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हिमाचल प्रदेश में चेन स्नैचिंग और महिलाओं को निशाना बनाकर होने वाली लूट की घटनाओं को लेकर पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के शक्तिपीठों, पर्यटन स्थलों, बड़े बाजारों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
पुलिस को विशेष रूप से उन स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश हैं जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसरों, बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, पार्किंग स्थलों और पर्यटन स्थलों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ ही उपलब्ध सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है। संदिग्ध गतिविधियों और बाहरी नंबर वाले वाहनों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय का यह रुख ऊना के बड़ूही में 14 अगस्त को हुई वारदात के बाद और महत्वपूर्ण हो गया है।
बड़ूही-जोल सड़क पर नीलकंठ महादेव मंदिर के समीप बाइक सवार दो युवकों ने कार को रुकवाकर हथियार के बल पर महिला के गले से सोने की चेन छीन ली थी। आरोपियों ने महिला और उसकी बेटी को डराने के लिए पिस्तौल का इस्तेमाल किया। घटना के बाद आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें संदिग्ध बाइक सवार दिखाई दिए। मामले में ऊना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी सुखदेव सिंह उर्फ केवा को पंजाब के कपूरथला से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार वारदात में दो बाइक सवार शामिल थे और दूसरे आरोपी की तलाश जारी है। जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार असली था या खिलौना पिस्तौल, इसकी भी जांच की जा रही है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर लिया गया है। प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने लोगों से अधिक भीड़भाड़ और सुनसान क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों को सुनसान स्थानों पर अकेले आभूषण पहनकर जाने से बचने, संदिग्ध बाइक सवारों से सावधान रहने और किसी भी वारदात या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने का आग्रह किया है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों और मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में हिमकेयर योजना के तहत इलाज के भुगतान को लेकर नया आदेश जारी किया है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार अब हिमकेयर के तहत सरकारी संस्थानों के इलाज के लिए वास्तविक खर्च और निर्धारित पैकेज रेट में से जो कम होगा, उसी के आधार पर प्रतिपूर्ति का दावा किया जा सकेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और डेंटल कॉलेज हिमकेयर के तहत किए गए इलाज के बिलों में वास्तविक खर्च की राशि के साथ हिमकेयर साथी का निर्धारित पारिश्रमिक क्लेम कर सकेंगे। मरीजों को इन संस्थानों में हिमकेयर के तहत कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। सरकारी सप्लाई की दवाओं का अलग से क्लेम नहीं सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीज के इलाज से संबंधित ऐसी दवाइयां, सामान, कंज्यूमेबल और सर्जिकल आइटम, जो पहले से सरकारी सप्लाई में उपलब्ध हैं या राज्य सरकार अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के बजट से अलग से उपलब्ध कराए गए हैं, उनका भुगतान अस्पताल हिमकेयर के तहत अलग से क्लेम नहीं कर सकेंगे। 8 अप्रैल के आदेश को किया गया सुपरसीड यह आदेश चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से 8 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के स्थान पर लागू किया गया है। अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी की गई है। सरकार ने विभिन्न विभागों को भेजी ऑर्डर की कॉपी सरकार ने आदेश की प्रतियां महालेखाकार, हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, डेंटल हेल्थ सर्विसेज निदेशक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक समेत संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी हैं। पहले क्या था? सरकारी अस्पताल में हिमकेयर मरीज का इलाज करता था। इलाज में खर्च हुई दवाइयों, सामान आदि का वास्तविक खर्च हिमकेयर के तहत क्लेम किया जा सकता था। अब क्या बदला है? वास्तविक खर्च और पैकेज रेट में जो कम होगा, उतना ही भुगतान मिलेगा। मान लीजिए किसी इलाज का हिमकेयर पैकेज रेट ₹50,000 है, लेकिन सरकारी अस्पताल का वास्तविक खर्च ₹40,000 आया है तो अस्पताल को ₹40,000 ही क्लेम करने की अनुमति होगी। अगर पैकेज रेट ₹50,000 है और वास्तविक खर्च ₹60,000 आया, तो भी ₹50,000 तक ही क्लेम होगा।
