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  • बीवी के चीथड़े उड़ाकर नहाया और खून से सने कपड़े, ऑनलाइन मंगाया था चाकू बेटे ने बताया मां उर्मिला का कैसे किया बाप ने कत्ल

    बीवी के चीथड़े उड़ाकर नहाया और खून से सने कपड़े, ऑनलाइन मंगाया था चाकू बेटे ने बताया मां उर्मिला का कैसे किया बाप ने कत्ल

    मध्य प्रदेश के इंदौर में डाक विभाग की महिला अधिकारी उर्मिला सैनी की हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस हत्याकांड के बाद जहां परिवार गहरे सदमे में है, वहीं घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।

    मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के करीब 48 घंटे बीत जाने के बाद भी मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आए पीड़िता के पति की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

    परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। इस बीच मृतका की बेटी ने अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आरोपों की जांच अभी जारी है और आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक कानून की नजर में वह निर्दोष माना जाएगा।

    पोस्ट ऑफिस में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट थीं उर्मिला सैनी

    जानकारी के अनुसार उर्मिला सैनी इंदौर के संयोगितागंज थाना क्षेत्र स्थित ‘डाक कुंज’ में भारतीय डाक विभाग में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत थीं। वह लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रही थीं और विभाग में जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जानी जाती थीं।

    उनकी अचानक हुई हत्या ने न केवल परिवार बल्कि सहकर्मियों और पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और विभिन्न पहलुओं से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    48 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश

    मामले में मुख्य संदिग्ध के रूप में उर्मिला सैनी के पति अखिलेश सैनी का नाम सामने आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द कार्रवाई करेगी।

    लेकिन घटना के लगभग 48 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई।इसी को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया।

    प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच की जाए तथा यदि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों तो आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाए।

    परिवार का कहना है कि गिरफ्तारी के बिना उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद अधूरी लग रही है।

    बेटी ने लगाए गंभीर आरोप

    मामले में सबसे भावुक और गंभीर बयान मृतका की बेटी प्रेक्षा सैनी का सामने आया है।प्रेक्षा ने आरोप लगाया कि उसके पिता लंबे समय से उसकी मां को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे और उन पर बेबुनियाद शक करते थे।

    उसके अनुसार इसी वजह से घर में अक्सर विवाद होते रहते थे।प्रेक्षा का दावा है कि उसकी मां की हत्या बेहद निर्ममता से की गई और इसके लिए दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

    उसने यह भी आरोप लगाया कि हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसकी पहले से योजना बनाई गई थी।

    ऑनलाइन चाकू मंगाने का भी दावा

    बेटी ने यह भी आरोप लगाया कि हत्या को अंजाम देने के लिए पहले से तैयारी की गई थी और आरोपी ने कथित तौर पर ऑनलाइन चाकू मंगवाए थे।हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं की जांच कर रही है और डिजिटल रिकॉर्ड सहित अन्य साक्ष्यों को भी खंगाल रही है।

    घटना के बाद क्या हुआ?

    परिजनों का आरोप है कि अपराध के बाद आरोपी ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की।उनका दावा है कि घटना के बाद आरोपी ने स्नान किया और खून से सने कपड़ों को नाली में बहा दिया।

    पुलिस जांच में जुटी

    इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है।जांच अधिकारी घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डाटा और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

    हालांकि, इन आरोपों की भी पुष्टि जांच पूरी होने और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।जांच एजेंसियां घटनास्थल से मिले सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं।

    परिवार की एक ही मांग-जल्द मिले न्याय

    उर्मिला सैनी के परिजनों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच है।परिवार का कहना है कि जब तक मामले में कानूनी कार्रवाई तेज नहीं होगी, तब तक उन्हें न्याय मिलने का भरोसा नहीं होगा।प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों ने भी पुलिस से अपील की कि मामले में किसी तरह की ढिलाई न बरती जाए और दोषी को जल्द कानून के दायरे में लाया जाए।

    घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना पर फिर उठे सवाल

    इस घटना ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों को लेकर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी परिवार में लगातार मानसिक तनाव, हिंसा या उत्पीड़न जैसी स्थिति बनी रहती है, तो समय रहते कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता लेना जरूरी होता है।

    कई मामलों में समय पर हस्तक्षेप बड़ी घटनाओं को रोक सकता है।

    कानून क्या कहता है?

