्याप्त पद आरक्षित किए गए हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि बैकलॉग पदों को भी इस भर्ती अभियान में शामिल किया जाए, ताकि लंबे समय से लंबित रिक्तियों को भरा जा सके।

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    भर्ती प्रक्रिया में विशेष श्रेणियों को भी प्राथमिकता दी गई है। पूर्व सैनिकों, दिव्यांग अभ्यर्थियों और खेल क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए अलग-अलग कोटे के तहत पद निर्धारित किए गए हैं। 
    इस कदम को सामाजिक समावेश और विभिन्न वर्गों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

    सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन पदों को भरने के लिए बैचवाइज भर्ती प्रणाली और राज्य चयन आयोग दोनों माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। इससे भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। युवाओं को अब भर्ती विज्ञापन, पात्रता शर्तों और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी का इंतजार है, जिसे विभाग जल्द जारी कर सकता है।

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    प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका असर विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा पर पड़ रहा था। सरकार का मानना है कि इन पदों पर नियुक्तियां होने से विद्यार्थियों को बेहतर खेल प्रशिक्षण मिलेगा और स्कूलों में खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक शिक्षा आज के समय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में रिक्त पदों को भरना शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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    प्रदेश में पिछले कुछ समय से विभिन्न विभागों में भर्तियों की घोषणाओं के बीच शारीरिक शिक्षकों के 870 पदों पर भर्ती की खबर ने युवाओं में नई उम्मीद जगाई है। खासकर वे अभ्यर्थी जो लंबे समय से शारीरिक शिक्षक के पदों के लिए तैयारी कर रहे हैं, उन्हें इस भर्ती से बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। सरकार की इस पहल को शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पदों को भरने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • हिमाचल: गांव की बेटी मुस्कान ने राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया नाम, AIIMS परीक्षा में हासिल की 87वीं रैंक

    मुस्कान की सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, लगन और पढ़ाई के प्रति समर्पण रहा। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रवेश परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर यह साबित किया कि अगर मेहनत और हौसला हो तो गांव से निकलकर भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।
  • हिमाचल में बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी:मंडी सहित कई जिलों में रक्षाबंधन का पर्व मनाया; बाजारों में खरीदारी को उमड़ी महिलाएं

    हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को भाई-बहन के पवित्र पर्व रक्षाबंधन को धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती दिखीं। बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की, जबकि भाइयों ने उन्हें उपहार दिए। रक्षाबंधन के अवसर पर मंडी के बाजारों में खासी रौनक देखी गई। ऐतिहासिक सेरी मंच पर लगे राखियों के स्टॉल पर महिलाओं और युवतियों ने खरीदारी की। राखी विक्रेता प्रवीण सकलानी ने बताया कि परिवारों के छोटे होने के कारण अब बड़ी संख्या में राखियां खरीदने का चलन कम हुआ है। अधिकांश लोग एक-दो राखियां ही खरीद रहे हैं, लेकिन भाई की कलाई सजाने का बहनों का उत्साह बरकरार है। हैंडमेड और स्वदेशी राखियों की मांग अधिक इस बार बाजार में हैंडमेड और स्वदेशी राखियों की मांग अधिक रही। ये राखियां 10 से 150 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध थीं। बच्चों के लिए 20 से 80 रुपये तक की कार्टून कैरेक्टर वाली रंग-बिरंगी राखियां खूब पसंद की गईं। सूती धागे, स्टोन वर्क और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां भी खूब बिकीं। स्वर्णकारों की दुकानों पर चांदी के ब्रेसलेट और डिजाइनर राखियों की भी मांग देखी गई। एचआरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा रक्षाबंधन पर हिमाचल सरकार ने महिलाओं को एचआरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की। इसके अतिरिक्त, सरकार ने आज सरकारी कार्यालयों में भी अवकाश घोषित किया। छुट्टी और निशुल्क बस यात्रा की सुविधा के कारण प्रदेशभर के लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए घरों तक पहुंचे। परिवार की खुशहाली की कामना मंडी सहित पूरे प्रदेश में घरों में भी रक्षाबंधन को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, उन्हें मिठाई खिलाई और परिवार की खुशहाली की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट किए। बाजारों में मिठाई और उपहारों की दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही।
  • सड़क नहीं, डेढ़ किमी पैदल रास्ता बनी मजबूरी!

    सड़क नहीं, डेढ़ किमी पैदल रास्ता बनी मजबूरी!