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  • क्या आप भी बांधते हैं पैर में काला धागा? संभल जाएं, इन राशियों के लिए हो सकता है बेहद खतरनाक

    Astro Tips:क्यों हाथ-पैर में काला धागा पहनती हैं महिलाएं? जानें क्या है  इसके चमत्कारी फायदे - Why Do Women Wear Black Thread On Their Hands And  Feet Know Its Miraculous Benefits - Amar Ujala Hindi News Live

    अक्सर आपने लोगों को पैर में काला धागा बांधे हुए देखा होगा। कई लोग इसे केवल एक फैशन, ट्रेंड या पुरानी परंपरा मानकर पहन लेते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसका बहुत गहरा और खास महत्व माना गया है। एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा के अनुसार, पैर में काला धागा बांधना सिर्फ एक सामान्य रिवाज नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारी कुंडली में ग्रहों की स्थिति और शरीर के आसपास मौजूद ऊर्जा से होता है। सही जानकारी और नियम के साथ धारण किया गया काला धागा जहां जीवन में सकारात्मकता लाता है।

    किसे पहनना चाहिए और क्या हैं इसके फायदे?

    ज्योतिष शास्त्र में काला धागा मुख्य रूप से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से रक्षा करने के लिए धारण किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार नजर लगने की समस्या रहती है या काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, तो पैर में काला धागा बांधना बेहद फायदेमंद माना जाता है।

    इसके अलावा, यह शनि देव के अशुभ प्रभाव को कम करने के साथ-साथ राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों के दोष से भी बचाव करता है। खासकर मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए काला धागा धारण करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं और काला रंग शनि देव का प्रिय रंग है। इसलिए इन दो राशियों के लोग यदि पैर में काला धागा पहनते हैं, तो उन्हें मानसिक शांति, आर्थिक मजबूती और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

    किसे नहीं पहनना चाहिए और क्या है कारण?

    जहां कुछ राशियों के लिए काला धागा सुरक्षा-कवच की तरह काम करता है, वहीं कुछ लोगों के लिए इसे धारण करना पूरी तरह वर्जित माना गया है। ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, मेष और वृश्चिक राशि के लोगों को पैर में काला धागा बांधने से हमेशा बचना चाहिए।

    इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल देव हैं। मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, अग्नि और लाल रंग का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल देव का काले रंग के साथ मित्रवत भाव नहीं होता है। जब मेष या वृश्चिक राशि के जातक काला धागा पहनते हैं, तो मंगल का शुभ प्रभाव कम होने लगता है। इसके कारण जीवन में बेवजह का तनाव, गुस्सा, धन हानि या बनते कामों में रुकावटें आने लगती हैं।

    इसलिए, पैर में काला धागा बांधने से पहले अपनी राशि और ग्रहों के प्रभाव को समझना बेहद जरूरी है, ताकि इसका सही और पूरा लाभ आपको मिल सके।

  • हिमाचल: स्मार्ट बिजली मीटर ने दिया दंपत्ति को बड़ा झटका, बंद घर का आया हजारों में बिल; उड़े होश

    ऊना। हिमाचल प्रदेश में सुविधा, सटीक बिलिंग और पारदर्शिता के दावों के साथ लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटर अब कई उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनते नजर आ रहे हैं। कभी 200 से 500 रुपये तक बिजली बिल चुकाने वाले परिवारों के पास अचानक हजारों रुपये के बिल पहुंचने से उपभोक्ताओं के होश उड़ रहे हैं। कई जगहों पर लोग बढ़े हुए बिलों को लेकर विद्युत बोर्ड के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।

    ऐसा ही हैरान करने वाला मामला ऊना जिले से सामने आया है, जहां चलोला गांव में स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में अचानक भारी उछाल आने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि जिन घरों में पहले सामान्य खपत के हिसाब से 800 से 900 रुपये तक बिल आता था, वहां अब कई हजार रुपये के बिल पहुंच रहे हैं। कुछ उपभोक्ताओं के बिल तो 10 हजार रुपये से भी ऊपर बताए जा रहे हैं।

    घर में कोई नहीं था, फिर भी आया 7,025 रुपये बिल

    चलोला गांव निवासी सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर मोहिंदर पाल सिंह का मामला स्मार्ट मीटर की बिलिंग को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। उन्होंने विद्युत बोर्ड के सहायक अभियंता को शिकायत देकर बताया कि उनके घर में केवल पति-पत्नी रहते हैं।