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ट्रांस हिमालय से जुड़े क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने से बन रहीं झीलें हिमाचल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक नेपाल की तरह तबाही मचा सकती हैं। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के ताजा अध्ययन में अकेले सतलुज बेसिन में ही 2,292 ग्लेशियल झीलें सामने आई हैं। इनमें 1,335 चीन अधिकृत तिब्बत में हैं, जहां भारत का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होने पर निगरानी संभव नहीं है। इस अध्ययन में 470 झीलें स्पीति और 487 किन्नौर के खाब से नीचे हिमाचल प्रदेश में आने वाले सतलुज क्षेत्र में हैं। इनमें से 49 झीलें 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली हैं। सतलुज के अलावा चिनाब और रावी बेसिन के ग्लेशियरों में भी 373 झीलें हैं।
सतलुज बेसिन में 49 झीलें 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैलीं
उपग्रह की तस्वीरों में अकेले सतलुज बेसिन में 2,292 ग्लेशियल झीलें सामने आईं
राज्य सरकार में आपदा नियंत्रण के परामर्शदाता व हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्टे) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. एसएस रंधावा के अनुसार लिस-4 उपग्रह के 5.8 मीटर रिजॉल्यूशन वाले डेटा से 2023 की तस्वीरों के आधार पर परिषद की ओर से किए ताजा अध्ययन में अकेले सतलुज बेसिन में 2,292 ग्लेशियल झीलें सामने आई हैं। लिस-3 उपग्रह डेटा 23.5 मीटर रिजॉल्यूशन वाले डेटा में वर्ष 2019 में चिनाब बेसिन में 242, ब्यास में 93 और रावी में 38 झीलें चिह्नित की जा चुकी हैं। भूकंप के दृष्टि से हिमाचल जोन छह में डाल दिया गया है, जबकि पहले इसे जोन चार और पांच में रखा जाता था। उनके मुताबिक नेपाल जैसी स्थिति में भूकंप के बाद अगर कोई ग्लेशियल झील फटती है तो बड़ी तबाही हो सकती है।
विशेषज्ञों ने ये कहा
आमतौर पर ऐसी झीलों के टूटने के प्रमुख कारण हिमस्खलन और भूकंप होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक हालांकि सभी झीलें खतरे वाली नहीं हैं, लेकिन तेजी से बढ़ रही और अस्थिर झीलों की पहचान सबसे जरूरी है। सतलुज बेसिन में तिब्बत की ओर मौजूद झीलों पर उपग्रह आधारित निगरानी, हिमाचल में संभावित बाढ़ मार्गों की पहचान और पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। तिब्बत में किसी झील के टूटने पर उसका पानी सतलुज के रास्ते हिमाचल में प्रवेश करेगा और इसके बाद इसका असर पंजाब के मैदानी क्षेत्रों तक होगा। हाइड्रो इंजीनियर आरएल जस्टा के मुताबिक सतलुज बेसिन का करीब एक चौथाई क्षेत्र हिमाचल में है, जबकि तीन चौथाई चीन अधिकृत तिब्बत में पड़ता है, इसलिए खतरे का आकलन हिमाचल की सीमा तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
सांगला के देबार कंडे में खतरा बनी यारपाबंग झील
नेपाल में जय प्रलय के बाद से सांगला वैली के लोगों में डर का माहौल है। कारण सांगला के देबार कंडे में बढ़ता जा रहा यारपाबंग झील का क्षेत्रफल है। यहां करीब 550 मीटर लंबी और 260 मीटर चौड़ी झील भूकंप और बाढ़ की स्थिति में बस्पा और सतलुज नदी के मुहाने पर बसे इलाकों में भारी तबाही मचा सकती है। सांगला वैली के लोगों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से यहां सुरक्षा के लिहाज से उचित कार्य करने की मांग की है।
सूबे की चार झीलें सबसे खतरनाक
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हिमाचल की चार झीलों को सबसे खतरनाक माना है। इनकी निगरानी के लिए अर्ली वर्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। कुल्लू जिले की वासुकी झील के अलावा लाहौल-स्पीति की गिपांग झील (घेपल) है। इसका दायरा भी सबसे अधिक 92.09 हेक्टेयर है। किन्नौर जिले में 15,465 फीट की ऊंचाई पर सांगला घाटी में बास्पा झील का क्षेत्रफल 18.88 हेक्टेयर है। सतलुज बेसन पर काशंग गाड़ में कलका नाम की झील का क्षेत्रफल भी 27.89 हेक्टेयर है। अगर ये झीलें टूटीं तो भारी नुकसान हो सकता है।
2000 की बाढ़ में सतलुज 60 फीट चढ़ी
31 जुलाई और एक अगस्त 2000 की बाढ़ में सतलुज का जलस्तर सामान्य से करीब 60 फीट ऊपर पहुंचा, करीब 200 किलोमीटर एनएच-22 प्रभावित हुआ और 20 पुल व 22 झूले बह गए। 135 लोगों की मौत हुई और नुकसान करीब 1,466 करोड़ रुपये आंका गया।
2005 में पारछू टूटी, 10 किमी एनएच-22 बहा
26 जून 2005 को तिब्बत में पारछू झील टूटने के बाद सतलुज में बाढ़ आई, जिसमें वांगतू से समदो के बीच करीब 10 किलोमीटर एनएच-22 बह गया और 10 पुल व 11 रोपवे तबाह हुए। सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान करीब 610 करोड़ रुपये आंका गया।