    भारतीय कानून के तहत हत्या जैसे गंभीर अपराध की जांच पुलिस द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाती है।किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी सिद्ध किए जाने तक निर्दोष माना जाता है।इसलिए जांच पूरी होने और न्यायालय के निर्णय से पहले किसी भी व्यक्ति को कानूनी रूप से दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।

    लोगों में न्याय की उम्मीद

    इंदौर की यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।सोशल मीडिया पर भी लोग मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।उधर परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि जांच जल्द पूरी हो ताकि सच्चाई सामने आ सके।इंदौर में डाक विभाग की अधिकारी उर्मिला सैनी की हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर परिजन आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि जांच सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। मृतका की बेटी द्वारा लगाए गए आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस की जांच जारी है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं तथा कानून के तहत आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

  • आंखों को सामने मां को उठा ले गया तेंदुआ, गांव में पुलिस फोर्स… PAC की टुकड़ी भी तैनात​

    आंखों को सामने मां को उठा ले गया तेंदुआ, गांव में पुलिस फोर्स… PAC की टुकड़ी भी तैनात​

    Moradabad Leopard Attack: मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र स्थित बलिया गांव में तेंदुए के हमले से एक वृद्ध महिला की दर्दनाक मौत हो गई. मंगलवार दोपहर के समय अपने परिजनों के साथ खेत में चारा लेने गई महिला बिरमा देवी पर झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया. 20 लोगों के बीच से तेंदुआ महिला को ले गया. परिजनों के शोर मचाने और भालेबल्लम लेकर दौड़ने पर तेंदुआ महिला को छोड़कर जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ, लेकिन तब तक गंभीर रूप से घायल महिला की जान जा चुकी थी. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है.

    सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है. तेंदुए के बढ़ते खौफ को देखते हुए गांव में पुलिस बल, क्विक रिस्पॉन्स टीम और PAC की टुकड़ी तैनात कर दी गई है. वन विभाग के साथ मिलकर ड्रोन कैमरों से इलाके की निगरानी की जा रही है और तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जा रहे हैं. प्रशासन ने मृतक महिला के परिजनों को दैवीय आपदा के तहत 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है. साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए चौपालें लगाई जा रही हैं और अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी जा रही है.

    परिजनों के द्वारा महिला की मौत को लेकर लगाए गए गंभीर आरोप

    घटना के समय मौजूद मृतक महिला के बेटे प्रेमचंद ने आपबीती बताते हुए कहा. “हम खेत से न्यार लेने गए थे. लगभग 1520 लोग चारा लेने गाड़ियों में एक साथ गए थे. न्यार काटने के बाद जब गड्डी बांध रहे थे. तभी महज एक मीटर की दूरी से तेंदुए ने हमारी मां पर हमला कर दिया है. हम तुरंत भालेबल्लम लेकर उस पर झपटे. तब जाकर वह मां को छोड़कर भागा था.” प्रेमचंद ने वन विभाग की लापरवाही पर गुस्सा जताते हुए कहा कि शाम 6 बजे के बाद गांव में तेंदुए का खतरा बहुत बढ़ जाता है. ग्रामीणों ने बारबार पिंजरे लगाने की गुहार लगाई, लेकिन वन विभाग टालमटोल करता रहा है. अब ग्रामीणों के सामने मवेशियों के लिए चारा लाने का संकट खड़ा हो गया है और खौफ के कारण रात में नींद तक नहीं आ रही है.

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने संभाला मोर्चा

    घटना की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा इंतजामों की जानकारी देते हुए एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया. “थाना ठाकुरद्वारा के बलिया गांव में करीब दोपहर 2:30 बजे एक महिला चारा काटने खेत गई थी. जहां तेंदुए के हमले में उनकी मौत हो गई है.शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है. ग्रामीणों में कुछ रोष था. लेकिन उनसे बातचीत कर स्थिति सामान्य कर ली गई है. एसपी देहात ने बताया कि वन विभाग के साथ समन्वय बनाकर पिंजरे लगवाए जा रहे हैं और ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही है. गांव में सुरक्षा के लिहाज से PAC की प्लाटून, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय पुलिस फोर्स तैनात कर रात में गश्त बढ़ाई गई है. इसके अलावा ग्रामीणों को अकेले न निकलने और समूहों में रहने की हिदायत दी जा रही है.