    मोहिंदर पाल सिंह के अनुसार उनका बिजली बिल सामान्य तौर पर 1,200 से 1,500 रुपये के आसपास रहता था, लेकिन इस बार उन्हें 7,025 रुपये का बिल थमा दिया गया। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि बिलिंग अवधि के दौरान वह अपनी पत्नी के साथ सोमनाथ और द्वारका की यात्रा पर गए हुए थे। यानी जिस अवधि में घर बंद था और बिजली की खपत बेहद कम होने की उम्मीद थी, उसी दौरान हजारों रुपये का बिल आने से परिवार भी हैरान है।

    पूरे गांव में बढ़े बिलों की शिकायत

    ग्रामीणों का कहना है कि समस्या किसी एक उपभोक्ता तक सीमित नहीं है। गांव के कई परिवारों को स्मार्ट मीटर लगने के बाद अपेक्षा से कहीं ज्यादा बिल प्राप्त हुए हैं। कैप्टन गुरदयाल चंद, विधि चंद धीमान, पुन्नू राम, होशियार सिंह और ओमपाल सिंह समेत कई उपभोक्ताओं ने भी बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायत की है। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ उपभोक्ताओं को 2 हजार रुपये से लेकर 12 हजार रुपये तक के बिल भेजे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने मीटर लगे होने के दौरान उनके बिल सामान्य आते थे, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद अचानक बिलिंग में इतना बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

    800-900 रुपये के बिल से हजारों तक पहुंचा आंकड़ा

    उपभोक्ताओं का कहना है कि सामान्य तौर पर जिन घरों में बिजली का बिल 800 से 900 रुपये के आसपास आता था, वहां अब कई गुना अधिक राशि दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तविक बिजली खपत में इतनी बड़ी वृद्धि कैसे हुई।

    ग्रामीणों ने विद्युत बोर्ड से मांग की है कि स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच कराई जाए और मीटर में दर्ज खपत का पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जाए। यदि तकनीकी खामी के कारण बिल बढ़े हैं तो उन्हें संशोधित कर वास्तविक खपत के आधार पर नया बिल जारी किया जाए।

    ग्रामीणों ने दी धरने की चेतावनी

    बढ़े हुए बिजली बिलों से नाराज ग्रामीणों ने विद्युत बोर्ड को चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही स्मार्ट मीटरों की जांच नहीं की गई और गलत बिलों को ठीक नहीं किया गया तो उपभोक्ता आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वे बसाल स्थित एसडीओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि आम परिवारों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त बिजली बिल डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

    विद्युत बोर्ड ने माना- शिकायतें मिली हैं

    मामले को लेकर विद्युत उपमंडल बसाल के सहायक अभियंता उदित शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर बोर्ड के शिमला स्थित मुख्यालय से भी संपर्क किया गया है। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी समस्या की जांच की जा रही है और जिन उपभोक्ताओं के बिलों में गड़बड़ी पाई जा रही है, उन्हें ठीक किया जा रहा है।

    स्मार्ट मीटरों पर फिर उठे सवाल

    स्मार्ट मीटरों का उद्देश्य बिजली की खपत की सटीक निगरानी, पारदर्शी बिलिंग और मीटर रीडिंग से जुड़ी समस्याओं को कम करना है। लेकिन यदि उपभोक्ताओं के दावों के अनुसार कम खपत वाले घरों में अचानक हजारों रुपये के बिल आने लगें, तो स्वाभाविक रूप से मीटर की रीडिंग और बिलिंग प्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। 

    ऊना के चलोला गांव की शिकायत ने स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब ग्रामीणों की नजर विद्युत बोर्ड की तकनीकी जांच और संशोधित बिलों पर है। यदि जांच में तकनीकी खामी सामने आती है, तो यह मामला स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और बिलिंग व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर सकता है।

  • देहरादून से हिमाचल में हो रहा था नशा सप्लाई, मास्टरमाइंड मनीषा सहित दो तस्कर गिरफ्तार

    Himachal Pradesh news

    शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे की सप्लाई को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसे नेटवर्क के बारे में पता चला, जिसके तार हिमाचल से बाहर तक जुड़े हुए थे। मामले में एक महिला का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। 