सरकारों को ठोस नीति बनानी होगी कि नदियों के किनारे सरकारी और गैर सरकारी कोई भी निर्माण न हो। यह सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। अन्यथा इन झीलों में हलचल हुई तो ये बड़ी तबाही ला सकती हैं। हिमाचल से होकर बहने वाली प्रमुख नदियों के बेसिन में 16 ऐसे ग्लेशियर झील आकार ले चुकी हैं, जो कभी भी नेपाल जैसी तबाही मचा सकती हैं। कई झीलों का आकार तीन दशक के अरसे में 44 फीसदी बढ़ गया है। – राजेश्वर सिंह बांश्टू, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग एनआईटी, हमीरपुर
सीएम सुक्खू ने ये कहा
लाहौल-स्पीति में एक झील बनी है। काफी वर्षों से बनी है। उस पर अध्ययन किया गया है। इस बारे में पिछले दिनों भी बैठक ली थी। कुछ जगह ग्लेशियर कम हो रहे हैं। कुछ जगह बढ़ रहे हैं। इसे देखना पड़ेगा कि क्या परिस्थिति है।– मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
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हिमाचल प्रदेश में एक साल से अधिक समय से खाली पड़े मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) और सूचना आयुक्त (IC) के पदों को भरने के लिए सरकार ने चयन समिति गठित कर ली है। प्रशासनिक सुधार विभाग ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति के चेयरमैन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू होंगे, जबकि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल सदस्य होंगे। आदेश के अनुसार यह समिति राज्य के CIC और IC के नामों पर विचार कर उनकी नियुक्ति के लिए सिफारिश करेगी, ताकि राज्य सूचना आयोग को दोबारा पूरी तरह संचालित किया जा सके। अब चयन समिति उन नामों पर विचार करेगी, जिन्होंने सीआईसी और आईसी बनने के लिए आवेदन कर रखा है। एक साल से अधिक समय से इन दोनों पदों के खाली होने से सूचना आयोग दफ्तर सफेद हाथी साबित हो रहा है। सूचना का अधिकार कानून (RTI) के तहत लगभग 1700 अपील पेडिंग है। सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में नियुक्ति के दिए थे निर्देश इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी हिमाचल समेत सभी राज्यों को समयबद्ध तरीके से सीआईसी और आईसी की नियुक्तियां करने का निर्देश दिए हैं। अंजली भारद्वाज बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सभी प्रदेशों को नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर दो सप्ताह के भीतर परिणाम घोषित करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इन आदेशों के बाद राज्य सरकार ने चयन समिति गठित कर दी है। एक साल से खाली हैं दोनों पद हिमाचल में सीआईसी और आईसी के दोनों पद लंबे समय से खाली हैं। पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त आरडी धीमान जून 2025 में रेरा के चेयरमैन नियुक्त हुए थे। वहीं राज्य सूचना आयुक्त एसएस गुलेरिया 3 जुलाई 2025 को रिटायर हुए। इसके बाद आयोग में कोई CIC या IC दोनों का ही कामकाज ठप है। दो बार आवेदन, फिर भी नियुक्ति नहीं हालांकि, इन पदों को भरने के लिए सरकार पहले भी दो बार आवेदन मांग चुकी है। सरकार ने नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। RTI की दूसरी अपीलों पर असर सूचना आयोग का सबसे महत्वपूर्ण काम RTI के तहत आने वाली दूसरी अपीलों और शिकायतों की सुनवाई करना है। जब किसी व्यक्ति को विभाग से मांगी गई सूचना नहीं मिलती या पहली अपील के बाद भी संतोषजनक सूचना नहीं दी जाती, तो वह राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील कर सकता है। मगर यहां अपील सुनने वाला कोई नहीं है।
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पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति में सरकार के हस्तक्षेप से जुड़े कानून को उच्च न्यायालय की ओर से रद्द किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि खुद को कानून का जानकार बताने वाले मुख्यमंत्री बार-बार ऐसे फैसले ले रहे हैं और ऐसे कानून बना रहे हैं, जिनकी न्यायालय में फजीहत हो रही है। नेता विपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी से ही अपनी राजनीति की शुरुआत की थी, इसलिए शायद वह यूनिवर्सिटी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