    प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से किया संवाद

    क्षेत्रीय स्थिति और प्रशासनिक मदद की जानकारी देते हुए एडीएम संगीता गौतम ने कहा कि मृतक महिला बिरमा देवी के परिवार को दैवीय आपदा के तहत कुल 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है. जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलते ही उपलब्ध करा दी जाएगी. एडीएम ने स्पष्ट किया कि मुरादाबाद का यह क्षेत्र जिम कॉर्बेट से सटा है. बारिश और गन्ने के खेतों के कारण लेपर्ड बाहर आ रहे हैं. क्षेत्र में लगभग 2025 तेंदुए होने का अनुमान है. जिनमें से हाल ही में 6 पकड़े गए हैं. प्रभावित इलाकों में 20 पिंजरे लगाए गए हैं और जल्द 10 और लगाए जाएंगे. प्रशासन चौपाल लगाकर लोगों से समूह में बाहर निकलने की अपील कर रहा है.

  • जरूरत से ज्यादा हेल्दी फूड खाना भी पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है वजन​

    जरूरत से ज्यादा हेल्दी फूड खाना भी पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है वजन​

    यह तो हम सब जानते हैं कि ओवर ईटिंग हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। इससे वजन बढ़ सकता है और यह कई तरह की मेडिकल कंडीशन जैसे हाई बीपी, डायबिटीज आदि का कारण भी बन सकता है। इसलिए, कहा जाता है कि हमेशा उतना ही खाएं, जितनी भूख हो और साथ ही हेल्दी खाना खाने की सलाह दी जाती है।

    कई बार यह सवाल उठता है कि क्या हेल्दी खाने से भी नुकसान पहुंच सकता है। अधिक मात्रा में हर चीज बुरी होती है। ज्यादा मात्रा में कोई भी चीज बुरी होती है, फिर चाहे आप स्वस्थ आहार का ही सेवन क्यों नहीं कर रहे हैं।

    डॉक्टर भी मानते हैं कि हेल्दी फूड्स को भी सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। असल में, हेल्दी फूड्स में भी सीमित मात्रा में कैलोरी होती है। अगर आप ओवर ईटिंग कर बैठते हैं, तो शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। अधिक मात्रा में पौष्टिक आहार का सेवन करने से शरीर उसे फैट की तरह स्टोर करता है।

    हेल्दी फूड खाते हुए वजन को नियंत्रित कैसे रखें?

    हालांकि, यह सच है कि ज्यादा मात्रा में हेल्दी फूड खाने से मेटाबॉलिज्म पर उतना नेगेटिव असर नहीं पड़ता है, जितना जंक या प्रोसेस्ड फूड खाने से होता है। इसके बावजूद, ज्यादा मात्रा में हेल्दी फूड खाना भी सही नहीं है। हेल्दी फूड खाते हुए वजन को नियंत्रित करने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    • पोर्शन कंट्रोल

    हेल्दी फूड को भी सीमित मात्रा में ही खाया जाना चाहिए। खासकर, स्नैक्स और नट्स आदि की मात्रा कम रखें।

    • माइंडफुल ईटिंग करें

    हेल्दी फूड न सिर्फ सीमित मात्रा में खाएं, बल्कि चबाचबाकर खाएं। जैसे ही पेट भर जाएगा, बॉडी को सिग्नल मिलेगा कि अब खाना बंद कर दें।

    • सब्जियां अधिक खाएं

    हेल्दी फूड में भी आपको उन विकल्पों को चुनना चाहिए, जो फैट स्टोरेज को बढ़ावा नहीं देते हैं। इनमें ब्रोकली, आदि शामिल हैं। इस तरह के खानों में कैलोरी की मात्रा कम होती है और इससे पेट भी जल्दी भर जाता है।