    फोन और ऑनलाइन पेमेंट से महिला तक पहुंची पुलिस

    पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और ऑनलाइन पेमेंट की जानकारी खंगाली। जांच में पता चला कि शिमला में नशीला कफ सिरप मंगवाने के लिए आरोपियों ने देहरादून में बैठी महिला से फोन पर संपर्क किया था। इसके लिए उसे ऑनलाइन पैसे भी भेजे गए थे। इन्हीं डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस देहरादून पहुंची और आरोपी मनीषा राणा को गिरफ्तार कर लिया।

    6 अगस्त को नाकाबंदी में पकड़ी गई थी नशे की खेप

    जानकारी के अनुसार, नेरवा पुलिस ने 6 अगस्त को नाकाबंदी के दौरान एक वाहन को रोका था। तलाशी लेने पर उसमें बिना लेबल वाली कोडीन आधारित कफ सिरप की 5 सीलबंद बोतलें मिली थीं। इसके बाद पुलिस ने वाहन में सवार दो लोगों को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था।

    पूछताछ और मोबाइल जांच से खुला देहरादून कनेक्शन

    गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उनके मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को देहरादून में बैठे सप्लायर के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने मामले की कड़ियां जोड़ते हुए देहरादून में दबिश दी और मनीषा राणा को गिरफ्तार कर लिया।

    रिमांड में खुल सकते हैं नेटवर्क से जुड़े और नाम

    पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महिला को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जा रहा है। रिमांड के दौरान उससे पूछताछ की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सप्लायरों और नशे की सप्लाई से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।

  • “हिमाचल में लुटकेस, बूटकेस व सूटकेस वाली सरकार” सांसद अनुराग ठाकुर ने साधा कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना

    Himachal Pradesh News : "हिमाचल में लुटकेस, बूटकेस व सूटकेस वाली सरकार" सांसद  अनुराग ठाकुर ने साधा कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना

    Himachal Pradesh News : पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर सांसद अनुराग ठाकुर ने रविवार को पूर्व कर्मचारी प्रकोष्ठ जिला कांगड़ा के धर्मशाला में आयोजित जिला सम्मेलन में प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा।

    उन्होंने राहुल गांधी के खटाखट पैसे देने के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी ने खटाखट पैसे देने की बात कही थी, लेकिन हिमाचल में कांग्रेस सरकार ने पूरा सिस्टम ही खटारा करके रख दिया है। उन्होंने कहा कि अब हिमाचल की जनता कांग्रेस को फटाफट-फटाफट भगाने का काम करेगी। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मित्रों की मौज चल रही है, जबकि आम कर्मचारी और पेंशनर अपने हक के लिए इंतजार कर रहे हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएं कर्मचारियों और पेंशनरों के बजाय अन्य लोगों को सुविधाएं देने की ओर हैं। प्रदेश पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है और करीब एक लाख दस हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों का 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता और वर्ष 2016 के वित्तीय लाभ लंबित हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम सहित विभिन्न बोर्डों और निगमों के कर्मचारियों के भी कई मामले लंबित हैं।

    उन्होंने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि पूर्व कर्मचारियों का अधिकार और सम्मान है। भाजपा कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों को लेकर उनके साथ खड़ी है और उनके अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करेगी।

    सांसद ने कांग्रेस के चुनावी वादों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की महिलाओं और युवाओं से बड़े-बड़े वादे किए गए थे। पांच लाख नौकरियां देने की बात कही गई थी, लेकिन आज युवा इसका जवाब मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के चार साल के वादों और कामकाज का हिसाब जनता को याद दिलाया जाएगा। अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह रील बनाने वाले नेता हैं, रियल नेता नहीं।

    उन्होंने राहुल गांधी के प्राथमिकी मामले को लेकर भी कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। राष्ट्रीय गीत के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर देश को बांटने की राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने प्रदेश सरकार पर लगातार नए कर और उपकर लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस सरकार पेट्रोल और डीजल के साथ सोनिया, राहुल और प्रियंका उपकर भी लगा दे तो आश्चर्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश को विकास की दिशा में आगे ले जाने के लिए काम करने वाली सरकार की जरूरत है। अनुराग ठाकुर ने कर्मचारियों को एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि कर्मचारी और अधिकारी सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सम्मेलन में रखी गई मांगों पर भाजपा केंद्र और प्रदेश में सरकार बनने पर काम करेगी।

    पेंशन अधिकार है, खैरात नहीं : अनुराग
    अनुराग ठाकुर ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पेंशनरों और पूर्व सैनिकों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। वन रैंक, वन पेंशन लागू करने के साथ पेंशन अदालतें शुरू की गईं।

    डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और पेंशन संबंधी ऑनलाइन सुविधाओं से बुजुर्गों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के सम्मान और अधिकार से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

    अनुराग ठाकुर ने कहा “अभी हाल में इन्होंने एक बार फिर से बहाने बनाते हुए पेट्रोल डीजल पर सेस बढ़ा दिया। अब तो ऐसा लगता है कि बस राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के नाम पर टैक्स लगाना बाकी रह गया है और मुझे लगता है कि सुक्खू जी की खाओ- पियो- मौज करो सरकार यह पुण्य काम कर ही देगी।”

    ये बूटकेस, लूटकेस और सूटकेस की सरकार है। बूटकेस है हिमाचल की जनता के लिए जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाती है और इनके अधिकारी और प्रशासन उनका मुंह बंद करा देते हैं।

    कितने मीडिया चैनल और सामाजिक कार्यकर्ता इनके बूटकेस का शिकार बने हैं। इनके राज में कानून व्यवस्था पाताल में चली गई है।

    खुद कांग्रेस अध्यक्ष के क्षेत्र में ही इतनी लूटपाट हो रही है कि बढ़ती चोरियों, अवैध खनन, बेलगाम टिप्परों और वन माफिया से आम जनता त्रस्त है।

    अब हिमाचल की जनता ने भी तय कर लिया है कि इन काँग्रेसियों ने जिस तरह प्रदेश को लूटकर खोखला कर दिया, हमारा खजाना खाली कर दिया। इनका हिसाब जरूर होगा।

    कांग्रेस ने हमारे सरकारी कर्मचारियों के साथ, युवाओं के साथ, महिलाओं के साथ, गरीब, किसान, मजदूर के साथ धोखाधड़ी की, इस सबका फैसला अब जनता अपने वोट से करेगी।

  • बाबा बालक नाथ से नैना देवी तक, हिमाचल के मंदिरों में आया 420 करोड़ का चढ़ावा; आंकड़ा सामने आया तो हर कोई रह गया हैरान!

    बाबा बालक नाथ से नैना देवी तक... हिमाचल के मंदिरों में आया 420 करोड़ का  चढ़ावा - Himachal 420 crore temple donation in 2 year check all mandir  chadhawa collection here lcly - AajTak

    शिमला; हिमाचल प्रदेश के सरकारी नियंत्रण वाले 36 मंदिरों में ढाई साल से अधिक समय में करीब 420 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है. राज्य सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी. सरकार के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से 1 अगस्त 2026 के बीच इन मंदिरों में कुल 419.88 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ.

    एक एजेंसी ने डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के हवाला से दावा किया कि कांग्रेस विधायक केवल सिंह के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि मंदिरों में प्राप्त चढ़ावे की राशि का इस्तेमाल विभिन्न धार्मिक और प्रशासनिक कार्यों में किया जाता है. जिसमें मंदिरों का रखरखाव, सौंदर्यीकरण, साफ-सफाई, लाइटिंग, गौशालाओं का संचालन, धार्मिक आयोजनों और मेलों की व्यवस्था शामिल है. इसके अलावा पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी इसी राशि से किया जाता है.

    गौसदन के लिए 50 फीसदी हिस्सा तय
    डिप्टी सीएम ने बताया कि मंदिरों में आने वाले चढ़ावे का 50 प्रतिशत हिस्सा गौसदन के निर्माण और रखरखाव के लिए निर्धारित किया गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर फंड खर्च करने के लिए फिलहाल कोई अलग नियम निर्धारित नहीं हैं. राज्य सरकार अभी इस संबंध में नियम बनाने पर विचार नहीं कर रही है.

    इन तीन मंदिरों में सबसे ज्यादा चढ़ावा
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा चढ़ावा हमीरपुर के बाबा बालक नाथ देवत सिद्ध मंदिर में आया. यहां 99.19 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. इसके बाद बिलासपुर के नैना देवी मंदिर में 86.94 करोड़ और ऊना जिले के माता चिंतपूर्णी मंदिर में 85.72 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया. आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में कुल 153.32 करोड़ रुपये चढ़ावा आया था. 2025 में यह बढ़कर 157.51 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, 2026 में 1 अगस्त तक 109.4 करोड़ रुपये चढ़ावे के रूप में प्राप्त हो चुके थे.