सरकार को विश्वविद्यालयों के विभागों की तरह चलाने की उनकी कोशिश को उच्च न्यायालय ने एक बार फिर झटका दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को बहुत पढ़ा-लिखा और कानून का जानकार बताते हैं, लेकिन विधानसभा में उनके द्वारा बनाए जा रहे कानून लॉ ऑफ द लैंड की कसौटी पर एक मिनट भी नहीं टिकते और असांविधानिक करार दिए जाते हैं। विपक्ष विधानसभा के अंदर बार-बार सरकार को आगाह करता है कि ऐसे कानून न बनाए जाएं, जो न्यायिक समीक्षा में टिक ही न सकें। इससे केवल सरकार की नहीं, बल्कि विधानसभा की गरिमा भी प्रभावित होती है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इससे पहले पूर्व विधायकों की पेंशन रद्द करने का कानून बनाया गया, जिसे हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया। कर्मचारियों के प्रमोशन के अधिकार को छीनने का प्रयास भी न्यायालय ने रद्द कर दिया। पंचायत चुनावों को लेकर भी सरकार को न्यायालय से लगातार झटके लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार कोई भी निर्णय लेते समय न असांविधानिक सीमाओं का ध्यान रखती है और न ही नैतिक मर्यादाओं का। मुख्यमंत्री को न अपने पद की मर्यादा का ख्याल है और न विधानसभा की गरिमा का। सरकार को समझना चाहिए कि बहुमत के बल पर विधानसभा में कानून पारित किया जा सकता है, लेकिन संविधान के ऊपर कोई नहीं है।
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हिमाचल प्रदेश में रक्षाबंधन के मौके पर मौसम मिलाजुला रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। हालांकि, आज किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी हल्की बारिश के आसार हैं। 29 और 30 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कांगड़ा-सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश 31 अगस्त से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। विभाग ने 31 अगस्त, 1 और 2 सितंबर को प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। 31 अगस्त को कांगड़ा और सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि मंडी में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। ऊना में सबसे अधिक 34.4 डिग्री सेल्सियस तापमान बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। नाहन में 41.2 एमएम, धौलाकुआं में 31.5 एमएम, ऊना में 9.6 एमएम और शिमला में 1.2 एमएम बारिश हुई। ऊना में प्रदेश का सबसे अधिक 34.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। तापमान में फिर गिरावट आने की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक, अगले चार से पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि, अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। 31 अगस्त के बाद बारिश बढ़ने पर तापमान में फिर गिरावट आने की संभावना है।
मोहाली के जीरकपुर में तेज रफ्तार कार ने सड़क पार करते वक्त महिला को टक्कर मार दी। घटना का 17 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार की टक्कर के बाद महिला बोनट पर आकर करीब 5 फीट ऊपर हवा में उछलती दिखाई देती है। इसके बाद वह सड़क पर गिरकर कई पलटी खाते हुए करीब 20 मीटर तक घिसटती चली जाती है। हादसे की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद उसने अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। मृतका की पहचान हादसा देविंदर कौर के नाम से हुई, वह हिमाचल की रहने वाली थीं। दविदर कौर अपनी बहन प्रीति के साथ ढकोली में ‘पिंड पंजाबी ढाबा’ चलाती थी, इसके सामने ही एन्क्लेव में उनका ‘पाकीजा होटल’ भी है। ढाबा बंद करने के बाद दविंदर पैदल होटल की तरफ जा रही थी। तभी यह हादसा हो गया। जानिए वीडियो में क्या दिख रहा.. घटना से जुड़ा एक 17 सेकेंड का वीडियो सामने आया है, जिसमें हाईवे पर वाहन गुजरते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक कार तेज रफ्तार कार आती है, सड़क पर जा रही महिला को टक्कर मार देती है। जिससे महिला कार के बोनट पर आ जाती और करीब कार से 5 फीट ऊपर हवा में उछती है, फिर सड़क पर गिर जाती है और कई पलटी खाते हुए करीब 20 मीटर पर घसिटते हुए चली जाती है। हादसे की आवाज सुनकार कर मौके पर मौजूद लोग भी वहां पहुंच जाते हैं। अब पूरा मामला जानिए 4 पॉइंट में… *************** ये खबर भी पढ़ें: पंजाबी इंफ्लुएंसर को पेड़ से बांधकर जिंदा जलाया: दो साथी बुलाकर ले गए थे; मां बोली- खरड़ पुलिस ने न बयान लिए, न FIR की पंजाबी इंफ्लुएंसर की हत्या कर दी गई, जिसकी पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि 3 जुलाई की देर रात उसके दो जानकार उसे सेक्टर-34 स्थित शराब के ठेके के पास से गाड़ी में बैठाकर मोरिंडा ले गए थे। (पढ़ें पूरी खबर)