    अगर आप अपने वेट को लेकर कॉन्शियस रहते हैं, तो अपने खाने के पोर्शन साइज पर ध्यान देने की जरूरत है। हेल्दी फूड भी अधिक मात्रा में खाया जाना सही नहीं होता है। इससे वजन बढ़ सकता है। मोटापा बढ़ने के साथ ही कई तरह की बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई बीपी, भी बढ़ता है। सीमित मात्रा में हेल्दी फूड खाने से एनर्जी का स्तर बना रहता है और बीमारियों का जोखिम भी कम होता है।

  • Gut Health Tips: हमारी गट हेल्थ कैसे करती है काम? एक्सपर्ट से जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें​

    Gut Health Tips: हमारी गट हेल्थ कैसे करती है काम? एक्सपर्ट से जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें​

    आज बॉडी को फिट रखने के लिए कई फिटनेस ट्रिक्स आजमाए जाते हैं. इसलिए लोग अब हेल्दी गट हेल्थ, ब्लैक कॉफी से फैटी लिवर रिवर्स जैसे कई ट्रिक्स फॉलो करने लगे हैं. क्या आप जानते हैं कि आखिर में गट हेल्थ होती है क्या है? इसका जवाब पूछा जाए तो ज्यादातर लोग इसे पूरे पेट की हेल्थ पुकारते हैं. असल में गट हेल्थ हमारे इंटेस्टाइन का सिस्टम है. इसमें छोटी आंत और बड़ी आंत की हेल्थ शामिल है.

    अगर गट हेल्थ बिगड़ी हुई है तो शरीर में हर समय अपच, गैस, मतली और कभीकभी उल्टी का मन भी करता है. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं कि आखिर गट हेल्थ कैसे काम करती है. साथ ही जानें इसे ठीक रखने के लिए किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए?

    गट हेल्थ क्या है और कैसे करती है काम

    महेश गुप्ता का कहना है कि गट हेल्थ यानी हमारी छोटी आंत और बड़ी आंत. इसका अपने आप में एक बड़ा निरोनल सिस्टम है. जिस तरह हमारा ब्रेन पूरी बॉडी को कंट्रोल करता है उसी तरह गट हेल्थ हमारे फूड के सिस्टम यानी डाइजेशन को कंट्रोल करता है.

    एक्सपर्ट कहते हैं कि हमारा खाना पेट से आंतो में जाता है. आंतों में बहुत सारे जूसी और एंजाइम सीक्रेट होते हैं और ये खाने को पचाते हैं. ये खाना पचने के बाद इंटेस्टाइन में ऑब्जर्व होता है. तो खाना ऊपर से नीचे की तरफ मूव करता है वो हमारी इंटेस्टाइन की एक मूमेंट होती है.

    क्या आप जानते हैं कि बॉडी की 70 फीसदी कोशिकाएं आंतों से जुड़ी होती हैं. इसलिए गट हेल्थ का असर हमारे इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है.

    गट हेल्थ का कनेक्शन हमारे दिमाग से भी होता है. अगर गट ठीक नहीं है तो तनाव, मूड ठीक न होना और नींद का सिस्टम भी बिगड़ जाता है.

    ऐसे रखें इसका ख्याल

    इस सिस्टम को हेल्दी रखने के लिए हमारी आंतों में गुड बैक्टीरिया का होना जरूरी है. इसके लिए आपका खानपान बेहतर होना चाहिए.

    एक्सपर्ट कहते हैं कि डाइट में ऐसी चीजें जरूर खाएं जिनमें फाइबर हो. क्योंकि इसकी हेल्प से खाना आसानी से पच पाता है.

    बॉडी में पानी की कमी भी आंतों और दूसरे अंगों की हेल्थ को कमजोर बनाती है. सीजनल फ्रूट्स और सब्जियों को खाने के अलावा ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. बॉडी को दिनभर हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी पीना बेस्ट है.

    मानसून के दौरान हमारा पाचन कमजोर होता है. इसलिए ऐसी चीजों को न खाएं जिनमें मसाला और ऑयल ज्यादा हो. ऐसे फूड्स या डिश गट हेल्थ को नुकसान पहुंचाती हैं.