  • बिहार के स्कूल की बदहाल तस्वीर ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल, एक ही कमरे में पढ़ते मिले पांच कक्षाओं के बच्चे

    बिहार के स्कूल की बदहाल तस्वीर ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल, एक ही कमरे  में पढ़ते मिले पांच कक्षाओं के बच्चे - India TV Hindi

    मधेपुरा; बिहार के मधेपुरा से शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है, जहां एक ही भवन में कक्षा एक से आठ तक के 159 बच्चों की पढ़ाई महज दो कमरों और एक टीन के शेड के सहारे हो रही है। कमरों की कमी के कारण कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। गर्मी के दिनों में टीन का शेड तपने से बच्चों को परेशानी होती है, लेकिन इसके बावजूद इसी व्यवस्था में स्कूल की पढ़ाई जारी है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत कुल पांच शिक्षक हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो गयी थी, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण नहीं हो सका।

    एक कमरे में पढ़ रहे हैं कक्षा छह से आठ तक के बच्चे
    एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को अलग-अलग विषय पढ़ाए जाने से शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को परेशानी होती है। एक तरफ किसी कक्षा में गणित के सवाल समझाए जाते हैं तो दूसरी ओर भाषा का पाठ पढ़ाया जाता है। इससे बच्चों का पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है। शिक्षक भी सभी कक्षाओं का सिलेबस समय पर पूरा कराने को लेकर परेशान हैं। विद्यालय के शिक्षक राधेश्याम राम ने बताया कि एक कमरे में कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। इससे काफी परेशानी होती है। बच्चों का सिलेबस समय पर पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में शिक्षकों को सामूहिक रूप से ऐसे पढ़ाना पड़ता है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को समझाया जा सके।

    राशि स्वीकृत हुई थी लेकिन भवन का निर्माण नहीं हो सका
    प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने बताया कि विद्यालय में कुल 159 बच्चे नामांकित हैं जिनमें से करीब 90 से 110 बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों की संख्या के मुकाबले में स्कूल में पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण और व्यवस्था में सुधार को लेकर विभाग को कई बार लिखित जानकारी दी गई लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

    प्रधानाध्यापक के मुताबिक, विद्यालय भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका। इसके बाद स्वीकृत राशि वापस लौट गई। ऐसे में फिलहाल बच्चों की पढ़ाई उपलब्ध दो कमरों और टीन शेड में में ही कराई जा रही है।

  • पेट में बार-बार गैस और भारीपन रहता है? रोज की ये 4 आसान आदतें अपनाकर पाएं राहत!

    हेल्थ डेस्क। पेट में गैस बनना एक आम समस्या है। गलत खानपान, जल्दी-जल्दी खाना, ज्यादा तला-भुना भोजन और लंबे समय तक बैठे रहने से गैस, पेट फूलना या भारीपन महसूस हो सकता है। कुछ आसान आदतों को अपनाकर इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है।

    1. खाना धीरे-धीरे खाएं

    भोजन को अच्छी तरह चबाकर और आराम से खाने की आदत डालें। जल्दी खाने से ज्यादा हवा पेट में जा सकती है, जिससे गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है।

    2. खाने के बाद थोड़ी देर टहलें

    भोजन के तुरंत बाद लेटने के बजाय कुछ देर हल्की वॉक करें। इससे पाचन प्रक्रिया को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है और पेट में भारीपन भी कम हो सकता है।

    3. गैस बढ़ाने वाली चीजें कम करें

    अगर कुछ खाद्य पदार्थ खाने के बाद आपको बार-बार गैस होती है तो उनका सेवन कम करें। बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार भोजन और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से भी दूरी रखना बेहतर है।

    4. पर्याप्त पानी पिएं

    दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना पाचन के लिए जरूरी है। साथ ही भोजन में फाइबर की मात्रा संतुलित रखें और रोजाना शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

  • खट से स्कैन, फट से पेमेंट! कैसे काम करता है UPI का पूरा सिस्टम? किसने किया था पहला ट्रांजैक्शन, आज पूरे हुए 10 साल

    10 Year of UPI: भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 10 साल का हो गया. दुनिया के सबसे बड़े रियल टाइम पेमेंट सिस्टम UPI से रोजाना 66 करोड़ का पेमेंट होता है. हर महीने 29.88 लाख करोड़ रुपये के पेमेंट का जरिया बनने वाला यूपीआई आज 11 देशों में फैला चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका आइडिया सबसे पहले किसे आया ? जब कार्ड स्वाइप, NEFT , RTGS और कुछ मिनटों में फंड ट्रांसफर करने के IMPS तरीके मौजूद थे, तो UPI की जरूरत क्यों पड़ी ? कैसे एक स्कैन करने और पिन डालने के साथ कुछ सेकेंड में पेमेंट कंप्लीट हो जाता है?