भाजपा महिला मोर्चा हिमाचल ने शुक्रवार को शिमला के ARTRAC, सेंट थॉमस स्कूल के सामने सैनिकों के साथ रक्षाबंधन मनाया। इस कार्यक्रम में महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डेजी ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। महिला मोर्चा की पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सैनिकों को तिलक लगाया, उनकी कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर सैनिकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और देशभक्ति का भाव प्रदर्शित हुआ। डेजी ठाकुर ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक प्रत्येक भारतीय परिवार का अभिन्न अंग हैं। उन्हीं की बदौलत देशवासी अपने घरों में सुरक्षित और निश्चिंत होकर त्योहार मना पाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे वीर जवानों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। विपरीत मौसम में राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं फौजी उन्होंने आगे कहा कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास, सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है। डेजी ठाकुर ने यह भी उल्लेख किया कि सैनिक अपने परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों और विपरीत मौसम में राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। उनका त्याग और समर्पण देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। सैनिकों और प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई दी उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ कर्तव्य, सुरक्षा और विश्वास का संदेश देता है। महिला मोर्चा इस पर्व के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सद्भाव और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। अंत में, डेजी ठाकुर ने सभी सैनिकों और प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। सैन्य जवानों को राखी बांधने की PHOTOS–
हिमाचल प्रदेश के रामपुर स्थित सराहन वन परिक्षेत्र के थड़ा गांव में एक व्यक्ति पर भालू ने हमला कर दिया। सेब के बगीचे में काम कर रहे व्यक्ति को गंभीर चोटें आई हैं। उसे प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए रामपुर अस्पताल रेफर किया गया है। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम सुभाष चंद्र (पुत्र दौलत राम) अपने सेब के बगीचे में देखरेख का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक एक भालू ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें रामपुर रेफर कर दिया घटना की सूचना मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल सुभाष चंद्र को तुरंत सराहन अस्पताल पहुंचाया। वहां इलाज के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें रामपुर रेफर कर दिया। आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल भालू के इस हमले के बाद थड़ा गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। इन दिनों सेब का सीजन होने के कारण ग्रामीण अपने बगीचों में काम कर रहे हैं, जिससे जंगली जानवरों की मौजूदगी को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। भालू की गतिविधियों पर नजर रखने की अपील स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, भालू की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
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जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह से चंबा होते हुए अब श्रद्धालुओं का जत्था उपमंडल भरमौर पहुंचा है। माता भरमाणी के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु भरमौर हेलीपैड में दो दिन तक डेरा लगाने के बाद जन्माष्टमी पर पवित्र डल में डुबकी लगाएंगे।
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वर्षों से चली आ रही पुरानी परंपरा के अनुसार भद्रवाह और डोडा से मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालु पहला डेरा चंबा में लगाते हैं। यहां पर विधि-विधान से अपने देव चिह्न चौगान में स्थापित करने के बाद मुख्यालय में स्थित मंदिरों के दर्शन करने के बाद भरमौर के लिए कूच करते हैं।
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इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए भद्रवाह से पहुंचा श्रद्धालुओं का जत्था भरमौर उपमंडल पहुंचा। शुक्रवार सुबह वाहनों और पैदल 100 लोगों का जत्था भद्रवाह से भरमौर पहुंचा। हेलीपैड में अपने देव चिह्न स्थापित करने के बाद श्रद्धालु माता भरमाणी के दर्शनों को पहुंचे। जहां से पैदल फिर से हेलीपैड में उन्होंने डेरा जमाया।
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श्रद्धालुओं में शामिल विनय कुमार, राजीव कुमार, शेखर, सूरज ने बताया कि यह जत्था जन्माष्टमी पर्व पर डलझील में डुबकी लगाएगा। कहा कि पिछले साल आपदा के कारण हजारों शिव भक्त मणिमहेश यात्रा नहीं कर पाए थे।
भद्रवाह और डोडा से आए जत्थों को भी चंबा से लौटना पड़ा था। लेकिन, इस बार श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। भगवान शंकर के पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन करने और अपनी मन्नत पूरी करने के लिए श्रद्धालु पिछले साल की तुलना में अधिक संख्या में यात्रा पर जाएंगे।
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