  • Pregnancy Health Tips: फोलिक एसिड ही नहीं….प्रेगनेंसी में ये पोषक तत्व भी हैं जरूरी, एक्सपर्ट ने बताया​

    Pregnancy Health Tips: फोलिक एसिड ही नहीं….प्रेगनेंसी में ये पोषक तत्व भी हैं जरूरी, एक्सपर्ट ने बताया​

    मां बनना एक खूबसूरत एहसास है लेकिन इससे पहले शरीर में कई बदलाव होते हैं. इसलिए हेल्थ को लेकर काफी सीरियस होना जरूरी है. प्रेगनेंसी में महिलाओं के शरीर को पोषक तत्वों की ज्यादा जरूरत होती है. देखा जाए तो बेबी प्लान करने से कंसीव करने तक महिलाओं को गायना फोलिक एसिड लेने की सलाह देती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रेगनेंसी में और भी कई दूसरे पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है. डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला का शरीर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मेहनत करता है.

    इस समय बेबी का विकास, मां की ऊर्जा, खून की पर्याप्त मात्रा, हड्डियों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी हद तक सही पोषण पर निर्भर करती है. हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है, लेकिन इन नौ महीनों में कुछ पोषक तत्व ऐसे हैं, जिनकी जरूरत हर होने वाली मां को होती है. आइए जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान सबसे जरूरी 7 पोषक तत्वों के बारे में.

    प्रेगनेंसी में बेहद जरूरी हैं ये 7 पोषक तत्व

    फोलिक एसिड प्रेगनेंसी के शुरुआती तीन महीनों में फोलिक एसिड बेहद जरूरी होता है. यह बेबी के दिमाग और रीढ़ की हड्डी के सही विकास में मदद करता है. इसलिए डॉक्टर अक्सर प्रेगनेंसी की प्लानिंग के समय से ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं. हरी पत्तेदार सब्जियां और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत हैं.

    आयरन प्रेगनेंसी के दौरान मां और बेबी दोनों के लिए शरीर को अधिक खून की जरूरत होती है. आयरन हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी और एनीमिया हो सकता है. पालक, गुड़, अंडा, चिकन और मछली आयरन के अच्छे स्रोत हैं.

    कैल्शियम कैल्शियम बेबी की हड्डियों और दांतों के विकास में अहम भूमिका निभाता है. साथ ही यह मां की हड्डियों को भी मजबूत बनाए रखता है. अगर शरीर को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो बेबी की जरूरत पूरी करने के लिए मां की हड्डियों से कैल्शियम लिया जा सकता है. दूध, दही, पनीर, रागी और हरी सब्जियां इसके अच्छे स्रोत हैं.

    विटामिन डी विटामिन D शरीर में कैल्शियम के बेहतर अवशोषण में मदद करता है. यह हड्डियों की मजबूती, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है. धूप इसका सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है. इसके अलावा अंडा, फोर्टिफाइड दूध और फैटी फिश से भी इसकी पूर्ति की जा सकती है.

    प्रोटीन प्रोटीन बेबी के अंगों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य हिस्सों के विकास के लिए जरूरी है. यह प्रेगनेंसी के दौरान मां के शरीर में होने वाले बदलावों को भी सहारा देता है. दाल, अंकुरित अनाज, पनीर, अंडा, मेवे और बीज प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं.

    ओमेगा3 ओमेगा3 फैटी एसिड, खासकर डीएचए , बेबी के दिमाग और आंखों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अखरोट, चिया सीड्स और कम पारे वाली मछलियां इसके अच्छे स्रोत हैं. शाकाहारी महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट ले सकती हैं.

    आयोडीन आयोडीन थायरॉयड को स्वस्थ रखने में मदद करता है, जो बेबी के मस्तिष्क के विकास के लिए बेहद जरूरी है. आयोडीन युक्त नमक, दूध से बने उत्पाद और अंडा इसके अच्छे स्रोत हैं. प्रेगनेंसी में स्वस्थ रहने का मतलब ज्यादा खाना नहीं, बल्कि सही और पौष्टिक भोजन करना है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर सप्लीमेंट लें और अपने रोज़ाना के भोजन में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें. यही स्वस्थ मां और स्वस्थ बेबी की मजबूत नींव है.