    क्या है UPI?
    यूपीआई रियल टाइम इंस्टैंट पेमेंट का सबसे तेज तरीका है, जिसे साल 2016 में नेशनल पेमेंट ऑफ इंडिया ( NPCI) ने डेवलप किया. मोबाइल फोन में मौजूद यूपीआई ऐप के मदद से आप चंद सेकेंड में स्कैन करके, फोन नंबर पर या बैंक अकाउंट में सीधे पेमेंट कर सकते हैं. आसान शब्दों में कहें, तो ये आपके बैंक अकाउंट और मोबाइल की दूरी को खत्म कर पेमेंट को आसान बनाता है.

    किसने बनाया UPI, कहां से आया आइडिया?
    साल 2016 में UPI को भारत में NPCI (National Payments Corporation of India) ने तैयार किया . यह संस्था भारत में सभी डिजिटल पेमेंट, ATM नेटवर्क की देखरेख करती है. इसे आरबीआई का समर्थन हासिल है, जिसकी वजह से आपका पैसा यूपीआई पेमेंट के जरिए बिल्कुल सुरक्षित है.

    जब नेटबैंकिंग और कार्ड पेमेंट मौजूद, तो UPI की जरूरत क्यों पड़ी ?
    नेटबैंकिंग के जरिए पेमेंट के लिए आपको ‘Beneficiary’ को ऐड करना पड़ता था, जिसे लिंक होने में कई घंटे लग जाते थे. जिसके लिए बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड की ज़रूरत होती थी. जबकि कार्ड पेमेंट के लिए क्रेडिट-डेबिट कार्ड की जरूरत होती थी, जिसे स्कैन करना पड़ता है. इसमें कार्ड क्लोनिंग जैसे फ्रॉड का खतरा बढ़ता चला गया. कई बार कार्ड भूल जाने से पेमेंट अटक जाता था. ऐसे में मोबाइल को पेमेंट एक ‘Virtual ID’ से जोड़कर यूपीआई पेमेंट को आसान बना दिया गया.

    यूपीआई से कैसे होता है पेमेंट ?
    आपने सोचा है कि कैसे आप मोबाइल फोन पर पिन कोड डालकर ‘सेंड’ बटन दबाते हैं और दूसरे के फोन पर पैसा रिवीज होने का मैसेज आ जाता है. ? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि पूरी एडवांस तकनीक काम करती है. पूरा UPI पेमेंट IMPS तकनीक पर टिका है. IMPS मतलब Immediate Payment Service मतलब एक ऐसी तकनीक, जो सातों दिन, चौबीसों घंटे तुरंत पैसे भेजने का काम करता है. UPI का इस्तेमाल करने के लिए फोन में यूपीआई की सुविधा देने वाले एप डाउनलोड करना होगा, जैसे Paytm, PhonePe, GooglePe, Bhim आदि. ऐप में लॉगइन करने के बाद बैंक अकाउंट को लिंक करना होता है. KYC वेरिफिकेशन के बाद आपकी UPI आईडी बन जाएगी. आईडी बनने बाद आप आसानी से किसी को भी उनके फोन नंबर, स्कैनर, अकाउंट नंबर के जरिए पैसे भेज सकते हैं.

    सबसे पहले कितने किया था UPI का पहला पेमेंट
    11 अप्रैल, 2016 को RBI के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन ने NPCI के तत्कालीन एमडी और सीईओ ए पी को सबसे पहला UPI पेमेंट किया था, जिसमें उन्होंने 5,000 रुपये ट्रांसफर किए थे. अगस्त 2016 में इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया था.

    किन 11 देशों में यूपीआई पेमेंट की सुविधा
    1.संयुक्त अरब अमीरात,
    2.फ्रांस
    3.भूटान
    4.श्रीलंका
    5.नेपाल
    6. सिंगापुर
    7.मॉरिशस
    8. कतर
    9.कंबोडिया
    10.ग्रीस
    11. मालदीव.

  • शादीशुदा महिला को हुआ प्रेमी से प्यार, पति ने भी अपनाया; अब तीनों साथ रहेंगे, बनाया अजीब ‘ड्यूटी चार्ट’!

    Sitapur News: पिछले दिनों अलग-अलग जिलों में जिस तरह से पत्नियों ने प्रेमी की खातिर अपने पति को मौत के घाट उतार दिया, उसे सुनकर आज भी लोग दहल जाते हैं, लेकिन यूपी के सीतापुर से पति-पत्नी और प्रेमी का एक अजब-गजब मामला सामने आया हैं। यहां शादीशुदा महिला को दूसरे युवक से प्यार हो गया। इसके बाद दोनों ने मार्च में शादी कर ली।

    हैरान कर देने वाली बात ये है कि महिला के पति को उसके प्रेमी को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। पति ने पत्नी के प्रेमी को भी अपना लिया है। अब तीनों एक ही छत के नीचे रहने का फैसला किया है, लेकिन महिला ने प्रेमी और पति की जिम्मेदारियों को बांट दिया है। महिला ने थाने में एक ड्यूटीचार्ट पुलिस को दिया है, जिसमें कहा गया है कि प्रेमी दिन में उसके और बच्चों के साथ रहेगा तो पति रात में उसके साथ रह सकता है। इस मामले को लेकर क्षेत्र में काफी चर्चा हो रही है।

    महमूदाबाद के फुलवारीपुर निवासी युवक की पत्नी का एक अन्य युवक से संपर्क था। आरोप है कि दोनों के बीच बढ़ी नजदीकियां प्रेम में बदल गईं और 21 मार्च को दोनों ने मंदिर में शादी कर ली। महिला की इस हरकत की जानकारी जब उसके मायके वालों को लगी तो उन्होंने बेटी से नाता तोड़ लिया। महिला अपने पति, प्रेमी और दो बच्चों के साथ रहने की जिद पर अड़ी है। पति भी पत्नी और उसके प्रेमी दोनों के साथ रहने को तैयार बताया जा रहा है। हालांकि पति को छोड़कर महिला के ससुराल वालों ने इस रिश्ते पर आपत्ति जताई दी। घर में जब विवाद बढ़ा तो महिला अपने बच्चों के साथ पति और प्रेमी को लेकर शुक्रवार को कोतवाली पहुंच गई। महिला ने पुलिस को जब पूरी बात बताई तो वह भी पति-पत्नी और वो का किस्सा सुनकर सन्न रह गई। देररात तक पुलिस तीनों से बातचीत कर समझौते का प्रयास करती रही, लेकिन पत्नी दोनों के साथ रहने पर अड़ी रही।

    पति का कहना है कि वह पत्नी और उसके प्रेमी दोनों का साथ नहीं छोड़ेगा। इसके लिए उसे घर छोड़ना पड़े तो भी वह तैयार है। महिला भी दोनों से अलग होने को तैयार नहीं है। बताया गया कि प्रेमी पहले से पति के घर आता-जाता था और कई बार वहां रुक भी चुका है। पति उसे अपना भाई बताता रहा है। जानकारी के अनुसार महिला ने रविवार को भी कोतवाली पहुंची। पुलिस ने महिला से जब तीनों के साथ रहने को लेकर सवाल किया तो महिला ने कहा, इसका हमने हल निकाल लिया है। महिला ने बताया कि प्रेमी और पति के साथ रहने को लेकर ड्यूटी चार्ज बनाया है। महिला के अनुसार प्रेमी उसके और बच्चों के साथ रहेगा और रात में वह पति के साथ रहेगी।

  • ‘मेरे सिर काली आ गई… मैंने राजेश को मार दिया’, मकान मालकिन के इस खुलासे से मचा हड़कंप!

    कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के राजेश हत्याकांड में मकान मालकिन ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि आरोपी बिमला सनकी है। वो टोना-टोटका करती थी। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि राजेश ने शुक्रवार को दिन में ही शराब पी ली थी। शाम को पति-पत्नी में झगड़ा हुआ था।

    कुरुक्षेत्र के राजेश हत्याकांड में जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। रविवार को मकान मालिक रिंकू की मां अमरो देवी ने बताया कि बिमला सनकी किस्म की महिला है। वह टोना टोटका करती रहती थी। राजेश की हत्या करने के बाद जब आसपास के लोगों ने उससे वजह पूछी तो वह एक ही बात कह रही थी, मेरे सिर काली आ गई, मैंने राजेश को मार दिया। पुलिस के आते ही वह बेहोश हो गई।