  • Health Care Tips in Fever: बुखार आने पर क्यों मर जाती है भूख? एक्सपर्ट ने समझाया पूरा लॉजिक​

    Health Care Tips in Fever: बुखार आने पर क्यों मर जाती है भूख? एक्सपर्ट ने समझाया पूरा लॉजिक​

    बुखार आने पर कभीकभी कुछ भी खाने का मन नहीं करता है. इसे आम भाषा में भारतीय बुखार में भूख का मर जाना कहते हैं. क्या आपने सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक शरीर में ऐसा होना एक वैज्ञानिक प्रतिक्रिया है. दरअसल, जब हमारे शरीर में इंफेक्शन होता है तो बुखार आने लगता है. हमारा शरीर इंफेक्शन फैलाने वाले वायरल और बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए टेंपरेचर को बढ़ाता है. ऐसे में बुखार आने लगता है और सिर में दर्द, शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द और भूख न लगने जैसे लक्षण भी नजर आने लगते हैं.

    इस कंडीशन में भी लिक्विड चीजें खाने की सलाह दी जाती है. लेकिन अधिकतर लोगों की भूख मर जाती है और शरीर और डाउन फील करने लगता है. हमारी बॉडी में ऐसा क्यों होता है, चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं…

    बुखार में भूख क्यों नहीं लगती?

    डॉक्टर रविंद्र गुप्ता कहते हैं कि बुखार का कारण इंफेक्शन होता है. इंफेक्शन से लड़ने के लिये हमारे शरीर मे कुछ कैमिकल बनते है, जिन्हे हम सायटोकाइन कहते है. ये सायटोकाइन हमारे मस्तिष्क मे भूख सैंटर को दबा देते हैं. यह इसलिए होता है ताकि शरीर की एनर्जी खाना हजम करने से ज्यादा इंफेक्शन के कीटाणुऔं को अटैक करने के लिए काम आ सके. आसान भाषा में कहे तो तो हमारा शरीर एनर्जी को डाइजेशन में खर्चने के बजाय इंफेक्शन से लड़ने में खर्च करने लगता है.

    दूसरा, कई बार लिवर पर बैक्टीरिया या वायरस का हमला भी भूख कम कर देता है. तीसरा, जब इंफेक्शन हमारी सूंघने और स्वाद की कोशिकाओं को कम या खत्म कर देता है तो भी भूख पर असर होता है. ऐसे में खाना फीका लगता है और भूख अपने आप कम हो जाती है. इसके अलावा कमजोरी, बदन दर्द, थकान, मतली और थ्रोट इंफेक्शन जैसी दिक्कतों के चलते भी खाने की इच्छा मर जाती है.

    इन बातों का रखें ध्यान

    डॉ. आर. आर. दत्ता कहते हैं कि भले ही भूख कम लगे, लेकिन शरीर को पोषण की जरूरत पहले से ज्यादा होती है. लंबे समय तक खाना न खाने से शरीर कमजोर हो सकता है और रिकवरी में देरी हो सकती है. मरीज को थोड़ीथोड़ी मात्रा में हल्का भोजन लेते रहना चाहिए.

    पर्याप्त मात्रा में पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और प्रोटीन का इंटेक किसी न किसी तरीके से करना चाहिए. इस तरह शरीर तेजी से रिकवर कर पाता है. भूल से भी हैवी मील न लें. ऐसी चीजें खाएं जो आसानी से पच पाएं और पोषण भी दें.

    बुखार में क्या खाना चाहिए?

    मूंग दाल की खिचड़ी

    दलिया या ओट्स

    दही

    सूप

    नारियल पानी

    ताजे फलों का सेवन

    उबली हुई सब्जियां

    केला, सेब और पपीता

    अगर कई दिनों तक भूख बिल्कुल न लगे, तेज बुखार बना रहे या लगातार उल्टी और कमजोरी हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

  • किस उम्र तक बच्चे को दी जानी चाहिए विटामिन डी की दवाएं.. कैल्शियम कब तक जरूरी?

    विटामिन डी की दवाएं

    कई माता-पिता यह मान लेते हैं कि बच्चे को विटामिन D और कैल्शियम की दवा लंबे समय तक देते रहना चाहिए, लेकिन हर बच्चे को इन सप्लीमेंट्स की जरूरत एक जैसी