    पिहोवा रोड स्थित राज पैलेस के पास जिस मकान में राजेश किराए पर रहते था उसके मालिक रिंकू के बयान भी पुलिस ने दर्ज किए हैं। राजेश, रिंकू के ही आरओ वाटर प्लांट में काम करता था। रिंकू ने बताया कि शाम को बिमला और राजेश में झगड़ा हुआ था। दोनों के चिल्लाने की आवाज आ रही थी।

    इसी बीच राजेश की चीख सुनकर वह उनके कमरे में गए। वहां राजेश का शव पड़ा था। बिमला उसकी आंतों को कट्टे में पैक कर रही थी। उन्होंने उससे जैसे ही कहा कि ये क्या किया, वह भाग गई और कमरे से बाहर जाकर नीचे कूद गई। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    इसी मकान में भूतल पर रहने वाले वीरभान ने बताया कि राजेश कुछ दिनों से बहुत ज्यादा तनाव में था। वह तीन दिन से दिन में ही शराब पी रहा था। शुक्रवार को भी वह दोपहर से ही नशे में दिख रहा था। उससे लोगों ने कहा कि दिन में ही शराब क्यों पी रहे हो?

    इस पर उसने माफी मांगते हुए कहा कि आज आखिरी बार पी है। वह शराब के नशे में ही आरओ प्लांट में काम करने चला गया। नशे में होने की वजह से रिंकू ने उसे वापस भेज दिया। दोपहर के बाद वह अपने कमरे पर चला गया। शाम को बिमला और राजेश के बीच झगड़े की आवाज आने लगी। बिमला के छत से कूदने के बाद राजेश की हत्या का पता चला।

    राजेश की तीसरी पत्नी है बिमला दो से हो चुका था तलाक

    पड़ोस के लोगों ने बताया कि बिमला राजेश की तीसरी पत्नी है। पहली दो पत्नियों से उसका तलाक हो चुका था। बिमला और राजेश की शादी को काफी समय हो गया था लेकिन कोई बच्चा नहीं था। दोनों का प्रेम विवाह हुआ था। बिमला अक्सर कमरे में ही रहती थी।

    बिमला आसपास के लोगों से कम ही वास्ता रखती थी। उसे कई बार कच्चे चावल और चीनी चबाते हुए देखा गया। राजेश मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर का रहने वाला था। वह पत्नी के साथ एक साल पहले ही कुरुक्षेत्र आया था।

    यह है पूरा मामला
    कुरुक्षेत्र में शुक्रवार रात करीब नौ बजे रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई। यहां पिहोवा रोड पर किराये पर रहने वाले मजदूर राजेश (40) की बर्बरता से हत्या की गई। एफआईआर के अनुसार, पत्नी बिमला ने रसोई के चाकू से बड़ी जोर से देर तक बार कर पति के पेट को बुरी तरह फाड़ डाला। हमले में पति के पेट पर 37 सेटीमीटर गहरा और लंबा घाव हो गया जिससे आंतें और किडनी तक बाहर निकल आए। इसके बाद बिमला ने फर्श पर पड़े अंगों को कट्टे में पैक किया और फिर पहली मंजिल से गली में छलांग लगा दी। वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

    लोगों ने पुलिस को बताया कि राजेश मूल रूप से यूपी के सीतापुर का रहने वाला था। वह रिंकू के मकान में पहली मंजिल पर पत्नी बिमला के साथ रहता था। शुक्रवार की रात दोनों के बीच झगड़े की आवाज सुनाई दे रही थी। ऐसा अक्सर होता रहता था, इसलिए किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। इसी बीच अचानक किसी के गिरने की आवाज आई। लोगों ने जाकर देखी तो बिमला सड़क पर पड़ी थी। उसे अस्पताल भेजकर लोग ऊपर कमरे में गए तो वहां का मंजर देखकर स्तब्ध रह गए।

    कमरे में राजेश का खून से लथपथ शव पड़ा था। फर्श से दीवार तक खून से सने थे। कमरे के एक कोने में कट्टा रखा था। मौके पर पहुंची पुलिस ने कट्टा खुलवाया तो इसके अंदर राजेश के अंग रखे मिले। पुलिस को मौके पर तीन चाकू पड़े मिले। इनमें से एक खून से सना था। पुलिस ने रिंकू की तहरीर पर शनिवार को घटना की प्राथमिकी दर्ज की।